📖 इकारान्त शब्दरूप : पाणिनीय व्याकरणिक रहस्य एवं सूत्र
जिस प्रातिपदिक के वर्ण-विच्छेद के अन्त में ह्रस्व 'इ' स्वर आता है, उसे इकारान्त कहते हैं (यथा: हरि = ह् + अ + र् + इ | मति = म् + अ + त् + इ | वारि = व् + आ + र् + इ)। यह तीनों लिंगों में प्रयुक्त होता है।
१. इकारान्त पुल्लिंग के मुख्य पाणिनीय सूत्र
सूत्र १: "शेषो घ्यसखि" (अष्टाध्यायी १.४.७)
घि-संज्ञा विधान: 'सखि' शब्द को छोड़कर शेष सभी ह्रस्व इकारान्त और उकारान्त पुल्लिंग शब्दों की 'घि' संज्ञा होती है। इसी घि-संज्ञा के कारण आगे के रूप सिद्ध होते हैं।
सूत्र २: "घेर्ङिति" (७.३.१११) एवं "जसि च" (७.३.१०९)
• ङित् विभक्तियों (चतुर्थी 'ङे', पञ्चमी 'ङसि', षष्ठी 'ङस्') के परे रहने पर घिसंज्ञक 'इ' को गुण (ए) हो जाता है: हरि + ङे = हरे + ए = हरये | हरे + अस् = हरेः।
• 'जसि च' से प्रथमा बहुवचन में गुण होकर: हरि + जस् = हरे + अस् = हरयः।
सूत्र ३: "औत औत्" (७.३.११९) एवं "आच्च घेः" (७.३.१२०)
सप्तमी एकवचन (ङि) में घिसंज्ञक इकार के स्थान पर 'अ' और प्रत्यय को 'औ' होकर 'हरौ', 'मुनौ', 'कवौ' सिद्ध होता है।
⚠️ पुल्लिंग के दो महा-अपवाद (परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाने वाले):
१. 'पति' शब्द का नियम ("पतिः समास एव" १.४.८): स्वतंत्र रहने पर 'पति' शब्द की घि-संज्ञा नहीं होती, अतः इसके रूप 'हरि' से भिन्न बनते हैं— तृतीया १व. में पत्या (न कि पतिना), चतुर्थी १व. में पत्ये (न कि पतये), पञ्चमी/षष्ठी १व. में पत्युः और सप्तमी १व. में पत्यौ बनता है। किन्तु यदि यह समास में हो (जैसे भूपति, सेनापति), तो यह सामान्य घि-संज्ञक होकर भूपतये, भूपतेः बनता है।
२. 'सखि' शब्द का नियम: 'सखि' की घि-संज्ञा नहीं होती। इसमें अनङ् आदेश होकर प्रथमा में सखा, सखायौ, सखायः और द्वितीया बहुवचन में सखीन् बनता है।
२. इकारान्त स्त्रीलिंग के विशेष नियम (वैकल्पिक रूप)
सूत्र ४: "ङिति ह्रस्वश्च" (१.४.६) — नदी संज्ञा विकल्प
इकारान्त स्त्रीलिंग शब्दों (मति, बुद्धि आदि) में ङित् विभक्तियों (चतुर्थी, पञ्चमी, षष्ठी व सप्तमी एकवचन) में विकल्प से 'नदी संज्ञा' होती है। इसी कारण इन चार विभक्तियों में दो-दो रूप बनते हैं:
• चतुर्थी (१व.): मतये (घि-पक्ष) / मत्यै (नदी-पक्ष)
• पञ्चमी (१व.): मतेः (घि-पक्ष) / मत्याः (नदी-पक्ष)
• षष्ठी (१व.): मतेः (घि-पक्ष) / मत्याः (नदी-पक्ष)
• सप्तमी (१व.): मतौ (घि-पक्ष) / मत्याम् (नदी-पक्ष)
३. इकारान्त नपुंसकलिंग के विशेष नियम
सूत्र ५: "इकोऽचि विभक्तौ" (७.१.७३) एवं "अस्थिदधिसक्थ्यक्ष्णामनडुदात्तः" (७.१.७५)
• सामान्य नपुंसकलिंग (वारि आदि) में अजादि विभक्तियों में 'नुम्' (न्) का आगम होता है: वारिणा, वारिणे, वारिणी, वारीणि।
• दधि, अक्षि, अस्थि, सक्थि: इन चार शब्दों में तृतीया एकवचन से आगे अजादि विभक्तियों में 'अनङ्' आदेश हो जाता है। अतः तृतीया १व. में दधिना के स्थान पर दध्ना, अक्ष्णा, अस्थ्ना बनता है तथा सप्तमी १व. में दध्नि / दधनि रूप बनता है।
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | हरिः | हरी | हरयः |
| द्वितीया | हरिम् | हरी | हरीन् |
| तृतीया | हरिणा | हरिभ्याम् | हरिभिः |
| चतुर्थी | हरये | हरिभ्याम् | हरिभ्यः |
| पञ्चमी | हरेः | हरिभ्याम् | हरिभ्यः |
| षष्ठी | हरेः | हर्योः | हरीणाम् |
| सप्तमी | हरौ | हर्योः | हरिषु |
| सम्बोधन | हे हरे | हे हरी | हे हरयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | मुनिः | मुनी | मुनयः |
| द्वितीया | मुनिम् | मुनी | मुनीन् |
| तृतीया | मुनिना | मुनिभ्याम् | मुनिभिः |
| चतुर्थी | मुनये | मुनिभ्याम् | मुनिभ्यः |
| पञ्चमी | मुनेः | मुनिभ्याम् | मुनिभ्यः |
| षष्ठी | मुनेः | मुन्योः | मुनीनाम् |
| सप्तमी | मुनौ | मुन्योः | मुनिषु |
| सम्बोधन | हे मुने | हे मुनी | हे मुनयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | कविः | कवी | कवयः |
| द्वितीया | कविम् | कवी | कवीन् |
| तृतीया | कविना | कविभ्याम् | कविभिः |
| चतुर्थी | कवये | कविभ्याम् | कविभ्यः |
| पञ्चमी | कवेः | कविभ्याम् | कविभ्यः |
| षष्ठी | कवेः | कव्योः | कवीनाम् |
| सप्तमी | कवौ | कव्योः | कविषु |
| सम्बोधन | हे कवे | हे कवी | हे कवयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | ऋषिः | ऋषी | ऋषयः |
| द्वितीया | ऋषिम् | ऋषी | ऋषीन् |
| तृतीया | ऋषिणा | ऋषिभ्याम् | ऋषिभिः |
| चतुर्थी | ऋषये | ऋषिभ्याम् | ऋषिभ्यः |
| पञ्चमी | ऋषेः | ऋषिभ्याम् | ऋषिभ्यः |
| षष्ठी | ऋषेः | ऋष्योः | ऋषीणाम् |
| सप्तमी | ऋषौ | ऋष्योः | ऋषिषु |
| सम्बोधन | हे ऋषे | हे ऋषी | हे ऋषयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | रविः | रवी | रवयः |
| द्वितीया | रविम् | रवी | रवीन् |
| तृतीया | रविणा | रविभ्याम् | रविभिः |
| चतुर्थी | रवये | रविभ्याम् | रविभ्यः |
| पञ्चमी | रवेः | रविभ्याम् | रविभ्यः |
| षष्ठी | रवेः | रव्योः | रवीणाम् |
| सप्तमी | रवौ | रव्योः | रविषु |
| सम्बोधन | हे रवे | हे रवी | हे रवयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | गिरिः | गिरी | गिरयः |
| द्वितीया | गिरिम् | गिरी | गिरीन् |
| तृतीया | गिरिणा | गिरिभ्याम् | गिरिभिः |
| चतुर्थी | गिरये | गिरिभ्याम् | गिरिभ्यः |
| पञ्चमी | गिरेः | गिरिभ्याम् | गिरिभ्यः |
| षष्ठी | गिरेः | गिर्योः | गिरीणाम् |
| सप्तमी | गिरौ | गिर्योः | गिरिषु |
| सम्बोधन | हे गिरे | हे गिरी | हे गिरयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | कपिः | कपी | कपयः |
| द्वितीया | कपिम् | कपी | कपीन् |
| तृतीया | कपिना | कपिभ्याम् | कपिभिः |
| चतुर्थी | कपये | कपिभ्याम् | कपिभ्यः |
| पञ्चमी | कपेः | कपिभ्याम् | कपिभ्यः |
| षष्ठी | कपेः | कप्योः | कपीनाम् |
| सप्तमी | कपौ | कप्योः | कपिषु |
| सम्बोधन | हे कपे | हे कपी | हे कपयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | अग्निः | अग्नी | अग्नयः |
| द्वितीया | अग्निम् | अग्नी | अग्नीन् |
| तृतीया | अग्निना | अग्निभ्याम् | अग्निभिः |
| चतुर्थी | अग्नये | अग्निभ्याम् | अग्निभ्यः |
| पञ्चमी | अग्नेः | अग्निभ्याम् | अग्निभ्यः |
| षष्ठी | अग्नेः | अग्न्योः | अग्नीनाम् |
| सप्तमी | अग्नौ | अग्न्योः | अग्निषु |
| सम्बोधन | हे अग्ने | हे अग्नी | हे अग्नयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | यतिः | यती | यतयः |
| द्वितीया | यतिम् | यती | यतीन् |
| तृतीया | यतिना | यतिभ्याम् | यतिभिः |
| चतुर्थी | यतये | यतिभ्याम् | यतिभ्यः |
| पञ्चमी | यतेः | यतिभ्याम् | यतिभ्यः |
| षष्ठी | यतेः | यत्योः | यतीनाम् |
| सप्तमी | यतौ | यत्योः | यतिषु |
| सम्बोधन | हे यते | हे यती | हे यतयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | अरिः | अरी | अरयः |
| द्वितीया | अरिम् | अरी | अरीन् |
| तृतीया | अरिणा | अरिभ्याम् | अरिभिः |
| चतुर्थी | अरये | अरिभ्याम् | अरिभ्यः |
| पञ्चमी | अरेः | अरिभ्याम् | अरिभ्यः |
| षष्ठी | अरेः | अर्योः | अरीणाम् |
| सप्तमी | अरौ | अर्योः | अरिषु |
| सम्बोधन | हे अरे | हे अरी | हे अरयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | अतिथिः | अतिथी | अतिथयः |
| द्वितीया | अतिथिम् | अतिथी | अतिथीन् |
| तृतीया | अतिथिना | अतिथिभ्याम् | अतिथिभिः |
| चतुर्थी | अतिथये | अतिथिभ्याम् | अतिथिभ्यः |
| पञ्चमी | अतिथेः | अतिथिभ्याम् | अतिथिभ्यः |
| षष्ठी | अतिथेः | अतिथ्योः | अतिथीनाम् |
| सप्तमी | अतिथौ | अतिथ्योः | अतिथिषु |
| सम्बोधन | हे अतिथे | हे अतिथी | हे अतिथयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | पाणिः | पाणी | पाणयः |
| द्वितीया | पाणिम् | पाणी | पाणीन् |
| तृतीया | पाणिना | पाणिभ्याम् | पाणिभिः |
| चतुर्थी | पाणये | पाणिभ्याम् | पाणिभ्यः |
| पञ्चमी | पाणेः | पाणिभ्याम् | पाणिभ्यः |
| षष्ठी | पाणेः | पाण्योः | पाणीनाम् |
| सप्तमी | पाणौ | पाण्योः | पाणिषु |
| सम्बोधन | हे पाणे | हे पाणी | हे पाणयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | ध्वनिः | ध्वनी | ध्वनयः |
| द्वितीया | ध्वनिम् | ध्वनी | ध्वनीन् |
| तृतीया | ध्वनिना | ध्वनिभ्याम् | ध्वनिभिः |
| चतुर्थी | ध्वनये | ध्वनिभ्याम् | ध्वनिभ्यः |
| पञ्चमी | ध्वनेः | ध्वनिभ्याम् | ध्वनिभ्यः |
| षष्ठी | ध्वनेः | ध्वन्योः | ध्वनीनाम् |
| सप्तमी | ध्वनौ | ध्वन्योः | ध्वनिषु |
| सम्बोधन | हे ध्वने | हे ध्वनी | हे ध्वनयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | निधिः | निधी | निधयः |
| द्वितीया | निधिम् | निधी | निधीन् |
| तृतीया | निधिना | निधिभ्याम् | निधिभिः |
| चतुर्थी | निधये | निधिभ्याम् | निधिभ्यः |
| पञ्चमी | निधेः | निधिभ्याम् | निधिभ्यः |
| षष्ठी | निधेः | निध्योः | निधीनाम् |
| सप्तमी | निधौ | निध्योः | निधिषु |
| सम्बोधन | हे निधे | हे निधी | हे निधयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | जलधिः | जलधी | जलधयः |
| द्वितीया | जलधिम् | जलधी | जलधीन् |
| तृतीया | जलधिना | जलधिभ्याम् | जलधिभिः |
| चतुर्थी | जलधये | जलधिभ्याम् | जलधिभ्यः |
| पञ्चमी | जलधेः | जलधिभ्याम् | जलधिभ्यः |
| षष्ठी | जलधेः | जलध्योः | जलधीनाम् |
| सप्तमी | जलधौ | जलध्योः | जलधिषु |
| सम्बोधन | हे जलधे | हे जलधी | हे जलधयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | विधिः | विधी | विधयः |
| द्वितीया | विधिम् | विधी | विधीन् |
| तृतीया | विधिना | विधिभ्याम् | विधिभिः |
| चतुर्थी | विधये | विधिभ्याम् | विधिभ्यः |
| पञ्चमी | विधेः | विधिभ्याम् | विधिभ्यः |
| षष्ठी | विधेः | विध्योः | विधीनाम् |
| सप्तमी | विधौ | विध्योः | विधिषु |
| सम्बोधन | हे विधे | हे विधी | हे विधयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | राशिः | राशी | राशयः |
| द्वितीया | राशिम् | राशी | राशीन् |
| तृतीया | राशिना | राशिभ्याम् | राशिभिः |
| चतुर्थी | राशये | राशिभ्याम् | राशिभ्यः |
| पञ्चमी | राशेः | राशिभ्याम् | राशिभ्यः |
| षष्ठी | राशेः | राश्योः | राशीनाम् |
| सप्तमी | राशौ | राश्योः | राशिषु |
| सम्बोधन | हे राशे | हे राशी | हे राशयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | वह्निः | वह्नी | वह्नयः |
| द्वितीया | वह्निम् | वह्नी | वह्नीन् |
| तृतीया | वह्निना | वह्निभ्याम् | वह्निभिः |
| चतुर्थी | वह्नये | वह्निभ्याम् | वह्निभ्यः |
| पञ्चमी | वह्नेः | वह्निभ्याम् | वह्निभ्यः |
| षष्ठी | वह्नेः | वह्न्योः | वह्नीनाम् |
| सप्तमी | वह्नौ | वह्न्योः | वह्निषु |
| सम्बोधन | हे वह्ने | हे वह्नी | हे वह्नयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | सारथिः | सारथी | सारथयः |
| द्वितीया | सारथिम् | सारथी | सारथीन् |
| तृतीया | सारथिना | सारथिभ्याम् | सारथिभिः |
| चतुर्थी | सारथये | सारथिभ्याम् | सारथिभ्यः |
| पञ्चमी | सारथेः | सारथिभ्याम् | सारथिभ्यः |
| षष्ठी | सारथेः | सारथ्योः | सारथीनाम् |
| सप्तमी | सारथौ | सारथ्योः | सारथिषु |
| सम्बोधन | हे सारथे | हे सारथी | हे सारथयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | बलिः | बली | बलयः |
| द्वितीया | बलिम् | बली | बलीन् |
| तृतीया | बलिना | बलिभ्याम् | बलिभिः |
| चतुर्थी | बलये | बलिभ्याम् | बलिभ्यः |
| पञ्चमी | बलेः | बलिभ्याम् | बलिभ्यः |
| षष्ठी | बलेः | बल्योः | बलीनाम् |
| सप्तमी | बलौ | बल्योः | बलिषु |
| सम्बोधन | हे बले | हे बली | हे बलयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | उदधिः | उदधी | उदधयः |
| द्वितीया | उदधिम् | उदधी | उदधीन् |
| तृतीया | उदधिना | उदधिभ्याम् | उदधिभिः |
| चतुर्थी | उदधये | उदधिभ्याम् | उदधिभ्यः |
| पञ्चमी | उदधेः | उदधिभ्याम् | उदधिभ्यः |
| षष्ठी | उदधेः | उदध्योः | उदधीनाम् |
| सप्तमी | उदधौ | उदध्योः | उदधिषु |
| सम्बोधन | हे उदधे | हे उदधी | हे उदधयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | मरीचिः | मरीची | मरीचयः |
| द्वितीया | मरीचिम् | मरीची | मरीचीन् |
| तृतीया | मरीचिना | मरीचिभ्याम् | मरीचिभिः |
| चतुर्थी | मरीचये | मरीचिभ्याम् | मरीचिभ्यः |
| पञ्चमी | मरीचेः | मरीचिभ्याम् | मरीचिभ्यः |
| षष्ठी | मरीचेः | मरीच्योः | मरीचीनाम् |
| सप्तमी | मरीचौ | मरीच्योः | मरीचिषु |
| सम्बोधन | हे मरीचे | हे मरीची | हे मरीचयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | पतिः | पती | पतयः |
| द्वितीया | पतिम् | पती | पतीन् |
| तृतीया | पत्या | पतिभ्याम् | पतिभिः |
| चतुर्थी | पत्ये | पतिभ्याम् | पतिभ्यः |
| पञ्चमी | पत्युः | पतिभ्याम् | पतिभ्यः |
| षष्ठी | पत्युः | पत्योः | पतीनाम् |
| सप्तमी | पत्यौ | पत्योः | पतिषु |
| सम्बोधन | हे पते | हे पती | हे पतयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | सखा | सखायौ | सखायः |
| द्वितीया | सखायम् | सखायौ | सखीन् |
| तृतीया | सख्या | सखिभ्याम् | सखिभिः |
| चतुर्थी | सख्ये | सखिभ्याम् | सखिभ्यः |
| पञ्चमी | सख्युः | सखिभ्याम् | सखिभ्यः |
| षष्ठी | सख्युः | सख्योः | सखीनाम् |
| सप्तमी | सख्यौ | सख्योः | सखिषु |
| सम्बोधन | हे सखे | हे सखायौ | हे सखायः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | मतिः | मती | मतयः |
| द्वितीया | मतिम् | मती | मतीः |
| तृतीया | मत्या | मतिभ्याम् | मतिभिः |
| चतुर्थी | मतये / मत्यै | मतिभ्याम् | मतिभ्यः |
| पञ्चमी | मतेः / मत्याः | मतिभ्याम् | मतिभ्यः |
| षष्ठी | मतेः / मत्याः | मत्योः | मतीनाम् |
| सप्तमी | मतौ / मत्याम् | मत्योः | मतिषु |
| सम्बोधन | हे मते | हे मती | हे मतयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | बुद्धिः | बुद्धी | बुद्धयः |
| द्वितीया | बुद्धिम् | बुद्धी | बुद्धीः |
| तृतीया | बुद्ध्या | बुद्धिभ्याम् | बुद्धिभिः |
| चतुर्थी | बुद्धये / बुद्ध्यै | बुद्धिभ्याम् | बुद्धिभ्यः |
| पञ्चमी | बुद्धेः / बुद्ध्याः | बुद्धिभ्याम् | बुद्धिभ्यः |
| षष्ठी | बुद्धेः / बुद्ध्याः | बुद्धयोः | बुद्धीनाम् |
| सप्तमी | बुद्धौ / बुद्ध्याम् | बुद्धयोः | बुद्धिषु |
| सम्बोधन | हे बुद्धे | हे बुद्धी | हे बुद्धयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | गतिः | गती | गतयः |
| द्वितीया | गतिम् | गती | गतीः |
| तृतीया | गत्या | गतिभ्याम् | गतिभिः |
| चतुर्थी | गतये / गत्यै | गतिभ्याम् | गतिभ्यः |
| पञ्चमी | गतेः / गत्याः | गतिभ्याम् | गतिभ्यः |
| षष्ठी | गतेः / गत्याः | गत्योः | गतीनाम् |
| सप्तमी | गतौ / गत्याम् | गत्योः | गतिषु |
| सम्बोधन | हे गते | हे गती | हे गतयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | कीर्तिः | कीर्ती | कीर्तयः |
| द्वितीया | कीर्तिम् | कीर्ती | कीर्तीः |
| तृतीया | कीर्त्या | कीर्तिभ्याम् | कीर्तिभिः |
| चतुर्थी | कीर्तये / कीर्त्यै | कीर्तिभ्याम् | कीर्तिभ्यः |
| पञ्चमी | कीर्तेः / कीर्त्याः | कीर्तिभ्याम् | कीर्तिभ्यः |
| षष्ठी | कीर्तेः / कीर्त्याः | कीर्त्योः | कीर्तीनाम् |
| सप्तमी | कीर्तौ / कीर्त्याम् | कीर्त्योः | कीर्तिषु |
| सम्बोधन | हे कीर्ते | हे कीर्ती | हे कीर्तयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | नीतिः | नीती | नीतयः |
| द्वितीया | नीतिम् | नीती | नीतीः |
| तृतीया | नीत्या | नीतिभ्याम् | नीतिभिः |
| चतुर्थी | नीतये / नीत्यै | नीतिभ्याम् | नीतिभ्यः |
| पञ्चमी | नीतेः / नीत्याः | नीतिभ्याम् | नीतिभ्यः |
| षष्ठी | नीतेः / नीत्याः | नीत्योः | नीतीनाम् |
| सप्तमी | नीतौ / नीत्याम् | नीत्योः | नीतिषु |
| सम्बोधन | हे नीते | हे नीती | हे नीतयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | धृतिः | धृती | धृतयः |
| द्वितीया | धृतिम् | धृती | धृतीः |
| तृतीया | धृत्या | धृतिभ्याम् | धृतिभिः |
| चतुर्थी | धृतये / धृत्यै | धृतिभ्याम् | धृतिभ्यः |
| पञ्चमी | धृतेः / धृत्याः | धृतिभ्याम् | धृतिभ्यः |
| षष्ठी | धृतेः / धृत्याः | धृत्योः | धृतीनाम् |
| सप्तमी | धृतौ / धृत्याम् | धृत्योः | धृतिषु |
| सम्बोधन | हे धृते | हे धृती | हे धृतयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | श्रुतिः | श्रुती | श्रुतयः |
| द्वितीया | श्रुतिम् | श्रुती | श्रुतीः |
| तृतीया | श्रुत्या | श्रुतिभ्याम् | श्रुतिभिः |
| चतुर्थी | श्रुतये / श्रुत्यै | श्रुतिभ्याम् | श्रुतिभ्यः |
| पञ्चमी | श्रुतेः / श्रुत्याः | श्रुतिभ्याम् | श्रुतिभ्यः |
| षष्ठी | श्रुतेः / श्रुत्याः | श्रुत्योः | श्रुतीनाम् |
| सप्तमी | श्रुतौ / श्रुत्याम् | श्रुत्योः | श्रुतिषु |
| सम्बोधन | हे श्रुते | हे श्रुती | हे श्रुतयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | स्मृतिः | स्मृती | स्मृतयः |
| द्वितीया | स्मृतिम् | स्मृती | स्मृतीः |
| तृतीया | स्मृत्या | स्मृतिभ्याम् | स्मृतिभिः |
| चतुर्थी | स्मृतये / स्मृत्यै | स्मृतिभ्याम् | स्मृतिभ्यः |
| पञ्चमी | स्मृतेः / स्मृत्याः | स्मृतिभ्याम् | स्मृतिभ्यः |
| षष्ठी | स्मृतेः / स्मृत्याः | स्मृत्योः | स्मृतीनाम् |
| सप्तमी | स्मृतौ / स्मृत्याम् | स्मृत्योः | स्मृतिषु |
| सम्बोधन | हे स्मृते | हे स्मृती | हे स्मृतयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | भूमिः | भूमी | भूमयः |
| द्वितीया | भूमिम् | भूमी | भूमीः |
| तृतीया | भूम्या | भूमिभ्याम् | भूमिभिः |
| चतुर्थी | भूमये / भूम्यै | भूमिभ्याम् | भूमिभ्यः |
| पञ्चमी | भूमेः / भूम्याः | भूमिभ्याम् | भूमिभ्यः |
| षष्ठी | भूमेः / भूम्याः | भूम्योः | भूमीनाम् |
| सप्तमी | भूमौ / भूम्याम् | भूम्योः | भूमिषु |
| सम्बोधन | हे भूमे | हे भूमी | हे भूमयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | रात्रिः | रात्री | रात्रयः |
| द्वितीया | रात्रिम् | रात्री | रात्रीः |
| तृतीया | रात्र्या | रात्रिभ्याम् | रात्रिभिः |
| चतुर्थी | रात्रये / रात्र्यै | रात्रिभ्याम् | रात्रिभ्यः |
| पञ्चमी | रात्रेः / रात्र्याः | रात्रिभ्याम् | रात्रिभ्यः |
| षष्ठी | रात्रेः / रात्र्याः | रात्र्योः | रात्रीणाम् |
| सप्तमी | रात्रौ / रात्र्याम् | रात्र्योः | रात्रिषु |
| सम्बोधन | हे रात्रे | हे रात्री | हे रात्रयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | शक्तिः | शक्ती | शक्तयः |
| द्वितीया | शक्तिम् | शक्ती | शक्तीः |
| तृतीया | शक्त्या | शक्तिभ्याम् | शक्तिभिः |
| चतुर्थी | शक्तये / शक्त्यै | शक्तिभ्याम् | शक्तिभ्यः |
| पञ्चमी | शक्तेः / शक्त्याः | शक्तिभ्याम् | शक्तिभ्यः |
| षष्ठी | शक्तेः / शक्त्याः | शक्त्योः | शक्तीनाम् |
| सप्तमी | शक्तौ / शक्त्याम् | शक्त्योः | शक्तिषु |
| सम्बोधन | हे शक्ते | हे शक्ती | हे शक्तयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | प्रकृतिः | प्रकृती | प्रकृतयः |
| द्वितीया | प्रकृतिम् | प्रकृती | प्रकृतीः |
| तृतीया | प्रकृत्या | प्रकृतिभ्याम् | प्रकृतिभिः |
| चतुर्थी | प्रकृतये / प्रकृत्यै | प्रकृतिभ्याम् | प्रकृतिभ्यः |
| पञ्चमी | प्रकृतेः / प्रकृत्याः | प्रकृतिभ्याम् | प्रकृतिभ्यः |
| षष्ठी | प्रकृतेः / प्रकृत्याः | प्रकृत्योः | प्रकृतीनाम् |
| सप्तमी | प्रकृतौ / प्रकृत्याम् | प्रकृत्योः | प्रकृतिषु |
| सम्बोधन | हे प्रकृते | हे प्रकृती | हे प्रकृतयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | पंक्तिः | पंक्ती | पंक्तयः |
| द्वितीया | पंक्तिम् | पंक्ती | पंक्तीः |
| तृतीया | पंक्त्या | पंक्तिभ्याम् | पंक्तिभिः |
| चतुर्थी | पंक्तये / पंक्त्यै | पंक्तिभ्याम् | पंक्तिभ्यः |
| पञ्चमी | पंक्तेः / पंक्त्याः | पंक्तिभ्याम् | पंक्तिभ्यः |
| षष्ठी | पंक्तेः / पंक्त्याः | पंक्त्योः | पंक्तीनाम् |
| सप्तमी | पंक्तौ / पंक्त्याम् | पंक्त्योः | पंक्तिषु |
| सम्बोधन | हे पंक्ते | हे पंक्ती | हे पंक्तयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | दृष्टिः | दृष्टी | दृष्टयः |
| द्वितीया | दृष्टिम् | दृष्टी | दृष्टीः |
| तृतीया | दृष्ट्या | दृष्टिभ्याम् | दृष्टिभिः |
| चतुर्थी | दृष्टये / दृष्ट्यै | दृष्टिभ्याम् | दृष्टिभ्यः |
| पञ्चमी | दृष्टेः / दृष्ट्याः | दृष्टिभ्याम् | दृष्टिभ्यः |
| षष्ठी | दृष्टेः / दृष्ट्याः | दृष्ट्योः | दृष्टीनाम् |
| सप्तमी | दृष्टौ / दृष्ट्याम् | दृष्ट्योः | दृष्टिषु |
| सम्बोधन | हे दृष्टे | हे दृष्टी | हे दृष्टयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | सृष्टिः | सृष्टी | सृष्टयः |
| द्वितीया | सृष्टिम् | सृष्टी | सृष्टीः |
| तृतीया | सृष्ट्या | सृष्टिभ्याम् | सृष्टिभिः |
| चतुर्थी | सृष्टये / सृष्ट्यै | सृष्टिभ्याम् | सृष्टिभ्यः |
| पञ्चमी | सृष्टेः / सृष्ट्याः | सृष्टिभ्याम् | सृष्टिभ्यः |
| षष्ठी | सृष्टेः / सृष्ट्याः | सृष्ट्योः | सृष्टीनाम् |
| सप्तमी | सृष्टौ / सृष्ट्याम् | सृष्ट्योः | सृष्टिषु |
| सम्बोधन | हे सृष्टे | हे सृष्टी | हे सृष्टयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | शान्तिः | शान्ती | शान्तयः |
| द्वितीया | शान्तिम् | शान्ती | शान्तीः |
| तृतीया | शान्त्या | शान्तिभ्याम् | शान्तिभिः |
| चतुर्थी | शान्तये / शान्त्यै | शान्तिभ्याम् | शान्तिभ्यः |
| पञ्चमी | शान्तेः / शान्त्याः | शान्तिभ्याम् | शान्तिभ्यः |
| षष्ठी | शान्तेः / शान्त्याः | शान्त्योः | शान्तीनाम् |
| सप्तमी | शान्तौ / शान्त्याम् | शान्त्योः | शान्तिषु |
| सम्बोधन | हे शान्ते | हे शान्ती | हे शान्तयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | भक्तिः | भक्ती | भक्तयः |
| द्वितीया | भक्तिम् | भक्ती | भक्तीः |
| तृतीया | भक्त्या | भक्तिभ्याम् | भक्तिभिः |
| चतुर्थी | भक्तये / भक्त्यै | भक्तिभ्याम् | भक्तिभ्यः |
| पञ्चमी | भक्तेः / भक्त्याः | भक्तिभ्याम् | भक्तिभ्यः |
| षष्ठी | भक्तेः / भक्त्याः | भक्त्योः | भक्तीनाम् |
| सप्तमी | भक्तौ / भक्त्याम् | भक्त्योः | भक्तिषु |
| सम्बोधन | हे भक्ते | हे भक्ती | हे भक्तयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | वृत्तिः | वृत्ती | वृत्तयः |
| द्वितीया | वृत्तिम् | वृत्ती | वृत्तीः |
| तृतीया | वृत्त्या | वृत्तिभ्याम् | वृत्तिभिः |
| चतुर्थी | वृत्तये / वृत्त्यै | वृत्तिभ्याम् | वृत्तिभ्यः |
| पञ्चमी | वृत्तेः / वृत्त्याः | वृत्तिभ्याम् | वृत्तिभ्यः |
| षष्ठी | वृत्तेः / वृत्त्याः | वृत्त्योः | वृत्तीनाम् |
| सप्तमी | वृत्तौ / वृत्त्याम् | वृत्त्योः | वृत्तिषु |
| सम्बोधन | हे वृत्ते | हे वृत्ती | हे वृत्तयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | मूर्तिः | मूर्ती | मूर्तयः |
| द्वितीया | मूर्तिम् | मूर्ती | मूर्तीः |
| तृतीया | मूर्त्या | मूर्तिभ्याम् | मूर्तिभिः |
| चतुर्थी | मूर्तये / मूर्त्यै | मूर्तिभ्याम् | मूर्तिभ्यः |
| पञ्चमी | मूर्तेः / मूर्त्याः | मूर्तिभ्याम् | मूर्तिभ्यः |
| षष्ठी | मूर्तेः / मूर्त्याः | मूर्त्योः | मूर्तीनाम् |
| सप्तमी | मूर्तौ / मूर्त्याम् | मूर्त्योः | मूर्तिषु |
| सम्बोधन | हे मूर्ते | हे मूर्ती | हे मूर्तयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | जातिः | जाती | जातयः |
| द्वितीया | जातिम् | जाती | जातीः |
| तृतीया | जात्या | जातिभ्याम् | जातिभिः |
| चतुर्थी | जातये / जात्यै | जातिभ्याम् | जातिभ्यः |
| पञ्चमी | जातेः / जात्याः | जातिभ्याम् | जातिभ्यः |
| षष्ठी | जातेः / जात्याः | जात्योः | जातीनाम् |
| सप्तमी | जातौ / जात्याम् | जात्योः | जातिषु |
| सम्बोधन | हे जाते | हे जाती | हे जातयः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | वारि | वारिणी | वारीणि |
| द्वितीया | वारि | वारिणी | वारीणि |
| तृतीया | वारिणा | वारिभ्याम् | वारिभिः |
| चतुर्थी | वारिणे | वारिभ्याम् | वारिभ्यः |
| पञ्चमी | वारिणः | वारिभ्याम् | वारिभ्यः |
| षष्ठी | वारिणः | वारिणोः | वारीणाम् |
| सप्तमी | वारिणि | वारिणोः | वारिषु |
| सम्बोधन | हे वारे / हे वारि | हे वारिणी | हे वारीणि |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | शुचि | शुचिनी | शुचीनि |
| द्वितीया | शुचि | शुचिनी | शुचीनि |
| तृतीया | शुचिना | शुचिभ्याम् | शुचिभिः |
| चतुर्थी | शुचिने | शुचिभ्याम् | शुचिभ्यः |
| पञ्चमी | शुचिनः | शुचिभ्याम् | शुचिभ्यः |
| षष्ठी | शुचिनः | शुचिनोः | शुचीनाम् |
| सप्तमी | शुचिनि | शुचिनोः | शुचिषु |
| सम्बोधन | हे शुचे / हे शुचि | हे शुचिनी | हे शुचीनि |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | दधि | दधिनी | दधीनि |
| द्वितीया | दधि | दधिनी | दधीनि |
| तृतीया | दध्ना | दधिभ्याम् | दधिभिः |
| चतुर्थी | दध्ने | दधिभ्याम् | दधिभ्यः |
| पञ्चमी | दध्नः | दधिभ्याम् | दधिभ्यः |
| षष्ठी | दध्नः | दध्नोः | दधीनाम् |
| सप्तमी | दध्नि / दधनि | दध्नोः | दधिषु |
| सम्बोधन | हे दधे / हे दधि | हे दधिनी | हे दधीनि |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | अक्षि | अक्षिणी | अक्षीणि |
| द्वितीया | अक्षि | अक्षिणी | अक्षीणि |
| तृतीया | अक्ष्णा | अक्षिभ्याम् | अक्षिभिः |
| चतुर्थी | अक्ष्णे | अक्षिभ्याम् | अक्षिभ्यः |
| पञ्चमी | अक्ष्णः | अक्षिभ्याम् | अक्षिभ्यः |
| षष्ठी | अक्ष्णः | अक्ष्णोः | अक्षीणामम् |
| सप्तमी | अक्ष्णि / अक्षणि | अक्ष्णोः | अक्षिषु |
| सम्बोधन | हे अक्शे / हे अक्षि | हे अक्षिणी | हे अक्षीणि |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | अस्थि | अस्थिनी | अस्थीनि |
| द्वितीया | अस्थि | अस्थिनी | अस्थीनि |
| तृतीया | अस्थ्ना | अस्थिभ्याम् | अस्थिभिः |
| चतुर्थी | अस्थ्ने | अस्थिभ्याम् | अस्थिभ्यः |
| पञ्चमी | अस्थ्नः | अस्थिभ्याम् | अस्थिभ्यः |
| षष्ठी | अस्थ्नः | अस्थ्नोः | अस्थीनाम् |
| सप्तमी | अस्थ्नि / अस्थनि | अस्थ्नोः | अस्थिषु |
| सम्बोधन | हे अस्थे / हे अस्थि | हे अस्थिनी | हे अस्थीनि |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | सक्थि | सक्थिनी | सक्थीनि |
| द्वितीया | सक्थि | सक्थिनी | सक्थीनि |
| तृतीया | सक्थ्ना | सक्थिभ्याम् | सक्थिभिः |
| चतुर्थी | सक्थ्ने | सक्थिभ्याम् | सक्थिभ्यः |
| पञ्चमी | सक्थ्नः | सक्थिभ्याम् | सक्थिभ्यः |
| षष्ठी | सक्थ्नः | सक्थ्नोः | सक्थीनाम् |
| सप्तमी | सक्थ्नि / सक्थनि | सक्थ्नोः | सक्थिषु |
| सम्बोधन | हे सक्थे / हे सक्थि | हे सक्थिनी | हे सक्थीनि |