हिन्दी- मंदाकिनी

॥ श्रीसरस्वत्यै नमः • डिजिटल ग्रन्थालय ॥

हिन्दी मंदाकिनी

सम्पादक: विद्या चन्द्रा • व्याख्या: चन्द्र देव त्रिपाठी 'अतुल'

विश्वविद्यालयीय पाठ्यक्रम (B.A. / M.A.) एवं प्रतियोगी परीक्षाओं (UGC NET, TGT, PGT, Assistant Prof.) हेतु संकलित मध्यकालीन प्रतिनिधि कवियों, मूल पाठों की प्रामाणिक व्याख्या एवं इतिहास का सम्पूर्ण अध्ययन।

📚 विधा: मध्यकालीन काव्य एवं इतिहास 📑 कुल सामग्री: 10 कवि + 06 इतिहास खण्ड 🎯 लक्ष्य: BA, MA, TGT, PGT, NET ⚡ प्रारूप: सप्रसंग व्याख्या + इतिहास + प्रश्नोत्तर

📑 खण्ड १: प्रतिनिधि कवि एवं काव्य-पाठ (सप्रसंग व्याख्या)

10 कवि उपलब्ध
पाठ ०१ मैथिल कोकिल / शृंगार
विद्यापति
✍️ व्याख्या: चन्द्र देव त्रिपाठी 'अतुल'

'पदावली' से संकलित पद; राधा-कृष्ण के अलौकिक प्रेम, वयःसन्धि, रूप-सौन्दर्य एवं भक्ति-भावना का सप्रसंग विवेचन।

सम्पूर्ण पाठ एवं व्याख्या पढ़ें →
पाठ ०२ ज्ञानाश्रयी सन्त काव्य
कबीरदास
✍️ व्याख्या: चन्द्र देव त्रिपाठी 'अतुल'

साखी, सबद एवं रमैनी; गुरु-महिमा, निर्गुण ब्रह्म की उपासना, सामाजिक रूढ़ि-खण्डन एवं रहस्यवादी पदों की व्याख्या।

सम्पूर्ण पाठ एवं व्याख्या पढ़ें →
पाठ ०३ प्रेमाश्रयी सूफी काव्य
मलिक मुहम्मद जायसी
✍️ व्याख्या: चन्द्र देव त्रिपाठी 'अतुल'

'पद्मावत' से संकलित अंश; नागमती वियोग खण्ड, बारहमासा, विरह-वेदना एवं सूफी प्रेम-साधना का शास्त्रीय विश्लेषण।

सम्पूर्ण पाठ एवं व्याख्या पढ़ें →
पाठ ०४ सगुण कृष्ण काव्य
सूरदास
✍️ व्याख्या: चन्द्र देव त्रिपाठी 'अतुल'

'सूरसागर' एवं 'भ्रमरगीत सार' से चयनित पद; वात्सल्य, बाल-लीला, गोपियों का विरह तथा निर्गुण पर सगुण की विजय।

सम्पूर्ण पाठ एवं व्याख्या पढ़ें →
पाठ ०५ सगुण राम काव्य
गोस्वामी तुलसीदास
✍️ व्याख्या: चन्द्र देव त्रिपाठी 'अतुल'

'रामचरितमानस', 'विनयपत्रिका' व 'कवितावली' से संकलित पद; लोकमंगल की साधना, समन्वय-चेतना एवं दास्य भक्ति।

सम्पूर्ण पाठ एवं व्याख्या पढ़ें →
पाठ ०६ रीतिबद्ध काव्य
केशवदास
✍️ व्याख्या: चन्द्र देव त्रिपाठी 'अतुल'

'रामचन्द्रिका' एवं 'रसिकप्रिया' से चयनित अंश; संवाद-सौष्ठव, शास्त्रीय पाण्डित्य, अलंकार-योजना और काव्य-शिल्प।

सम्पूर्ण पाठ एवं व्याख्या पढ़ें →
पाठ ०७ रीतिसिद्ध काव्य
बिहारीलाल
✍️ व्याख्या: चन्द्र देव त्रिपाठी 'अतुल'

'बिहारी सतसई' के प्रतिनिधि दोहे; गागर में सागर भरने वाली शृंगार, भक्ति, नीति और बहुज्ञता की अनुपम व्याख्या।

सम्पूर्ण पाठ एवं व्याख्या पढ़ें →
पाठ ०८ रीतिमुक्त काव्य
घनानन्द
✍️ व्याख्या: चन्द्र देव त्रिपाठी 'अतुल'

प्रेम की पीर, आन्तरिक अनुभूति, सुजान-प्रेम का कृष्ण-भक्ति में रूपान्तरण और स्वच्छन्दतावादी कवित्त-सवैयों की व्याख्या।

सम्पूर्ण पाठ एवं व्याख्या पढ़ें →
पाठ ०९ ऋतु-वर्णन / रीतिबद्ध
सेनापति
✍️ व्याख्या: चन्द्र देव त्रिपाठी 'अतुल'

'कवित्त रत्नाकर' से चयनित पद; प्रकृति एवं षड्-ऋतु वर्णन का बेजोड़ चित्रात्मक सौन्दर्य, श्लेष-चमत्कार और रामभक्ति।

सम्पूर्ण पाठ एवं व्याख्या पढ़ें →
पाठ १० रीति-वीर काव्य
महाकवि भूषण
✍️ व्याख्या: चन्द्र देव त्रिपाठी 'अतुल'

'शिवराज भूषण' एवं 'शिवाबावनी' से संकलित ओजस्वी कवित्त; छत्रपति शिवाजी के शौर्य, पराक्रम और राष्ट्रीय चेतना का गान।

सम्पूर्ण पाठ एवं व्याख्या पढ़ें →

📜 खण्ड २: हिन्दी साहित्य का इतिहास (मध्यकाल)

06 इतिहास खण्ड उपलब्ध
खण्ड ०१ साहित्येतिहास
भक्तिकाल: इतिहास एवं प्रवृत्तियाँ
✍️ अध्ययन: चन्द्र देव त्रिपाठी 'अतुल'

हिन्दी साहित्य के स्वर्णयुग की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, सामाजिक-धार्मिक चेतना, नामकरण, वर्गीकरण एवं समग्र विशेषताएँ।

सम्पूर्ण इतिहास एवं प्रवृत्तियाँ पढ़ें →
खण्ड ०२ साहित्येतिहास
रीतिकाल: इतिहास एवं प्रवृत्तियाँ
✍️ अध्ययन: चन्द्र देव त्रिपाठी 'अतुल'

दरबारी संस्कृति, रीतिबद्ध, रीतिसिद्ध व रीतिमुक्त काव्यधाराओं का तुलनात्मक अध्ययन, लक्षण-ग्रन्थ परम्परा व कला-पक्ष।

सम्पूर्ण इतिहास एवं प्रवृत्तियाँ पढ़ें →
खण्ड ०३ निर्गुण काव्यधारा
ज्ञानाश्रयी शाखा (सन्त काव्य)
✍️ अध्ययन: चन्द्र देव त्रिपाठी 'अतुल'

सन्त काव्यधारा की दार्शनिक पीठिका, निर्गुण भक्ति का स्वरूप, प्रमुख सन्त कवि, सामाजिक क्रान्ति एवं भाषा-शिल्प।

सम्पूर्ण इतिहास एवं प्रवृत्तियाँ पढ़ें →
खण्ड ०४ निर्गुण काव्यधारा
प्रेमाश्रयी शाखा (सूफी काव्य)
✍️ अध्ययन: चन्द्र देव त्रिपाठी 'अतुल'

सूफी प्रेमाख्यानक परम्परा, मसनवी शैली, भारतीय लोक-कथाओं का सूफीकरण, प्रमुख कवि-रचनाएँ और रहस्यवादी चेतना।

सम्पूर्ण इतिहास एवं प्रवृत्तियाँ पढ़ें →
खण्ड ०५ सगुण काव्यधारा
रामाश्रयी शाखा (राम काव्य)
✍️ अध्ययन: चन्द्र देव त्रिपाठी 'अतुल'

मर्यादा पुरुषोत्तम राम की भक्ति-परम्परा, प्रबन्ध काव्य की उदात्तता, लोकमंगलकारी आदर्श और समन्वयवादी दृष्टिकोण।

सम्पूर्ण इतिहास एवं प्रवृत्तियाँ पढ़ें →
खण्ड ०६ सगुण काव्यधारा
कृष्णाश्रयी शाखा (कृष्ण काव्य)
✍️ अध्ययन: चन्द्र देव त्रिपाठी 'अतुल'

पुष्टिमार्गीय भक्ति, अष्टछाप के कवि, लीला-गान, वात्सल्य एवं माधुर्य भाव की पद-परम्परा तथा संगीतात्मकता।

सम्पूर्ण इतिहास एवं प्रवृत्तियाँ पढ़ें →

प्र. 'हिन्दी मंदाकिनी' के अंतर्गत क्या-क्या अध्ययन सामग्री उपलब्ध है?

उत्तर: इसमें मध्यकालीन हिन्दी काव्य (आदिकाल/भक्तिकाल/रीतिकाल) के 10 प्रमुख कवियों के संकलित पदों का मूल पाठ, सप्रसंग व्याख्या, काव्य-सौन्दर्य तथा मध्यकालीन साहित्येतिहास की सभी प्रमुख धाराओं की विस्तृत समीक्षा उपलब्ध है।

॥ हिन्दी मंदाकिनी (सम्पादक: विद्या चन्द्रा • व्याख्या: चन्द्र देव त्रिपाठी 'अतुल') • सम्पूर्ण डिजिटल ग्रन्थालय ॥

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)