मेघदूतम् – महाकवि कालिदास
मेघदूतम् : वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तरी
१. मेघदूत के रचनाकार हैं :
२. 'दीपशिखा' इस उपाधि से अलंकृत हैं :
३. महाकवि कालिदास थे :
४. महाकवि कालिदास की रचनाएँ हैं :
५. महाकवि कालिदास की सर्वश्रेष्ठ नाटक है :
६. अभिज्ञानशाकुन्तल नाटक है :
७. अभिज्ञानशाकुन्तल का सर्वप्रथम अंग्रेजी अनुवाद किया :
८. कालिदास की कीर्ति का आधार है :
९. उपमा सम्राट हैं :
१०. कालिदास की कृति नहीं है :
११. कालिदास ने अधिकतर रीति का प्रयोग किया है :
१२. कालिदास की शैली है :
१३. कालिदास के नाटकों में छंदों की प्रमुखता है :
१४. मेघदूत में छन्द है :
१५. सीमित शब्दों में सशक्त भाषा का प्रयोग करते हैं :
१६. कालिदास किस शैली के आचार्य हैं :
१७. कोमल भावों की अभिव्यंजना के आधार पर कविता कामिनी का विलास किसे कहा गया है :
१८. भारतीय संस्कृति के प्रबल समर्थक हैं :
१९. कालिदास की नाट्यकला अंकुरित हुई :
२०. कालिदास की नाट्यकला पुष्पित हुई :
२१. कालिदास के नाटकों का प्रतिपाद्य विषय है :
२२. उपमाओं के लिए विश्वविश्रुत हैं :
२३. कालिदास सर्वप्रथम थे :
२४. कालिदास का शास्त्रार्थ हुआ :
२५. कालिदास किसकी कृपा से विद्वान बने :
२६. 'अस्ति कश्चिद् वाग्विशेषः' उक्ति है :
२७. 'अनावृतं कपाटं द्वारं देहि' यह कथन है :
२८. कालिदास ने 'अस्ति' शब्द से रचना की :
२९. 'कश्चिद्' शब्द से कालिदास ने रचना की :
३०. 'वाग्' शब्द से कालिदास ने रचना की :
३१. 'यदि स्वर्ग और मर्त्यलोक को एक ही स्थान पर देखना हो तो शकुन्तला को देखो' यह कथन है :
३२. कालिदास को कविकुलगुरु की उपाधि से विभूषित किया :
३३. महाकवि कालिदास सभी को शिक्षा देते हैं :
३४. भगवान् सदाशिव आशुतोष के उपासक हैं :
३५. ये कवि हैं :
३६. रसात्मक वाक्य को कहते हैं :
३७. काव्य में भेद होते हैं :
३८. दो भेद होते हैं :
३९. दृश्य काव्य के भेद होते हैं :
४०. गद्य काव्य के भेद होते हैं :
४१. ये भेद हैं :
४२. पद्य काव्य के भेद होते हैं :
४३. ये भेद हैं :
४४. गीतिकाव्य को ही कहते हैं :
४५. गीतिकाव्य के विषय की दृष्टि से तीन भेद हैं :
४६. कालिदास का मेघदूत है :
४७. 'खण्डकाव्यं भवेत्काव्यस्यैकदेशानुसारि च' यह लक्षण करते हैं :
४८. गीतिकाव्य का उद्गम स्थल है :
४९. मेघदूत का उपजीव्य है :
५०. अलकाधीश्वर कुबेर द्वारा प्रदत्त शाप का आधार है :
५१. संदेश पहुँचाने वाले को कहते हैं :
५२. दूत के भेद होते हैं :
५३. निसृष्टार्थ दूत है :
५४. अभिज्ञानशाकुन्तल में मिश्रकेशी है :
५५. महाभारत में निसृष्टार्थ दूत हैं :
५६. धूम, ज्योति, जल तथा वायु का समूह है :
५७. मेघ है :
५८. मेघदूत में है :
५९. मेघदूत में नायक है :
६०. मेघदूत में नायिका है :
६१. यक्ष है :
६२. नायिका के भेद होते हैं :
६३. यक्षपत्नी है :
६४. शृंगाररस के भेद होते हैं :
६५. विप्रलम्भ शृङ्गार के भेद होते हैं :
६६. मेघदूत में प्रधानतया गुण है :
६६ (२). मेघदूत में प्रधानतया रीति है :
६७. मेघदूत के भाग हैं :
६८. कुबेर ने शाप दिया :
६९. अपने अधिकार के पालन में प्रमत्त हुआ :
७०. अलकापुरी से एक साल के लिए निर्वासित हुआ :
७१. कैलास पर्वत में अवस्थित यक्षों की पुरी है :
७२. कैलास को कहते हैं :
७३. कैलास पर्वत के दक्षिण में है :
७४. नर्मदा नदी का उद्गम स्थल है :
७५. मालव का पूर्वभाग है :
७६. मालव देश की राजधानी है :
७७. उज्जयिनी.....पुरियों में एक है :
७८. रामगिरि के आश्रम में निवास किया :
७९. आश्रम का जल पवित्र हो गया था :
८०. यक्ष को शाप मिला था :
८१. इन्द्र के कोषाध्यक्ष हैं :
८२. गुह्यक पर्याय है :
८३. देवताओं के भेद होते हैं :
८४. मंगलाचरण के भेद होते हैं :
८५. मेघदूत में मंगलाचरण है :
८६. 'शापः' में प्रत्यय है :
८७. 'महिमा' में प्रत्यय है :
८८. 'प्रमत्तः' में शब्द है :
८९. 'अधिकार' में प्रत्यय है :
९०. 'अणिमा' आदि सिद्धियों की संख्या होती है :
९१. काव्य के आरम्भ में........का प्रयोग हुआ है :
९२. कोश के अनुसार वायु, ब्रह्मा तथा सूर्य का वाचक है :
९३. प्रवास के भेद होते हैं :
९४. ये भेद हैं :
९५. मेघदूत..........नामक प्रवास का उल्लेख है :
९६. नञ् के अर्थ होते हैं :
९७. चित्रकूट पर्वत पर वियोग के आठ मास व्यतीत किया :
९८. शून्य कलाई वाला हो गया :
९९. ......के पहले दिन यक्ष ने मेघ को देखा :
१००. मेघ.........के सदृश था :
१०१. वप्रक्रीडा में.............दन्त प्रहार करने वाले हाथी के सदृश मेघ को देखा :
१०२. पुरुषों की अपेक्षा सामान्यतः स्त्रियों में बल की अल्पता से उन्हें कहते हैं :
१०३. कुबेर के.............ने मेघ के समक्ष खड़े होकर सोचा :
१०४. मेघ के दर्शन होने पर सुखी का भी चित्त हो जाता है :
१०५. यक्ष के कण्ठालिङ्गन का इच्छुक रहती है :
१०६. मेघ के दर्शन होने पर विरही यक्ष को......का स्मरण हो आया :
१०७. 'नभसि प्रत्यासन्ने' का अर्थ है :
१०८. प्रिया की जीवनरक्षा चाहने वाला यक्ष ने पूजन किया :
१०९. अर्घ्यसामग्री में पुष्प थे :
११०. अर्घ्य में वस्तुओं की संख्या होती है :
१११. यक्ष ने प्रसन्नतापूर्वक प्रणयभरे नयनों से स्वागत किया :
११२. धूम, अग्नि, जल तथा वायु का मिश्रण होता है :
११३. जड़-चेतन में भेद नहीं करते हैं :
११४. विरह के क्षणों में अपनी प्रिया के फोटो, वस्त्रादि से बातें करते हैं :
११५. निधि की रक्षा करने वाले को कहते हैं :
११६. मेघ प्रधान पुरुष है :
११७. 'पुष्करावर्तक' कुल में उत्पन्न होने वाले हैं :
११८. पुष्करावर्तक की व्युत्पत्ति है :
११९. ज्योतिषशास्त्र में मेघों के नायक विशेष को कहते हैं :
१२०. प्रलयकाल में संहार करने वाले......पुष्करावर्तक कहते हैं :
१२१. अधिकगुण वाले पुरुष से की गई.....निष्फल होने पर भी अच्छी होती है :
१२२. ......से की गई याचना सफल होने पर भी अच्छी नहीं होती :
१२३. 'पुष्करम्' का अर्थ है :
१२४. सन्तापयुक्तों का रक्षक है :
१२५. अलकापुरी के उद्यान में मन्दिर है :
१२६. धनपति का अर्थ है :
१२७. कुबेर के नगरी का नाम है :
१२८. बाह्योद्यान में स्थित शिवजी के सिर पर स्थित चन्द्रमा की चाँदनी से प्रकाशित होते रहते हैं :
१२९. 'पयोद' कहते हैं :
१३०. पुत्र को जन्म देने के कारण पत्नी को कहते हैं :
१३१. 'पवनपदवीम्' का अर्थ है :
१३२. 'पथिकवनिताः' का अर्थ है :
१३३. जिनकी आजीविका दूसरों के अधीन होती है :
१३४. अवधि के दिन गिनने में लगी हुई होगी :
१३५. यात्रा के समय अनुकूल वायु का बहना होता है :
१३६. .............पक्षी का यात्रा के समय बायीं तरफ होना शुभ होता है :
१३७. चातक............नक्षत्र में होने वाली वर्षा का जल पीता है :
१३८. सगन्धः का अर्थ होता है :
१३९. मेघ के संयोग से गर्भ धारण करती हैं :
१४०. यात्रा के समय शुभसूचक होता है :
१४१. .................के उगने से धरती उपजाऊ होती है :
१४२. राजहंस के चोंच एवं पैर होते हैं :
१४३. शिवजी के मित्र.............कैलास पर्वत पर निवास करते हैं :
१४४. मानसरोवर का निर्माण किया :
१४५. नीरक्षीरविवेकी होते हैं :
१४६. काव्यों में...........का कमलनाल खाना प्रसिद्ध है :
१४७. प्रेमीजनों का जब चिरकाल के पश्चात् मिलन होता है तो उनके निकल पड़ते हैं :
१४८. मेघ के सहचर होंगे :
१४९. 'जलधरसमये मानसं यान्ति हंसाः' ऐसा लिखते हैं :
१५०. पत्थरों से टकराने के कारण नदियों का जल हल्का तथा स्वास्थ्यकारी होता है यह कथन है :
१५१. दिग्गजों की संख्या होती है :
१५२. गोपाल का वेष धारण करते हैं :
१५३. इन्द्रधनुष के रंगों की संख्या होती है :
१५४. 'आखण्डल' नाम है :
१५५. अपने वज्र से पर्वतों के पंख काट डाले :
१५६. मेघ के अधीन होता है :
१५७. 'लघुगतिः' का अर्थ है :
१५८. ग्रामीण स्त्रियाँ शृङ्गारिक चेष्टाओं से रहती हैं :
१५९. वर्षा करने के पश्चात् मेघ हो जाएगा :
१६०. उपकारी के उपकार को नहीं भूलता है :
१६१. आम्रकूट पर्वत के आसपास...........के वृक्ष पाये जाते हैं :
१६२. मेघ मूसलाधार वर्षा से.........को बुझा देगा :
१६३. आम्रकूट पर्वत से निकलती है :
१६४. खाली हुए सभी होते हैं :
१६५. गौरव के लिए होती है :
१६६. जलयुक्त मेघ को आन्दोलित करने में वायु होगा :
१६७. मेघ की अगवानी करेंगे :
१६८. नयन के प्रान्तभाग की शुक्लता के कारण........को शुक्लापाङ्ग कहते हैं :
१६९. विदिशा पहुँचकर कामुकता के सम्पूर्ण फल को प्राप्त कर लेगा :
१७०. वेत्रवती नदी के पास है :
१७१. पुष्पलावी कहते हैं :
१७२. अलकागामी मेघ के लिए मार्ग होगा :
१७३. निर्विन्ध्या नदी के.........में उज्जयिनी विद्यमान है :
१७४. उज्जयिनी को............भी कहते हैं :
१७५. उज्जयिनी में .........का मन्दिर है :
१७६. मोक्षदायिका पुरी है :
१७७. उज्जयिनी...........का एक टुकड़ा है :
१७८. 'प्रार्थनाचाटुकार' का अर्थ है :
१७९. शिप्रावात का अर्थ है :
१८०. उज्जयिनी के तट पर स्थित है :
१८१. मेघ और मोर की.............मित्रता स्वाभाविक है :
१८२. त्रिभुवनगुरु कहलाते हैं :
१८३. महाकाल को देखकर मिल जाती है :
१८४. मालवदेश में पायी जाती है :
१८५. राजा प्रद्योत की पुत्री थी :
१८६. वत्सनरेश थे :
१८७. प्रद्योत के हाथी का नाम था :
१८८. राजा उदयन ने अपहरण कर ली :
१८९. भाव पर आश्रित अङ्गसंचालन कहलाता है :
१९०. ताल तथा लय पर आश्रित हस्त-पाद के संचालन को कहते हैं :
१९१. शैवदर्शन के अनुसार पदार्थ के भेद हैं :
१९२. तीन भेद हैं :
१९३. अविद्यारूपी पाश से बद्ध जीवात्मा को कहते हैं :
१९४. पाश के समान बन्धन करने के कारण अविद्या को कहते हैं :
१९५. अविद्या से मुक्त शिव को कहते हैं :
१९६. गजासुर को मारा :
१९७. गजासुर के आर्द्रचर्म को धारण कर ताण्डव नृत्य किया :
१९८. मित्र के कार्य को अङ्गीकार करने वाले विलम्ब नहीं करते हैं :
१९९. कमलिनी...........की पत्नी के रूप में प्रसिद्ध है :
२००. ..........आने पर नदी का प्रवाह कम हो जाता है :
२०१. ......की शाखाएँ सदा उसका स्पर्श करती रहती हैं :
२०२. गम्भीरा नदी का जल पीकर देवगिरि की ओर बढ़ेगा.....
२०३. शीतल वायु .............के नीचे बहेगा :
२०४. देवगिरि पर निवास करते हैं :
२०५. मेघ भगवान् कार्तिकेय के ऊपर करेगा :
२०६. मयूर के पंख को धारण करती हैं :
२०७. देवों के सेनापति हैं :
२०८. कृत्तिकाओं ने पाला :
२०९. राजा रन्तिदेव की कीर्तिरूप...........नदी है :
२१०. गौओं के आलम्भन में चर्मराशि से बहते हुए रक्त से जो नदी निकली उसका नाम है :
२११. राजा रन्तिदेव.............में राज्य करते थे :
२१२. चर्मण्वती को आजकल कहते हैं :
२१३. ............के धनुष का नाम शार्ङ्ग है :
२१४. शार्ङ्ग नामक धनुष धारण करने के कारण श्रीकृष्ण कहलाते हैं :
२१५. गगनगति कहलाते हैं :
२१६. कुन्दपुष्प होता है :
२१७. 'ब्रह्मावर्त' द्वारा रचित है :
२१८. कौरव तथा पाण्डवों का प्रसिद्ध युद्ध हुआ :
२१९. अर्जुन के धनुष का नाम है :
२२०. खाण्डव को जलाने के समय.......द्वारा अर्जुन को प्राप्त हुआ :
२२१. मेघ....नदी के जल को पीकर अपना अन्तःकरण पवित्र कर ले :
२२२. बलराम की पत्नी का नाम है :
२२३. जह्नु ऋषि की पुत्री कहलाती हैं :
२२४. हलधर कहलाते हैं :
२२५. श्रेष्ठजनों की सम्पत्तियाँ आपद्ग्रस्तों की पीड़ा को करती हैं :
२२६. .................में प्रयास करने वाले तिरस्कृत होते हैं :
२२७. ............ने अपने चरणन्यास को हिमालय में व्यक्त किया :
२२८. मेघ...............के दावानल को शान्त कर दे :
२२९. मय दानव द्वारा रचित था :
२३०. त्रिपुरदहन..............द्वारा किया गया :
२३१. क्रौञ्चरन्ध्र को परशुराम के.........का मार्ग कहते हैं :
२३२. ............ने रावण को चन्द्रहास नामक खड्ग दी :
२३३. त्रिदश.............कहलाते हैं :
२३४. कैलास पर्वत...............है :
२३५. बलराम जी का वस्त्र है :
२३६. शिवजी का क्रीडास्थल है :
२३७. कल्पवृक्ष पाया जाता है :
२३८. अलकानगरी के भवन............मंजिल हैं :
२३९. कैलास के............भाग में अलका बसी है :
२४०. रसकूपामृत को पी गये :
२४१. कैलास पर्वत को अपने चरण से दबाया :
उत्तरमाला
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बहुत ही सार्थक एवं परिश्रम साध्य कार्य आप कर रहे है। धन्यवाद
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