मेघदूतम् -महाकवि कालिदास

मेघदूतम् - वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तरी

मेघदूतम् : वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तरी

१. मेघदूत के रचनाकार हैं :
(क) कालिदास
(ख) भवभूति
(ग) भास
(घ) माघ
२. 'दीपशिखा' इस उपाधि से अलंकृत हैं :
(क) भवभूति
(ख) माघ
(ग) कालिदास
(घ) भास
३. महाकवि कालिदास थे :
(क) शैव
(ख) वैष्णव
(ग) शाक्त
(घ) निर्गुण ब्रह्मोपासक
४. महाकवि कालिदास की रचनाएँ हैं :
(क) २
(ख) ५
(ग) ७
(घ) ९
५. महाकवि कालिदास की सर्वश्रेष्ठ नाटक है :
(क) अभिज्ञानशाकुन्तलम्
(ख) विक्रमोर्वशीय
(ग) उत्तररामचरित
(घ) स्वप्नवासवदत्तम्
६. अभिज्ञानशाकुन्तल नाटक है :
(क) दुःखान्त
(ख) सुखान्त
(ग) दुःखान्त तथा सुखान्त मिश्रित
(घ) कल्पनान्त
७. अभिज्ञानशाकुन्तल का सर्वप्रथम अंग्रेजी अनुवाद किया :
(क) बालगंगाधर तिलक ने
(ख) शेक्सपियर ने
(ग) विलियम जोन्स ने
(घ) गोटे ने
८. कालिदास की कीर्ति का आधार है :
(क) मेघदूत
(ख) रघुवंश
(ग) विक्रमोर्वशीय
(घ) अभिज्ञानशाकुन्तलम्
९. उपमा सम्राट हैं :
(क) भवभूति
(ख) माघ
(ग) भारवि
(घ) कालिदास
१०. कालिदास की कृति नहीं है :
(क) रघुवंश
(ख) वेणीसंहार
(ग) मेघदूत
(घ) ऋतुसंहार
११. कालिदास ने अधिकतर रीति का प्रयोग किया है :
(क) गौड़ी
(ख) पाञ्चाली
(ग) वैदर्भी
(घ) लाटी
१२. कालिदास की शैली है :
(क) ध्वन्यात्मक
(ख) वर्णनात्मक
(ग) संकेतात्मक
(घ) निबन्धात्मक
१३. कालिदास के नाटकों में छंदों की प्रमुखता है :
(क) त्रिष्टुप्
(ख) आर्या
(ग) मालिनी
(घ) उपजाति
१४. मेघदूत में छन्द है :
(क) मालिनी
(ख) मन्दाक्रान्ता
(ग) शालिनी
(घ) शार्दूलविक्रीडित
१५. सीमित शब्दों में सशक्त भाषा का प्रयोग करते हैं :
(क) माघ
(ख) भारवि
(ग) कालिदास
(घ) भवभूति
१६. कालिदास किस शैली के आचार्य हैं :
(क) रसमयी
(ख) आलंकारिक
(ग) भावपरक
(घ) गुणपरक
१७. कोमल भावों की अभिव्यंजना के आधार पर कविता कामिनी का विलास किसे कहा गया है :
(क) भवभूति
(ख) कालिदास
(ग) माघ
(घ) भारवि
१८. भारतीय संस्कृति के प्रबल समर्थक हैं :
(क) भारवि
(ख) कालिदास
(ग) माघ
(घ) भवभूति
१९. कालिदास की नाट्यकला अंकुरित हुई :
(क) अभिज्ञानशाकुन्तल में
(ख) पञ्चरात्र में
(ग) विक्रमोर्वशीय में
(घ) मालविकाग्निमित्र में
२०. कालिदास की नाट्यकला पुष्पित हुई :
(क) अभिज्ञानशाकुन्तल में
(ख) विक्रमोर्वशीय में
(ग) मालविकाग्निमित्र में
(घ) उत्तररामचरित में
२१. कालिदास के नाटकों का प्रतिपाद्य विषय है :
(क) व्यक्तिपरक
(ख) श्रृङ्गारपरक
(ग) नीतिपरक
(घ) आध्यात्मिक
२२. उपमाओं के लिए विश्वविश्रुत हैं :
(क) माघ
(ख) दण्डी
(ग) भारवि
(घ) कालिदास
२३. कालिदास सर्वप्रथम थे :
(क) चतुर
(ख) विद्वान्
(ग) महामूर्ख
(घ) धूर्त
२४. कालिदास का शास्त्रार्थ हुआ :
(क) गार्गी
(ख) विद्योत्तमा
(ग) मैत्रेयी
(घ) सुलक्षणा
२५. कालिदास किसकी कृपा से विद्वान बने :
(क) दुर्गा देवी की
(ख) लक्ष्मी देवी की
(ग) काली देवी की
(घ) पार्वती जी की
२६. 'अस्ति कश्चिद् वाग्विशेषः' उक्ति है :
(क) विद्योत्तमा की
(ख) गार्गी की
(ग) मैत्रेयी की
(घ) भामिनी की
२७. 'अनावृतं कपाटं द्वारं देहि' यह कथन है :
(क) भारवि की
(ख) भवभूति की
(ग) माघ का
(घ) महाकवि कालिदास की
२८. कालिदास ने 'अस्ति' शब्द से रचना की :
(क) रघुवंश की
(ख) कुमारसंभव की
(ग) मेघदूत की
(घ) ऋतुसंहार की
२९. 'कश्चिद्' शब्द से कालिदास ने रचना की :
(क) कुमारसंभव की
(ख) मेघदूत की
(ग) विक्रमोर्वशीय की
(घ) मालविकाग्निमित्र की
३०. 'वाग्' शब्द से कालिदास ने रचना की :
(क) रघुवंश की
(ख) कुमारसंभव की
(ग) ऋतुसंहार की
(घ) मेघदूत की
३१. 'यदि स्वर्ग और मर्त्यलोक को एक ही स्थान पर देखना हो तो शकुन्तला को देखो' यह कथन है :
(क) शेक्सपीयर का
(ख) विलियम जोन्स का
(ग) बालगंगाधर तिलक का
(घ) महाकवि गोटे का
३२. कालिदास को कविकुलगुरु की उपाधि से विभूषित किया :
(क) महाकवि बाणभट्ट ने
(ख) सोड्ढल कवि ने
(ग) पीयूषवर्षी कवि जयदेव ने
(घ) महाकवि जयदेव ने
३३. महाकवि कालिदास सभी को शिक्षा देते हैं :
(क) संग्रह एवं भोग की
(ख) त्याग एवं तपस्या की
(ग) आखेट की
(घ) व्यापार की
३४. भगवान् सदाशिव आशुतोष के उपासक हैं :
(क) दण्डी
(ख) माघ
(ग) भवभूति
(घ) महाकवि कालिदास
३५. ये कवि हैं :
(क) आशावादी
(ख) निराशावादी
(ग) भोगवादी
(घ) आखेटप्रिय
३६. रसात्मक वाक्य को कहते हैं :
(क) कथा
(ख) आख्यायिका
(ग) नाटक
(घ) काव्य
३७. काव्य में भेद होते हैं :
(क) दो
(ख) चार
(ग) पाँच
(घ) सात
३८. दो भेद होते हैं :
(क) श्रव्यकाव्य तथा दृश्यकाव्य
(ख) गीतिकाव्य तथा श्रव्यकाव्य
(ग) दृश्यकाव्य तथा गद्यकाव्य
(घ) गीतिकाव्य तथा दृश्यकाव्य
३९. दृश्य काव्य के भेद होते हैं :
(क) दो
(ख) तीन
(ग) चार
(घ) पाँच
४०. गद्य काव्य के भेद होते हैं :
(क) दो
(ख) चार
(ग) पाँच
(घ) सात
४१. ये भेद हैं :
(क) कथा एवं उपन्यास
(ख) उपन्यास एवं आख्यायिका
(ग) कथा एवं आख्यायिका
(घ) आख्यायिका एवं चम्पू
४२. पद्य काव्य के भेद होते हैं :
(क) दो
(ख) पाँच
(ग) सात
(घ) नव
४३. ये भेद हैं :
(क) महाकाव्य एवं गीतिकाव्य
(ख) कथा एवं गीतिकाव्य
(ग) उपन्यास एवं महाकाव्य
(घ) आख्यान एवं उपन्यास
४४. गीतिकाव्य को ही कहते हैं :
(क) महाकाव्य
(ख) खण्डकाव्य
(ग) उपन्यास
(घ) आख्यायिका
४५. गीतिकाव्य के विषय की दृष्टि से तीन भेद हैं :
(क) स्तोत्र सम्बन्धी, नीतिसम्बन्धी तथा शृङ्गारसम्बन्धी
(ख) रससम्बन्धी, अलङ्कारसम्बन्धी तथा गुणसम्बन्धी
(ग) शृङ्गारसम्बन्धी, गुणसम्बन्धी तथा रीतिसम्बन्धी
(घ) नीतिसम्बन्धी, भक्तिसम्बन्धी तथा रससम्बन्धी
४६. कालिदास का मेघदूत है :
(क) खण्डकाव्य या गीतिकाव्य
(ख) महाकाव्य या गीतिकाव्य
(ग) रीतिकाव्य या खण्डकाव्य
(घ) मुक्तक खण्डकाव्य या गीतिकाव्य
४७. 'खण्डकाव्यं भवेत्काव्यस्यैकदेशानुसारि च' यह लक्षण करते हैं :
(क) मम्मट
(ख) पण्डितराज जगन्नाथ
(ग) आचार्य आनन्दवर्धन
(घ) आचार्य विश्वनाथ
४८. गीतिकाव्य का उद्गम स्थल है :
(क) ऋग्वेद
(ख) यजुर्वेद
(ग) सामवेद
(घ) अथर्ववेद
४९. मेघदूत का उपजीव्य है :
(क) रामायण
(ख) महाभारत
(ग) गीता
(घ) उपनिषद्
५०. अलकाधीश्वर कुबेर द्वारा प्रदत्त शाप का आधार है :
(क) विष्णुपुराण
(ख) शिवपुराण
(ग) ब्रह्मवैवर्तपुराण
(घ) कूर्मपुराण
५१. संदेश पहुँचाने वाले को कहते हैं :
(क) संदेशलेखक
(ख) संदेशवाहक
(ग) दूत
(घ) संदेशवक्ता
५२. दूत के भेद होते हैं :
(क) दो
(ख) तीन
(ग) पाँच
(घ) सात
५३. निसृष्टार्थ दूत है :
(क) हनुमान्
(ख) जाबालि
(ग) मिश्रकेशी
(घ) मेघ
५४. अभिज्ञानशाकुन्तल में मिश्रकेशी है :
(क) मितार्थदूती
(ख) निसृष्टार्थ दूती
(ग) सन्देशवाहिका दूती
(घ) इनमें से कोई नहीं
५५. महाभारत में निसृष्टार्थ दूत हैं :
(क) भीम
(ख) युधिष्ठिर
(ग) श्रीकृष्ण
(घ) द्रोणाचार्य
५६. धूम, ज्योति, जल तथा वायु का समूह है :
(क) आकाश
(ख) वर्षा
(ग) महासागर
(घ) मेघ
५७. मेघ है :
(क) कामरूप
(ख) धनरूप
(ग) ज्ञानरूप
(घ) अभीष्टरूप
५८. मेघदूत में है :
(क) संयोग शृंगार
(ख) विप्रलम्भ शृङ्गार
(ग) संभोग तथा विप्रलम्भ शृङ्गार
(घ) इनमें से कोई नहीं
५९. मेघदूत में नायक है :
(क) कुबेर
(ख) यक्ष
(ग) अग्निमित्र
(घ) मेघ
६०. मेघदूत में नायिका है :
(क) उर्वशी
(ख) शकुन्तला
(ग) कुबेरपत्नी
(घ) यक्षपत्नी
६१. यक्ष है :
(क) अनुकूल नायक
(ख) प्रतिकूल नायक
(ग) ललित नायक
(घ) इनमें से कोई नहीं
६२. नायिका के भेद होते हैं :
(क) दो
(ख) तीन
(ग) पाँच
(घ) सात
६३. यक्षपत्नी है :
(क) स्वकीया
(ख) परकीया
(ग) साधारणा
(घ) इनमें से कोई नहीं
६४. शृंगाररस के भेद होते हैं :
(क) दो
(ख) तीन
(ग) चार
(घ) पाँच
६५. विप्रलम्भ शृङ्गार के भेद होते हैं :
(क) दो
(ख) चार
(ग) छः
(घ) सात
६६. मेघदूत में प्रधानतया गुण है :
(क) ओज
(ख) प्रसाद
(ग) माधुर्य
(घ) ओज तथा माधुर्य
६६ (२). मेघदूत में प्रधानतया रीति है :
(क) गौड़ी
(ख) पाञ्चाली
(ग) लाटी
(घ) वैदर्भी
६७. मेघदूत के भाग हैं :
(क) पूर्वमेघ तथा उत्तरमेघ
(ख) मध्य तथा मध्योत्तर
(ग) पूर्वमेघ तथा मध्यमेघ
(घ) उत्तर तथा पूर्वमेघ
६८. कुबेर ने शाप दिया :
(क) युधिष्ठर को
(ख) यक्ष को
(ग) यक्षपत्नी को
(घ) नलकूबर को
६९. अपने अधिकार के पालन में प्रमत्त हुआ :
(क) यक्ष
(ख) नलकूबर
(ग) भीम
(घ) अर्जुन
७०. अलकापुरी से एक साल के लिए निर्वासित हुआ :
(क) नलकूबर
(ख) यमलार्जुन
(ग) भीम
(घ) यक्ष
७१. कैलास पर्वत में अवस्थित यक्षों की पुरी है :
(क) इन्द्रलोक
(ख) अलका
(ग) ब्रह्मलोक
(घ) अयोध्या
७२. कैलास को कहते हैं :
(क) देवभूमि
(ख) स्वर्गभूमि
(ग) मर्त्यभूमि
(घ) राजभूमि
७३. कैलास पर्वत के दक्षिण में है :
(क) मानसरोवर
(ख) पम्पासरोवर
(ग) रामगिरि
(घ) इनमें से कोई नहीं
७४. नर्मदा नदी का उद्गम स्थल है :
(क) विन्ध्य
(ख) मालदा
(ग) आम्रकूट
(घ) चित्रकूट
७५. मालव का पूर्वभाग है :
(क) रेवा
(ख) दशार्ण
(ग) विन्ध्य
(घ) अलका
७६. मालव देश की राजधानी है :
(क) अयोध्या
(ख) कुण्डिनपुरी
(ग) हस्तिनापुर
(घ) उज्जयिनी
७७. उज्जयिनी.....पुरियों में एक है :
(क) ५
(ख) ७
(ग) ८
(घ) ९
७८. रामगिरि के आश्रम में निवास किया :
(क) युधिष्ठिर ने
(ख) भीष्मपितामह ने
(ग) यक्ष ने
(घ) कुबेर ने
७९. आश्रम का जल पवित्र हो गया था :
(क) सीता जी के स्नान करने से
(ख) अनसूया के स्नान करने से
(ग) सावित्री के स्नान करने से
(घ) राधा जी के स्नान करने से
८०. यक्ष को शाप मिला था :
(क) एक वर्ष के लिए
(ख) दो वर्ष के लिए
(ग) पाँच वर्ष के लिए
(घ) सात वर्ष के लिए
८१. इन्द्र के कोषाध्यक्ष हैं :
(क) गन्धर्व
(ख) कुबेर
(ग) यक्ष
(घ) गुह्यक
८२. गुह्यक पर्याय है :
(क) यक्ष का
(ख) कुबेर का
(ग) गन्धर्व का
(घ) किन्नर का
८३. देवताओं के भेद होते हैं :
(क) पाँच
(ख) सात
(ग) आठ
(घ) नव
८४. मंगलाचरण के भेद होते हैं :
(क) एक
(ख) दो
(ग) तीन
(घ) चार
८५. मेघदूत में मंगलाचरण है :
(क) आशीर्वादात्मक
(ख) नमस्कारात्मक
(ग) वस्तुनिर्देशात्मक
(घ) सभी
८६. 'शापः' में प्रत्यय है :
(क) शतृ
(ख) शानच्
(ग) तुमुन्
(घ) घञ्
८७. 'महिमा' में प्रत्यय है :
(क) तुमुन्
(ख) ण्वुल्
(ग) इमनिच्
(घ) घञ्
८८. 'प्रमत्तः' में शब्द है :
(क) मन्
(ख) मद्
(ग) मथ्
(घ) इनमें से कोई
८९. 'अधिकार' में प्रत्यय है :
(क) ल्यप्
(ख) क्त
(ग) घञ्
(घ) शानच्
९०. 'अणिमा' आदि सिद्धियों की संख्या होती है :
(क) पाँच
(ख) सात
(ग) आठ
(घ) नव
९१. काव्य के आरम्भ में........का प्रयोग हुआ है :
(क) 'क' शब्द
(ख) 'ख' शब्द
(ग) 'ल' शब्द
(घ) 'प' शब्द
९२. कोश के अनुसार वायु, ब्रह्मा तथा सूर्य का वाचक है :
(क) 'क' शब्द
(ख) 'ल' शब्द
(ग) 'ष' शब्द
(घ) 'व' शब्द
९३. प्रवास के भेद होते हैं :
(क) दो
(ख) तीन
(ग) पाँच
(घ) सात
९४. ये भेद हैं :
(क) भावी, भवन् और भूत
(ख) भावी, अभावि तथा भूत
(ग) भविष्यत्, भूत तथा वर्तमान
(घ) भूत, भविष्यत् तथा अभावी
९५. मेघदूत..........नामक प्रवास का उल्लेख है :
(क) भावी
(ख) भूत
(ग) भवन्
(घ) इनमें से कोई नहीं
९६. नञ् के अर्थ होते हैं :
(क) दो
(ख) चार
(ग) पाँच
(घ) छः
९७. चित्रकूट पर्वत पर वियोग के आठ मास व्यतीत किया :
(क) कुबेर ने
(ख) इन्द्र ने
(ग) यमलार्जुन ने
(घ) यक्ष ने
९८. शून्य कलाई वाला हो गया :
(क) यक्ष
(ख) किन्नर
(ग) गुह्यक
(घ) कुबेर
९९. ......के पहले दिन यक्ष ने मेघ को देखा :
(क) चैत
(ख) बैशाख
(ग) ज्येष्ठ
(घ) आषाढ़
१००. मेघ.........के सदृश था :
(क) हाथी
(ख) घोड़ा
(ग) बैल
(घ) गाय
१०१. वप्रक्रीडा में.............दन्त प्रहार करने वाले हाथी के सदृश मेघ को देखा :
(क) सीधा
(ख) तिरछा
(ग) पीछे से
(घ) सामने से
१०२. पुरुषों की अपेक्षा सामान्यतः स्त्रियों में बल की अल्पता से उन्हें कहते हैं :
(क) सबला
(ख) अबला
(ग) बलहीन
(घ) इनमें से कोई नहीं
१०३. कुबेर के.............ने मेघ के समक्ष खड़े होकर सोचा :
(क) भृत्य
(ख) मित्र
(ग) भाई
(घ) सहपाठी
१०४. मेघ के दर्शन होने पर सुखी का भी चित्त हो जाता है :
(क) अविकृत
(ख) विकृत
(ग) प्रफुल्लित
(घ) आह्लादित
१०५. यक्ष के कण्ठालिङ्गन का इच्छुक रहती है :
(क) यक्षपत्नी
(ख) रम्भा
(ग) भ्रातृजाया
(घ) यक्षप्रेमिका
१०६. मेघ के दर्शन होने पर विरही यक्ष को......का स्मरण हो आया :
(क) कुबेर
(ख) मित्र
(ग) अपनी प्रियतमा
(घ) भ्रातृजाया
१०७. 'नभसि प्रत्यासन्ने' का अर्थ है :
(क) श्रावण मास के निकट होने पर
(ख) आषाढ़ मास के आने पर
(ग) कार्तिक मास के निकट होने पर
(घ) इनमें से कोई नहीं
१०८. प्रिया की जीवनरक्षा चाहने वाला यक्ष ने पूजन किया :
(क) कुबेर का
(ख) मेघ का
(ग) इन्द्र का
(घ) विष्णु का
१०९. अर्घ्यसामग्री में पुष्प थे :
(क) गुलाब के
(ख) कुटज के
(ग) गेंदा के
(घ) रातरानी के
११०. अर्घ्य में वस्तुओं की संख्या होती है :
(क) दो
(ख) पाँच
(ग) सात
(घ) आठ
१११. यक्ष ने प्रसन्नतापूर्वक प्रणयभरे नयनों से स्वागत किया :
(क) कुबेर का
(ख) मेघ का
(ग) इन्द्र का
(घ) वरुण का
११२. धूम, अग्नि, जल तथा वायु का मिश्रण होता है :
(क) आकाश
(ख) मेघ
(ग) वर्षर्तितु
(घ) वाष्प
११३. जड़-चेतन में भेद नहीं करते हैं :
(क) मदान्ध
(ख) कामार्त
(ग) क्षुधार्त
(घ) धनान्ध
११४. विरह के क्षणों में अपनी प्रिया के फोटो, वस्त्रादि से बातें करते हैं :
(क) क्षुधार्त
(ख) तृषार्त
(ग) कामार्त
(घ) मदान्ध
११५. निधि की रक्षा करने वाले को कहते हैं :
(क) गुह्यक
(ख) गन्धर्व
(ग) पिशाच
(घ) सिद्ध
११६. मेघ प्रधान पुरुष है :
(क) इन्द्र का
(ख) वरुण का
(ग) कुबेर का
(घ) ब्रह्मा का
११७. 'पुष्करावर्तक' कुल में उत्पन्न होने वाले हैं :
(क) मेघ
(ख) झंझावात
(ग) बवंडर
(घ) इनमें से कोई नहीं
११८. पुष्करावर्तक की व्युत्पत्ति है :
(क) पुष्करम् आवर्तयतीति
(ख) पुष्करं विवर्तयतीति
(ग) पुष्करं चालयतीति
(घ) पुष्करं चारयतीति
११९. ज्योतिषशास्त्र में मेघों के नायक विशेष को कहते हैं :
(क) पुष्कर
(ख) अपुष्कर
(ग) अगुआ
(घ) नेता
१२०. प्रलयकाल में संहार करने वाले......पुष्करावर्तक कहते हैं :
(क) झंझावातों को
(ख) बवण्डरों को
(ग) अन्धड़ को
(घ) मेघों को
१२१. अधिकगुण वाले पुरुष से की गई.....निष्फल होने पर भी अच्छी होती है :
(क) याचना
(ख) वार्ता
(ग) कामना
(घ) चाह
१२२. ......से की गई याचना सफल होने पर भी अच्छी नहीं होती :
(क) सगुण पुरुष
(ख) निर्गुण पुरुष
(ग) निर्बल पुरुष
(घ) सबल पुरुष
१२३. 'पुष्करम्' का अर्थ है :
(क) जल
(ख) हवा
(ग) ओला
(घ) धूल
१२४. सन्तापयुक्तों का रक्षक है :
(क) इन्द्र
(ख) वरुण
(ग) मेघ
(घ) झंझावात
१२५. अलकापुरी के उद्यान में मन्दिर है :
(क) विष्णु भगवान् का
(ख) ब्रह्माजी का
(ग) सूर्य का
(घ) शंकर जी का
१२६. धनपति का अर्थ है :
(क) कुबेर
(ख) इन्द्र
(ग) वरुण
(घ) अग्नि
१२७. कुबेर के नगरी का नाम है :
(क) इन्द्रलोक
(ख) ब्रह्मलोक
(ग) कुण्डिनपुरी
(घ) अलका
१२८. बाह्योद्यान में स्थित शिवजी के सिर पर स्थित चन्द्रमा की चाँदनी से प्रकाशित होते रहते हैं :
(क) अलका के महल
(ख) अलका के मार्ग
(ग) अलका के मन्दिर
(घ) इनमें से कोई नहीं
१२९. 'पयोद' कहते हैं :
(क) मेघ को
(ख) ग्वाले को
(ग) दुग्धदाता को
(घ) अन्नदाता को
१३०. पुत्र को जन्म देने के कारण पत्नी को कहते हैं :
(क) पुत्रवती
(ख) कलत्र
(ग) जाया
(घ) पत्नी
१३१. 'पवनपदवीम्' का अर्थ है :
(क) आकाश
(ख) वायु के समान तीव्रगामी
(ग) वायु का चरण
(घ) इनमें से कोई नहीं
१३२. 'पथिकवनिताः' का अर्थ है :
(क) परदेशियों की स्त्रियाँ
(ख) राही की स्त्रियाँ
(ग) मार्ग में गमन करने वालों की पत्नियाँ
(घ) इनमें से कोई नहीं
१३३. जिनकी आजीविका दूसरों के अधीन होती है :
(क) पराधीनवृत्ति
(ख) स्वाधीनवृत्ति
(ग) सर्वाधीनवृत्ति
(घ) इनमें से कोई नहीं
१३४. अवधि के दिन गिनने में लगी हुई होगी :
(क) कुबेर की पत्नी
(ख) इन्द्रपत्नी
(ग) यक्षपत्नी
(घ) ब्रह्माणी
१३५. यात्रा के समय अनुकूल वायु का बहना होता है :
(क) शुभ
(ख) अशुभ
(ग) लाभदायक
(घ) सुखदायक
१३६. .............पक्षी का यात्रा के समय बायीं तरफ होना शुभ होता है :
(क) चातक
(ख) मयूर
(ग) कौआ
(घ) बगुला
१३७. चातक............नक्षत्र में होने वाली वर्षा का जल पीता है :
(क) अश्विनी
(ख) हस्त
(ग) चित्रा
(घ) स्वाती
१३८. सगन्धः का अर्थ होता है :
(क) बन्धु
(ख) सम्बन्ध तथा गर्व
(ग) मित्र
(घ) इष्ट-मित्र
१३९. मेघ के संयोग से गर्भ धारण करती हैं :
(क) मैनाएँ
(ख) बगुलियाँ
(ग) हंसिनियाँ
(घ) इनमें से कोई नहीं
१४०. यात्रा के समय शुभसूचक होता है :
(क) केकानाद
(ख) चातकनाद
(ग) कोयल की कूक
(घ) कौए की आवाज
१४१. .................के उगने से धरती उपजाऊ होती है :
(क) नागरमोथा
(ख) हरीघास
(ग) कुकुरमुत्तों
(घ) सरसों
१४२. राजहंस के चोंच एवं पैर होते हैं :
(क) लाल
(ख) पीला
(ग) हरा
(घ) नीला
१४३. शिवजी के मित्र.............कैलास पर्वत पर निवास करते हैं :
(क) कुबेर
(ख) वरुण
(ग) अग्नि
(घ) धर्मराज
१४४. मानसरोवर का निर्माण किया :
(क) ब्रह्मा ने
(ख) शिवजी ने
(ग) विश्वकर्मा ने
(घ) विष्णु ने
१४५. नीरक्षीरविवेकी होते हैं :
(क) मयूर
(ख) राजहंस
(ग) बगुले
(घ) कौए
१४६. काव्यों में...........का कमलनाल खाना प्रसिद्ध है :
(क) हंसों
(ख) मयूरों
(ग) बगुलों
(घ) कौओं
१४७. प्रेमीजनों का जब चिरकाल के पश्चात् मिलन होता है तो उनके निकल पड़ते हैं :
(क) हर्षाश्रु
(ख) क्रोधाश्रु
(ग) दुःखाश्रु
(घ) प्रेमाश्रु
१४८. मेघ के सहचर होंगे :
(क) मयूर
(ख) बगुले
(ग) राजहंस
(घ) चातक
१४९. 'जलधरसमये मानसं यान्ति हंसाः' ऐसा लिखते हैं :
(क) आचार्य मम्मट
(ख) आचार्य अभिनवगुप्त
(ग) पण्डितराज जगन्नाथ
(घ) कविराज विश्वनाथ
१५०. पत्थरों से टकराने के कारण नदियों का जल हल्का तथा स्वास्थ्यकारी होता है यह कथन है :
(क) वाग्भट
(ख) भट्टलोल्लट
(ग) मम्मट
(घ) कैयट
१५१. दिग्गजों की संख्या होती है :
(क) दो
(ख) पाँच
(ग) सात
(घ) आठ
१५२. गोपाल का वेष धारण करते हैं :
(क) राम
(ख) कृष्ण
(ग) शिव
(घ) ब्रह्मा
१५३. इन्द्रधनुष के रंगों की संख्या होती है :
(क) सात
(ख) नव
(ग) दस
(घ) ग्यारह
१५४. 'आखण्डल' नाम है :
(क) वरुण
(ख) इन्द्र
(ग) अग्नि
(घ) धर्मराज
१५५. अपने वज्र से पर्वतों के पंख काट डाले :
(क) इन्द्र ने
(ख) वरुण ने
(ग) अग्नि ने
(घ) कुबेर ने
१५६. मेघ के अधीन होता है :
(क) कृषिफल
(ख) कदलीफल
(ग) आम्रफल
(घ) श्रमफल
१५७. 'लघुगतिः' का अर्थ है :
(क) छोटी गतिवाला
(ख) थोड़ा गतिवाला
(ग) तीव्रगति वाला
(घ) इनमें से कोई नहीं
१५८. ग्रामीण स्त्रियाँ शृङ्गारिक चेष्टाओं से रहती हैं :
(क) भिज्ञ
(ख) अनभिज्ञ
(ग) सावधान
(घ) असावधान
१५९. वर्षा करने के पश्चात् मेघ हो जाएगा :
(क) हल्का
(ख) भारी
(ग) मजबूत
(घ) कमजोर
१६०. उपकारी के उपकार को नहीं भूलता है :
(क) मित्र
(ख) कुमित्र
(ग) रिश्तेदार
(घ) स्वार्थी
१६१. आम्रकूट पर्वत के आसपास...........के वृक्ष पाये जाते हैं :
(क) लीची
(ख) केला
(ग) जामुन
(घ) आम
१६२. मेघ मूसलाधार वर्षा से.........को बुझा देगा :
(क) दावाग्नि
(ख) वडवाग्नि
(ग) जठराग्नि
(घ) क्षुधाग्नि
१६३. आम्रकूट पर्वत से निकलती है :
(क) गंगा
(ख) यमुना
(ग) नर्मदा
(घ) कोशी
१६४. खाली हुए सभी होते हैं :
(क) भारी
(ख) हल्के
(ग) मोटे
(घ) वजन
१६५. गौरव के लिए होती है :
(क) पूर्णता
(ख) लघुता
(ग) अल्पता
(घ) इनमें से कोई नहीं
१६६. जलयुक्त मेघ को आन्दोलित करने में वायु होगा :
(क) समर्थ
(ख) असमर्थ
(ग) प्रसन्न
(घ) अप्रसन्न
१६७. मेघ की अगवानी करेंगे :
(क) चातक
(ख) हंस
(ग) बगुले
(घ) मयूर
१६८. नयन के प्रान्तभाग की शुक्लता के कारण........को शुक्लापाङ्ग कहते हैं :
(क) मयूर
(ख) कोयल
(ग) हंस
(घ) बगुला
१६९. विदिशा पहुँचकर कामुकता के सम्पूर्ण फल को प्राप्त कर लेगा :
(क) यक्ष
(ख) कुबेर
(ग) इन्द्र
(घ) मेघ
१७०. वेत्रवती नदी के पास है :
(क) विदिशा
(ख) दशार्ण
(ग) कुण्डिननगरी
(घ) निष्धदेश
१७१. पुष्पलावी कहते हैं :
(क) मालिन को
(ख) फूल बेचने वाले को
(ग) फूल चढ़ाने वाले को
(घ) फूल पर पानी देने वाले को
१७२. अलकागामी मेघ के लिए मार्ग होगा :
(क) सीधा
(ख) लम्बा
(ग) टेढ़ा
(घ) कण्टकाकीर्ण
१७३. निर्विन्ध्या नदी के.........में उज्जयिनी विद्यमान है :
(क) पूर्वभाग
(ख) पश्चिमभाग
(ग) उत्तरभाग
(घ) दक्षिणभाग
१७४. उज्जयिनी को............भी कहते हैं :
(क) अलकापुरी
(ख) कुण्डिनपुरी
(ग) निष्धनगरी
(घ) विशाला तथा अवन्तिका
१७५. उज्जयिनी में .........का मन्दिर है :
(क) महाकाल शङ्कर
(ख) विष्णु
(ग) ब्रह्मा
(घ) काली
१७६. मोक्षदायिका पुरी है :
(क) निष्धनगरी
(ख) कुण्डिनपुरी
(ग) अलकापुरी
(घ) अवन्तिका (उज्जयिनी)
१७७. उज्जयिनी...........का एक टुकड़ा है :
(क) अलकापुरी
(ख) कुण्डिनपुरी
(ग) स्वर्ग
(घ) निष्धनगरी
१७८. 'प्रार्थनाचाटुकार' का अर्थ है :
(क) (रति) याचना में मीठे वचन बोलने वाला
(ख) चापलूस
(ग) चुगलखोर
(घ) अवसरवादी
१७९. शिप्रावात का अर्थ है :
(क) शिप्रा की लहर
(ख) शिप्रा का तट
(ग) शिप्रा का तरंग
(घ) शिप्रा नदी का पवन
१८०. उज्जयिनी के तट पर स्थित है :
(क) गंगा नदी
(ख) यमुना नदी
(ग) शिप्रा नदी
(घ) सरयू नदी
१८१. मेघ और मोर की.............मित्रता स्वाभाविक है :
(क) स्वाभाविक
(ख) अस्वाभाविक
(ग) स्वाभाविक तथा अस्वाभाविक
(घ) इनमें से कोई नहीं
१८२. त्रिभुवनगुरु कहलाते हैं :
(क) ब्रह्मा
(ख) विष्णु
(ग) शिव
(घ) इन्द्र
१८३. महाकाल को देखकर मिल जाती है :
(क) मुक्ति
(ख) सम्पत्ति
(ग) लक्ष्मी
(घ) अभीष्ट सिद्धि
१८४. मालवदेश में पायी जाती है :
(क) गंगा नदी
(ख) गन्धवती नदी
(ग) सरयू नदी
(घ) बूढ़ी गंडक
१८५. राजा प्रद्योत की पुत्री थी :
(क) वासवदत्ता
(ख) दमयन्ती
(ग) शकुन्तला
(घ) मालविका
१८६. वत्सनरेश थे :
(क) उदयन
(ख) यौगन्धरायण
(ग) कुबेर
(घ) दुष्यन्त
१८७. प्रद्योत के हाथी का नाम था :
(क) नतगिरि
(ख) नलगिरि
(ग) नडागिरि
(घ) तलगिरि
१८८. राजा उदयन ने अपहरण कर ली :
(क) वासवदत्ता का
(ख) शकुन्तला का
(ग) मालविका का
(घ) दमयन्ती का
१८९. भाव पर आश्रित अङ्गसंचालन कहलाता है :
(क) आङ्गिकचेष्टा
(ख) नृत्त
(ग) आङ्गिकचालन
(घ) नृत्य
१९०. ताल तथा लय पर आश्रित हस्त-पाद के संचालन को कहते हैं :
(क) नृत्त
(ख) नृत्य
(ग) हस्तपादसंचालन
(घ) शरीरनर्तन
१९१. शैवदर्शन के अनुसार पदार्थ के भेद हैं :
(क) दो
(ख) तीन
(ग) पाँच
(घ) सात
१९२. तीन भेद हैं :
(क) पशु, पाश और पति
(ख) पति-पत्नी तथा पाश
(ग) पशु तथा पाश एवं पति
(घ) पशु-पाश तथा योगी
१९३. अविद्यारूपी पाश से बद्ध जीवात्मा को कहते हैं :
(क) पाश
(ख) पशु
(ग) पति
(घ) पाश तथा पशु
१९४. पाश के समान बन्धन करने के कारण अविद्या को कहते हैं :
(क) पति
(ख) पशु
(ग) पाश
(घ) पति तथा पशु
१९५. अविद्या से मुक्त शिव को कहते हैं :
(क) पशु
(ख) पाश
(ग) पशु तथा पति
(घ) पति
१९६. गजासुर को मारा :
(क) विष्णु ने
(ख) ब्रह्मा ने
(ग) इन्द्र ने
(घ) शिव ने
१९७. गजासुर के आर्द्रचर्म को धारण कर ताण्डव नृत्य किया :
(क) ब्रह्मा जी ने
(ख) विष्णु ने
(ग) शंकर जी ने
(घ) इन्द्र ने
१९८. मित्र के कार्य को अङ्गीकार करने वाले विलम्ब नहीं करते हैं :
(क) सज्जन
(ख) दुर्जन
(ग) शत्रु
(घ) सम्बन्धी
१९९. कमलिनी...........की पत्नी के रूप में प्रसिद्ध है :
(क) वरुण
(ख) अरुण
(ग) सूर्य
(घ) अग्नि
२००. ..........आने पर नदी का प्रवाह कम हो जाता है :
(क) शिशिर ऋतु
(ख) वर्षा ऋतु
(ग) ग्रीष्म ऋतु
(घ) शरद ऋतु
२०१. ......की शाखाएँ सदा उसका स्पर्श करती रहती हैं :
(क) बाँस की शाखाएँ
(ख) बेंत की शाखाएँ
(ग) आम
(घ) लीची
२०२. गम्भीरा नदी का जल पीकर देवगिरि की ओर बढ़ेगा.....
(क) यक्ष
(ख) कुबेर
(ग) इन्द्र
(घ) मेघ
२०३. शीतल वायु .............के नीचे बहेगा :
(क) नीचपर्वत
(ख) कैलासपर्वत
(ग) अलकापुरी
(घ) मेघ
२०४. देवगिरि पर निवास करते हैं :
(क) भगवान् विष्णु
(ख) ब्रह्मा जी
(ग) शंकर जी
(घ) भगवान् कार्तिकेय
२०५. मेघ भगवान् कार्तिकेय के ऊपर करेगा :
(क) पुष्पों की वर्षा
(ख) ओलायुक्त वृष्टि
(ग) झंझावातयुक्त वृष्टि
(घ) धारासार वृष्टि
२०६. मयूर के पंख को धारण करती हैं :
(क) लक्ष्मी जी
(ख) सरस्वती जी
(ग) दुर्गा जी
(घ) पार्वती जी
२०७. देवों के सेनापति हैं :
(क) इन्द्र
(ख) वरुण
(ग) कार्तिकेय
(घ) कुबेर
२०८. कृत्तिकाओं ने पाला :
(क) गणेश को
(ख) जयन्त को
(ग) कार्तिकेय को
(घ) इनमें से किसी के नहीं
२०९. राजा रन्तिदेव की कीर्तिरूप...........नदी है :
(क) चर्मण्वती
(ख) घाघरा
(ग) सतलज
(घ) गन्धवती
२१०. गौओं के आलम्भन में चर्मराशि से बहते हुए रक्त से जो नदी निकली उसका नाम है :
(क) चर्मण्वती
(ख) गन्धवती
(ग) शतद्रु
(घ) कर्मनाशा
२११. राजा रन्तिदेव.............में राज्य करते थे :
(क) कुण्डिनपुर
(ख) अयोध्या में
(ग) दशपुर
(घ) निष्धदेश
२१२. चर्मण्वती को आजकल कहते हैं :
(क) बेतवा
(ख) चम्बल
(ग) गन्धवती
(घ) घाघरा
२१३. ............के धनुष का नाम शार्ङ्ग है :
(क) विष्णु
(ख) अर्जुन
(ग) परशुराम
(घ) कृष्ण
२१४. शार्ङ्ग नामक धनुष धारण करने के कारण श्रीकृष्ण कहलाते हैं :
(क) धनुर्धारी
(ख) शार्ङ्गी
(ग) लक्ष्यभेदी
(घ) इनमें से कोई नहीं
२१५. गगनगति कहलाते हैं :
(क) पक्षी
(ख) तारे
(ग) ग्रह
(घ) दिव्य सिद्ध गन्धर्व आदि देवयोनियाँ
२१६. कुन्दपुष्प होता है :
(क) श्वेत
(ख) रक्त
(ग) कृष्ण
(घ) पीत
२१७. 'ब्रह्मावर्त' द्वारा रचित है :
(क) ब्रह्मा
(ख) विष्णु
(ग) महेश
(घ) विश्वकर्मा
२१८. कौरव तथा पाण्डवों का प्रसिद्ध युद्ध हुआ :
(क) पानीपत
(ख) हरियाणा
(ग) दिल्ली
(घ) कुरुक्षेत्र
२१९. अर्जुन के धनुष का नाम है :
(क) शार्ङ्ग
(ख) पिनाक
(ग) गाण्डीव
(घ) इनमें से कोई नहीं
२२०. खाण्डव को जलाने के समय.......द्वारा अर्जुन को प्राप्त हुआ :
(क) अग्नि
(ख) वरुण
(ग) इन्द्र
(घ) कुबेर
२२१. मेघ....नदी के जल को पीकर अपना अन्तःकरण पवित्र कर ले :
(क) गंगा
(ख) यमुना
(ग) सरस्वती
(घ) नर्मदा
२२२. बलराम की पत्नी का नाम है :
(क) रुक्मिणी
(ख) अनसूया
(ग) सावित्री
(घ) रेवती
२२३. जह्नु ऋषि की पुत्री कहलाती हैं :
(क) गंगा
(ख) यमुना
(ग) सरस्वती
(घ) नर्मदा
२२४. हलधर कहलाते हैं :
(क) बलराम
(ख) श्रीकृष्ण
(ग) विष्णु
(घ) ब्रह्मा
२२५. श्रेष्ठजनों की सम्पत्तियाँ आपद्ग्रस्तों की पीड़ा को करती हैं :
(क) दूर
(ख) बढ़ाया
(ग) घटाया
(घ) जले पर नमक का कार्य
२२६. .................में प्रयास करने वाले तिरस्कृत होते हैं :
(क) सफलकर्म
(ख) निष्फल कर्म
(ग) बुरे कर्म
(घ) अच्छे कर्म
२२७. ............ने अपने चरणन्यास को हिमालय में व्यक्त किया :
(क) ब्रह्माजी
(ख) विष्णु भगवान्
(ग) शिवजी
(घ) विश्वकर्मा
२२८. मेघ...............के दावानल को शान्त कर दे :
(क) विन्ध्याचल
(ख) सह्य पर्वत
(ग) हिमालय
(घ) मन्दराचल
२२९. मय दानव द्वारा रचित था :
(क) कुण्डिनपुर
(ख) इन्द्रप्रस्थ
(ग) अलका
(घ) त्रिपुर
२३०. त्रिपुरदहन..............द्वारा किया गया :
(क) विष्णु
(ख) ब्रह्मा
(ग) शिव
(घ) इन्द्र
२३१. क्रौञ्चरन्ध्र को परशुराम के.........का मार्ग कहते हैं :
(क) यश
(ख) अपयश
(ग) वीरता
(घ) धीरता
२३२. ............ने रावण को चन्द्रहास नामक खड्ग दी :
(क) ब्रह्मा जी
(ख) विष्णु भगवान् ने
(ग) शंकर जी ने
(घ) विश्वकर्मा ने
२३३. त्रिदश.............कहलाते हैं :
(क) देवता
(ख) राक्षस
(ग) गगनचारी
(घ) सिद्धगण
२३४. कैलास पर्वत...............है :
(क) धवल
(ख) रक्त
(ग) पीत
(घ) कृष्ण
२३५. बलराम जी का वस्त्र है :
(क) नीला
(ख) पीला
(ग) हरा
(घ) श्याम
२३६. शिवजी का क्रीडास्थल है :
(क) शिवलोक
(ख) इन्द्रलोक
(ग) हिमालय
(घ) कैलास
२३७. कल्पवृक्ष पाया जाता है :
(क) इन्द्रलोक में
(ख) ब्रह्मलोक में
(ग) शिवलोक में
(घ) विष्णुलोक में
२३८. अलकानगरी के भवन............मंजिल हैं :
(क) दो
(ख) पाँच
(ग) सात
(घ) नव
२३९. कैलास के............भाग में अलका बसी है :
(क) ऊर्ध्व
(ख) निम्न
(ग) अधो
(घ) इनमें से किसी भी
२४०. रसकूपामृत को पी गये :
(क) इन्द्र तथा वरुण
(ख) श्रीकृष्ण तथा बलराम
(ग) भीम तथा अर्जुन
(घ) ब्रह्मा तथा विष्णु
२४१. कैलास पर्वत को अपने चरण से दबाया :
(क) इन्द्र ने
(ख) कुबेर ने
(ग) रावण ने
(घ) कुम्भकर्ण ने

उत्तरमाला

१. (क)
२. (ग)
३. (क)
४. (ग)
५. (क)
६. (ख)
७. (ग)
८. (घ)
९. (घ)
१०. (ख)
११. (ग)
१२. (क)
१३. (ख)
१४. (ख)
१५. (ग)
१६. (क)
१७. (ख)
१८. (ख)
१९. (घ)
२०. (क)
२१. (ख)
२२. (घ)
२३. (ग)
२४. (ख)
२५. (ग)
२६. (क)
२७. (घ)
२८. (ख)
२९. (ख)
३०. (क)
३१. (घ)
३२. (ग)
३३. (ख)
३४. (घ)
३५. (क)
३६. (घ)
३७. (क)
३८. (क)
३९. (ख)
४०. (क)
४१. (ग)
४२. (क)
४३. (क)
४४. (ख)
४५. (क)
४६. (क)
४७. (घ)
४८. (क)
४९. (क)
५०. (ग)
५१. (ग)
५२. (ख)
५३. (क)
५४. (ग)
५५. (घ)
५६. (क)
५७. (ख)
५८. (ख)
५९. (घ)
६०. (क)
६१. (ख)
६२. (क)
६३. (क)
६४. (ख)
६५. (ख)
६६. (घ)
६७. (क)
६८. (ख)
६९. (क)
७०. (घ)
७१. (ख)
७२. (क)
७३. (क)
७४. (ग)
७५. (ख)
७६. (घ)
७७. (ख)
७८. (ग)
७९. (क)
८०. (क)
८१. (ख)
८२. (क)
८३. (ग)
८४. (ग)
८५. (ग)
८६. (घ)
८७. (ग)
८८. (ख)
८९. (ग)
९०. (ग)
९१. (क)
९२. (क)
९३. (ख)
९४. (क)
९५. (ग)
९६. (घ)
९७. (घ)
९८. (क)
९९. (घ)
१००. (क)
१०१. (ख)
१०२. (ख)
१०३. (क)
१०४. (ख)
१०५. (क)
१०६. (ग)
१०७. (क)
१०८. (ख)
१०९. (ख)
११०. (घ)
१११. (ख)
११२. (ख)
११३. (ख)
११४. (ग)
११५. (क)
११६. (क)
११७. (क)
११८. (क)
११९. (क)
१२०. (घ)
१२१. (क)
१२२. (ख)
१२३. (क)
१२४. (ग)
१२५. (घ)
१२६. (क)
१२७. (घ)
१२८. (क)
१२९. (क)
१३०. (ग)
१३१. (क)
१३२. (क)
१३३. (क)
१३४. (ग)
१३५. (क)
१३६. (क)
१३७. (घ)
१३८. (ख)
१३९. (ख)
१४०. (ख)
१४१. (ग)
१४२. (क)
१४३. (क)
१४४. (क)
१४५. (ख)
१४६. (क)
१४७. (घ)
१४८. (ग)
१४९. (घ)
१५०. (क)
१५१. (घ)
१५२. (ख)
१५३. (क)
१५४. (ख)
१५५. (क)
१५६. (क)
१५७. (ग)
१५८. (ख)
१५९. (क)
१६०. (क)
१६१. (घ)
१६२. (क)
१६३. (ग)
१६४. (ख)
१६५. (क)
१६६. (ख)
१६७. (घ)
१६८. (क)
१६९. (घ)
१७०. (क)
१७१. (क)
१७२. (ग)
१७३. (क)
१७४. (घ)
१७५. (क)
१७६. (घ)
१७७. (ग)
१७८. (क)
१७९. (घ)
१८०. (ग)
१८१. (क)
१८२. (ग)
१८३. (क)
१८४. (ख)
१८५. (क)
१८६. (क)
१८७. (ख)
१८८. (क)
१८९. (घ)
१९०. (क)
१९१. (ख)
१९२. (क)
१९३. (ख)
१९४. (ग)
१९५. (घ)
१९६. (घ)
१९७. (ग)
१९८. (क)
१९९. (ग)
२००. (ग)
२०१. (ख)
२०२. (घ)
२०३. (घ)
२०४. (घ)
२०५. (क)
२०६. (घ)
२०७. (ग)
२०८. (ग)
२०९. (क)
२१०. (क)
२११. (ग)
२१२. (ख)
२१३. (घ)
२१४. (ख)
२१५. (घ)
२१६. (क)
२१७. (क)
२१८. (घ)
२१९. (ग)
२२०. (क)
२२१. (ग)
२२२. (घ)
२२३. (क)
२२४. (क)
२२५. (क)
२२६. (ख)
२२७. (ग)
२२८. (ग)
२२९. (घ)
२३०. (ग)
२३१. (क)
२३२. (ग)
२३३. (क)
२३४. (क)
२३५. (क)
२३६. (घ)
२३७. (क)
२३८. (ग)
२३९. (क)
२४०. (घ)
२४१. (ग)

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