संस्कृत व्याकरण के समस्त 27 वर्गों (अकारान्त से लेकर हकारान्त, सर्वनाम एवं संख्यावाची) के पुल्लिंग, स्त्रीलिंग एवं नपुंसकलिंग शब्दों के सातों विभक्तियों व तीनों वचनों में प्रामाणिक रूप, सुप् प्रत्यय नियम एवं परीक्षा-उपयोगी अभ्यास प्रश्नोत्तरी।
📜 शब्दरूप : स्वरूप, सुप्-प्रत्यय एवं व्याकरणिक महत्ता
संस्कृत भाषा में पदों के निर्माण के लिए प्रातिपदिक (मूल शब्द) में 21 'सुप्' प्रत्यय (सु, औ, जस्, अम्, औट्, शस् आदि) जोड़े जाते हैं। महर्षि पाणिनि के अनुसार "सुप्तिङन्तं पदम्" अर्थात् सुबन्त (शब्दरूप) और तिङन्त (धातुरूप) ही 'पद' कहलाते हैं और संस्कृत में बिना पद बनाए किसी शब्द का वाक्य में प्रयोग नहीं होता:
शब्दों के अन्तिम वर्ण के आधार पर इन्हें दो मुख्य भागों में बाँटा जाता है — (1) अजन्त (स्वरान्त): जिनके अन्त में स्वर (अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ) हों, और (2) हलन्त (व्यञ्जनान्त): जिनके अन्त में व्यञ्जन (च, ज, त, द, ध, न, प, भ, र, व, श, ष, स, ह) हों। इसके अतिरिक्त सर्वनाम एवं संख्यावाची शब्दों के रूप विशिष्ट नियमों से चलते हैं।
संस्कृत शब्दरूप : सम्पूर्ण 27 वर्ग कोश
पुल्लिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसकलिंग — राम, बालक, नर, देव, वृक्ष, फल, पुष्प, पुस्तक, ज्ञान, वन आदि के रूप।
स्त्रीलिंग, पुल्लिंग — लता, रमा, सीता, बालिका, विद्या, निशा, गङ्गा, हाहा (पुल्लिंग) आदि के रूप।
पुल्लिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसकलिंग — हरि, मुनि, कवि, मति, बुद्धि, धृति, वारि, दधि, अक्षि आदि के रूप।
स्त्रीलिंग, पुल्लिंग — नदी, जननी, गौरी, लक्ष्मी, श्री, सुधी (पुल्लिंग), सेनानी (पुल्लिंग) आदि के रूप।
पुल्लिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसकलिंग — गुरु, भानु, साधु, शिशु, धेनु, रज्जु, तनु, मधु, वस्तु, जानु आदि के रूप।
स्त्रीलिंग, पुल्लिंग — वधू, चमू, भू, श्वश्रू, खलपू (पुल्लिंग), प्रतिभू (पुल्लिंग) आदि के रूप।
पुल्लिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसकलिंग — पितृ, भ्रातृ, जामातृ, मातृ, दुहितृ, ननान्दृ, दातृ, कर्तृ आदि के रूप।
पुल्लिंग, स्त्रीलिंग — से (पुल्लिंग), प्रधे (स्त्रीलिंग) आदि एकारान्त शब्दों के सम्पूर्ण रूप।
पुल्लिंग, स्त्रीलिंग — रै (धन/सम्पत्ति - पुल्लिंग एवं स्त्रीलिंग दोनों में) आदि के रूप।
पुल्लिंग, स्त्रीलिंग — गो (बैल - पुल्लिंग / गाय - स्त्रीलिंग), द्यो आदि ओकारान्त शब्दों के रूप।
पुल्लिंग, स्त्रीलिंग — ग्लौ (चन्द्रमा - पुल्लिंग), नौ (नाव - स्त्रीलिंग), द्यौ (स्वर्ग) आदि के रूप।
स्त्रीलिंग, पुल्लिंग, नपुंसकलिंग — वाच् (वाणी), प्राच् (पूर्व दिशा), प्रत्यच्, तिर्यच् आदि हलन्त रूप।
पुल्लिंग, स्त्रीलिंग — भिषज् (वैद्य), ऋत्विज् (पुरोहित), वणिज् (व्यापारी), सम्राज्, स्रज् (माला) आदि के रूप।
पुल्लिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसकलिंग — मरुत्, भवत्, श्रीमत्, भगवत्, सरित्, विद्युत्, जगत्, वृहत् आदि के रूप।
पुल्लिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसकलिंग — सुहृद् (मित्र), परिषद्, आपद्, सम्पद्, दृषद्, कुमुद् आदि के रूप।
स्त्रीलिंग, पुल्लिंग — युध् (युद्ध), क्षुध् (भूख), समिध् (हवन सामग्री), बुध् आदि धकारान्त शब्दों के रूप।
पुल्लिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसकलिंग — राजन्, आत्मन्, मघवन्, गुणिन्, दण्डिन्, सीमन्, नामन्, कर्मन्, जन्मन् आदि।
पुल्लिंग, स्त्रीलिंग — गुप् (रक्षक), गोप्, विष्टप् (संसार), पा (रक्षा करने वाला) आदि पकारान्त हलन्त रूप।
स्त्रीलिंग, पुल्लिंग — ककुभ् (दिशा), त्रिष्टुभ् (छन्द), अनुष्टुभ्, दृभ् आदि भकारान्त शब्दों के रूप।
स्त्रीलिंग, पुल्लिंग, नपुंसकलिंग — गिर् (वाणी), पुर् (नगरी), स्वर् (स्वर्ग), दुर्, पुनर्, वार् (जल) आदि के रूप।
स्त्रीलिंग, पुल्लिंग — दिव् (द्यु - आकाश/स्वर्ग), चतुर्व् आदि वकारान्त हलन्त शब्दों के रूप।
स्त्रीलिंग, पुल्लिंग — दृश् (दृष्टि), विश् (प्रजा/वैश्य), दिश् (दिशा), तादृश्, यादृश् आदि शकारान्त रूप।
स्त्रीलिंग, पुल्लिंग — प्रावृष् (वर्षा ऋतु), द्विष् (शत्रु), सजुष्, पिपठिष् आदि षकारान्त शब्दों के रूप।
पुल्लिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसकलिंग — चन्द्रमस्, वेधस्, मनस्, पयस्, चेतस्, यशस्, हविस्, धनुस्, चक्षुस् आदि।
स्त्रीलिंग, पुल्लिंग — उपानह् (जूता), मधुलिह् (भौंरा), लिह्, गोदुह् (ग्वाला), अनडुह् (बैल) आदि के रूप।
पुल्लिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसकलिंग — अस्मद् (मैं), युष्मद् (तुम), तद्, यद्, एतद्, किम्, सर्व, इदम्, अदस् आदि (सम्बोधन रहित)।
पुल्लिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसकलिंग — एक (नित्य एकवचन), द्वि (द्विवचन), त्रि, चतुर, पञ्चन्, षष्, अष्टन् से शतं तक के रूप।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नोत्तर (FAQs)
शब्दरूप किसे कहते हैं और सुप् प्रत्यय कितने होते हैं?
संस्कृत व्याकरण में किसी प्रातिपदिक (संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण) में कारक और वचन का बोध कराने के लिए जो प्रत्यय जोड़े जाते हैं, उन्हें सुप् प्रत्यय कहते हैं। इनकी कुल संख्या 21 होती है (7 विभक्तियाँ × 3 वचन = 21)।
अजन्त और हलन्त शब्दरूप में क्या मूलभूत अंतर है?
अजन्त (अच् + अन्त): जिन शब्दों का अंतिम वर्ण स्वर (अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ आदि) हो, उन्हें अजन्त कहते हैं (जैसे — राम, लता, हरि)।
हलन्त (हल् + अन्त): जिन शब्दों का अंतिम वर्ण व्यंजन (त्, न्, स्, च्, ज् आदि) हो, उन्हें हलन्त कहते हैं (जैसे — मरुत्, राजन्, मनस्)।
सर्वनाम शब्दों में कौन सी विभक्ति नहीं होती है?
सर्वनाम शब्दों (जैसे — अस्मद्, युष्मद्, तद्, सर्व आदि) में सम्बोधन विभक्ति नहीं होती है। इनके रूप केवल प्रथमा से सप्तमी विभक्ति तक ही चलते हैं।
संख्यावाची शब्दों में वचन और लिंग के क्या नियम हैं?
1. 'एक' शब्द के रूप केवल एकवचन में (तीनों लिंगों में) चलते हैं।
2. 'द्वि' शब्द के रूप केवल द्विवचन में चलते हैं।
3. 'त्रि' से लेकर 'अष्टादश' (18) तक के रूप केवल बहुवचन में चलते हैं।
4. 'एकोनविंशति' (19) से 'नवनवति' (99) तक के शब्द नित्य स्त्रीलिंग एकवचन में होते हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं (TGT, PGT, NET) में शब्दरूप याद करने की सबसे सरल ट्रिक क्या है?
शब्दरूपों को 'आड़ा' (प्रथमा से सप्तमी एकवचन) याद करना सबसे सरल होता है। उदाहरण के लिए राम के रूप पहले एकवचन (रामः, रामम्, रामेण, रामाय, रामात्, रामस्य, रामे, हे राम!) याद करें, फिर द्विवचन और बहुवचन। इससे विभक्तियों के अंत वाले प्रत्ययों की लय आसानी से याद हो जाती है।
त्वरित शब्दरूप दर्शिका (अभ्यास टेबल्स)
विस्तृत शब्दरूप सारणियाँ
आकारान्त पुल्लिंग - गोपा शब्द
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | गोपा | गोपौ | गोपाः |
| द्वितिया | गोपाम् | गोपौ | गोपः |
| तृतीया | गोपा | गोपाभ्याम् | गोपाभिः |
| चतुर्थी | गोपै | गोपाभ्याम् | गोपाभ्यः |
| पञ्चमी | गोपः | गोपाभ्याम् | गोपाभ्यः |
| षष्ठी | गोपः | गोपोः | गोपाम् |
| सप्तमी | गोपि | गोपोः | गोपासु |
| सम्बोधन | हे गोपा | हे गोपौ | हे गोपाः |
👉 इसी प्रकार विश्वपा, धूम्रपा, सोमपा, बलदा आदि के रूप भी चलेंगे।
आकारान्त स्त्रीलिंग - विद्या शब्द
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | विद्या | विद्ये | विद्याः |
| द्वितिया | विद्याम् | विद्ये | विद्याः |
| तृतीया | विद्यया | विद्याभ्याम् | विद्याभिः |
| चतुर्थी | विद्यायै | विद्याभ्याम् | विद्याभ्यः |
| पञ्चमी | विद्यायाः | विद्याभ्याम् | विद्याभ्यः |
| षष्ठी | विद्यायाः | विद्ययोः | विद्यानाम् |
| सप्तमी | विद्यायाम् | विद्ययोः | विद्यासु |
| सम्बोधन | हे विद्ये | हे विद्ये | हे विद्याः |
इकारान्त पुल्लिंग - हरि शब्द
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | हरिः | हरी | हरयः |
| द्वितिया | हरिम् | हरी | हरीन् |
| तृतीया | हरिणा | हरिभ्याम् | हरीभिः |
| चतुर्थी | हरये | हरिभ्याम् | हरीभ्यः |
| पञ्चमी | हरेः | हरीभ्याम् | हरीभ्यः |
| षष्ठी | हरेः | हरयोः | हरीनाम् |
| सप्तमी | हरौ | हरयोः | हरीषु |
| सम्बोधन | हे हरे | हे हरी | हे हरयः |
👉 हरिः की तरह कविः, अरिः, रविः, गिरिः, कपिः, निधिः, विधिः, मारीचिः, पाणिः आदि के रूप भी चलेंगे।
इकारान्त स्त्रीलिंग - मति शब्द
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | मतिः | मती | मतयः |
| द्वितिया | मतिम् | मती | मतीन् |
| तृतीया | मत्या | मतीभ्याम् | मतिभिः |
| चतुर्थी | मत्ये | मतीभ्याम् | मतीभ्यः |
| पञ्चमी | मत्याः | मतीभ्याम् | मतीभ्यः |
| षष्ठी | मत्याः | मत्योः | मतीनाम् |
| सप्तमी | मत्याम् | मत्योः | मतिषु |
| सम्बोधन | हे मते | हे मती | हे मतयः |
इकारान्त नपुंसकलिंग - वारि शब्द
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | वारि | वारिणि | वारीणि |
| द्वितिया | वारि | वारिणि | वारीणि |
| तृतीया | वारिणा | वारिभ्याम् | वारिभिः |
| चतुर्थी | वारिणे | वारिभ्याम् | वारिभ्यः |
| पञ्चमी | वारिणः | वारिभ्याम् | वारिभ्यः |
| षष्ठी | वारिणः | वारिणोः | वारीणाम् |
| सप्तमी | वारिणि | वारिणोः | वारिषु |
| सम्बोधन | हे वारि | हे वारिणि | हे वारीणि |
दधि (नपुंसकलिंग)
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | दधि | दधिनी | दधीनि |
| द्वितीया | दधि | दधिनी | दधीनि |
| तृतीया | दध्ना | दधिभ्याम् | दधिभिः |
| चतुर्थी | दध्ने | दधिभ्याम् | दधिभ्यः |
| पंचमी | दध्नः | दधिभ्याम् | दधिभ्यः |
| षष्ठी | दध्नः | दध्नोः | दध्नाम् |
| सप्तमी | दध्नि | दध्नोः | दधिषु |
| सम्बोधन | हे दधि | हे दधिनी | हे दधीनि |
अक्षि (नपुंसकलिंग)
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | अक्षि | अक्षिणी | अक्षीणि |
| द्वितीया | अक्षि | अक्षिणी | अक्षीणि |
| तृतीया | अक्ष्णा | अक्षिभ्याम् | अक्षिभिः |
| चतुर्थी | अक्ष्णे | अक्षिभ्याम् | अक्षिभ्यः |
| पंचमी | अक्ष्णः | अक्षिभ्याम् | अक्षिभ्यः |
| षष्ठी | अक्ष्णः | अक्ष्णोः | अक्ष्णाम् |
| सप्तमी | अक्ष्णि | अक्ष्णोः | अक्षिषु |
| सम्बोधन | हे अक्षि | हे अक्षिणी | हे अक्षीणि |
ईकारान्त पुल्लिंग - प्रधी शब्द
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | प्रधीः | प्रधी | प्रधियः |
| द्वितिया | प्रधीम् | प्रधी | प्रधीन् |
| तृतीया | प्रध्या | प्रधीभ्याम् | प्रधीभिः |
| चतुर्थी | प्रधये | प्रधीभ्याम् | प्रधीभ्यः |
| पञ्चमी | प्रधिः | प्रधीभ्याम् | प्रधीभ्यः |
| षष्ठी | प्रधेः | प्रध्योः | प्रधीनाम् |
| सप्तमी | प्रधौ | प्रध्योः | प्रधिषु |
| सम्बोधन | हे प्रधे | हे प्रधी | हे प्रधियः |
👉 सुधी, सखी आदि के रूप भी इसी प्रकार होंगे।
ईकारान्त पुल्लिंग - सखी (मित्र चाहने वाला)
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | सखा | सखायौ | सखायः |
| द्वितिया | सखायम् | सखायौ | सख्यः |
| तृतीया | सख्या | सखीभ्याम् | सखीभिः |
| चतुर्थी | सख्ये | सखीभ्याम् | सखीभ्यः |
| पञ्चमी | सख्युः | सखीभ्याम् | सखीभ्यः |
| षष्ठी | सख्युः | सख्योः | सख्याम् |
| सप्तमी | सख्यि | सख्योः | सखीषु |
| सम्बोधन | हे सखा | हे सखायौ | हे सखायः |
नदी (स्त्रीलिंग)
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | नदी | नद्यौ | नद्यः |
| द्वितीया | नदीम् | नद्यौ | नदीः |
| तृतीया | नद्या | नदीभ्याम् | नदीभिः |
| चतुर्थी | नद्यै | नदीभ्याम् | नदीभ्यः |
| पंचमी | नद्याः | नदीभ्याम् | नदीभ्यः |
| षष्ठी | नद्याः | नद्योः | नदीनाम् |
| सप्तमी | नद्याम् | नद्योः | नदीषु |
| सम्बोधन | हे नदि | हे नद्यौ | हे नद्यः |
लक्ष्मी (स्त्रीलिंग)
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | लक्ष्मीः | लक्ष्म्यौ | लक्ष्म्यः |
| द्वितीया | लक्ष्मीम् | लक्ष्म्यौ | लक्ष्मीः |
| तृतीया | लक्ष्म्या | लक्ष्मीभ्याम् | लक्ष्मीभिः |
| चतुर्थी | लक्ष्म्यै | लक्ष्मीभ्याम् | लक्ष्मीभ्यः |
| पंचमी | लक्ष्म्याः | लक्ष्मीभ्याम् | लक्ष्मीभ्यः |
| षष्ठी | लक्ष्म्याः | लक्ष्म्योः | लक्ष्मीनाम् |
| सप्तमी | लक्ष्म्याम् | लक्ष्म्योः | लक्ष्मीषु |
| सम्बोधन | हे लक्ष्मि | हे लक्ष्म्यौ | हे लक्ष्म्यः |
ईकारान्त नपुंसकलिंग (उदाहरण: धामनि-शब्द)
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | धामनि | धामिनी | धामीनि |
| द्वितीया | धामनि | धामिनी | धामीनि |
| तृतीया | धाम्ना | धामिभ्याम् | धामिभिः |
| चतुर्थी | धाम्ने | धामिभ्याम् | धामिभ्यः |
| पंचमी | धाम्नः | धामिभ्याम् | धामिभ्यः |
| षष्ठी | धाम्नः | धाम्नोः | धाम्नाम् |
| सप्तमी | धाम्नि | धाम्नोः | धामिषु |
| सम्बोधन | हे धामनि | हे धामिनी | हे धामीनि |
उकारान्त पुल्लिंग - गुरु शब्द
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | गुरुः | गुरू | गुरवः |
| द्वितिया | गुरुम् | गुरू | गुरून् |
| तृतीया | गुरुणा | गुरुभ्याम् | गुरुभिः |
| चतुर्थी | गुरवे | गुरुभ्याम् | गुरुभ्यः |
| पञ्चमी | गुरोः | गुरुभ्याम् | गुरुभ्यः |
| षष्ठी | गुरोः | गुर्वोः | गुरूणाम् |
| सप्तमी | गुरौ | गुर्वोः | गुरुषु |
| सम्बोधन | हे गुरो | हे गुरू | हे गुरवः |
👉 गुरु की तरह ही भानु, शिशु, वायु, पशु, विष्णु, रिपु, सिन्धु, शत्रु, मृत्यु, तरु, बिन्दु, बाहु, पांशु (धूलि), इषु (बाण), विधु (चन्द्रमा), मृदु (कोमल), प्रभु, साधु, उरु (जाँघ), वेणु (बाँस) के भी रूप चलेंगे।
उकारान्त स्त्रीलिंग - धेनुः शब्द
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | धेनुः | धेनू | धेनवः |
| द्वितिया | धेनुम् | धेनू | धेनूः |
| तृतीया | धेन्वा | धेनुभ्याम् | धेनुभिः |
| चतुर्थी | धेन्वै / धेनवे | धेनुभ्याम् | धेनुभ्यः |
| पञ्चमी | धेन्वाः / धेनोः | धेनुभ्याम् | धेनुभ्यः |
| षष्ठी | धेन्वाः / धेनोः | धेन्वोः | धेनूनाम् |
| सप्तमी | धेन्वाम् / धेनौ | धेन्वोः | धेनुषु |
| सम्बोधन | हे धेनो | हे धेनू | हे धेनवः |
उकारान्त नपुंसकलिंग - वस्तु शब्द
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | वस्तु | वस्तूनी | वस्तूनि |
| द्वितिया | वस्तु | वस्तूनी | वस्तूनि |
| तृतीया | वस्तुना | वस्तुभ्याम् | वस्तुभिः |
| चतुर्थी | वस्तुने | वस्तुभ्याम् | वस्तुभ्यः |
| पञ्चमी | वस्तुनः | वस्तुभ्याम् | वस्तुभ्यः |
| षष्ठी | वस्तुनः | वस्त्वोः | वस्तूनाम् |
| सप्तमी | वस्तुनि | वस्त्वोः | वस्तुषु |
| सम्बोधन | हे वस्तु | हे वस्तूनी | हे वस्तूनि |
ऊकारान्त पुल्लिंग - स्वयंभू शब्द
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | स्वयंभूः | स्वयंभुवौ | स्वयंभुवः |
| द्वितिया | स्वयंभुवम् | स्वयंभुवौ | स्वयंभुवः |
| तृतीया | स्वयंभुवा | स्वयंभूभ्याम् | स्वयंभूभिः |
| चतुर्थी | स्वयंभुवे | स्वयंभूभ्याम् | स्वयंभूभ्यः |
| पञ्चमी | स्वयंभुवः | स्वयंभूभ्याम् | स्वयंभूभ्यः |
| षष्ठी | स्वयंभुवः | स्वयंभुवोः | स्वयंभुवाम् |
| सप्तमी | स्वयंभुवि | स्वयंभुवोः | स्वयंभूषु |
| सम्बोधन | हे स्वयंभूः | हे स्वयंभुवौ | हे स्वयंभुवः |
स्वयंभू की तरह: प्रतिभू, खलपू इत्यादि।
ऊकारान्त स्त्रीलिंग - वधू शब्द
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | वधूः | वध्वौ | वध्वः |
| द्वितिया | वधूम् | वध्वौ | वधूः |
| तृतीया | वध्वा | वधूभ्याम् | वधूभिः |
| चतुर्थी | वध्वै | वधूभ्याम् | वधूभ्यः |
| पञ्चमी | वध्वाः | वधूभ्याम् | वधूभ्यः |
| षष्ठी | वध्वाः | वध्वोः | वधूनाम् |
| सप्तमी | वध्वाम् | वध्वोः | वधूसु |
| सम्बोधन | हे वधु | हे वध्वौ | हे वध्वः |
वधू की तरह: तनू, चमू, श्वश्रू इत्यादि।
ऋकारान्त पुल्लिंग - पितृ शब्द
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | पिता | पितरौ | पितरः |
| द्वितिया | पितरम् | पितरौ | पितॄन् |
| तृतीया | पित्रा | पितृभ्याम् | पितृभिः |
| चतुर्थी | पित्रे | पितृभ्याम् | पितृभ्यः |
| पञ्चमी | पितुः | पितृभ्याम् | पितृभ्यः |
| षष्ठी | पितुः | पित्रोः | पितॄणाम् |
| सप्तमी | पितरि | पित्रोः | पितृषु |
| सम्बोधन | हे पितः | हे पितरौ | हे पितरः |
ऋकारान्त स्त्रीलिंग - मातृ शब्द
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | माता | मातरौ | मातरः |
| द्वितिया | मातरम् | मातरौ | मातॄः |
| तृतीया | मात्रा | मातृभ्याम् | मातृभिः |
| चतुर्थी | मात्रे | मातृभ्याम् | मातृभ्यः |
| पञ्चमी | मातुः | मातृभ्याम् | मातृभ्यः |
| षष्ठी | मातुः | मात्रोः | मातॄणाम् |
| सप्तमी | मातरि | मात्रोः | मातृषु |
| सम्बोधन | हे मातः | हे मातरौ | हे मातरः |
ऋकारान्त नपुंसकलिंग - जत्रु शब्द
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | जत्रु | जत्रुणी | जत्रूणि |
| द्वितिया | जत्रु | जत्रुणी | जत्रूणि |
| तृतीया | जत्रुणा | जत्रुभ्याम् | जत्रुभिः |
| चतुर्थी | जत्रुणे | जत्रुभ्याम् | जत्रुभ्यः |
| पञ्चमी | जत्रुणः | जत्रुभ्याम् | जत्रुभ्यः |
| षष्ठी | जत्रुणः | जत्रुणोः | जत्रूणाम् |
| सप्तमी | जत्रुणि | जत्रुणोः | जत्रुषु |
| सम्बोधन | हे जत्रु | हे जत्रुणी | हे जत्रूणि |
नकारान्त पुल्लिंग - पाणिन् शब्द
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | पाणिः | पाणिनौ | पाणिनः |
| द्वितिया | पाणिनम् | पाणिनौ | पाणिनः |
| तृतीया | पाणिना | पाणिभ्याम् | पाणिभिः |
| चतुर्थी | पाणिने | पाणिभ्याम् | पाणिभ्यः |
| पञ्चमी | पाणिनः | पाणिभ्याम् | पाणिभ्यः |
| षष्ठी | पाणिनः | पाणिनोः | पाणिनाम् |
| सप्तमी | पाणिनि | पाणिनोः | पाणिषु |
| सम्बोधन | हे पाणिन् | हे पाणिनौ | हे पाणिनः |
स्त्रीलिंग - अतिविदुषी शब्द
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | अतिविदुषी | अतिविदुष्यौ | अतिविदुष्यः |
| द्वितिया | अतिविदुषीम् | अतिविदुष्यौ | अतिविदुषीः |
| तृतीया | अतिविदुष्या | अतिविदुषीभ्याम् | अतिविदुषीभिः |
| चतुर्थी | अतिविदुष्यै | अतिविदुषीभ्याम् | अतिविदुषीभ्यः |
| पञ्चमी | अतिविदुष्याः | अतिविदुषीभ्याम् | अतिविदुषीभ्यः |
| षष्ठी | अतिविदुष्याः | अतिविदुष्योः | अतिविदुषीणाम् |
| सप्तमी | अतिविदुष्याम् | अतिविदुष्योः | अतिविदुषीषु |
| सम्बोधन | हे अतिविदुषि | हे अतिविदुष्यौ | हे अतिविदुष्यः |
नपुंसकलिंग - चिदस्मिन् शब्द
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | चिदस्मिन् | चिदस्मिनी | चिदस्मीनि |
| द्वितिया | चिदस्मिन् | चिदस्मिनी | चिदस्मीनि |
| तृतीया | चिदस्मिना | चिदस्मिभ्याम् | चिदस्मिभिः |
| चतुर्थी | चिदस्मिने | चिदस्मिभ्याम् | चिदस्मिभ्यः |
| पञ्चमी | चिदस्मिनः | चिदस्मिभ्याम् | चिदस्मिभ्यः |
| षष्ठी | चिदस्मिनः | चिदस्मिनोः | चिदस्मीनाम् |
| सप्तमी | चिदस्मिनि | चिदस्मिनोः | चिदस्मिषु |
| सम्बोधन | हे चिदस्मिन् | हे चिदस्मिनी | हे चिदस्मीनि |
तकारान्त पुल्लिंग - श्रीमत् शब्द
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | श्रीमान् | श्रीमन्तौ | श्रीमन्तः |
| द्वितिया | श्रीमन्तम् | श्रीमन्तौ | श्रीमतः |
| तृतीया | श्रीमता | श्रीमद्भ्याम् | श्रीमद्भिः |
| चतुर्थी | श्रीमते | श्रीमद्भ्याम् | श्रीमद्भ्यः |
| पञ्चमी | श्रीमतः | श्रीमद्भ्याम् | श्रीमद्भ्यः |
| षष्ठी | श्रीमतः | श्रीमतोः | श्रीमन्ताम् |
| सप्तमी | श्रीमति | श्रीमतोः | श्रीमत्सु |
| सम्बोधन | हे श्रीमान् | हे श्रीमन्तौ | हे श्रीमन्तः |
तकारान्त स्त्रीलिंग - सरित् शब्द
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | सरित् | सरितौ | सरितः |
| द्वितिया | सरितम् | सरितौ | सरितः |
| तृतीया | सरिता | सरिद्भ्याम् | सरिद्भिः |
| चतुर्थी | सरिते | सरिद्भ्याम् | सरिद्भ्यः |
| पञ्चमी | सरितः | सरिद्भ्याम् | सरिद्भ्यः |
| षष्ठी | सरितः | सरितोः | सरिताम् |
| सप्तमी | सरिति | सरितोः | सरित्सु |
| सम्बोधन | हे सरित् | हे सरितौ | हे सरितः |
तकारान्त नपुंसकलिंग - जगत् शब्द
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | जगत् | जगती | जगन्ति |
| द्वितिया | जगत् | जगती | जगन्ति |
| तृतीया | जगता | जगद्भ्याम् | जगद्भिः |
| चतुर्थी | जगते | जगद्भ्याम् | जगद्भ्यः |
| पञ्चमी | जगतः | जगद्भ्याम् | जगद्भ्यः |
| षष्ठी | जगतः | जगतोः | जगताम् |
| सप्तमी | जगति | जगतोः | जगत्सु |
| सम्बोधन | हे जगत् | हे जगती | हे जगन्ति |
बहुत सराहनीय कार्य है परन्तु बहुवचन को देखने में समस्या हो रही है
जवाब देंहटाएंयदि बहुबचन देखने में समस्या हो रही हो तो आप अपने क्रोम ब्राउजर के सेटिंग में जाकर डेक्सटॉप मोड कर लें तो मोबाइल में यह समस्या नहीं रहेगी ।
जवाब देंहटाएं