प्रतिशोध
महाभारत की घटनाओं, प्रतिज्ञाओं, संघर्षों, नीति-अनीति और प्रतिशोध की अविरल गाथा पर आधारित 21 अध्यायों का प्रामाणिक, विस्तृत एवं साहित्यिक अध्ययन।
📑 संकलित अध्यायों की अनुक्रमणिका
21 अध्याय उपलब्धअम्बा के पुनर्जन्म, शिखण्डी के रूप में प्राकट्य, पूर्वजन्म के प्रतिशोध की ज्वाला एवं भीष्म-वध की पूर्व-पीठिका।
राजकुमारी अम्बा का अपने मातामह राजर्षि होत्रवाहन से मिलन, दुःख-निवेदन एवं न्याय हेतु परशुराम की शरण में जाने का प्रसंग।
भृगुवंशी महर्षि ऋचीक, सत्यवती व राजा गाधि प्रसंग; ब्रह्मतेज और क्षात्रतेज के समन्वय एवं परशुराम-विश्वामित्र कुल की कथा।
महर्षि जमदग्नि का तपोमय जीवन, माता रेणुका का आख्यान, परशुराम की कठोर पितृभक्ति और वरदान प्राप्ति का प्रसंग।
माहिष्मती नरेश कार्तवीर्य सहस्त्रबाहु का जमदग्नि आश्रम में आगमन, महर्षि का सत्कार और मदोन्मत्त राजा की दुर्भावना।
सहस्त्रबाहु द्वारा दिव्य कामधेनु (हविर्धानी) का बलपूर्वक हरण, आश्रम का विध्वंस और प्रतिशोध की भीषण ज्वाला का प्रज्वलन।
सहस्त्रबाहु संहार के बाद महर्षि कश्यप को सम्पूर्ण विजित पृथ्वी का दान और भगवान परशुराम का महेन्द्र पर्वत प्रस्थान।
राजा सृंजय और भगवान परशुराम का दार्शनिक संवाद; क्षात्रधर्म, राजा के कर्तव्य, दण्ड-नीति और मर्यादा का निरूपण।
अम्बा के न्याय हेतु गुरु परशुराम और शिष्य भीष्म के मध्य कुरुक्षेत्र की भूमि पर लड़ा गया ऐतिहासिक एवं रोमांचक द्वन्द्व युद्ध।
भीष्म-युद्ध की परिणति के उपरान्त परशुराम द्वारा भविष्य में किसी क्षत्रिय को दिव्यास्त्र शिक्षा न देने का कठोर संकल्प।
कुरु-सभा में शान्ति-दूत श्रीकृष्ण के प्रस्ताव की उपेक्षा, दुर्योधन का हठ और महाविनाशकारी युद्ध की अपरिहार्य स्थिति।
कौरव दल के प्रधान सेनापति पद पर पितामह भीष्म का अभिषेक, युद्ध के कठोर नियम और कर्ण द्वारा अस्त्र त्याग का निर्णय।
कुरुक्षेत्र के विशाल मैदान में दोनों पक्षों के शंखों का तुमुल नाद, गीता का अमर उपदेश और महायुद्ध का विधिवत प्रारम्भ।
भीष्म का विकराल संहारक रूप, पाण्डव सेना में हाहाकार तथा उनके अमोघ इच्छा-मृत्यु वरदान को भेदने का गम्भीर संकट।
भीष्म की प्रतिज्ञा पूर्ण करने और अर्जुन की रक्षा हेतु अपनी निःशस्त्र रहने की प्रतिज्ञा तोड़ रथ-चक्र उठाते भगवान श्रीकृष्ण।
दसवें दिन अर्जुन-शिखण्डी का रथारोहण, पितामह का धनुष त्याग, बाणों की वर्षा और भीष्म का शरशय्या पर शयन।
आचार्य द्रोण का सेनापतित्व, चक्रव्यूह का निर्माण, वीर अभिमन्यु का अप्रतिम पराक्रम, छल-वध और द्रोण का अवसान।
अंगराज कर्ण का महासेनापतित्व, अर्जुन के साथ प्रलयंकारी द्वन्द्व, शापों का फलीभूत होना और महारथी कर्ण का वीरगति पाना।
दुर्योधन के पतन के उपरान्त अश्वत्थामा का सेनापतित्व, रात्रि-शिविर में पाण्डव-पुत्रों का संहार और प्रतिशोध का वीभत्स रूप।
शरशय्या पर स्थित भीष्म पितामह द्वारा महाराज युधिष्ठिर को राजधर्म, आपद्धर्म, मोक्षधर्म एवं आदर्श जीवन-मूल्यों का उपदेश।
सूर्य के उत्तरायण होने पर पितामह का स्वेच्छा से प्राण त्याग, महाप्रस्थान और महाभारत के प्रतिशोध पर्व का पूर्ण उपसंहार।
प्र. 'प्रतिशोध' ग्रन्थ के अध्यायों में किस प्रकार की अध्ययन सामग्री उपलब्ध है?
उत्तर: प्रत्येक अध्याय के लिंक पर क्लिक करके आप महाभारत-आधारित इस ग्रन्थ का मूल पाठ, विस्तृत व्याख्या, पौराणिक सन्दर्भ-प्रसंग, चरित्र-चित्रण तथा विश्वविद्यालयीय व प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर प्राप्त कर सकते हैं।