📖 चकारान्त एवं जकारान्त हलन्त : पाणिनीय व्याकरणिक रहस्य एवं प्रमुख सूत्र
जिन प्रातिपदिकों (मूल हलन्त शब्दों) के अन्त में व्यञ्जन वर्ण 'च्' अथवा 'ज्' आता है, वे क्रमशः चकारान्त और जकारान्त कहलाते हैं। इन शब्दों की सिद्धि में पाणिनीय व्याकरण के सन्धि एवं पद-परिवर्तन के नियम अत्यन्त महत्वपूर्ण हैं।
१. चकारान्त शब्दों के सामान्य नियम (कुत्व विधान)
सूत्र: "चोः कुः" (८.२.३०), "झलां जशोऽन्ते" (८.२.३९) एवं "वाऽवसाने" (८.४.५६)
• पदान्त में अथवा झल् (हलादि) प्रत्यय परे होने पर चवर्ग (च्) को कवर्ग (क् / ग्) आदेश होता है।
• प्रथमा एकवचन: वाच् + सुँ ➔ सुँ का लोप ('हल्ङ्याब्भ्यो...') ➔ 'चोः कुः' से च् को क् ➔ 'झलां जशोऽन्ते' से ग् ➔ 'वाऽवसाने' से विकल्प से चर्त्व होकर वाक् / वाग् दोनों रूप बनते हैं।
• हलादि विभक्तियों में: वाच् + भ्याम् = वाग्भ्याम् | वाच् + भिः = वाग्भिः | वाच् + सु = वाक् + सु ➔ 'आदेशप्रत्यययोः' से षत्व होकर वाक्षु।
• अजादि विभक्तियों में: 'च्' अपने मूल रूप में स्वर से मिल जाता है (यथा: वाचम्, वाचा, वाचे, वाचि)।
२. अञ्चु-प्रत्ययान्त विशेष चकारान्त शब्द (प्राच्, प्रत्यच्, उदच्, तिर्यच्)
विशेष सूत्र: "अनिदितां हल उपधायाः..." (६.४.२४), "उगिदचां सर्वनामस्थाने..." (७.१.७०), "अचः" (६.४.१३८) एवं "चौ" (६.३.१३८)
• सर्वनामस्थान (प्रथमा व द्वितीया १व./२व.): नुम् आगम होकर प्राङ्, प्राञ्चौ, प्राञ्चः तथा प्रत्यङ्, प्रत्यञ्चौ, प्रत्यञ्चः बनते हैं।
• भ-संज्ञा (द्वितीया बहु. से सप्तमी पर्यन्त अजादि): 'अचः' से अकार का लोप होकर 'चौ' से पूर्व स्वर दीर्घ हो जाता है ➔ प्रति + अच् + शस् = प्रतीचः, तृतीया १व. प्रतीचा।
• 'उदच्' में 'उद ईत्' (६.४.१३९) से उदीचः, उदीचा तथा 'तिर्यच्' में 'तिरस्' आदेश होकर तिरश्चः, तिरश्चा रूप सिद्ध होते हैं।
⚠️ जकारान्त का सबसे बड़ा परीक्षा नियम : 'कुत्व' बनाम 'षत्व' भेद!
संस्कृत में सभी जकारान्त शब्दों के पदान्त रूप एक जैसे नहीं होते! यहाँ दो स्पष्ट वर्ग हैं:
वर्ग क (कुत्व - क्/ग्): वणिज्, भिषज्, ऋत्विज्, स्रज् आदि में "चोः कुः" से 'ज्' को 'क्/ग्' होता है ➔ वणिक् / वणिग्, भिषक् / भिषग्, स्रक् / स्रग्।
वर्ग ख (षत्व ➔ ट्/ड्): सूत्र "व्रश्चभ्रस्जसृजमृजयजराजभ्राजच्छशां षः" (८.२.३६) के अनुसार राज्, भ्राज्, यज्, सृज् आदि धातुओं से बने शब्दों में 'ज्' को पहले 'ष्' होता है, फिर जश्त्व से 'ड्' और अवसान में 'ट्' होता है!
अतः: राज् ➔ राट् / राड् (राक् नहीं बनता!) | सम्राज् ➔ सम्राट् / सम्राड् | परिव्राज् ➔ परिव्राट् / परिव्राड् | विश्वसृज् ➔ विश्वसृट् / विश्वसृड्।
हलादि में: राड्भ्याम्, राट्सु (न कि राग्भ्याम्, राक्षु)।
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | वाक् / वाग् | वाचौ | वाचः |
| द्वितीया | वाचम् | वाचौ | वाचः |
| तृतीया | वाचा | वाग्भ्याम् | वाग्भिः |
| चतुर्थी | वाचे | वाग्भ्याम् | वाग्भ्यः |
| पञ्चमी | वाचः | वाग्भ्याम् | वाग्भ्यः |
| षष्ठी | वाचः | वाचोः | वाचाम् |
| सप्तमी | वाचि | वाचोः | वाक्षु |
| सम्बोधन | हे वाक् / हे वाग् | हे वाचौ | हे वाचः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | त्वक् / त्वग् | त्वचौ | त्वचः |
| द्वितीया | त्वचम् | त्वचौ | त्वचः |
| तृतीया | त्वचा | त्वग्भ्याम् | त्वग्भिः |
| चतुर्थी | त्वचे | त्वग्भ्याम् | त्वग्भ्यः |
| पञ्चमी | त्वचः | त्वग्भ्याम् | त्वग्भ्यः |
| षष्ठी | त्वचः | त्वचोः | त्वचाम् |
| सप्तमी | त्वचि | त्वचोः | त्वक्षु |
| सम्बोधन | हे त्वक् / हे त्वग् | हे त्वचौ | हे त्वचः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | रुक् / रुग् | रुचौ | रुचः |
| द्वितीया | रुचम् | रुचौ | रुचः |
| तृतीया | रुचा | रुग्भ्याम् | रुग्भिः |
| चतुर्थी | रुचे | रुग्भ्याम् | रुग्भ्यः |
| पञ्चमी | रुचः | रुग्भ्याम् | रुग्भ्यः |
| षष्ठी | रुचः | रुचोः | रुचाम् |
| सप्तमी | रुचि | रुचोः | रुक्षु |
| सम्बोधन | हे रुक् / हे रुग् | हे रुचौ | हे रुचः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | पयोमुक् / पयोमुग् | पयोमुचौ | पयोमुचः |
| द्वितीया | पयोमुचम् | पयोमुचौ | पयोमुचः |
| तृतीया | पयोमुचा | पयोमुग्भ्याम् | पयोमुग्भिः |
| चतुर्थी | पयोमुचे | पयोमुग्भ्याम् | पयोमुग्भ्यः |
| पञ्चमी | पयोमुचः | पयोमुग्भ्याम् | पयोमुग्भ्यः |
| षष्ठी | पयोमुचः | पयोमुचोः | पयोमुचाम् |
| सप्तमी | पयोमुचि | पयोमुचोः | पयोमुक्षु |
| सम्बोधन | हे पयोमुक् / हे पयोमुग् | हे पयोमुचौ | हे पयोमुचः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | जलमुक् / जलमुग् | जलमुचौ | जलमुचः |
| द्वितीया | जलमुचम् | जलमुचौ | जलमुचः |
| तृतीया | जलमुचा | जलमुग्भ्याम् | जलमुग्भिः |
| चतुर्थी | जलमुचे | जलमुग्भ्याम् | जलमुग्भ्यः |
| पञ्चमी | जलमुचः | जलमुग्भ्याम् | जलमुग्भ्यः |
| षष्ठी | जलमुचः | जलमुचोः | जलमुचाम् |
| सप्तमी | जलमुचि | जलमुचोः | जलमुक्षु |
| सम्बोधन | हे जलमुक् / हे जलमुग् | हे जलमुचौ | हे जलमुचः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | सुवाक् / सुवाग् | सुवाचौ | सुवाचः |
| द्वितीया | सुवाचम् | सुवाचौ | सुवाचः |
| तृतीया | सुवाचा | सुवाग्भ्याम् | सुवाग्भिः |
| चतुर्थी | सुवाचे | सुवाग्भ्याम् | सुवाग्भ्यः |
| पञ्चमी | सुवाचः | सुवाग्भ्याम् | सुवाग्भ्यः |
| षष्ठी | सुवाचः | सुवाचोः | सुवाचाम् |
| सप्तमी | सुवाचि | सुवाचोः | सुवाक्षु |
| सम्बोधन | हे सुवाक् / हे सुवाग् | हे सुवाचौ | हे सुवाचः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | प्राङ् | प्राञ्चौ | प्राञ्चः |
| द्वितीया | प्राञ्चम् | प्राञ्चौ | प्राचः |
| तृतीया | प्राचा | प्राग्भ्याम् | प्राग्भिः |
| चतुर्थी | प्राचे | प्राग्भ्याम् | प्राग्भ्यः |
| पञ्चमी | प्राचः | प्राग्भ्याम् | प्राग्भ्यः |
| षष्ठी | प्राचः | प्राचोः | प्राचाम् |
| सप्तमी | प्राचि | प्राचोः | प्राक्षु |
| सम्बोधन | हे प्राङ् | हे प्राञ्चौ | हे प्राञ्चः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | प्रत्यङ् | प्रत्यञ्चौ | प्रत्यञ्चः |
| द्वितीया | प्रत्यञ्चम् | प्रत्यञ्चौ | प्रतीचः |
| तृतीया | प्रतीचा | प्रत्यग्भ्याम् | प्रत्यग्भिः |
| चतुर्थी | प्रतीचे | प्रत्यग्भ्याम् | प्रत्यग्भ्यः |
| पञ्चमी | प्रतीचः | प्रत्यग्भ्याम् | प्रत्यग्भ्यः |
| षष्ठी | प्रतीचः | प्रतीचोः | प्रतीचाम् |
| सप्तमी | प्रतीचि | प्रतीचोः | प्रत्यक्षु |
| सम्बोधन | हे प्रत्यङ् | हे प्रत्यञ्चौ | हे प्रत्यञ्चः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | उदङ् | उदञ्चौ | उदञ्चः |
| द्वितीया | उदञ्चम् | उदञ्चौ | उदीचः |
| तृतीया | उदीचा | उदग्भ्याम् | उदग्भिः |
| चतुर्थी | उदीचे | उदग्भ्याम् | उदग्भ्यः |
| पञ्चमी | उदीचः | उदग्भ्याम् | उदग्भ्यः |
| षष्ठी | उदीचः | उदीचोः | उदीचाम् |
| सप्तमी | उदीचि | उदीचोः | उदक्षु |
| सम्बोधन | हे उदङ् | हे उदञ्चौ | हे उदञ्चः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | तिर्यङ् | तिर्यञ्चौ | तिर्यञ्चः |
| द्वितीया | तिर्यञ्चम् | तिर्यञ्चौ | तिरश्चः |
| तृतीया | तिरश्चा | तिर्यग्भ्याम् | तिर्यग्भिः |
| चतुर्थी | तिरश्चे | तिर्यग्भ्याम् | तिर्यग्भ्यः |
| पञ्चमी | तिरश्चः | तिर्यग्भ्याम् | तिर्यग्भ्यः |
| षष्ठी | तिरश्चः | तिरश्चोः | तिरश्चाम् |
| सप्तमी | तिरश्चि | तिरश्चोः | तिर्यक्षु |
| सम्बोधन | हे तिर्यङ् | हे तिर्यञ्चौ | हे तिर्यञ्चः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | वणिक् / वणिग् | वणिजौ | वणिजः |
| द्वितीया | वणिजम् | वणिजौ | वणिजः |
| तृतीया | वणिजा | वणिग्भ्याम् | वणिग्भिः |
| चतुर्थी | वणिजे | वणिग्भ्याम् | वणिग्भ्यः |
| पञ्चमी | वणिजः | वणिग्भ्याम् | वणिग्भ्यः |
| षष्ठी | वणिजः | वणिजोः | वणिजाम् |
| सप्तमी | वणिजि | वणिजोः | वणिक्षु |
| सम्बोधन | हे वणिक् / हे वणिग् | हे वणिजौ | हे वणिजः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | भिषक् / भिषग् | भिषजौ | भिषजः |
| द्वितीया | भिषजम् | भिषजौ | भिषजः |
| तृतीया | भिषजा | भिषग्भ्याम् | भिषग्भिः |
| चतुर्थी | भिषजे | भिषग्भ्याम् | भिषग्भ्यः |
| पञ्चमी | भिषजः | भिषग्भ्याम् | भिषग्भ्यः |
| षष्ठी | भिषजः | भिषजोः | भिषजाम् |
| सप्तमी | भिषजि | भिषजोः | भिषक्षु |
| सम्बोधन | हे भिषक् / हे भिषग् | हे भिषजौ | हे भिषजः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | ऋत्विक् / ऋत्विग् | ऋत्विजौ | ऋत्विजः |
| द्वितीया | ऋत्विजम् | ऋत्विजौ | ऋत्विजः |
| तृतीया | ऋत्विजा | ऋत्विग्भ्याम् | ऋत्विग्भिः |
| चतुर्थी | ऋत्विजे | ऋत्विग्भ्याम् | ऋत्विग्भ्यः |
| पञ्चमी | ऋत्विजः | ऋत्विग्भ्याम् | ऋत्विग्भ्यः |
| षष्ठी | ऋत्विजः | ऋत्विजोः | ऋत्विजाम् |
| सप्तमी | ऋत्विजि | ऋत्विजोः | ऋत्विक्षु |
| सम्बोधन | हे ऋत्विक् / हे ऋत्विग् | हे ऋत्विजौ | हे ऋत्विजः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | स्रक् / स्रग् | स्रजौ | स्रजः |
| द्वितीया | स्रजम् | स्रजौ | स्रजः |
| तृतीया | स्रजा | स्रग्भ्याम् | स्रग्भिः |
| चतुर्थी | स्रजे | स्रग्भ्याम् | स्रग्भ्यः |
| पञ्चमी | स्रजः | स्रग्भ्याम् | स्रग्भ्यः |
| षष्ठी | स्रजः | स्रजोः | स्रजाम् |
| सप्तमी | स्रजि | स्रजोः | स्रक्षु |
| सम्बोधन | हे स्रक् / हे स्रग् | हे स्रजौ | हे स्रजः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | युङ् | युजौ | युजः |
| द्वितीया | युजम् | युजौ | युजः |
| तृतीया | युजा | युग्भ्याम् | युग्भिः |
| चतुर्थी | युजे | युग्भ्याम् | युग्भ्यः |
| पञ्चमी | युजः | युग्भ्याम् | युग्भ्यः |
| षष्ठी | युजः | युजोः | युजाम् |
| सप्तमी | युजि | युजोः | युक्षु |
| सम्बोधन | हे युङ् | हे युजौ | हे युजः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | राट् / राड् | राजौ | राजः |
| द्वितीया | राजम् | राजौ | राजः |
| तृतीया | राजा | राड्भ्याम् | राड्भिः |
| चतुर्थी | राजे | राड्भ्याम् | राड्भ्यः |
| पञ्चमी | राजः | राड्भ्याम् | राड्भ्यः |
| षष्ठी | राजः | राजोः | राजाम् |
| सप्तमी | राजि | राजोः | राट्सु |
| सम्बोधन | हे राट् / हे राड् | हे राजौ | हे राजः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | सम्राट् / सम्राड् | सम्राजौ | सम्राजः |
| द्वितीया | सम्राजम् | सम्राजौ | सम्राजः |
| तृतीया | सम्राजा | सम्राड्भ्याम् | सम्राड्भिः |
| चतुर्थी | सम्राजे | सम्राड्भ्याम् | सम्राड्भ्यः |
| पञ्चमी | सम्राजः | सम्राड्भ्याम् | सम्राड्भ्यः |
| षष्ठी | सम्राजः | सम्राजोः | सम्राजाम् |
| सप्तमी | सम्राजि | सम्राजोः | सम्राट्सु |
| सम्बोधन | हे सम्राट् / हे सम्राड् | हे सम्राजौ | हे सम्राजः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | परिव्राट् / परिव्राड् | परिव्राजौ | परिव्राजः |
| द्वितीया | परिव्राजम् | परिव्राजौ | परिव्राजः |
| तृतीया | परिव्राजा | परिव्राड्भ्याम् | परिव्राड्भिः |
| चतुर्थी | परिव्राजे | परिव्राड्भ्याम् | परिव्राड्भ्यः |
| पञ्चमी | परिव्राजः | परिव्राड्भ्याम् | परिव्राड्भ्यः |
| षष्ठी | परिव्राजः | परिव्राजोः | परिव्राजाम् |
| सप्तमी | परिव्राजि | परिव्राजोः | परिव्राट्सु |
| सम्बोधन | हे परिव्राट् / हे परिव्राड् | हे परिव्राजौ | हे परिव्राजः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | विश्वसृट् / विश्वसृड् | विश्वसृजौ | विश्वसृजः |
| द्वितीया | विश्वसृजम् | विश्वसृजौ | विश्वसृजः |
| तृतीया | विश्वसृजा | विश्वसृड्भ्याम् | विश्वसृड्भिः |
| चतुर्थी | विश्वसृजे | विश्वसृड्भ्याम् | विश्वसृड्भ्यः |
| पञ्चमी | विश्वसृजः | विश्वसृड्भ्याम् | विश्वसृड्भ्यः |
| षष्ठी | विश्वसृजः | विश्वसृजोः | विश्वसृजाम् |
| सप्तमी | विश्वसृजि | विश्वसृजोः | विश्वसृट्सु |
| सम्बोधन | हे विश्वसृट् / हे विश्वसृड् | हे विश्वसृजौ | हे विश्वसृजः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | देवयट् / देवयड् | देवयजौ | देवयजः |
| द्वितीया | देवयजम् | देवयजौ | देवयजः |
| तृतीया | देवयजा | देवयड्भ्याम् | देवयड्भिः |
| चतुर्थी | देवयजे | देवयड्भ्याम् | देवयड्भ्यः |
| पञ्चमी | देवयजः | देवयड्भ्याम् | देवयड्भ्यः |
| षष्ठी | देवयजः | देवयजोः | देवयजाम् |
| सप्तमी | देवयजि | देवयजोः | देवयट्सु |
| सम्बोधन | हे देवयट् / हे देवयड् | हे देवयजौ | हे देवयजः |