📖 संख्यावाची शब्दरूप : लिंग, वचन एवं पाणिनीय व्याकरणिक व्यवस्था
संस्कृत में संख्यावाची शब्दों का प्रयोग विशेषण (संख्या-विशेषण) तथा संज्ञा दोनों रूपों में होता है। संख्यावाची शब्दों के लिंग एवं वचन के नियम अत्यन्त विशिष्ट और सुनिश्चित हैं।
१. संख्या १ से ४ तक के नियम (त्रिलिंगी व्यवस्था)
१ से ४ तक की संख्याएँ तीनों लिंगों में भिन्न-भिन्न होती हैं तथा अपने विशेष्य के अनुसार चलती हैं:
• एक (१): यह नित्य एकवचनान्त है। इसके रूप 'सर्व' शब्द के समान सर्वनामवत् चलते हैं (पुं. एकः, स्त्री. एका, नपुं. एकम्)। जब 'एक' का प्रयोग बहुवचन (एके) में होता है, तब उसका अर्थ संख्या '१' न होकर 'कुछ' (केचन/अपरे) होता है।
• द्वि (२): यह नित्य द्विवचनान्त है (पुं. द्वौ, स्त्री. द्वे, नपुं. द्वे)।
• त्रि (३) एवं चतुर् (४): ये नित्य बहुवचनान्त हैं।
– त्रि: पुं. त्रयः, स्त्री. तिस्रः, नपुं. त्रीणि।
– चतुर्: पुं. चत्वारः, स्त्री. चतस्रः, नपुं. चत्वारि।
⚠️ 'त्रि' और 'चतुर्' स्त्रीलिंग का सबसे बड़ा परीक्षा नियम:
सूत्र: "तिसृचतसृ" (७.२.९९) एवं "न तिसृचतसृ" (६.४.४)
षष्ठी बहुवचन में नाम् परे रहते सामान्यतः स्वर को दीर्घ होता है (यथा: नदी ➔ नदीनाम्, पितृ ➔ पितॄणाम्), किन्तु 'तिसृ' और 'चतसृ' में दीर्घ का स्पष्ट निषेध है। अतः षष्ठी बहुवचन में ह्रस्व ऋकार युक्त 'तिसृणाम्' तथा 'चतसृणाम्' ही शुद्ध रूप बनते हैं (दीर्घ 'तिसॄणाम्' लिखना अशुद्ध है)।
२. संख्या ५ से १८ तक के नियम (षट्संज्ञा एवं नित्य बहुवचन)
सूत्र: "ष्णान्ता षट्" (१.१.२४) एवं "षड्भ्यो लुक्" (७.१.२२)
• ५ (पञ्चन्) से १८ (अष्टादशन्) तक की संख्याएँ तीनों लिंगों में सर्वथा एक समान होती हैं। इनमें लिंग-भेद नहीं होता (यथा: पञ्च बालकाः, पञ्च बालिकाः, पञ्च फलानि)।
• ये शब्द नित्य बहुवचनान्त होते हैं।
• 'ष्णान्ता षट्' से षान्त (षष्) और नान्त (पञ्चन्, सप्तन्, अष्टन्, नवन्, दशन् आदि) की 'षट्' संज्ञा होती है। 'षड्भ्यो लुक्' से प्रथमा व द्वितीया बहुवचन के प्रत्ययों (जस्/शस्) का लुक् (लोप) हो जाता है, जिससे केवल पञ्च, षट्, सप्त, अष्ट (अष्टौ), नव, दश शेष रहते हैं।
• सूत्र "अष्टन आ विभक्तौ" (७.२.८४): 'अष्टन्' शब्द के सभी विभक्तियों में दो-दो वैकल्पिक रूप बनते हैं (यथा: अष्टौ / अष्ट, अष्टाभिः / अष्टभिः, अष्टाभ्यः / अष्टभ्यः, अष्टासु / अष्टसु)।
३. संख्या १९ से ९९ तक के नियम (नित्य स्त्रीलिंग एकवचन)
संख्या १९ (एकोनविंशति) से ९९ (नवनवति) पर्यन्त:
• ये संख्याएँ विशेष्य के लिंग व वचन की परवाह किए बिना नित्य स्त्रीलिंग एवं एकवचन में ही प्रयुक्त होती हैं।
• इकारान्त संख्याएँ: विंशति (२०), षष्टि (६०), सप्तति (७०), अशीति (८०), नवति (९०) ➔ इनके रूप 'मति' के समान चलते हैं।
• तकारान्त संख्याएँ: त्रिंशत् (३०), चत्वारिंशत् (४०), पञ्चाशत् (५०) ➔ इनके रूप हलन्त स्त्रीलिंग 'सरित्' के समान चलते हैं।
प्रयोग उदाहरण: "विंशत्या बालकैः सह" (२० बालकों के साथ - यहाँ बालक पुल्लिंग बहुवचन हैं, फिर भी विंशति स्त्रीलिंग तृतीया एकवचन में ही रहेगा)।
४. शतम् (१००), सहस्रम् (१,०००), लक्षम्, कोटिः
महा-संख्याओं के लिंग एवं वचन:
• शतम् (१००), सहस्रम् (१०००), लक्षम् (१,००,०००): ये नित्य नपुंसकलिंग एवं एकवचन में प्रयुक्त होते हैं। इनके रूप 'फल'वत् चलते हैं।
• कोटिः (१,००,००,०००): यह नित्य स्त्रीलिंग एकवचन ('मति'वत्) है।
• अपवाद (द्वित्व/बहुत्व): यदि इन संख्याओं का गुणक दर्शाना हो (यथा: दो सौ, पाँच हजार), तब इनमें द्विवचन या बहुवचन हो सकता है (यथा: द्वे शते, त्रीणि शतानि, पञ्च सहस्राणि)।
| विभक्ति | एकवचन |
| प्रथमा | एकः |
| द्वितीया | एकम् |
| तृतीया | एकेन |
| चतुर्थी | एकस्मै |
| पञ्चमी | एकस्मात् |
| षष्ठी | एकस्य |
| सप्तमी | एकस्मिन् |
| विभक्ति | एकवचन |
| प्रथमा | एका |
| द्वितीया | एकाम् |
| तृतीया | एकया |
| चतुर्थी | एकस्यै |
| पञ्चमी | एकस्याः |
| षष्ठी | एकस्याः |
| सप्तमी | एकस्याम् |
| विभक्ति | एकवचन |
| प्रथमा | एकम् |
| द्वितीया | एकम् |
| तृतीया | एकेन |
| चतुर्थी | एकस्मै |
| पञ्चमी | एकस्मात् |
| षष्ठी | एकस्य |
| सप्तमी | एकस्मिन् |
| विभक्ति | द्विवचन |
| प्रथमा | द्वौ |
| द्वितीया | द्वौ |
| तृतीया | द्वाभ्याम् |
| चतुर्थी | द्वाभ्याम् |
| पञ्चमी | द्वाभ्याम् |
| षष्ठी | द्वयोः |
| सप्तमी | द्वयोः |
| विभक्ति | द्विवचन |
| प्रथमा | द्वे |
| द्वितीया | द्वे |
| तृतीया | द्वाभ्याम् |
| चतुर्थी | द्वाभ्याम् |
| पञ्चमी | द्वाभ्याम् |
| षष्ठी | द्वयोः |
| सप्तमी | द्वयोः |
| विभक्ति | द्विवचन |
| प्रथमा | द्वे |
| द्वितीया | द्वे |
| तृतीया | द्वाभ्याम् |
| चतुर्थी | द्वाभ्याम् |
| पञ्चमी | द्वाभ्याम् |
| षष्ठी | द्वयोः |
| सप्तमी | द्वयोः |
| विभक्ति | बहुवचन |
| प्रथमा | त्रयः |
| द्वितीया | त्रीन् |
| तृतीया | त्रिभिः |
| चतुर्थी | त्रिभ्यः |
| पञ्चमी | त्रिभ्यः |
| षष्ठी | त्रयाणाम् |
| सप्तमी | त्रिषु |
| विभक्ति | बहुवचन |
| प्रथमा | तिस्रः |
| द्वितीया | तिस्रः |
| तृतीया | तिसृभिः |
| चतुर्थी | तिसृभ्यः |
| पञ्चमी | तिसृभ्यः |
| षष्ठी | तिसृणाम् |
| सप्तमी | तिसृषु |
| विभक्ति | बहुवचन |
| प्रथमा | त्रीणि |
| द्वितीया | त्रीणि |
| तृतीया | त्रिभिः |
| चतुर्थी | त्रिभ्यः |
| पञ्चमी | त्रिभ्यः |
| षष्ठी | त्रयाणाम् |
| सप्तमी | त्रिषु |
| विभक्ति | बहुवचन |
| प्रथमा | चत्वारः |
| द्वितीया | चतुरः |
| तृतीया | चतुर्भिः |
| चतुर्थी | चतुर्भ्यः |
| पञ्चमी | चतुर्भ्यः |
| षष्ठी | चतुर्णाम् |
| सप्तमी | चतुर्षु |
| विभक्ति | बहुवचन |
| प्रथमा | चतस्रः |
| द्वितीया | चतस्रः |
| तृतीया | चतसृभिः |
| चतुर्थी | चतसृभ्यः |
| पञ्चमी | चतसृभ्यः |
| षष्ठी | चतसृणाम् |
| सप्तमी | चतसृषु |
| विभक्ति | बहुवचन |
| प्रथमा | चत्वारि |
| द्वितीया | चत्वारि |
| तृतीया | चतुर्भिः |
| चतुर्थी | चतुर्भ्यः |
| पञ्चमी | चतुर्भ्यः |
| षष्ठी | चतुर्णाम् |
| सप्तमी | चतुर्षु |
| विभक्ति | बहुवचन (तीनों लिंग समान) |
| प्रथमा | पञ्च |
| द्वितीया | पञ्च |
| तृतीया | पञ्चभिः |
| चतुर्थी | पञ्चभ्यः |
| पञ्चमी | पञ्चभ्यः |
| षष्ठी | पञ्चानाम् |
| सप्तमी | पञ्चसु |
| विभक्ति | बहुवचन (तीनों लिंग समान) |
| प्रथमा | षट् (षड्) |
| द्वितीया | षट् (षड्) |
| तृतीया | षड्भिः |
| चतुर्थी | षड्भ्यः |
| पञ्चमी | षड्भ्यः |
| षष्ठी | षण्णाम् |
| सप्तमी | षट्सु |
| विभक्ति | बहुवचन (तीनों लिंग समान) |
| प्रथमा | सप्त |
| द्वितीया | सप्त |
| तृतीया | सप्तभिः |
| चतुर्थी | सप्तभ्यः |
| पञ्चमी | सप्तभ्यः |
| षष्ठी | सप्तानाम् |
| सप्तमी | सप्तसु |
| विभक्ति | मुख्य रूप | वैकल्पिक रूप |
| प्रथमा | अष्टौ | अष्ट |
| द्वितीया | अष्टौ | अष्ट |
| तृतीया | अष्टाभिः | अष्टभिः |
| चतुर्थी | अष्टाभ्यः | अष्टभ्यः |
| पञ्चमी | अष्टाभ्यः | अष्टभ्यः |
| षष्ठी | अष्टानाम् | — |
| सप्तमी | अष्टासु | अष्टसु |
| विभक्ति | बहुवचन (तीनों लिंग समान) |
| प्रथमा | नव |
| द्वितीया | नव |
| तृतीया | नवभिः |
| चतुर्थी | नवभ्यः |
| पञ्चमी | नवभ्यः |
| षष्ठी | नवानाम् |
| सप्तमी | नवसु |
| विभक्ति | बहुवचन (तीनों लिंग समान) |
| प्रथमा | दश |
| द्वितीया | दश |
| तृतीया | दशभिः |
| चतुर्थी | दशभ्यः |
| पञ्चमी | दशभ्यः |
| षष्ठी | दशानाम् |
| सप्तमी | दशसु |
| विभक्ति | एकवचन |
| प्रथमा | विंशतिः |
| द्वितीया | विंशतिम् |
| तृतीया | विंशत्या |
| चतुर्थी | विंशतये / विंशत्यै |
| पञ्चमी | विंशतेः / विंशत्याः |
| षष्ठी | विंशतेः / विंशत्याः |
| सप्तमी | विंशतौ / विंशत्याम् |
| विभक्ति | एकवचन |
| प्रथमा | त्रिंशत् (त्रिंशद्) |
| द्वितीया | त्रिंशतम् |
| तृतीया | त्रिंशता |
| चतुर्थी | त्रिंशते |
| पञ्चमी | त्रिंशतः |
| षष्ठी | त्रिंशतः |
| सप्तमी | त्रिंशति |
| विभक्ति | एकवचन |
| प्रथमा | चत्वारिंशत् (चत्वारिंशद्) |
| द्वितीया | चत्वारिंशतम् |
| तृतीया | चत्वारिंशता |
| चतुर्थी | चत्वारिंशते |
| पञ्चमी | चत्वारिंशतः |
| षष्ठी | चत्वारिंशतः |
| सप्तमी | चत्वारिंशति |
| विभक्ति | एकवचन |
| प्रथमा | पञ्चाशत् (पञ्चाशद्) |
| द्वितीया | पञ्चाशतम् |
| तृतीया | पञ्चाशता |
| चतुर्थी | पञ्चाशते |
| पञ्चमी | पञ्चाशतः |
| षष्ठी | पञ्चाशतः |
| सप्तमी | पञ्चाशति |
| विभक्ति | एकवचन |
| प्रथमा | षष्टिः |
| द्वितीया | षष्टिम् |
| तृतीया | षष्ट्या |
| चतुर्थी | षष्टये / षष्ट्यै |
| पञ्चमी | षष्टेः / षष्ट्याः |
| षष्ठी | षष्टेः / षष्ट्याः |
| सप्तमी | षष्टौ / षष्ट्याम् |
| विभक्ति | एकवचन |
| प्रथमा | सप्ततिः |
| द्वितीया | सप्ततिम् |
| तृतीया | सप्तत्या |
| चतुर्थी | सप्ततये / सप्तत्यै |
| पञ्चमी | सप्ततेः / सप्तत्याः |
| षष्ठी | सप्ततेः / सप्तत्याः |
| सप्तमी | सप्ततौ / सप्तत्याम् |
| विभक्ति | एकवचन |
| प्रथमा | अशीतिः |
| द्वितीया | अशीतिम् |
| तृतीया | अशीत्या |
| चतुर्थी | अशीतये / अशीत्यै |
| पञ्चमी | अशीतेः / अशीत्याः |
| षष्ठी | अशीतेः / अशीत्याः |
| सप्तमी | अशीतौ / अशीत्याम् |
| विभक्ति | एकवचन |
| प्रथमा | नवतिः |
| द्वितीया | नवतिम् |
| तृतीया | नवत्या |
| चतुर्थी | नवतये / नवत्यै |
| पञ्चमी | नवतेः / नवत्याः |
| षष्ठी | नवतेः / नवत्याः |
| सप्तमी | नवतौ / नवत्याम् |
| विभक्ति | एकवचन |
| प्रथमा | शतम् |
| द्वितीया | शतम् |
| तृतीया | शतेन |
| चतुर्थी | शताय |
| पञ्चमी | शतात् |
| षष्ठी | शतस्य |
| सप्तमी | शते |
| विभक्ति | एकवचन |
| प्रथमा | सहस्रम् |
| द्वितीया | सहस्रम् |
| तृतीया | सहस्रेण |
| चतुर्थी | सहस्राय |
| पञ्चमी | सहस्रात् |
| षष्ठी | सहस्रस्य |
| सप्तमी | सहस्रे |