📖 सर्वनाम वर्ग : पाणिनीय व्याकरणिक रहस्य एवं प्रमुख सूत्र
संस्कृत व्याकरण में जो शब्द सब नामों (संज्ञाओं) के स्थान पर प्रयुक्त होते हैं, उन्हें सर्वनाम कहते हैं। महर्षि पाणिनि ने अष्टाध्यायी में गणपाठ के अन्तर्गत 'सर्वादीनि सर्वनामानि' (१.१.२७) सूत्र द्वारा सर्व, विश्व, उभ, उभय, अन्य, त्यद्, तद्, यद्, एतद्, इदम्, अदस्, एक, द्वि, युष्मद्, अस्मद्, भवतु, किम् आदि ३५ शब्दों को 'सर्वादिगण' में परिगणित किया है।
सर्वनाम शब्दों के सम्बोधन रूप नहीं होते (केवल प्रथमा से सप्तमी तक ७ विभक्तियाँ ही होती हैं)।
शास्त्रीय कारण: पाणिनीय व्याकरण में सम्बोधन का तात्पर्य "अभिमुखीकरणं सम्बोधनम्" (किसी को अपनी ओर आकृष्ट करना) है। सर्वनाम शब्द पूर्वप्रसङ्ग में उपस्थित अथवा बुद्धिस्थ अर्थ के परामर्शक (परोक्ष/प्रतिनिधि) होते हैं। जो साक्षात् सम्मुख निश्चित संज्ञा रूप में सम्बोधित नहीं किया जा रहा, उसके अभिमुखीकरण का कोई प्रयोजन न होने से सर्वनामों में सम्बोधन विभक्ति (सुँ आदि) का विधान नहीं किया गया।
१. अकारान्त सर्वनामों (सर्व, विश्व, अन्य आदि) के विशेष प्रत्यय सूत्र
१. जसः शी (७.१.१७): प्रथमा बहुवचन में 'जस्' को 'शी' (ई) होकर गुण होता है ➔ सर्व + जस् = सर्वे (रामः ➔ रामाः, किन्तु सर्व ➔ सर्वे)।
२. सर्वनाम्नः स्मै (७.१.१४): चतुर्थी एकवचन में 'ङे' को 'स्मै' आदेश होता है ➔ सर्व + ङे = सर्वस्मै, तस्मै, कस्मै।
३. ङसिङ्योः स्मात्स्मिनौ (७.१.१५): पञ्चमी १व. में 'स्मात्' (सर्वस्मात्) तथा सप्तमी १व. में 'स्मिन्' (सर्वस्मिन्) आदेश होता है।
४. आमि सर्वनाम्नः सुट् (७.१.५२): षष्ठी बहुवचन में 'आम्' से पूर्व 'सुट्' (स्) आगम होकर मूर्धन्य षकार होता है ➔ सर्व + आम् = सर्वेषाम् (स्त्री. सर्वासाम्)।
५. सर्वनाम्नः स्याड्ढ्रस्वश्च (७.३.११४): स्त्रीलिंग में ङित् विभक्तियों (चतुर्थी, पञ्चमी, षष्ठी, सप्तमी १व.) में 'स्याट्' आगम होता है ➔ सर्वस्यै, सर्वस्याः, सर्वस्याम्।
२. त्यदादि वर्ग (तद्, यद्, एतद्, किम्) के विशेष सूत्र
• त्यदादि के अन्त्य वर्ण को 'अ' आदेश होता है (तद् ➔ त + अ = त)।
• 'तद्' और 'एतद्' के 'त्' को 'सु' (प्रथमा १व.) परे रहते 'स्' आदेश होकर रुत्व-विसर्ग से सः, सा, एषः, एषा बनते हैं।
• 'किम्' शब्द के स्थान पर विभक्तियों में 'क' आदेश होता है (कः, कौ, के; का, के, काः; कम्, कौ, कान्)। नपुंसकलिंग प्रथमा/द्वितीया १व. में केवल 'किम्' रहता है।
३. अन्वादेश में 'एन' आदेश — सूत्र: "द्वितीयाटौस्स्वेनः" (२.४.३४)
जब एक ही वाक्य अथवा प्रसङ्ग में 'इदम्' या 'एतद्' का पुनः प्रयोग (अन्वादेश) किया जाता है, तब द्वितीया (तीनों वचनों), तृतीया एकवचन तथा षष्ठी/सप्तमी द्विवचन में इनके स्थान पर 'एन' आदेश विकल्प से होता है:
• द्वितीया: एनम्, एनौ, एनान् (पुं.) | एनाम्, एने, एनाः (स्त्री.) | एनत्/एनद्, एने, एनानि (नपुं.)।
• तृतीया १व.: एनेन (पुं./नपुं.), एनया (स्त्री.) | षष्ठी/सप्तमी २व.: एनयोः (तीनों लिंगों में)।
४. 'अस्मद्' (मैं) एवं 'युष्मद्' (तुम) के वैकल्पिक पादादेश नियम
अस्मद् और युष्मद् के रूप तीनों लिंगों में सर्वथा एक समान रहते हैं। इनके द्वितीया, चतुर्थी और षष्ठी में संक्षिप्त वैकल्पिक रूप बनते हैं, जो सर्वथा अनुदात्त होते हैं तथा वाक्य के आरम्भ में अथवा 'च, वा, ह, एव' के योग में प्रयुक्त नहीं हो सकते:
• द्वितीया (१व./२व./३व.): युष्मद् ➔ त्वा, वाम्, वः | अस्मद् ➔ मा, नौ, नः
• चतुर्थी (१व./२व./३व.): युष्मद् ➔ ते, वाम्, वः | अस्मद् ➔ मे, नौ, नः
• षष्ठी (१व./२व./३व.): युष्मद् ➔ ते, वाम्, वः | अस्मद् ➔ मे, नौ, नः
५. 'इदम्' एवं 'अदस्' के जटिल पाणिनीय रूप
• इदम्: "इदम इश्" (५.३.३) से पुं. प्रथमा १व. में अयम्, स्त्री. में इयम् तथा नपुं. में इदम् बनता है। हलादि विभक्तियों में "हलि लोपः" (७.२.११३) से 'इद' का लोप होकर तृतीया २व. में आभ्याम्, बहु. में एभिः बनता है।
• अदस्: "अदस औ सुलोपश्च" (७.२.१०७) से पुं./स्त्री. प्रथमा १व. में असौ बनता है। "अदसोऽसेर्दादु दो मः" (८.२.८०) सूत्र से 'द्' को 'म्' तथा उसके बाद के स्वर को 'ऊ' होकर अमू, अमी, अमून्, अमुष्मात्, अमुष्य आदि विशिष्ट रूप सिद्ध होते हैं।
१. सर्वनाम - अस्मद् शब्द रूप (उत्तम पुरुष : मैं / हम)
(👉 तीनों लिंगों में समान - कोष्ठक में पादादेश वैकल्पिक रूप)| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | अहम् | आवाम् | वयम् |
| द्वितीया | माम् (मा) | आवाम् (नौ) | अस्मान् (नः) |
| तृतीया | मया | आवाभ्याम् | अस्माभिः |
| चतुर्थी | मह्यम् (मे) | आवाभ्याम् (नौ) | अस्मभ्यम् (नः) |
| पञ्चमी | मत् | आवाभ्याम् | अस्मत् |
| षष्ठी | मम (मे) | आवयोः (नौ) | अस्माकम् (नः) |
| सप्तमी | मयि | आवयोः | अस्मासु |
२. सर्वनाम - युष्मद् शब्द रूप (मध्यम पुरुष : तुम / आप)
(👉 तीनों लिंगों में समान - कोष्ठक में पादादेश वैकल्पिक रूप)| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | त्वम् | युवाम् | यूयम् |
| द्वितीया | त्वाम् (त्वा) | युवाम् (वाम्) | युष्मान् (वः) |
| तृतीया | त्वया | युवाभ्याम् | युष्माभिः |
| चतुर्थी | तुभ्यम् (ते) | युवाभ्याम् (वाम्) | युष्मभ्यम् (वः) |
| पञ्चमी | त्वत् | युवाभ्याम् | युष्मत् |
| षष्ठी | तव (ते) | युवयोः (वाम्) | युष्माकम् (वः) |
| सप्तमी | त्वयि | युवयोः | युष्मासु |
३. तद् (वह) - पुल्लिंग शब्द रूप
(👉 प्रथम पुरुष पुल्लिंग परामर्शक)| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | सः | तौ | ते |
| द्वितीया | तम् | तौ | तान् |
| तृतीया | तेन | ताभ्याम् | तैः |
| चतुर्थी | तस्मै | ताभ्याम् | तेभ्यः |
| पञ्चमी | तस्मात् | ताभ्याम् | तेभ्यः |
| षष्ठी | तस्य | तयोः | तेषाम् |
| सप्तमी | तस्मिन् | तयोः | तेषु |
४. तद् (वह) - स्त्रीलिंग शब्द रूप
(👉 प्रथम पुरुष स्त्रीलिंग परामर्शक)| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | सा | ते | ताः |
| द्वितीया | ताम् | ते | ताः |
| तृतीया | तया | ताभ्याम् | ताभिः |
| चतुर्थी | तस्यै | ताभ्याम् | ताभ्यः |
| पञ्चमी | तस्याः | ताभ्याम् | ताभ्यः |
| षष्ठी | तस्याः | तयोः | तासाम् |
| सप्तमी | तस्याम् | तयोः | तासु |
५. तद् (वह) - नपुंसकलिंग शब्द रूप
(👉 प्रथमा-द्वितीया भिन्न, तृतीया से सप्तमी तक पुल्लिंगवत्)| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | तत् / तद् | ते | तानि |
| द्वितीया | तत् / तद् | ते | तानि |
| तृतीया | तेन | ताभ्याम् | तैः |
| चतुर्थी | तस्मै | ताभ्याम् | तेभ्यः |
| पञ्चमी | तस्मात् | ताभ्याम् | तेभ्यः |
| षष्ठी | तस्य | तयोः | तेषाम् |
| सप्तमी | तस्मिन् | तयोः | तेषु |
६. एतद् (यह) - पुल्लिंग शब्द रूप
(👉 समीपस्थ परामर्शक - कोष्ठक में 'एन' अन्वादेश रूप)| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | एषः | एतौ | एते |
| द्वितीया | एतम् (एनम्) | एतौ (एनौ) | एतान् (एनान्) |
| तृतीया | एतेन (एनेन) | एताभ्याम् | एतैः |
| चतुर्थी | एतस्मै | एताभ्याम् | एतेभ्यः |
| पञ्चमी | एतस्मात् | एताभ्याम् | एतेभ्यः |
| षष्ठी | एतस्य | एतयोः (एनयोः) | एतेषाम् |
| सप्तमी | एतस्मिन् | एतयोः (एनयोः) | एतेषु |
७. एतद् (यह) - स्त्रीलिंग शब्द रूप
(👉 समीपस्थ स्त्री परामर्शक - कोष्ठक में 'एन' अन्वादेश रूप)| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | एषा | एते | एताः |
| द्वितीया | एताम् (एनाम्) | एते (एने) | एताः (एनाः) |
| तृतीया | एतया (एनया) | एताभ्याम् | एताभिः |
| चतुर्थी | एतस्यै | एताभ्याम् | एताभ्यः |
| पञ्चमी | एतस्याः | एताभ्याम् | एताभ्यः |
| षष्ठी | एतस्याः | एतयोः (एनयोः) | एतासाम् |
| सप्तमी | एतस्याम् | एतयोः (एनयोः) | एतासु |
८. एतद् (यह) - नपुंसकलिंग शब्द रूप
(👉 समीपस्थ नपुंसकलिंग परामर्शक)| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | एतत् / एतद् | एते (एने) | एतानि (एनानि) |
| द्वितीया | एतत् / एतद् (एनत्/एनद्) | एते (एने) | एतानि (एनानि) |
| तृतीया | एतेन (एनेन) | एताभ्याम् | एतैः |
| चतुर्थी | एतस्मै | एताभ्याम् | एतेभ्यः |
| पञ्चमी | एतस्मात् | एताभ्याम् | एतेभ्यः |
| षष्ठी | एतस्य | एतयोः (एनयोः) | एतेषाम् |
| सप्तमी | एतस्मिन् | एतयोः (एनयोः) | एतेषु |
९. इदम् (यह) - पुल्लिंग शब्द रूप
(👉 'अयम्' आदि रूप - कोष्ठक में 'एन' अन्वादेश रूप)| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | अयम् | इमौ | इमे |
| द्वितीया | इमम् (एनम्) | इमौ (एनौ) | इमान् (एनान्) |
| तृतीया | अनेन (एनेन) | आभ्याम् | एभिः |
| चतुर्थी | अस्मै | आभ्याम् | एभ्यः |
| पञ्चमी | अस्मात् | आभ्याम् | एभ्यः |
| षष्ठी | अस्य | अनयोः (एनयोः) | एषाम् |
| सप्तमी | अस्मिन् | अनयोः (एनयोः) | एषु |
१०. इदम् (यह) - स्त्रीलिंग शब्द रूप
(👉 'इयम्' आदि रूप - कोष्ठक में 'एन' अन्वादेश रूप)| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | इयम् | इमे | इमाः |
| द्वितीया | इमाम् (एनाम्) | इमे (एने) | इमाः (एनाः) |
| तृतीया | अनया (एनया) | आभ्याम् | आभिः |
| चतुर्थी | अस्यै | आभ्याम् | आभ्यः |
| पञ्चमी | अस्याः | आभ्याम् | आभ्यः |
| षष्ठी | अस्याः | अनयोः (एनयोः) | आसाम् |
| सप्तमी | अस्याम् | अनयोः (एनयोः) | आसु |
११. इदम् (यह) - नपुंसकलिंग शब्द रूप
(👉 प्रथमा-द्वितीया भिन्न, तृतीया से पुल्लिंगवत्)| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | इदम् | इमे (एने) | इमानि (एनानि) |
| द्वितीया | इदम् (एनत्/एनद्) | इमे (एने) | इमानि (एनानि) |
| तृतीया | अनेन (एनेन) | आभ्याम् | एभिः |
| चतुर्थी | अस्मै | आभ्याम् | एभ्यः |
| पञ्चमी | अस्मात् | आभ्याम् | एभ्यः |
| षष्ठी | अस्य | अनयोः (एनयोः) | एषाम् |
| सप्तमी | अस्मिन् | अनयोः (एनयोः) | एषु |
१२. अदस् (वह विप्रकृष्ट/परोक्ष) - पुल्लिंग शब्द रूप
(👉 'असौ, अमू, अमी' - पाणिनीय मुत्व विधान)| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | असौ | अमू | अमी |
| द्वितीया | अमूम् | अमू | अमूनन् |
| तृतीया | अमुना | अमूभ्याम् | अमीभिः |
| चतुर्थी | अमुष्मै | अमूभ्याम् | अमीभ्यः |
| पञ्चमी | अमुष्मात् | अमूभ्याम् | अमीभ्यः |
| षष्ठी | अमुष्य | अमुयोः | अमीषाम् |
| सप्तमी | अमुष्मिन् | अमुयोः | अमीषु |
१३. अदस् (वह विप्रकृष्ट/परोक्ष) - स्त्रीलिंग शब्द रूप
(👉 'असौ, अमू, अमूः' विशिष्ट रूपावली)| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | असौ | अमू | अमूः |
| द्वितीया | अमूम् | अमू | अमूः |
| तृतीया | अमुया | अमूभ्याम् | अमूभिः |
| चतुर्थी | अमुष्यै | अमूभ्याम् | अमूभ्यः |
| पञ्चमी | अमुष्याः | अमूभ्याम् | अमूभ्यः |
| षष्ठी | अमुष्याः | अमुयोः | अमूषाम् |
| सप्तमी | अमुष्याम् | अमुयोः | अमूषु |
१४. अदस् (वह विप्रकृष्ट/परोक्ष) - नपुंसकलिंग शब्द रूप
(👉 प्रथमा-द्वितीया भिन्न, तृतीया से पुल्लिंगवत्)| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | अदः | अमू | अमूनि |
| द्वितीया | अदः | अमू | अमूनि |
| तृतीया | अमुना | अमूभ्याम् | अमीभिः |
| चतुर्थी | अमुष्मै | अमूभ्याम् | अमीभ्यः |
| पञ्चमी | अमुष्मात् | अमूभ्याम् | अमीभ्यः |
| षष्ठी | अमुष्य | अमुयोः | अमीषाम् |
| सप्तमी | अमुष्मिन् | अमुयोः | अमीषु |
१५. यद् (जो / जिस) - पुल्लिंग शब्द रूप
(👉 सम्बन्धवाचक सर्वनाम पुल्लिंग)| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | यः | यौ | ये |
| द्वितीया | यम् | यौ | यान् |
| तृतीया | येन | याभ्याम् | यैः |
| चतुर्थी | यस्मै | याभ्याम् | येभ्यः |
| पञ्चमी | यस्मात् | याभ्याम् | येभ्यः |
| षष्ठी | यस्य | ययोः | येषाम् |
| सप्तमी | यस्मिन् | ययोः | येषु |
१६. यद् (जो / जिस) - स्त्रीलिंग शब्द रूप
(👉 सम्बन्धवाचक सर्वनाम स्त्रीलिंग)| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | या | ये | याः |
| द्वितीया | याम् | ये | याः |
| तृतीया | यया | याभ्याम् | याभिः |
| चतुर्थी | यस्यै | याभ्याम् | याभ्यः |
| पञ्चमी | यस्याः | याभ्याम् | याभ्यः |
| षष्ठी | यस्याः | ययोः | यासाम् |
| सप्तमी | यस्याम् | ययोः | यासु |
१७. यद् (जो) - नपुंसकलिंग शब्द रूप
(👉 सम्बन्धवाचक सर्वनाम नपुंसकलिंग)| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | यत् / यद् | ये | यानि |
| द्वितीया | यत् / यद् | ये | यानि |
| तृतीया | येन | याभ्याम् | यैः |
| चतुर्थी | यस्मै | याभ्याम् | येभ्यः |
| पञ्चमी | यस्मात् | याभ्याम् | येभ्यः |
| षष्ठी | यस्य | ययोः | येषाम् |
| सप्तमी | यस्मिन् | ययोः | येषु |
१८. किम् (कौन / किस) - पुल्लिंग शब्द रूप
(👉 प्रश्नवाचक सर्वनाम पुल्लिंग - 'क' आदेश)| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | कः | कौ | के |
| द्वितीया | कम् | कौ | कान् |
| तृतीया | केन | काभ्याम् | कैः |
| चतुर्थी | कस्मै | काभ्याम् | केभ्यः |
| पञ्चमी | कस्मात् | काभ्याम् | केभ्यः |
| षष्ठी | कस्य | कयोः | केषाम् |
| सप्तमी | कस्मिन् | कयोः | केषु |
१९. किम् (कौन / किस) - स्त्रीलिंग शब्द रूप
(👉 प्रश्नवाचक सर्वनाम स्त्रीलिंग)| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | का | के | काः |
| द्वितीया | काम् | के | काः |
| तृतीया | कया | काभ्याम् | काभिः |
| चतुर्थी | कस्यै | काभ्याम् | काभ्यः |
| पञ्चमी | कस्याः | काभ्याम् | काभ्यः |
| षष्ठी | कस्याः | कयोः | कासाम् |
| सप्तमी | कस्याम् | कयोः | कासु |
२०. किम् (क्या / कौन) - नपुंसकलिंग शब्द रूप
(👉 प्रश्नवाचक सर्वनाम नपुंसकलिंग)| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | किम् | के | कानि |
| द्वितीया | किम् | के | कानि |
| तृतीया | केन | काभ्याम् | कैः |
| चतुर्थी | कस्मै | काभ्याम् | केभ्यः |
| पञ्चमी | कस्मात् | काभ्याम् | केभ्यः |
| षष्ठी | कस्य | कयोः | केषाम् |
| सप्तमी | कस्मिन् | कयोः | केषु |
२१. सर्व (सब / समस्त) - पुल्लिंग शब्द रूप
(👉 सर्वादिगण का मुख्य आदर्श रूप)| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | सर्वः | सर्वौ | सर्वे |
| द्वितीया | सर्वम् | सर्वौ | सर्वान् |
| तृतीया | सर्वेण | सर्वाभ्याम् | सर्वैः |
| चतुर्थी | सर्वस्मै | सर्वाभ्याम् | सर्वेभ्यः |
| पञ्चमी | सर्वस्मात् | सर्वाभ्याम् | सर्वेभ्यः |
| षष्ठी | सर्वस्य | सर्वयोः | सर्वेषाम् |
| सप्तमी | सर्वस्मिन् | सर्वयोः | सर्वेषु |
२२. सर्व (सब / समस्त) - स्त्रीलिंग शब्द रूप
(👉 'स्याट्' आगम युक्त रूप)| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | सर्वा | सर्वे | सर्वाः |
| द्वितीया | सर्वाम् | सर्वे | सर्वाः |
| तृतीया | सर्वया | सर्वाभ्याम् | सर्वाभिः |
| चतुर्थी | सर्वस्यै | सर्वाभ्याम् | सर्वाभ्यः |
| पञ्चमी | सर्वस्याः | सर्वाभ्याम् | सर्वाभ्यः |
| षष्ठी | सर्वस्याः | सर्वयोः | सर्वासाम् |
| सप्तमी | सर्वस्याम् | सर्वयोः | सर्वासु |
२३. सर्व (सब / समस्त) - नपुंसकलिंग शब्द रूप
(👉 प्रथमा-द्वितीया भिन्न, तृतीया से पुल्लिंगवत्)| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | सर्वम् | सर्वे | सर्वाणि |
| द्वितीया | सर्वम् | सर्वे | सर्वाणि |
| तृतीया | सर्वेण | सर्वाभ्याम् | सर्वैः |
| चतुर्थी | सर्वस्मै | सर्वाभ्याम् | सर्वेभ्यः |
| पञ्चमी | सर्वस्मात् | सर्वाभ्याम् | सर्वेभ्यः |
| षष्ठी | सर्वस्य | सर्वयोः | सर्वेषाम् |
| सप्तमी | सर्वस्मिन् | सर्वयोः | सर्वेषु |
२४. अन्य (दूसरा / भिन्न) - पुल्लिंग शब्द रूप
(👉 सर्ववत् रूपावली)| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | अन्यः | अन्यौ | अन्ये |
| द्वितीया | अन्यम् | अन्यौ | अन्यन् |
| तृतीया | अन्येन | अन्याभ्याम् | अन्यैः |
| चतुर्थी | अन्यस्मै | अन्याभ्याम् | अन्येभ्यः |
| पञ्चमी | अन्यस्मात् | अन्याभ्याम् | अन्येभ्यः |
| षष्ठी | अन्यस्य | अन्ययोः | अन्येषाम् |
| सप्तमी | अन्यस्मिन् | अन्ययोः | अन्येषु |
२५. अन्य (दूसरा) - नपुंसकलिंग शब्द रूप
(👉 सूत्र "अद्दड्डतर..." से १व. में 'अन्यत्/अन्यद्')| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | अन्यत् / अन्यद् | अन्ये | अन्यानि |
| द्वितीया | अन्यत् / अन्यद् | अन्ये | अन्यानि |
| तृतीया | अन्येन | अन्याभ्याम् | अन्यैः |
| चतुर्थी | अन्यस्मै | अन्याभ्याम् | अन्येभ्यः |
| पञ्चमी | अन्यस्मात् | अन्याभ्याम् | अन्येभ्यः |
| षष्ठी | अन्यस्य | अन्ययोः | अन्येषाम् |
| सप्तमी | अन्यस्मिन् | अन्ययोः | अन्येषु |
२६. उभ (दोनों) - नित्य द्विवचनान्त शब्द रूप
(👉 इसका एकवचन व बहुवचन नहीं होता - केवल द्विवचन)| विभक्ति | पुल्लिंग | स्त्रीलिंग | नपुंसकलिंग |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | उभौ | उभे | उभे |
| द्वितीया | उभौ | उभे | उभे |
| तृतीया | उभाभ्याम् | उभाभ्याम् | उभाभ्याम् |
| चतुर्थी | उभाभ्याम् | उभाभ्याम् | उभाभ्याम् |
| पञ्चमी | उभाभ्याम् | उभाभ्याम् | उभाभ्याम् |
| षष्ठी | उभयोः | उभयोः | उभयोः |
| सप्तमी | उभयोः | उभयोः | उभयोः |
