📖 ऊकारान्त शब्दरूप : पाणिनीय व्याकरणिक रहस्य एवं सूत्र
जिस प्रातिपदिक (मूल शब्द) के वर्ण-विच्छेद के अन्त में दीर्घ 'ऊ' स्वर आता है, उसे ऊकारान्त कहते हैं (यथा: वधू = व् + अ + ध् + ऊ | भू = भ् + ऊ | खलपू = ख् + अ + ल् + अ + प् + ऊ)।
१. ऊकारान्त स्त्रीलिंग के मुख्य पाणिनीय सूत्र
सूत्र १: "यू स्त्र्याख्यौ नदी" (अष्टाध्यायी १.४.३) — नित्य नदीसंज्ञा
नित्य स्त्रीलिंग में प्रयुक्त होने वाले दीर्घ ईकारान्त तथा दीर्घ ऊकारान्त शब्दों की 'नदी' संज्ञा होती है (जैसे: वधू, चमू, श्वश्रू आदि)। नदीसंज्ञक होने के कारण निम्नलिखित विशिष्ट कार्य होते हैं:
सूत्र २: "आटश्च" (६.१.९०), "ङेराम्नद्याम्नीभ्यः" (७.३.११६) एवं "ह्रस्वनद्यापो नुट्" (७.१.५४)
• ङित् विभक्तियों (चतुर्थी 'ङे', पञ्चमी 'ङसि', षष्ठी 'ङस्') में 'आट्' का आगम होकर वृद्धि होती है: वधू + ङे = वध्वै | वधू + ङसि = वध्वाः।
• सप्तमी एकवचन (ङि) में 'ङि' के स्थान पर 'आम्' आदेश होता है: वधू + ङि = वध्वाम्।
• षष्ठी बहुवचन (आम्) में नुट् (न्) का आगम होता है: वधू + नुट् + आम् = वधूनाम्।
सूत्र ३: "अम्बार्थनद्योर्ह्रस्वः" (७.३.१०७) — सम्बोधन में ह्रस्व
सम्बोधन एकवचन में नदीसंज्ञक शब्दों का दीर्घ 'ऊ' ह्रस्व 'उ' में बदल जाता है तथा 'सु' का लोप होकर विसर्ग नहीं लगता: हे वधु!, हे चमु!, हे श्वश्रु! (हे वधूः नहीं बनता)।
⚠️ स्त्रीलिंग का विशेष पाणिनीय अपवाद — भू, भ्रू आदि (उवङ् एवं विकल्प नदीसंज्ञा):
सूत्र "नेयङुवङ्स्थानावस्त्री" (१.४.४) एवं "वामि" (१.४.५): 'भू' तथा 'भ्रू' शब्दों में यण् के स्थान पर 'उवङ्' (उव्) आदेश होता है (भुवौ, भुवः)। साथ ही ङित् विभक्तियों में नदीसंज्ञा विकल्प से होती है, जिससे दो-दो रूप बनते हैं:
चतुर्थी (१व.): भुवै (नदी-पक्ष) / भुवे (अनदी-पक्ष)
पञ्चमी/षष्ठी (१व.): भुवाः (नदी-पक्ष) / भुवः (अनदी-पक्ष)
सप्तमी (१व.): भुवाम् (नदी-पक्ष) / भुवि (अनदी-पक्ष)
षष्ठी (बहु.): भूनाम् (नदी-पक्ष) / भुवाम् (अनदी-पक्ष)
२. ऊकारान्त पुंल्लिङ्ग के विशेष नियम (यण्, उवङ् एवं वार्तिक भेद)
सूत्र ४: "ओः सुपि" (६.४.८३) — धातुज में यण् आदेश (खलपू वर्ग)
अनेकाच् धातुज ऊकारान्त पुंल्लिङ्ग शब्दों (जैसे: खलपू = खल + पूङ् धातु) में अजादि सुप् परे होने पर यण् (व्) आदेश होता है: खलपू + औ = खलप्वौ | खलपू + जस् = खलप्वः | खलपू + ङि = खलप्वि।
द्वितीया बहुवचन में पूर्वसवर्णदीर्घ का बाध होने से 'शसो नः पुंसि' नहीं लगता, अतः खलप्वः रूप ही बनता है।
सूत्र ५: "अचि श्नुधातुब्रुवां य्वो रियङुवङौ" (६.४.७७) — प्रतिभू व स्वयम्भू में उवङ्
'भू' धातु से बने पुंल्लिङ्ग शब्दों (प्रतिभू, स्वयम्भू आदि) में यण् न होकर उवङ् (उव्) आदेश होता है: प्रतिभुवौ, प्रतिभुवः, प्रतिभुवा, प्रतिभुवि।
⚠️ पुंल्लिङ्ग के दो सबसे बड़े पाणिनीय अपवाद (वर्षाभू एवं हूहू):
• वार्तिक "वर्षाभ्वश्च": 'वर्षाभू' (मेंढक) शब्द में अजादि विभक्तियों में उवङ् के स्थान पर 'औ' आदेश होता है: वर्षाभू + औ = वर्षाभौ | वर्षाभू + जस् = वर्षाभवः | वर्षाभू + ङि = वर्षाभवि।
• हूहू (गन्धर्व): यह धातुज नहीं अपितु अव्युत्पन्न प्रातिपदिक है। अतः द्वितीया बहुवचन में पूर्वसवर्णदीर्घ और नत्व होकर हूहून् बनता है।
३. ऊकारान्त नपुंसकलिंग के नियम
सूत्र ६: "ह्रस्वो नपुंसके प्रातिपदिकस्य" (१.२.४७) — नित्य ह्रस्व विधान
नपुंसकलिंग में किसी भी दीर्घ ऊकारान्त प्रातिपदिक को नित्य ह्रस्व 'उ' हो जाता है (जैसे: अतिचमू ➔ अतिचमु कुलम्)। ह्रस्व होने के उपरान्त इसके समस्त रूप 'मधु' के समान चलते हैं: प्रथमा/द्वितीया = अतिचमु, अतिचमुनी, अतिचमूनि।
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | वधूः | वध्वौ | वध्वः |
| द्वितीया | वधूम् | वध्वौ | वधूः |
| तृतीया | वध्वा | वधूभ्याम् | वधूभिः |
| चतुर्थी | वध्वै | वधूभ्याम् | वधूभ्यः |
| पञ्चमी | वध्वाः | वधूभ्याम् | वधूभ्यः |
| षष्ठी | वध्वाः | वध्वोः | वधूनाम् |
| सप्तमी | वध्वाम् | वध्वोः | वधुषु |
| सम्बोधन | हे वधु | हे वध्वौ | हे वध्वः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | चमूः | चम्वौ | चम्वः |
| द्वितीया | चमूम् | चम्वौ | चमूः |
| तृतीया | चम्वा | चमूभ्याम् | चमूभिः |
| चतुर्थी | चम्वै | चमूभ्याम् | चमूभ्यः |
| पञ्चमी | चम्वाः | चमूभ्याम् | चमूभ्यः |
| षष्ठी | चम्वाः | चम्वोः | चमूनाम् |
| सप्तमी | चम्वाम् | चम्वोः | चमूषु |
| सम्बोधन | हे चमु | हे चम्वौ | हे चम्वः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | श्वश्रूः | श्वश्र्वौ | श्वश्र्वः |
| द्वितीया | श्वश्रूम | श्वश्र्वौ | श्वश्रूः |
| तृतीया | श्वश्र्वा | श्वश्रूभ्याम् | श्वश्रूभिः |
| चतुर्थी | श्वश्र्वै | श्वश्रूभ्याम् | श्वश्रूभ्यः |
| पञ्चमी | श्वश्र्वाः | श्वश्रूभ्याम् | श्वश्रूभ्यः |
| षष्ठी | श्वश्र्वाः | श्वश्र्वोः | श्वश्रूणाम् |
| सप्तमी | श्वश्र्वाम् | श्वश्र्वोः | श्वश्रूषु |
| सम्बोधन | हे श्वश्रु | हे श्वश्र्वौ | हे श्वश्र्वः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | तनूः | तन्वौ | तन्वः |
| द्वितीया | तनूम् | तन्वौ | तनूः |
| तृतीया | तन्वा | तनूभ्याम् | तनूभिः |
| चतुर्थी | तन्वै | तनूभ्याम् | तनूभ्यः |
| पञ्चमी | तन्वाः | तनूभ्याम् | तनूभ्यः |
| षष्ठी | तन्वाः | तन्वोः | तनूनाम् |
| सप्तमी | तन्वाम् | तन्वोः | तनूषु |
| सम्बोधन | हे तनु | हे तन्वौ | हे तन्वः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | सरयूः | सरय्वौ | सरय्वः |
| द्वितीया | सरयूम | सरय्वौ | सरयूः |
| तृतीया | सरय्वा | सरयूभ्याम् | सरयूभिः |
| चतुर्थी | सरय्वै | सरयूभ्याम् | सरयूभ्यः |
| पञ्चमी | सरय्वाः | सरयूभ्याम् | सरयूभ्यः |
| षष्ठी | सरय्वाः | सरय्वोः | सरयूणाम् |
| सप्तमी | सरय्वाम् | सरय्वोः | सरयूषु |
| सम्बोधन | हे सरयु | हे सरय्वौ | हे सरय्वः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | जम्बूः | जम्ब्वौ | जम्ब्वः |
| द्वितीया | जम्बूम | जम्ब्वौ | जम्बूः |
| तृतीया | जम्ब्वा | जम्बूभ्याम् | जम्बूभिः |
| चतुर्थी | जम्ब्वै | जम्बूभ्याम् | जम्बूभ्यः |
| पञ्चमी | जम्ब्वाः | जम्बूभ्याम् | जम्बूभ्यः |
| षष्ठी | जम्ब्वाः | जम्ब्वोः | जम्बूनाम् |
| सप्तमी | जम्ब्वाम् | जम्ब्वोः | जम्बूषु |
| सम्बोधन | हे जम्बु | हे जम्ब्वौ | हे जम्ब्वः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | कर्कन्धूः | कर्कन्ध्वौ | कर्कन्ध्वः |
| द्वितीया | कर्कन्धूम | कर्कन्ध्वौ | कर्कन्धूः |
| तृतीया | कर्कन्ध्वा | कर्कन्धूभ्याम् | कर्कन्धूभिः |
| चतुर्थी | कर्कन्ध्वै | कर्कन्धूभ्याम् | कर्कन्धूभ्यः |
| पञ्चमी | कर्कन्ध्वाः | कर्कन्धूभ्याम् | कर्कन्धूभ्यः |
| षष्ठी | कर्कन्ध्वाः | कर्कन्ध्वोः | कर्कन्धूनाम् |
| सप्तमी | कर्कन्ध्वाम् | कर्कन्ध्वोः | कर्कन्धूषु |
| सम्बोधन | हे कर्कन्धु | हे कर्कन्ध्वौ | हे कर्कन्ध्वः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | अलम्बूः | अलम्ब्वौ | अलम्ब्वः |
| द्वितीया | अलम्बूम | अलम्ब्वौ | अलम्बूः |
| तृतीया | अलम्ब्वा | अलम्बूभ्याम् | अलम्बूभिः |
| चतुर्थी | अलम्ब्वै | अलम्बूभ्याम् | अलम्बूभ्यः |
| पञ्चमी | अलम्ब्वाः | अलम्बूभ्याम् | अलम्बूभ्यः |
| षष्ठी | अलम्ब्वाः | अलम्ब्वोः | अलम्बूनाम् |
| सप्तमी | अलम्ब्वाम् | अलम्ब्वोः | अलम्बूषु |
| सम्बोधन | हे अलम्बु | हे अलम्ब्वौ | हे अलम्ब्वः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | भूः | भुवौ | भुवः |
| द्वितीया | भुवम् | भुवौ | भुवः |
| तृतीया | भुवा | भूभ्याम् | भूभिः |
| चतुर्थी | भुवै / भुवे | भूभ्याम् | भूभ्यः |
| पञ्चमी | भुवाः / भुवः | भूभ्याम् | भूभ्यः |
| षष्ठी | भुवाः / भुवः | भुवोः | भूनाम् / भुवाम् |
| सप्तमी | भुवाम् / भुवि | भुवोः | भूषु |
| सम्बोधन | हे भूः | हे भुवौ | हे भुवः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | भ्रूः | भ्रुवौ | भ्रुवः |
| द्वितीया | भ्रुवम् | भ्रुवौ | भ्रुवः |
| तृतीया | भ्रुवा | भ्रूभ्याम् | भ्रूभिः |
| चतुर्थी | भ्रुवै / भ्रुवे | भ्रूभ्याम् | भ्रूभ्यः |
| पञ्चमी | भ्रुवाः / भ्रुवः | भ्रूभ्याम् | भ्रूभ्यः |
| षष्ठी | भ्रुवाः / भ्रुवः | भ्रुवोः | भ्रूणाम् / भ्रुवाम् |
| सप्तमी | भ्रुवाम् / भ्रुवि | भ्रुवोः | भ्रूषु |
| सम्बोधन | हे भ्रूः | हे भ्रुवौ | हे भ्रुवः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | पुनर्भूः | पुनर्भ्वौ | पुनर्भ्वः |
| द्वितीया | पुनर्भूम् | पुनर्भ्वौ | पुनर्भूः |
| तृतीया | पुनर्भ्वा | पुनर्भूभ्याम् | पुनर्भूभिः |
| चतुर्थी | पुनर्ध्वै | पुनर्भूभ्याम् | पुनर्भूभ्यः |
| पञ्चमी | पुनर्ध्वाः | पुनर्भूभ्याम् | पुनर्भूभ्यः |
| षष्ठी | पुनर्ध्वाः | पुनर्ध्वोः | पुनर्भूणाम् |
| सप्तमी | पुनर्ध्वाम् | पुनर्ध्वोः | पुनर्भूषु |
| सम्बोधन | हे पुनर्भु | हे पुनर्भ्वौ | हे पुनर्भ्वः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | खलपूः | खलप्वौ | खलप्वः |
| द्वितीया | खलप्वम् | खलप्वौ | खलप्वः |
| तृतीया | खलप्वा | खलपूभ्याम् | खलपूभिः |
| चतुर्थी | खलप्वे | खलपूभ्याम् | खलपूभ्यः |
| पञ्चमी | खलप्वः | खलपूभ्याम् | खलपूभ्यः |
| षष्ठी | खलप्वः | खलप्वोः | खलप्वाम् |
| सप्तमी | खलप्वि | खलप्वोः | खलपूषु |
| सम्बोधन | हे खलपूः | हे खलप्वौ | हे खलप्वः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | सुलूः | सुल्वौ | सुल्वः |
| द्वितीया | सुल्वम् | सुल्वौ | सुल्वः |
| तृतीया | सुल्वा | सुलूभ्याम् | सुलूभिः |
| चतुर्थी | सुल्वे | सुलूभ्याम् | सुलूभ्यः |
| पञ्चमी | सुल्वह | सुल्वः | सुलूभ्याम् | सुलूभ्यः |
| षष्ठी | सुल्वः | सुल्वोः | सुल्वाम् |
| सप्तमी | सुल्वि | सुल्वोः | सुलूषु |
| सम्बोधन | हे सुलूः | हे सुल्वौ | हे सुल्वः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | प्रतिभूः | प्रतिभुवौ | प्रतिभुवः |
| द्वितीया | प्रतिभुवम् | प्रतिभुवौ | प्रतिभुवः |
| तृतीया | प्रतिभुवा | प्रतिभूभ्याम् | प्रतिभूभिः |
| चतुर्थी | प्रतिभुवे | प्रतिभूभ्याम् | प्रतिभूभ्यः |
| पञ्चमी | प्रतिभुवः | प्रतिभूभ्याम् | प्रतिभूभ्यः |
| षष्ठी | प्रतिभुवः | प्रतिभुवोः | प्रतिभुवाम् |
| सप्तमी | प्रतिभुवि | प्रतिभुवोः | प्रतिभूषु |
| सम्बोधन | हे प्रतिभूः | हे प्रतिभुवौ | हे प्रतिभुवः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | स्वयम्भूः | स्वयम्भुवौ | स्वयम्भुवः |
| द्वितीया | स्वयम्भुवम् | स्वयम्भुवौ | स्वयम्भुवः |
| तृतीया | स्वयम्भुवा | स्वयम्भूभ्याम् | स्वयम्भूभिः |
| चतुर्थी | स्वयम्भुवे | स्वयम्भूभ्याम् | स्वयम्भूभ्यः |
| पञ्चमी | स्वयम्भुवः | स्वयम्भूभ्याम् | स्वयम्भूभ्यः |
| षष्ठी | स्वयम्भुवः | स्वयम्भुवोः | स्वयम्भुवाम् |
| सप्तमी | स्वयम्भुवि | स्वयम्भुवोः | स्वयम्भूषु |
| सम्बोधन | हे स्वयम्भूः | हे स्वयम्भुवौ | हे स्वयम्भुवः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | वर्षाभूः | वर्षाभौ | वर्षाभवः |
| द्वितीया | वर्षाभवम् | वर्षाभौ | वर्षाभवः |
| तृतीया | वर्षाभवा | वर्षाभूभ्याम् | वर्षाभूभिः |
| चतुर्थी | वर्षाभवे | वर्षाभूभ्याम् | वर्षाभूभ्यः |
| पञ्चमी | वर्षाभवः | वर्षाभूभ्याम् | वर्षाभूभ्यः |
| षष्ठी | वर्षाभवः | वर्षाभवोः | वर्षाभवाम् |
| सप्तमी | वर्षाभवि | वर्षाभवोः | वर्षाभूषु |
| सम्बोधन | हे वर्षाभूः | हे वर्षाभौ | हे वर्षाभवः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | हूहूः | हूह्वौ | हूह्वः |
| द्वितीया | हूहूम | हूह्वौ | हूहून् |
| तृतीया | हूह्वा | हूहूभ्याम् | हूहूभिः |
| चतुर्थी | हूह्वे | हूहूभ्याम् | हूहूभ्यः |
| पञ्चमी | हूह्वः | हूहूभ्याम् | हूहूभ्यः |
| षष्ठी | हूह्वः | हूह्वोः | हूह्वाम् |
| सप्तमी | हूह्वि | हूह्वोः | हूहूषु |
| सम्बोधन | हे हूहूः | हे हूह्वौ | हे हूह्वः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | दृन्भूः | दृन्भुवौ | दृन्भुवः |
| द्वितीया | दृन्भुवम् | दृन्भुवौ | दृन्भुवः |
| तृतीया | दृन्भुवा | दृन्भूभ्याम् | दृन्भूभिः |
| चतुर्थी | दृन्भुवे | दृन्भूभ्याम् | दृन्भूभ्यः |
| पञ्चमी | दृन्भुवः | दृन्भूभ्याम् | दृन्भूभ्यः |
| षष्ठी | दृन्भुवः | दृन्भुवोः | दृन्भुवाम् |
| सप्तमी | दृन्भुवि | दृन्भुवोः | दृन्भूषु |
| सम्बोधन | हे दृन्भूः | हे दृन्भुवौ | हे दृन्भुवः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | करभूः | करभ्वौ | करभ्वः |
| द्वितीया | करभ्वम् | करभ्वौ | करभ्वः |
| तृतीया | करभ्वा | करभूभ्याम् | करभूभिः |
| चतुर्थी | करभ्वे | करभूभ्याम् | करभूभ्यः |
| पञ्चमी | करभ्वः | करभूभ्याम् | करभूभ्यः |
| षष्ठी | करभ्वः | करभ्वोः | करभ्वाम् |
| सप्तमी | करभ्वि | करभ्वोः | करभूषु |
| सम्बोधन | हे करभूः | हे करभ्वौ | हे करभ्वः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | अतिचमु | अतिचमुनी | अतिचमूनि |
| द्वितीया | अतिचमु | अतिचमुनी | अतिचमूनि |
| तृतीया | अतिचमुना | अतिचमुभ्याम् | अतिचमुभिः |
| चतुर्थी | अतिचमुने | अतिचमुभ्याम् | अतिचमुभ्यः |
| पञ्चमी | अतिचमुनः | अतिचमुभ्याम् | अतिचमुभ्यः |
| षष्ठी | अतिचमुनः | अतिचमुनोः | अतिचमूनाम् |
| सप्तमी | अतिचमुनि | अतिचमुनोः | अतिचमुषु |
| सम्बोधन | हे अतिचमो / हे अतिचमु | हे अतिचमुनी | हे अतिचमूनि |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | अतिवधु | अतिवधुनी | अतिवधूनि |
| द्वितीया | अतिवधु | अतिवधुनी | अतिवधूनि |
| तृतीया | अतिवधुना | अतिवधुभ्याम् | अतिवधुभिः |
| चतुर्थी | अतिवधुने | अतिवधुभ्याम् | अतिवधुभ्यः |
| पञ्चमी | अतिवधुनः | अतिवधुभ्याम् | अतिवधुभ्यः |
| षष्ठी | अतिवधुनः | अतिवधुनोः | अतिवधूनाम् |
| सप्तमी | अतिवधुनि | अतिवधुनोः | अतिवधुषु |
| सम्बोधन | हे अतिवधो / हे अतिवधु | हे अतिवधुनी | हे अतिवधूनि |