लोकोक्तियाँ,कहावतें -अर्थ एवं वाक्य-प्रयोग

चन्द्र देव त्रिपाठी 'अतुल'
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॥ श्रीसरस्वत्यै नमः • डिजिटल ग्रन्थालय ॥

350 महत्वपूर्ण हिन्दी एवं संस्कृत लोकोक्तियाँ (कहावतें)

सम्पूर्ण संकलन • प्रामाणिक अर्थ • सटीक वाक्य-प्रयोग

📖 लोकोक्तियाँ: 350 🎯 लक्ष्य: सभी प्रतियोगी परीक्षाएँ ⚡ प्रारूप: अर्थ + वाक्य
क्र.
लोकोक्ति / कहावत
लोकोक्ति का अर्थ
वाक्य प्रयोग
01 अंधों में काना राजा
मूर्खों या अयोग्य व्यक्तियों के बीच अल्पज्ञानी का भी आदर होना
प्रयोग: उस अनपढ़ गाँव में दसवीं पास रामू का खूब मान-सम्मान है, सच है अंधों में काना राजा।
02 अधजल गगरी छलकत जाए
अल्पज्ञानी या ओछा व्यक्ति बहुत अधिक दिखावा करता है
प्रयोग: थोड़ी सी अंग्रेजी सीखकर वह विद्वान बनने का ढोंग करता है, इसे कहते हैं अधजल गगरी छलकत जाए।
03 अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता
अकेला व्यक्ति कोई बड़ा या व्यापक कार्य नहीं कर सकता
प्रयोग: समाज सुधार के लिए सबका सहयोग चाहिए, क्योंकि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता।
04 अपनी डफली अपना राग
परस्पर सामंजस्य न होना और सबका अपने-अपने मन की करना
प्रयोग: उस समिति में कोई साझा निर्णय नहीं हो पाता, वहाँ तो सब अपनी डफली अपना राग अलापते हैं।
05 आम के आम गुठलियों के दाम
दोहरा या चौतरफा लाभ प्राप्त होना
प्रयोग: अखबार पढ़कर ज्ञान भी मिला और रद्दी बेचकर पैसे भी, यह हुआ आम के आम गुठलियों के दाम।
06 उलटा चोर कोतवाल को डांटे
अपना अपराध स्वीकार करने के बजाय निर्दोष पर रौब गालिब करना
प्रयोग: उसने मेरी ही पुस्तक फाड़ दी और मुझ पर ही बिगड़ने लगा, इसे कहते हैं उलटा चोर कोतवाल को डांटे।
07 ऊँची दुकान फीका पकवान
केवल बाहरी दिखावा अधिक होना पर गुणवत्ता बिल्कुल नगण्य होना
प्रयोग: उस बड़े होटल का नाम बहुत सुना था, पर भोजन अत्यंत घटिया निकला, सच है ऊँची दुकान फीका पकवान।
08 एक अनार सौ बीमार
वस्तु अल्प होना और उसकी माँग या चाहने वाले बहुत अधिक होना
प्रयोग: दफ्तर में नौकरी का एक ही पद रिक्त है और आवेदन दस हजार आ गए, इसे कहते हैं एक अनार सौ बीमार।
09 कंगाली में आटा गीला
मुसीबत या विपत्ति में और अधिक संकट आ जाना
प्रयोग: पहले ही व्यापार में घाटा चल रहा था, ऊपर से दुकान में चोरी हो गई, कंगाली में आटा गीला हो गया।
10 कहाँ राजा भोज कहाँ गंगू तेली
दो सर्वथा असमान व्यक्तियों या स्तरों की तुलना करना
प्रयोग: उस अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक से इस तुच्छ नौसिखिए की तुलना मत करो, कहाँ राजा भोज कहाँ गंगू तेली।
11 खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे
लज्जित या पराजित होकर अकारण दूसरों पर अपना क्रोध निकालना
प्रयोग: मुकाबला हारने के बाद वह अंपायर पर बेबुनियाद आरोप लगाने लगा, सच है खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे।
12 घर का भेदी लंका ढाए
आपसी फूट या भीतरी गद्दार सर्वनाश का कारण बनता है
प्रयोग: कंपनी के गुप्त दस्तावेज उसके अपने साझेदार ने ही बेचे थे, सच कहा गया है घर का भेदी लंका ढाए।
13 चोर की दाढ़ी में तिनका
अपराधी सदा सशंकित, भयभीत और आत्मसचेत रहता है
प्रयोग: पुलिस के आते ही वह घबराकर मुँह छिपाने लगा, इसे कहते हैं चोर की दाढ़ी में तिनका।
14 जल में रहकर मगर से बैर
जिसके आश्रय में रहें उसी से शत्रुता मोल लेना मूर्खता है
प्रयोग: दफ्तर में नौकरी करनी है तो उच्चाधिकारी से विवाद मत करो, जल में रहकर मगर से बैर नहीं किया जाता।
15 जिसकी लाठी उसकी भैंस
संसार में बलवान और शक्तिशाली की ही विजय होती है
प्रयोग: दबंगों ने गरीब किसान की उपजाऊ जमीन पर जबरन कब्जा कर लिया, सच है जिसकी लाठी उसकी भैंस।
16 नाच न जाने आँगन टेढ़ा
अपनी अयोग्यता छिपाने के लिए साधनों या दूसरों में दोष निकालना
प्रयोग: गायन आता नहीं और माइक को खराब बता रहा है, इसे कहते हैं नाच न जाने आँगन टेढ़ा।
17 नेकी कर दरिया में डाल
भलाई करके बदले में उपकार या फल की आशा न रखना
प्रयोग: सच्चे समाजसेवी किसी पुरस्कार की चाह नहीं रखते, वे नेकी कर दरिया में डाल के सिद्धांत पर जीते हैं।
18 बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद
मूर्ख या अनभिज्ञ व्यक्ति उत्तम वस्तु के मूल्य को नहीं समझ सकता
प्रयोग: अज्ञानी के सामने शास्त्रीय संगीत का प्रदर्शन व्यर्थ है, बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद।
19 बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होय
बुरे कर्म करके अच्छे परिणाम की आशा करना सर्वथा व्यर्थ है
प्रयोग: साल भर पढ़ाई नहीं की और अब अच्छे अंकों की उम्मीद कर रहे हो, बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होय।
20 मान न मान मैं तेरा मेहमान
जबरदस्ती किसी के गले पड़ना या अनावश्यक रिश्तेदारी जोड़ना
प्रयोग: बिना बुलाए ही वह हर आयोजन में पहुँचकर बैठ जाता है, मान न मान मैं तेरा मेहमान।
21 मुख में राम बगल में छुरी
ऊपर से मित्रता या साधुता का ढोंग और भीतर से घातक कपट रखना
प्रयोग: उस चापलूस से सावधान रहना, वह मुख में राम बगल में छुरी रखकर बात करता है।
22 हाथी के दाँत खाने के और दिखाने के और
कथनी और करनी में भारी अंतर होना (दिखावा कुछ और वास्तविकता कुछ और)
प्रयोग: उस नेता के भाषणों पर विश्वास मत करो, उसके तो हाथी के दाँत खाने के और दिखाने के और हैं।
23 होनहार बिरवान के होत चीकने पात
प्रतिभाशाली और महान व्यक्तियों के लक्षण बचपन में ही प्रकट हो जाते हैं
प्रयोग: बालक की कुशाग्र बुद्धि देखकर गुरु जी ने कहा कि होनहार बिरवान के होत चीकने पात।
24 अंधा बांटे रेवड़ी फिर-फिर अपनों को दे
अधिकार मिलने पर केवल अपने सगे-संबंधियों को ही लाभ पहुँचाना
प्रयोग: प्रबंधक बनते ही उसने सारे महत्वपूर्ण पद अपने रिश्तेदारों को दे दिए, सच है अंधा बांटे रेवड़ी फिर अपनों को दे।
25 अटका बनिया देय उधार
मजबूरी या संकट में फँसने पर अनिच्छुक व्यक्ति भी सहायता करता है
प्रयोग: जब साहूकार का अपना काम फँसा तो उसने तुरंत ऋण स्वीकृत कर दिया, इसे कहते हैं अटका बनिया देय उधार।
26 अपनी करनी पार उतरनी
मनुष्य को अपने ही कर्मों के अनुसार सुख या दुःख का फल भोगना पड़ता है
प्रयोग: दूसरों को दोष देने से कोई लाभ नहीं, याद रखो कि अपनी करनी पार उतरनी।
27 आगे कुआँ पीछे खाई
दोनों ओर से भारी संकट या विपत्ति में घिर जाना
प्रयोग: इधर सच बोले तो नौकरी जाए, उधर झूठ बोले तो जेल, उसकी दशा आगे कुआँ पीछे खाई जैसी है।
28 आसमान से गिरा खजूर में अटका
एक बड़ी विपत्ति से छूटकर दूसरी नई विपत्ति में फँस जाना
प्रयोग: पुरानी नौकरी छूटी ही थी कि नई कंपनी में ताला लग गया, यह तो वही हुआ आसमान से गिरा खजूर में अटका।
29 आ बैल मुझे मार
जान-बूझकर अपने ऊपर अनावश्यक संकट या मुसीबत मोल लेना
प्रयोग: दबंगों के झगड़े में बीच में कूदना आ बैल मुझे मार के समान है।
30 आप भला तो जग भला
जो स्वयं अच्छा और सज्जन होता है, उसे सारा संसार अच्छा दिखाई देता है
प्रयोग: यदि तुम्हारा आचरण शुद्ध है तो कोई तुम्हारा अहित नहीं कर सकता, आप भला तो जग भला।
31 इतनी सी जान गज भर की जबान
अल्पायु या छोटे कद का होकर बहुत अधिक और ढिठाई से बोलना
प्रयोग: छोटा सा बच्चा बड़ों को आँखें दिखा रहा है, सच है इतनी सी जान गज भर की जबान।
32 ईंट का जवाब पत्थर से देना
शत्रु के दुस्साहस का अत्यधिक कठोरता और आक्रामकता से प्रत्युत्तर देना
प्रयोग: सीमा पर शत्रु की गोलाबारी का भारतीय सेना ने ईंट का जवाब पत्थर से दिया।
33 उलटे बाँस बरेली को
जहाँ जिस वस्तु की प्रचुरता हो, वहीं उसे बेचने या पहुँचाने का विपरीत कार्य करना
प्रयोग: विद्वानों के शहर में जाकर ज्ञान बघारना उलटे बाँस बरेली को भेजने जैसा है।
34 ऊँट के मुँह में जीरा
अत्यधिक आवश्यकता या भारी खुराक वाले को बहुत अल्प मात्रा में देना
प्रयोग: उस भारी भरकम पहलवान को एक रोटी देना ऊँट के मुँह में जीरा के समान है।
35 ऊँट किस करवट बैठता है
अनिश्चित परिणाम की प्रतीक्षा करना (देखें क्या निर्णय होता है)
प्रयोग: चुनाव में दोनों दलों में कड़ा मुकाबला है, मतगणना के बाद ही पता चलेगा कि ऊँट किस करवट बैठता है।
36 एक म्यान में दो तलवारें नहीं रह सकतीं
एक ही स्थान या अधिकार क्षेत्र में दो समान प्रबल सत्ताएँ नहीं टिक सकतीं
प्रयोग: संस्थान में दो समानांतर निदेशक नहीं हो सकते, क्योंकि एक म्यान में दो तलवारें नहीं रह सकतीं।
37 एक हाथ से ताली नहीं बजती
किसी भी झगड़े या विवाद में दोनों पक्षों का किसी न किसी रूप में दोष होता है
प्रयोग: केवल एक पक्ष को जिम्मेदार मत ठहराओ, समझ लो कि एक हाथ से ताली नहीं बजती।
38 ओखली में सिर दिया तो मूसलों का क्या डर
कठिन कार्य का संकल्प ले लेने के बाद आने वाली बाधाओं से भयभीत नहीं होना चाहिए
प्रयोग: जब देश सेवा का मार्ग चुन ही लिया है, तो कष्टों से क्या घबराना; ओखली में सिर दिया तो मूसलों का क्या डर।
39 कभी नाव गाड़ी पर, कभी गाड़ी नाव पर
जीवन में एक-दूसरे के सहयोग की आवश्यकता सदा बनी रहती है
प्रयोग: समय सबका बदलता है, कभी नाव गाड़ी पर होती है और कभी गाड़ी नाव पर।
40 कर भला तो हो भला
दूसरों का उपकार और भलाई करने वाले का अंततः स्वयं भी भला होता है
प्रयोग: सदा असहायों की मदद करो, ईश्वर तुम्हारा कल्याण करेगा; कर भला तो हो भला।
41 काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती
धोखेबाजी और छल-कपट का उपाय बार-बार सफल नहीं हो सकता
प्रयोग: तुम एक बार झूठ बोलकर बच गए, पर याद रखो कि काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती।
42 कोयले की दलाली में हाथ काले
बुरे और दुष्ट लोगों की संगति या व्यापार करने से बदनामी ही मिलती है
प्रयोग: तस्करों के साथ रहोगे तो जेल जाना ही पड़ेगा, सच है कोयले की दलाली में हाथ काले।
43 खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है
एक व्यक्ति को देखकर दूसरा व्यक्ति भी उसी के अनुरूप अपना आचरण बदलता है
प्रयोग: कक्षा में एक छात्र को पढ़ते देखकर दूसरा भी पढ़ने लगा, सच है खरबूजे को देख खरबूजा रंग बदलता है।
44 खोदा पहाड़ निकली चुहिया
अत्यधिक कठोर परिश्रम के बाद अत्यंत नगण्य और अल्प फल प्राप्त होना
प्रयोग: महीनों की भारी छानबीन के बाद भी पुलिस को कुछ खास न मिला, यह तो वही हुआ खोदा पहाड़ निकली चुहिया।
45 गंगा गए गंगादास, जमना गए जमनादास
सिद्धांतहीन और अवसरवादी व्यक्ति जो अवसर देखकर अपना पाला बदल ले
प्रयोग: उस नेता का कोई पक्का सिद्धांत नहीं है, वह तो गंगा गए गंगादास, जमना गए जमनादास है।
46 गुड़ खाए गुलगुलों से परहेज
बड़ा अनुचित कार्य स्वयं करना पर छोटी सी बात में झूठा ढोंग दिखाना
प्रयोग: लाखों की रिश्वत लेने वाला अधिकारी मिठाई लेने से मना करता है, सच है गुड़ खाए गुलगुलों से परहेज।
47 घर की मुर्गी दाल बराबर
सहजता से उपलब्ध गुणी वस्तु या व्यक्ति का कोई आदर न होना
प्रयोग: घर के योग्य डॉक्टर को छोड़कर लोग दूर शहर जाते हैं, सच है घर की मुर्गी दाल बराबर।
48 चमड़ी जाए पर दमड़ी न जाए
अत्यधिक कंजूस होना जो कष्ट सहकर भी एक पैसा खर्च न करे
प्रयोग: बीमार होने पर भी सेठ जी दवा नहीं खरीदते, उनका नियम है चमड़ी जाए पर दमड़ी न जाए।
49 चार दिन की चाँदनी फिर अंधेरी रात
सांसारिक सुख और वैभव अत्यंत अल्पकालिक होता है
प्रयोग: धन के नशे में मत इतराओ, यह तो चार दिन की चाँदनी फिर अंधेरी रात है।
50 चिराग तले अंधेरा
विद्वान या ज्ञानी के अत्यंत निकट रहकर भी अज्ञान का वास होना
प्रयोग: शिक्षा अधिकारी का अपना ही बेटा अनपढ़ रह गया, इसे कहते हैं चिराग तले अंधेरा।
51 छोटा मुँह बड़ी बात
अपनी योग्यता, पद या मर्यादा से बढ़कर बोलना
प्रयोग: वरिष्ठ अधिकारियों के निर्णय पर टिप्पणी करना मेरे लिए छोटा मुँह बड़ी बात होगी।
52 डूबते को तिनके का सहारा
घोर संकट के समय मिलने वाली थोड़ी सी भी सहायता बहुत बड़ा संबल बनती है
प्रयोग: बेरोजगारी के विकट दौर में मिली अंशकालिक नौकरी उसके लिए डूबते को तिनके का सहारा बनी।
53 ढाक के तीन पात
सदा एक ही जैसी स्थिति में रहना (कोई ठोस सुधार न होना)
प्रयोग: वर्षों की बातचीत और बैठकों के बाद भी नतीजा ढाक के तीन पात ही निकला।
54 तेते पाँव पसारिए जेती लांबी सौर
अपनी आय और सामर्थ्य के अनुसार ही व्यय करना चाहिए
प्रयोग: कर्ज के बोझ से बचना चाहते हो तो याद रखो, तेते पाँव पसारिए जेती लांबी सौर।
55 दूर के ढोल सुहावने
दूर से कोई वस्तु अत्यंत सुंदर और आकर्षक लगती है पर निकट जाने पर सच्चाई प्रकट होती है
प्रयोग: महानगरों की चकाचौंध दूर से अच्छी लगती है, सच है दूर के ढोल सुहावने होते हैं।
56 धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का
जिसका कहीं कोई निश्चित आश्रय या ठिकाना न हो (त्रिशंकु जैसी स्थिति)
प्रयोग: पुरानी नौकरी छोड़ दी और नई मिली नहीं, अब वह धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का हो गया।
57 ना नौ मन तेल होगा, ना राधा नाचेगी
किसी कार्य के लिए ऐसी असंभव शर्त रख देना जो कभी पूरी न हो सके
प्रयोग: उसने सहायता के बदले इतनी बड़ी शर्त रख दी कि ना नौ मन तेल होगा, ना राधा नाचेगी।
58 पढ़े फारसी बेचे तेल, यह देखो कुदरत का खेल
उच्च शिक्षा प्राप्त करके भी मजबूरी में तुच्छ और निम्न कार्य करना
प्रयोग: इंजीनियरिंग की डिग्री लेकर वह चाय की दुकान चला रहा है, सच है पढ़े फारसी बेचे तेल...।
59 बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी
अपराधी या दोषी सदा के लिए दंड से नहीं बच सकता, कभी न कभी पकड़ा ही जाएगा
प्रयोग: वह बार-बार बच निकलता है पर एक दिन पकड़ा जाएगा, बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी।
60 मुल्ला की दौड़ मस्जिद तक
किसी व्यक्ति के कार्यक्षेत्र और पहुँच की एक निश्चित सीमा होना
प्रयोग: वह केवल अपने गाँव में ही रौब दिखा सकता है, मुल्ला की दौड़ मस्जिद तक होती है।
61 रस्सी जल गई पर ऐंठन न गई
सर्वस्व नष्ट हो जाने पर भी मिथ्या घमंड का न जाना
प्रयोग: जमींदारी समाप्त हो गई पर उसकी ठसक वैसी ही है, सच है रस्सी जल गई पर ऐंठन नहीं गई।
62 साँच को आँच नहीं
सत्यवादी और निष्कलंक व्यक्ति को किसी परीक्षा या भय का डर नहीं होता
प्रयोग: अदालत में निर्दोष व्यक्ति निर्भीक खड़ा रहा, क्योंकि साँच को आँच नहीं होती।
63 हाथ कंगन को आरसी क्या
प्रत्यक्ष और स्पष्ट वस्तु के लिए किसी अन्य प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती
प्रयोग: उसकी प्रतिभा और सफलता सबके सामने है, सच है हाथ कंगन को आरसी क्या।
64 हारिए न हिम्मत, बिसारिए न हरि नाम
विपत्ति के समय धैर्य नहीं छोड़ना चाहिए और ईश्वर पर भरोसा रखना चाहिए
प्रयोग: घोर संकट में भी उसने संघर्ष जारी रखा, सच है हारिए न हिम्मत बिसारिए न हरि नाम।
65 हथेली पर दही नहीं जमता
कोई भी महत्वपूर्ण और बड़ा कार्य तुरंत या पल भर में पूरा नहीं होता
प्रयोग: सफलता के लिए नियमित परिश्रम करो, हथेली पर दही नहीं जमता।
66 नौ दिन चले अढ़ाई कोस
अत्यधिक सुस्त और धीमी गति से कार्य करना
प्रयोग: सड़क निर्माण का कार्य इतनी धीमी गति से चल रहा है मानो नौ दिन चले अढ़ाई कोस।
67 नेकी और पूछ-पूछ
भलाई या शुभ कार्य करने के लिए किसी से अनुमति माँगने की आवश्यकता नहीं होती
प्रयोग: यदि तुम भूखों को भोजन कराना चाहते हो तो तुरंत कराओ, नेकी और पूछ-पूछ।
68 नीम हकीम खतरे जान
अल्पज्ञानी या अयोग्य चिकित्सक/व्यक्ति से परामर्श लेना जानलेवा होता है
प्रयोग: गंभीर बीमारी में अच्छे डॉक्टर के पास जाओ, नीम हकीम खतरे जान होता है।
69 न रहेगा बाँस, न बजेगी बाँसुरी
विवाद या समस्या के मूल कारण को ही हमेशा के लिए समाप्त कर देना
प्रयोग: संपत्ति के झगड़े को खत्म करने के लिए उसने जमीन ही दान कर दी; न रहेगा बाँस न बजेगी बाँसुरी।
70 दुविधा में दोनों गए, माया मिली न राम
असमंजस या अनिर्णय के कारण दोनों पक्षों के लाभ से वंचित रह जाना
प्रयोग: दो नौकरियों के चक्कर में उसने दोनों के अवसर गँवा दिए, सच है दुविधा में दोनों गए...।
71 दूध का जला छाछ भी फूँक-फूँककर पीता है
एक बार धोखा खाया हुआ व्यक्ति आगे सदा अत्यधिक सतर्क रहता है
प्रयोग: व्यापार में भारी नुकसान के बाद वह हर कदम सोच-समझकर रखता है।
72 दाल-भात में मूसलचंद
दो व्यक्तियों की बातचीत या कार्य में अकारण हस्तक्षेप करने वाला व्यक्ति
प्रयोग: हम दोनों के निजी मामले में तुम क्यों दाल-भात में मूसलचंद बन रहे हो?
73 तू डाल-डाल, मैं पात-पात
चालाकी और कूटनीति में एक-दूसरे से बढ़कर होना
प्रयोग: यदि अपराधी चालाक हैं तो पुलिस प्रशासन भी तू डाल-डाल मैं पात-पात की नीति पर है।
74 तेल देखो, तेल की धार देखो
परिस्थिति का रुख और अंतिम परिणाम देखकर ही कोई निर्णय लेना
प्रयोग: जल्दबाजी मत करो, अभी शांत रहकर तेल देखो और तेल की धार देखो।
75 जान बची तो लाखों पाए
जीवन की रक्षा होना संसार की सबसे बड़ी संपदा है
प्रयोग: हादसे में गाड़ी नष्ट हो गई पर सब सकुशल बच गए, सच है जान बची तो लाखों पाए।
76 जस दूल्हा तस बनी बराता
जैसे मुखिया या नेता होते हैं, वैसे ही उनके अनुयायी भी होते हैं
प्रयोग: अधिकारी और कर्मचारी सब एक जैसे भ्रष्ट हैं, सच है जस दूल्हा तस बनी बराता।
77 चमगादड़ के घर मेहमान आए, तो क्या उल्टे लटकें
अपनी सीमाओं से बाहर जाकर असमर्थता का आदर नहीं किया जा सकता
प्रयोग: निर्धन व्यक्ति अपनी सामर्थ्य के अनुसार ही स्वागत करेगा।
78 घर का जोगी जोगड़ा, आन गाँव का सिद्ध
निकट के गुणी व्यक्ति का अनादर और दूर के साधारण व्यक्ति का आदर होना
प्रयोग: गाँव के विद्वान को छोड़कर लोग बाहरी ढोंगी के पास जाते हैं, घर का जोगी जोगड़ा...।
79 गाँठ का पूरा, आँख का अंधा
धनवान किंतु अत्यंत मूर्ख और विवेकहीन व्यक्ति
प्रयोग: सेठ जी के पास अकूत धन है पर समझ शून्य है, वे तो आँख के अंधे गाँठ के पूरे हैं।
80 गरीबी में आटा गीला होना
अभाव की स्थिति में एक और नई विपत्ति आ पड़ना
प्रयोग: पहले ही तंगी थी, ऊपर से पिता की बीमारी ने गरीबी में आटा गीला कर दिया।
81 गुड़ दिए मरे तो जहर क्यों दे
जब काम प्रेम और विनम्रता से बन जाए तो कठोरता अपनाना अनुचित है
प्रयोग: विवाद को बातचीत से सुलझाओ, जब गुड़ दिए मरे तो जहर क्यों देना।
82 चोर-चोर मौसेरे भाई
एक जैसे दुर्गुणी और दुष्ट लोग आपस में जल्दी मेलजोल बढ़ा लेते हैं
प्रयोग: दोनों भ्रष्ट नेताओं में तुरंत समझौता हो गया, सच है चोर-चोर मौसेरे भाई।
83 चींटी को मौत के वक्त पर निकल आते हैं
विनाश के समय मनुष्य की बुद्धि विपरीत और मर्यादाहीन हो जाती है
प्रयोग: साधारण नौकर होकर मालिक को ललकार रहे हो, लगता है तुम्हारे पर निकल आए हैं।
84 जब ओखली में दिया सिर तो मूसलों से क्या डरना
दृढ़ निश्चय कर लेने पर संघर्षों से भयभीत नहीं होना चाहिए
प्रयोग: परीक्षा कठिन है पर जब संकल्प ले ही लिया है तो परिश्रम से क्या डरना।
85 जैसा देश वैसा भेष
परिस्थिति, स्थान और समाज के नियमों के अनुसार ही आचरण करना चाहिए
प्रयोग: विदेश में जाकर वहाँ की संस्कृति का आदर करना चाहिए, जैसा देश वैसा भेष।
86 जैसे को तैसा मिलना
बुरे व्यक्ति के साथ उसी की भाषा और शैली में व्यवहार होना
प्रयोग: धूर्त व्यापारी को उसी के साझेदार ने ठग लिया, सच है जैसे को तैसा मिला।
87 जो गरजत हैं वो बरसत नहीं
बड़ी-बड़ी डींगें हाँकने वाले लोग वास्तव में कुछ ठोस कार्य नहीं करते
प्रयोग: उसकी धमकियों से मत डरो, जो गरजते हैं वे बरसते नहीं।
88 झूठ के पाँव नहीं होते
असत्य कभी अधिक समय तक टिक नहीं सकता, उसका पर्दाफाश शीघ्र हो जाता है
प्रयोग: अदालत में उसका सारा फरेब पकड़ा गया, सच कहा गया है झूठ के पाँव नहीं होते।
89 टका सा जवाब देना
साफ-साफ और रूखेपन से इनकार कर देना
प्रयोग: मदद माँगने पर उसने मुँह पर टका सा जवाब दे दिया।
90 तिल का ताड़ बनाना
छोटी सी बात को बहुत अधिक बढ़ा-चढ़ा देना
प्रयोग: मामूली कहासुनी थी, पर मीडिया ने तिल का ताड़ बना दिया।
91 दीवारों के भी कान होते हैं
गोपनीय बातों के प्रकट हो जाने का सदैव भय रहता है
प्रयोग: धीरे बोलो, दीवारों के भी कान होते हैं, कोई सुन लेगा।
92 धूल में लट्ठ मारना
बिना सोचे-समझे केवल अनुमान से काम करना
प्रयोग: तैयारी के बिना परीक्षा देना धूल में लट्ठ मारने जैसा है।
93 नक्कारखाने में तूती की आवाज
बड़े और प्रभावशाली लोगों के बीच निर्बल की बात पर कोई ध्यान न देना
प्रयोग: अधिकारियों की सभा में गरीब किसान की फरियाद नक्कारखाने में तूती की आवाज बनकर रह गई।
94 न रहेगा बाँस न बजेगी बाँसुरी
झगड़े की जड़ को ही समूल नष्ट कर देना
प्रयोग: विवादित संपत्ति को बेचकर चैरिटी में दे दिया गया, न रहेगा बाँस न बजेगी बाँसुरी।
95 प्यास लगने पर कुआँ खोदना
विपत्ति या आवश्यकता आने पर अचानक उपाय खोजना (पूर्व तैयारी न रखना)
प्रयोग: परीक्षा के दिन किताब खोलना प्यास लगने पर कुआँ खोदने जैसा है।
96 फिसल पड़े तो हर-हर गंगे
मजबूरी में किए गए कार्य को भी धर्म या त्याग का रूप दे देना
प्रयोग: व्यापार में घाटा होने पर दुकान बंद कर सन्यासी बन गया, फिसल पड़े तो हर-हर गंगे।
97 बंदर के हाथ में उस्तरा
अयोग्य या मूर्ख व्यक्ति को घातक अधिकार या शक्ति मिल जाना
प्रयोग: क्रूर व्यक्ति को सत्ता मिलना बंदर के हाथ में उस्तरा देने जैसा है।
98 बिल्ली के भागों छींका टूटा
अचानक अनायास और अप्रत्याशित रूप से बड़ा लाभ मिल जाना
प्रयोग: बिना विशेष प्रयास के उसे उच्च पद मिल गया, मानो बिल्ली के भागों छींका टूटा।
99 मियाँ की जूती मियाँ के सिर
किसी की अपनी ही चाल या चालाकी से उसी का नुकसान होना
प्रयोग: उसने जो जाल दूसरों के लिए बिछाया था उसी में फँस गया, मियाँ की जूती मियाँ के सिर।
100 मेरी बिल्ली मुझी से म्याऊँ
जिसके आश्रय या उपकार पर पले हों, उसी पर रौब गालिब करना
प्रयोग: मैंने उसे काम सिखाया और आज वह मुझ पर ही हुक्म चला रहा है, मेरी बिल्ली मुझी से म्याऊँ।
101 रोगी को जो भावे, वही वैद्य फरमावे
मनपसंद बात का ही संयोगवश समर्थन मिलना
प्रयोग: मैं छुट्टी चाहता ही था और अधिकारी ने स्वयं अवकाश दे दिया, रोगी को जो भावे वही वैद्य फरमावे।
102 लश्कर में ऊँट बदनाम
दोष किसी का हो और बदनामी किसी प्रमुख या बड़े की हो
प्रयोग: गलती क्लर्क ने की और आरोप अधिकारी पर लगा, लश्कर में ऊँट बदनाम।
103 सब धान बाईस पसेरी
अच्छे-बुरे का भेद किए बिना सबको एक तराजू में तौलना
प्रयोग: मेहनती और कामचोर दोनों को एक जैसा वेतन देना सब धान बाईस पसेरी जैसा है।
104 सिर मुड़ाते ही ओले पड़े
कार्य के प्रारम्भ में ही भारी विघ्न आ जाना
प्रयोग: दुकान खोली ही थी कि सील हो गई, सिर मुड़ाते ही ओले पड़े।
105 हथकड़ी को आरसी क्या
अपराध का साक्षात प्रमाण सामने होने पर बहस व्यर्थ है
प्रयोग: चोर रंगे हाथों पकड़ा गया है, अब सफाई देने की कोई जरूरत नहीं।
281 सत्यमेव जयते नानृतम्
अंततः सत्य की ही विजय होती है, असत्य की नहीं
प्रयोग: न्यायालय के निष्पक्ष निर्णय ने सिद्ध कर दिया कि 'सत्यमेव जयते नानृतम्'।
282 विद्या ददाति विनयम्
सच्ची विद्या और ज्ञान मनुष्य को विनम्रता प्रदान करता है
प्रयोग: विद्वान पुरुष कभी अहंकार नहीं करते, क्योंकि 'विद्या ददाति विनयम्'।
283 जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी
माता और मातृभूमि का स्थान स्वर्ग से भी श्रेष्ठ और पूज्य है
प्रयोग: सैनिकों ने देशरक्षा में प्राण न्योछावर कर प्रमाणित किया कि 'जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी'।
284 अहिंसा परमो धर्मः
जीव मात्र पर दया और अहिंसा ही सबसे बड़ा धर्म है
प्रयोग: महात्मा गाँधी ने 'अहिंसा परमो धर्मः' के बल पर भारत को स्वतंत्र कराया।
285 वसुधैव कुटुम्बकम्
समग्र पृथ्वी और मानव समाज ही एक परिवार है
प्रयोग: भारतीय संस्कृति का मूल आधार 'उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्' है।
286 विनाशकाले विपरीतबुद्धिः
विनाश या पतन के समय मनुष्य की बुद्धि और विवेक भ्रष्ट हो जाता है
प्रयोग: रावण ने सीता हरण करके अपने सर्वनाश को निमंत्रण दिया, सच है 'विनाशकाले विपरीतबुद्धिः'।
287 विद्वान् सर्वत्र पूज्यते
विद्वान और ज्ञानी व्यक्ति का हर जगह आदर-सत्कार होता है
प्रयोग: राजा केवल अपने देश में सम्मान पाता है, पर 'विद्वान् सर्वत्र पूज्यते'।
288 शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्
सभी धर्मों, कर्तव्यों और साधनाओं को पूरा करने का मूल साधन स्वस्थ शरीर ही है
प्रयोग: स्वास्थ्य का सदा ध्यान रखो, क्योंकि 'शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्'।
289 अति सर्वत्र वर्जयेत्
किसी भी वस्तु, कार्य या विचार की अति सदा हानिकर होती है
प्रयोग: अत्यधिक भोजन और अत्यधिक निद्रा दोनों स्वास्थ्य बिगाड़ते हैं, सच है 'अति सर्वत्र वर्जयेत्'।
290 संघे शक्तिः कलौ युगे
कलियुग में एकता और संगठन में ही वास्तविक शक्ति है
प्रयोग: आपसी फूट त्यागकर संगठित रहो, क्योंकि 'संघे शक्तिः कलौ युगे'।
291 उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः
कार्य केवल परिश्रम और पुरुषार्थ से सिद्ध होते हैं, कोरी इच्छाओं से नहीं
प्रयोग: सपने देखने के बजाय कठोर अध्ययन करो, क्योंकि 'उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः'।
292 काकतालीय न्याय
अचानक और अप्रत्याशित रूप से दो घटनाओं का अकारण संयोगवश घटित होना
प्रयोग: मेरा वहाँ पहुँचना और बिजली का चले जाना केवल 'काकतालीय न्याय' था।
293 अंधपरंपरा न्याय
बिना सोचे-समझे पुरानी रूढ़ियों या दूसरों की अंधी नकल करना
प्रयोग: तर्क छोड़कर केवल 'अंधपरंपरा न्याय' पर चलना समाज को पीछे धकेलता है।
294 दण्डापूपिका न्याय
जब कठिन वस्तु नष्ट हो जाए तो सरल का नष्ट होना स्वतः सिद्ध हो जाना
प्रयोग: जब मजबूत दीवार ही गिर गई तो छप्पर का गिरना 'दण्डापूपिका न्याय' से सिद्ध है।
295 मौनं सर्वार्थसाधनम्
मौन रहना अनेक विवादों और संकटों से बचने का उत्तम साधन है
प्रयोग: व्यर्थ बहस में पड़ने के बजाय चुप रहकर उसने कार्य सिद्ध किया, 'मौनं सर्वार्थसाधनम्'।
296 अङ्गारशतधौतेन मलीनत्वं न मुञ्चति
दुष्ट व्यक्ति को कितना भी समझाओ, वह अपना स्वाभाविक दुर्गुण नहीं छोड़ता
प्रयोग: उस चोर को जेल में भी सुधार न आया, 'अङ्गारशतधौतेन मलीनत्वं न मुञ्चति'।
297 यथा राजा तथा प्रजा
जैसा देश का शासक या मार्गदर्शक होता है, प्रजा भी वैसा ही आचरण करती है
प्रयोग: ईमानदार राजा के राज्य में प्रजा भी सदाचारी रहती है, सच है 'यथा राजा तथा प्रजा'।
298 लोभः पापस्य कारणम्
अत्यधिक लोभ और लालच ही सभी पापों और अनर्थों की मूल जड़ है
प्रयोग: सट्टेबाजी में उसने अपनी सारी पूँजी गँवा दी, सच है 'लोभः पापस्य कारणम्'।
299 आचारः परमो धर्मः
सदाचार, श्रेष्ठ आचरण और मर्यादा ही सबसे बड़ा धर्म है
प्रयोग: मनुष्य की पहचान उसके आचरण से होती है, क्योंकि 'आचारः परमो धर्मः'।
300 साहसे श्रीः प्रतिवसति
साहस, पुरुषार्थ और पराक्रम करने वाले को ही समृद्धि और लक्ष्मी प्राप्त होती है
प्रयोग: कठिन परिस्थितियों में भी उसने उद्यम नहीं छोड़ा और सफल हुआ, सच है 'साहसे श्रीः प्रतिवसति'।
301 गुणाः पूजास्थानं गुणिषु न च लिङ्गं न च वयः
सम्मान का आधार गुण और ज्ञान होता है, आयु या लिंग नहीं
प्रयोग: अल्पायु में ही बालक के अगाध ज्ञान का सबने सत्कार किया।
302 पिण्डे पिण्डे मतिर्भिन्ना
प्रत्येक व्यक्ति का विचार, दृष्टिकोण और स्वभाव भिन्न-भिन्न होता है
प्रयोग: सबकी एक राय होना कठिन है, क्योंकि 'पिण्डे पिण्डे मतिर्भिन्ना'।
303 न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः
बिना परिश्रम के सोए हुए सिंह के मुख में भी शिकार स्वतः प्रवेश नहीं करता
प्रयोग: सफलता के लिए कर्म आवश्यक है, 'न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः'।
304 स्वभावेन हि तुष्यन्ति देवाः सत्पुरुषा द्विजाः
सज्जन और देवता शुद्ध हृदय और सरल स्वभाव से ही प्रसन्न होते हैं
प्रयोग: दिखावा त्यागकर सरल बनो, ईश्वर भाव के भूखे हैं।
305 परिक्षेत्रे न विश्वसेत्
अपरिचित या संदिग्ध स्थान और व्यक्ति पर शीघ्र विश्वास नहीं करना चाहिए
प्रयोग: यात्रा के समय अजनबियों से सतर्क रहना चाहिए।
306 धर्मो रक्षति रक्षितः
जो धर्म और मर्यादा की रक्षा करता है, धर्म उसकी सदा रक्षा करता है
प्रयोग: न्याय के पथ पर अडिग रहो, क्योंकि 'धर्मो रक्षति रक्षितः'।
307 यतो धर्मस्ततो जयः
जहाँ धर्म, सत्य और न्याय है, वहीं अंततः विजय होती है
प्रयोग: महाभारत युद्ध का अंतिम संदेश यही है कि 'यतो धर्मस्ततो जयः'।
308 अल्पविद्या भयंकरी
अधूरा ज्ञान सदा विनाशकारी और संकट पैदा करने वाला होता है
प्रयोग: बिना पूर्ण ज्ञान के दवा देना प्राणघातक हो सकता है, 'अल्पविद्या भयंकरी'।
309 मातृवत् परदारेषु परद्रव्येषु लोष्टवत्
परस्त्री को माता के समान और पराये धन को मिट्टी के ढेले के समान समझना
प्रयोग: सच्चा ज्ञानी वही है जो 'मातृवत् परदारेषु परद्रव्येषु लोष्टवत्' का पालन करे।
310 संतोषं परslice सुखम् (संतोषं परमं सुखम्)
संतोष ही संसार का सबसे बड़ा और सच्चा सुख है
प्रयोग: असीमित तृष्णा से मुक्ति पाने के लिए संतोष ही सर्वोत्तम साधन है।
311 वरमेको गुणी पुत्रो न च मूर्खशतान्यपि
सौ मूर्ख पुत्रों की अपेक्षा एक गुणी और सुयोग्य पुत्र ही श्रेष्ठ है
प्रयोग: संख्या से अधिक गुणवत्ता महत्वपूर्ण होती है।
312 सत्संगतिः कथय किं न करोति पुंसाम्
सज्जनों की संगति मनुष्य का क्या-क्या कल्याण नहीं कर देती
प्रयोग: सत्संगति से पापी भी धर्मात्मा बन जाता है।
313 न कश्चित् कस्यचिन्मित्रं न कश्चित् कस्यचित् रिपुः
संसार में कोई जन्म से मित्र या शत्रु नहीं होता, व्यवहार से ही बनते हैं
प्रयोग: मित्रता और शत्रुता मनुष्य के व्यवहार पर निर्भर करती है।
314 हितं मनोहारि च दुर्लभं वचः
कल्याणकारी और साथ ही कर्णप्रिय लगने वाली बात अत्यंत दुर्लभ होती है
प्रयोग: सत्य कड़वा होता है, क्योंकि 'हितं मनोहारि च दुर्लभं वचः'।
315 यथा दृष्टिस्तथा सृष्टिः
मनुष्य का जैसा दृष्टिकोण होता है, उसे संसार भी वैसा ही दिखाई देता है
प्रयोग: अपने विचार शुद्ध रखो, क्योंकि 'यथा दृष्टिस्तथा सृष्टिः'।
316 कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन
मनुष्य का अधिकार केवल कर्म करने में है, फल की चिंता में नहीं
प्रयोग: निःस्वार्थ भाव से अपना कर्तव्य निभाओ, 'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन'।
317 परान्नं दुर्लभं लोके
मुफ्त या पराए भोजन के लोभ में अपने स्वास्थ्य और सम्मान की हानि न करना
प्रयोग: संयम से भोजन करो, मुफ्त देखकर अधिक खाना स्वास्थ्य बिगाड़ता है।
318 अजहल्लक्षणा न्याय
जहाँ मुख्य अर्थ का त्याग किए बिना अन्य अर्थ भी ग्रहण किया जाए
प्रयोग: शास्त्रों की व्याख्या में 'अजहल्लक्षणा न्याय' का प्रयोग होता है।
319 सिंहविलोकन न्याय
आगे बढ़ते हुए पीछे के कार्यों और अनुभवों का पुनरावलोकन करना
प्रयोग: प्रगति के मार्ग पर 'सिंहविलोकन न्याय' से अपनी पुरानी भूलों को सुधारना चाहिए।
320 कूपमण्डूक न्याय
सीमित दायरे में रहकर संकुचित ज्ञान तक ही सीमित रहना
प्रयोग: आधुनिक दुनिया से अनभिज्ञ रहकर वह कूपमण्डूक बना रहा।
321 देहलीदीपक न्याय
एक ही साधन या बात से दोनों पक्षों को एक साथ प्रकाशित/लाभान्वित करना
प्रयोग: उसका सुझाव देहलीदीपक न्याय की तरह दोनों पक्षों के लिए लाभकारी रहा।
322 मत्स्य न्याय
जहाँ कानून का शासन न हो और बलवान निर्बल को सताता हो (अराजकता)
प्रयोग: बिना शासन और संविधान के समाज में मत्स्य न्याय फैल जाता है।
323 बीजांकुर न्याय
कार्य और कारण का अनादि परस्पर संबंध होना
प्रयोग: कर्म और भाग्य का संबंध बीजांकुर न्याय के समान है।
324 स्थूणानिखनन न्याय
किसी मत या सिद्धांत को विभिन्न तर्कों से भली-भाँति सुदृढ़ करना
प्रयोग: विद्वान ने अपने शोध को स्थूणानिखनन न्याय से पुष्ट किया।
325 क्षीरनीर न्याय
दूध और जल की तरह पूर्णतः अभिन्न और घुला-मिला संबंध होना
प्रयोग: सच्चे मित्रों का संबंध क्षीरनीर न्याय की तरह एकाकार होता है।
326 हंसक्षीर न्याय
दोषों को छोड़कर केवल गुणों और सत्य को ही ग्रहण करना
प्रयोग: विद्वान पुरुष संसार से हंसक्षीर न्याय की तरह केवल अच्छाई ग्रहण करते हैं।
327 अरण्यरोदन न्याय
जहाँ सुनने और समझने वाला कोई न हो, वहाँ व्यर्थ रोना या प्रार्थना करना
प्रयोग: भ्रष्ट तंत्र के सामने दया की भीख माँगना अरण्यरोदन न्याय के समान है।
328 शृंगग्राहिका न्याय
किसी विषय को सीधे और स्पष्ट रूप से मुख्य बिंदु से पकड़ना
प्रयोग: अध्यापक ने शृंगग्राहिका न्याय से सीधे कठिन पाठ का मर्म समझाया।
329 घुणाक्षर न्याय
बिना किसी पूर्व योजना के अनायास ही कोई शुद्ध कार्य बन जाना
प्रयोग: अनपढ़ व्यक्ति का सही उत्तर देना घुणाक्षर न्याय का उदाहरण है।
330 अजाकृपाणीय न्याय
अचानक अपनी ही अज्ञानता से स्वयं का विनाश हो जाना
प्रयोग: शत्रु अपनी ही चाल में फँसकर मारा गया, अजाकृपाणीय न्याय चरितार्थ हुआ।
331 अमृतं बालभाषितम्
छोटे बच्चों की निष्कपट और तोतली वाणी अमृत के समान मधुर होती है
प्रयोग: शिशु की मीठी बातें सुनकर सबका हृदय प्रसन्न हो जाता है।
332 काव्यशास्त्रविनोदेन कालो गच्छति धीमताम्
बुद्धिमान लोगों का समय ज्ञानवर्धक शास्त्रों और साहित्य के आनंद में बीतता है
प्रयोग: विद्वान व्यर्थ गपशप में समय नहीं गँवाते।
333 व्यसनेन तु मूर्खाणाम्
मूर्ख लोगों का समय बुरी लतों, कलह और सोने में नष्ट होता है
प्रयोग: आलसी लोग समय का मूल्य नहीं समझते।
334 विद्या धनं सर्वधनप्रधानम्
ज्ञान और विद्या रूपी धन संसार के सभी धनों में सर्वश्रेष्ठ है
प्रयोग: विद्या को न कोई चुरा सकता है न बाँट सकता है, 'विद्या धनं सर्वधनप्रधानम्'।
335 न भूतो न भविष्यति
ऐसी असाधारण घटना या व्यक्ति जो न पहले कभी हुआ और न आगे कभी होगा
प्रयोग: उनकी महान देशभक्ति और त्याग 'न भूतो न भविष्यति' के समान अद्वितीय है।
336 परोपकाराय सतां विभूतयः
सज्जन पुरुषों की धन-संपत्ति और ज्ञान केवल दूसरों के परोपकार के लिए होता है
प्रयोग: दानवीर कर्ण का पूरा जीवन 'परोपकाराय सतां विभूतयः' का साक्षात प्रमाण था।
337 यथा बीजं तथा निष्पत्तिः
मनुष्य जैसा कर्म का बीज बोता है, उसे फल भी वैसा ही प्राप्त होता है
प्रयोग: सत्कर्म करोगे तो सुख मिलेगा, 'यथा बीजं तथा निष्पत्तिः'।
338 लोभान्मोहश्च नाशश्च
लोभ से मोह और अंततः सर्वनाश उत्पन्न होता है
प्रयोग: लालच से सदा बचो, क्योंकि लोभ ही पतन का द्वार है।
339 न दुर्जनः सज्जनतामुपैति
दुष्ट व्यक्ति कितना भी उपदेश पा ले, वह सज्जन नहीं बन सकता
प्रयोग: साँप को दूध पिलाने पर भी वह विष ही उगलता है।
340 सर्वं परवशं दुःखं सर्वमात्मवशं सुखम्
पराधीनता ही सबसे बड़ा दुःख है और स्वाधीनता ही सबसे बड़ा सुख है
प्रयोग: आत्मनिर्भर बनो, क्योंकि 'सर्वं परवशं दुःखं सर्वमात्मवशं सुखम्'।
341 सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् न ब्रूयात् सत्यमप्रियम्
सत्य और प्रिय बोलना चाहिए, कठोर या अप्रिय लगने वाला कटु सत्य नहीं बोलना चाहिए
प्रयोग: वाणी में सदा मिठास और शालीनता रखो।
342 उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्
उदार हृदय वाले महापुरुषों के लिए पूरी पृथ्वी ही अपना परिवार है
प्रयोग: संकीर्ण भेद त्यागकर सभी को अपना समझो।
343 क्षणे रुष्टाः क्षणे तुष्टाः
एक क्षण में नाराज और दूसरे ही क्षण में प्रसन्न होने वाला चंचल स्वभाव
प्रयोग: उसका स्वभाव अस्थिर है, वह 'क्षणे रुष्टाः क्षणे तुष्टाः' जैसा है।
344 वृद्धस्य वचनं ग्राह्यम्
अनुभवी और बुजुर्ग व्यक्तियों की सीख को सदा शिरोधार्य करना चाहिए
प्रयोग: संकट में बड़ों की सलाह मानो, 'वृद्धस्य वचनं ग्राह्यम्'।
345 अतिपरिचयादवज्ञा
अत्यधिक निकटता या रोज-रोज मिलने से मान-सम्मान कम हो जाता है
प्रयोग: मर्यादा बनाए रखो, क्योंकि 'अतिपरिचयादवज्ञा' होती है।
346 स्वावलम्बनं परं सुखम्
आत्मनिर्भर होना और अपने पैरों पर खड़ा होना ही परम सुख है
प्रयोग: किसी पर निर्भर मत रहो, 'स्वावलम्बनं परं सुखम्'।
347 यथा चित्तं तथा वाचः यथा वाचस्तथा क्रियाः
मन, वचन और कर्म में पूर्ण एकरूपता होना ही सज्जनता का लक्षण है
प्रयोग: महापुरुषों की कथनी और करनी में कभी अंतर नहीं होता।
348 काकचेष्टा बकोध्यानं स्वाननिद्रा तथैव च
कौवे जैसी चतुराई, बगुले जैसा ध्यान और श्वान जैसी सतर्क नींद विद्यार्थी के लक्षण हैं
प्रयोग: विद्यार्थियों को इन पंच लक्षणों को अपने जीवन में अपनाना चाहिए।
349 अमृतं च मृतं चैव द्वयं देहे प्रतिष्ठितम्
अमरता (सत्य) और मृत्यु (मोह) दोनों मनुष्य के अपने भीतर ही स्थित हैं
प्रयोग: सत्य आचरण से अमरता और असत्य से पतन निश्चित है।
350 सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः
समस्त संसार के सभी प्राणी सुखी हों और सभी रोगमुक्त एवं स्वस्थ रहें
प्रयोग: भारतीय संस्कृति का शाश्वत संदेश है—'सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः'।
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