किरातार्जुनीयम् : वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तरी ( परीक्षा-अभ्यास प्रश्न-पत्र) 500+

चन्द्र देव त्रिपाठी 'अतुल'
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किरातार्जुनीयम् : 500 वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तरी महामैराथन (भाग-1)

UGC NET, UP TGT, PGT, GIC, RPSC, असिस्टेंट प्रोफेसर एवं समस्त संस्कृत प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु

1. महाकवि भारवि के काल-निर्धारण का सबसे प्रामाणिक बाह्य साक्ष्य कौन-सा है?

(अ) मंदसौर शिलालेख (ब) रविकीर्ति-रचित ऐहोल शिलालेख (634 ई.) (स) प्रयाग प्रशस्ति (द) जूनागढ़ अभिलेख

2. 'अवन्तिसुन्दरीकथा' के अनुसार महाकवि भारवि किस पल्लव नरेश की सभा में सम्मानित थे?

(अ) सिंहविष्णु (ब) महेन्द्रवर्मा (स) नरसिंहवर्मा (द) अपराजितवर्मा

3. महाकवि भारवि के पिता एवं माता का क्या नाम था?

(अ) नीलकण्ठ एवं सुशीला (ब) श्रीधर (नारायणस्वामी) एवं सुशीला (स) भट्टगोपाल एवं तारावती (द) चित्रभानु एवं राजदेवी

4. भारवि का जन्म किस गोत्र में माना जाता है?

(अ) कश्यप गोत्र (ब) कुशिक गोत्र (स) भारद्वाज गोत्र (द) शाण्डिल्य गोत्र

5. भारवि की पत्नी का वास्तविक नाम ग्रन्थों में क्या प्राप्त होता है?

(अ) रसिकवती (रसिका) (ब) सुलोचना (स) मनोरमा (द) विलासवती

6. भारवि मुख्यतः किस सम्प्रदाय/मत के अनुयायी थे?

(अ) वैष्णव मत (ब) शैव मत (स) शाक्त मत (द) सौर मत

7. किरातार्जुनीयम् महाकाव्य संस्कृत साहित्य के किस ग्रन्थ-त्रयी के अन्तर्गत आता है?

(अ) लघुत्रयी (ब) प्रस्थानत्रयी (स) बृहत्त्रयी (द) मुनित्रयी

8. किरातार्जुनीयम् महाकाव्य का मुख्य उपजीव्य (कथानक का मूल स्रोत) क्या है?

(अ) महाभारत का वनपर्व (ब) महाभारत का सभापर्व (स) श्रीमद्भागवत महापुराण (द) वायुपुराण

9. किरातार्जुनीयम् महाकाव्य में कुल कितने सर्ग तथा लगभग कितने श्लोक हैं?

(अ) 17 सर्ग एवं 1000 श्लोक (ब) 18 सर्ग एवं 1030/1040 श्लोक (स) 20 सर्ग एवं 1200 श्लोक (द) 22 सर्ग एवं 1500 श्लोक

10. किरातार्जुनीयम् का प्रधान (अङ्गी) रस कौन-सा है?

(अ) शृङ्गार रस (ब) वीर रस (स) शान्त रस (द) रौद्र रस

11. किरातार्जुनीयम् का नायक किस कोटि का है?

(अ) धीरललित (ब) धीरप्रशान्त (स) धीरोदात्त (अर्जुन) (द) धीरोद्धत

12. किरातार्जुनीयम् का प्रारम्भ किस शब्द से होता है?

(अ) ॐ (ब) अथ (स) श्रियः (द) लक्ष्मी

13. किरातार्जुनीयम् के प्रत्येक सर्ग का अन्तिम श्लोक किस शब्द से समाप्त होता है?

(अ) शिव (ब) लक्ष्मी (स) विभु (द) जय

14. किरातार्जुनीयम् के प्रथम सर्ग में कुल कितने श्लोक हैं?

(अ) 44 श्लोक (ब) 46 श्लोक (स) 48 श्लोक (द) 54 श्लोक

15. प्रथम सर्ग के श्लोक संख्या 1 से 44 तक किस छन्द की प्रमुखता है?

(अ) उपजाति (ब) वंशस्थ (स) इन्द्रवज्रा (द) अनुष्टुप्

16. किरातार्जुनीयम् के प्रथम सर्ग के 45वें तथा 46वें श्लोक में क्रमशः कौन-से छन्द हैं?

(अ) वंशस्थ एवं मालिनी (ब) पुष्पिताग्रा एवं मालिनी (स) वसन्ततिलका एवं शार्दूलविक्रीडित (द) मालिनी एवं पुष्पिताग्रा

17. 'श्रियः कुरुणामधिपस्य पालनीम्' इस प्रथम श्लोक में 'कुरुणामधिपस्य' पद से किसका संकेत है?

(अ) युधिष्ठिर का (ब) दुर्योधन का (स) धृतराष्ट्र का (द) भीष्म का

18. दुर्योधन का समाचार जानने के बाद वनेचर युधिष्ठिर से कहाँ मिला?

(अ) काम्यकवन में (ब) द्वैतवन में (स) खाण्डववन में (द) नैमिषारण्य में

19. 'स वर्णिलीङ्गी विदितः समाययौ' यहाँ 'वर्णिलीङ्गी' पद का क्या अर्थ है?

(अ) वनवासी (ब) ब्रह्मचारी वेशधारी (स) संन्यासी (द) सैनिक वेशधारी

20. 'कृतप्रणामस्य महीं महीभुजे' श्लोकांश में 'महीभुजे' पद में कौन-सी विभक्ति और वचन है?

(अ) तृतीया, एकवचन (ब) चतुर्थी, एकवचन (स) पञ्चमी, एकवचन (द) षष्ठी, एकवचन

21. 'द्विषां विघाताय विधातुमिच्छतो' यहाँ 'द्विषाम्' पद में कौन-सी विभक्ति है?

(अ) द्वितीया बहुवचन (ब) षष्ठी बहुवचन (स) तृतीया एकवचन (द) पञ्चमी एकवचन

22. 'हितं मनोहारि च दुर्लभं वचः' यह सूक्ति किरातार्जुनीयम् के किस सर्ग और श्लोक की है?

(अ) प्रथम सर्ग, चतुर्थ श्लोक (ब) प्रथम सर्ग, प्रथम श्लोक (स) द्वितीय सर्ग, तृतीय श्लोक (द) तृतीय सर्ग, पञ्चम श्लोक

23. 'क्रियासु युक्तैर्नृप चारचक्षुषो न वञ्चनीयाः प्रभवोऽनुजीविभिः' यह कथन किसका है?

(अ) द्रौपदी का (ब) वनेचर का (स) युधिष्ठिर का (द) भीम का

24. 'सदानुकूलेषु हि कुर्वते रतिं नृपेष्वमात्येषु च सर्वसम्पदः' यहाँ किसका महत्त्व प्रतिपादित है?

(अ) राजा और मन्त्रियों में परस्पर अनुकूलता (ब) सैन्य बल (स) धन संग्रह (द) गुप्तचर व्यवस्था

25. 'वरं विरोधोऽपि समं महात्मभिः' यह प्रसिद्ध सूक्ति किरातार्जुनीयम् के किस सर्ग में है?

(अ) प्रथम सर्ग (ब) द्वितीय सर्ग (स) तृतीय सर्ग (द) पञ्चम सर्ग

26. 'अहो दुरन्ता बलवद्विरोधिता' सूक्ति किसके द्वारा कही गई है?

(अ) द्रौपदी द्वारा (ब) वनेचर द्वारा (स) व्यास द्वारा (द) युधिष्ठिर द्वारा

27. दुर्योधन राज्य को किस प्रकार जीतना चाहता है?

(अ) छल-कपट से (ब) नीति (नय) द्वारा (स) केवल युद्ध द्वारा (द) धन द्वारा

28. 'अदेवमातृकाः' पद का किरातार्जुनीयम् के सन्दर्भ में क्या अर्थ है?

(अ) देवों पर आश्रित (ब) जो वर्षा के जल पर निर्भर न हों (नदी-कूप सिंचित) (स) जहाँ फसल न उगती हो (द) बंजर भूमि

29. दुर्योधन ने अपने अन्तःशत्रु (काम, क्रोध, लोभ आदि) को जीतने के लिए किसे जीता?

(अ) षड्वर्ग (काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मात्सर्य) (ब) अष्टवर्ग (स) चतुर्वर्ग (द) त्रिवर्ग

30. प्रथम सर्ग में भारवि ने दुर्योधन के लिए किस शब्द का प्रयोग किया है?

(अ) कुयोधन (ब) सुयोधन (स) दुर्मति (द) दुरात्मा

31. वनेचर के चले जाने के बाद युधिष्ठिर किसके भवन में प्रविष्ट होते हैं?

(अ) कुन्ती के (ब) द्रौपदी के (स) भीमसेन के (द) अर्जुन के

32. 'व्रजन्ति ते मूढधियः पराभवं भवन्ति मायाविषु ये न मायिनः' यह किसकी उक्ति है?

(अ) वनेचर की (ब) द्रौपदी की (स) भीम की (द) अर्जुन की

33. 'विचित्ररूपाः खलु चित्तवृत्तयः' सूक्ति किरातार्जुनीयम् के किस सर्ग से उद्धृत है?

(अ) प्रथम सर्ग (ब) द्वितीय सर्ग (स) चतुर्थ सर्ग (द) षष्ठ सर्ग

34. द्रौपदी युधिष्ठिर को किस मार्ग का परित्याग कर तेज धारण करने के लिए प्रेरित करती हैं?

(अ) युद्ध मार्ग (ब) शम/शान्ति मार्ग (स) धर्म मार्ग (द) कर्म मार्ग

35. 'अमर्षशून्येन जनस्य जन्तुना न जातहार्देन न विद्विषादरः' यह कथन किसका है?

(अ) वनेचर का (ब) द्रौपदी का (स) व्यास का (द) इन्द्र का

36. किरातार्जुनीयम् के द्वितीय सर्ग में पाण्डवों में से किसका ओजस्वी संवाद प्रस्तुत है?

(अ) नकुल का (ब) भीमसेन का (स) सहदेव का (द) अर्जुन का

37. "सहसा विदधीत न क्रियामविवेकः परमापदां पदम्" यह श्लोक किस सर्ग का है?

(अ) प्रथम सर्ग (ब) द्वितीय सर्ग (स) तृतीय सर्ग (द) चतुर्थ सर्ग

38. पाण्डवों को राजनीति एवं अस्त्र-शस्त्र प्राप्ति का परामर्श देने द्वैतवन में कौन पधारे थे?

(अ) भगवान श्रीकृष्ण (ब) महर्षि वेदव्यास (स) देवर्षि नारद (द) महर्षि धौम्य

39. महर्षि वेदव्यास ने युधिष्ठिर को कौन-सी गुप्त विद्या प्रदान की थी?

(अ) संजीविनी विद्या (ब) प्रतिस्मृति विद्या (स) ब्रह्मविद्या (द) कालविद्या

40. अर्जुन तपस्या करने के लिए किस पर्वत पर गए थे?

(अ) गन्धमादन पर्वत (ब) इन्द्रकील पर्वत (स) विन्ध्याचल पर्वत (द) मलय पर्वत

41. अर्जुन की तपस्या भंग करने के लिए इन्द्र ने किन्हें भेजा था?

(अ) यक्षों को (ब) अप्सराओं एवं गन्धर्वों को (स) दैत्यों को (द) नागों को

42. किरातार्जुनीयम् के किस सर्ग में शरद ऋतु का अत्यन्त मनोहारी वर्णन प्राप्त होता है?

(अ) द्वितीय सर्ग (ब) चतुर्थ सर्ग (स) अष्टम सर्ग (द) दशम सर्ग

43. किरातार्जुनीयम् के किस सर्ग में चित्रकाव्य (एकाक्षर, सर्वतोभद्र आदि) का चमत्कार प्रदर्शित है?

(अ) दशम सर्ग (ब) पञ्चदश (15वें) सर्ग (स) एकादश सर्ग (द) द्वादश सर्ग

44. "न नोननुन्नो नुन्नोनो नाना नानानना ननु" यह प्रसिद्ध एकाक्षर श्लोक किस कवि की रचना है?

(अ) माघ (ब) भारवि (स) श्रीहर्ष (द) कालिदास

45. अर्जुन और भगवान शिव के मध्य किस दैत्य (शूकर रूपधारी) के वध को लेकर विवाद हुआ?

(अ) बाणासुर (ब) मूकासुर (स) भस्मासुर (द) तारकासुर

46. भगवान शिव अर्जुन के समक्ष किस रूप में प्रकट हुए थे?

(अ) संन्यासी रूप (ब) किरात (भील/शबर) सेनापति रूप (स) ब्राह्मण रूप (द) इन्द्र रूप

47. अर्जुन को शिव की प्रसन्नता के उपरान्त किस अमोघ अस्त्र की प्राप्ति हुई?

(अ) ब्रह्मास्त्र (ब) पाशुपतास्त्र (स) नारायणास्त्र (द) आग्नेयास्त्र

48. किरातार्जुनीयम् महाकाव्य पर मल्लिनाथ द्वारा लिखी गई प्रसिद्ध टीका का नाम क्या है?

(अ) सञ्जीवनी (ब) घण्टापथ (स) सर्वङ्कषा (द) जीवातू

49. "नारिकेलफलसम्मितं वचो भारवेः" यह प्रशंसात्मक उक्ति किस आचार्य ने कही है?

(अ) आनन्दवर्धन (ब) मल्लिनाथ (स) मम्मट (द) क्षेमेन्द्र

50. 'भारवेरर्थगौरवम्' के अनुसार भारवि की शैली की प्रमुख विशेषता क्या है?

(अ) विस्तृत व्याख्या (ब) अल्प शब्दों में गम्भीर एवं विशद अर्थ संजोना (स) केवल क्लिष्ट शब्दावली (द) अप्रसिद्ध छन्दों का प्रयोग
✦ उत्तरमाला (Answer Key : प्रश्न 1 से 50) ✦
1-(ब) 2-(अ) 3-(ब) 4-(ब) 5-(अ) 6-(ब) 7-(स) 8-(अ) 9-(ब) 10-(ब) 11-(स) 12-(स) 13-(ब) 14-(ब) 15-(ब) 16-(ब) 17-(ब) 18-(ब) 19-(ब) 20-(ब) 21-(ब) 22-(अ) 23-(ब) 24-(अ) 25-(अ) 26-(ब) 27-(ब) 28-(ब) 29-(अ) 30-(ब) 31-(ब) 32-(ब) 33-(अ) 34-(ब) 35-(ब) 36-(ब) 37-(ब) 38-(ब) 39-(ब) 40-(ब) 41-(ब) 42-(ब) 43-(ब) 44-(ब) 45-(ब) 46-(ब) 47-(ब) 48-(ब) 49-(ब) 50-(ब)

किरातार्जुनीयम् : 500 वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तरी महामैराथन (भाग-2 : प्रश्न 51-100)

UGC NET, UP TGT, PGT, GIC, RPSC एवं असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा विशेष

51. 'प्रवृत्तिसाराः खलु मादृशां गिरः' यह कथन किरातार्जुनीयम् में किसके द्वारा कहा गया है?

(अ) युधिष्ठिर (ब) वनेचर (स) द्रौपदी (द) भीमसेन

52. 'किरातार्जुनीयम्' पद की निष्पत्ति में किस तद्धित प्रत्यय का प्रयोग हुआ है?

(अ) अण् प्रत्यय (ब) छ (ईय) प्रत्यय (स) घञ् प्रत्यय (द) यत् प्रत्यय

53. किरातार्जुनीयम् के प्रथम तीन सर्गों को विद्वानों द्वारा किस संज्ञा से अभिहित किया गया है?

(अ) सुवर्णत्रय (ब) पाषाणत्रय (स) रत्नत्रय (द) मणित्रय

54. 'मनोहारि' पद में 'हृ' धातु से कौन-सा कृदन्त प्रत्यय लगा है?

(अ) णिनि प्रत्यय (ब) तृच् प्रत्यय (स) ल्युट् प्रत्यय (द) क्तिन् प्रत्यय

55. 'निवेदयिष्यतः' पद में किस कृदन्त प्रत्यय का योग हुआ है?

(अ) क्त प्रत्यय (ब) शतृ प्रत्यय (लृट् लकारयुक्त) (स) शानच् प्रत्यय (द) क्तवतु प्रत्यय

56. 'जिगीषतः' पद में 'जि' धातु के साथ किस प्रत्यय का प्रयोग हुआ है?

(अ) सन् + शतृ (ब) णिच् + शतृ (स) यङ् + शतृ (द) क्यच् + शतृ

57. 'अकृष्टपच्या इव सस्यसम्पदः' इस श्लोकांश का क्या भावार्थ है?

(अ) अकाल पड़ना (ब) बिना जोते ही उत्तम फसलें पकने जैसी समृद्धि (स) कृषि का नष्ट होना (द) अधिक वर्षा होना

58. 'न तेन सज्यं क्वचिदुद्यतं धनुः' यहाँ 'सज्यम्' पद का क्या अर्थ है?

(अ) टूटा हुआ (ब) प्रत्यञ्चा (डोरी) चढ़ा हुआ (स) बाणरहित (द) स्वर्णजड़ित

59. 'कथं त्वमेतौ धृतिसंयमौ यमौ विलोकयन्त्सहसे न बाधितुम्' यहाँ 'यमौ' पद से किनका बोध होता है?

(अ) भीम और अर्जुन (ब) नकुल और सहदेव (स) युधिष्ठिर और भीम (द) कर्ण और दुर्योधन

60. 'गुणानुरोधेन बिना न सत्क्रिया' यह सूक्ति किरातार्जुनीयम् के किस सर्ग की है?

(अ) प्रथम सर्ग (ब) द्वितीय सर्ग (स) तृतीय सर्ग (द) पञ्चम सर्ग

61. दुर्योधन किस भय के कारण निरन्तर अपने व्यवहार को श्रेष्ठ और लोकहितकारी दिखाने का यत्न करता है?

(अ) प्रजा विद्रोह के भय से (ब) युधिष्ठिर के पराक्रम एवं भावी युद्ध के भय से (स) देवराज इन्द्र के भय से (द) अपने मन्त्रियों के भय से

62. 'सम्पदां' पद में किस विभक्ति और वचन का प्रयोग हुआ है?

(अ) द्वितीया, एकवचन (ब) षष्ठी, बहुवचन (स) तृतीया, एकवचन (द) पञ्चमी, बहुवचन

63. किरातार्जुनीयम् के द्वितीय सर्ग का आरम्भ किस पात्र के भाषण/वक्तव्य से होता है?

(अ) युधिष्ठिर (ब) भीमसेन (स) अर्जुन (द) महर्षि व्यास

64. भीमसेन ने द्वितीय सर्ग में युधिष्ठिर के किस दृष्टिकोण का तीव्र प्रतिवाद किया है?

(अ) दानशीलता का (ब) अत्यधिक क्षमाशीलता एवं निष्क्रियता का (स) सत्यवादिता का (द) वनवास स्वीकारने का

65. 'स्फुटता न पदैरपाकृता न च न स्वीकृतमर्थगौरवम्' यह श्लोक किसकी काव्य-शैली का आदर्श व्यक्त करता है?

(अ) कालिदास (ब) भारवि (स) भवभूति (द) बाणभट्ट

66. किरातार्जुनीयम् के तृतीय सर्ग में पाण्डवों के आश्रम में किस महर्षि का आगमन होता है?

(अ) महर्षि विश्वामित्र (ब) महर्षि कृष्णद्वैपायन (वेदव्यास) (स) महर्षि वसिष्ठ (द) महर्षि दुर्वासा

67. वेदव्यास ने युधिष्ठिर को कौन-सी विद्या प्रदान की, जिसे युधिष्ठिर ने बाद में अर्जुन को दी?

(अ) वैष्णवी विद्या (ब) प्रतिस्मृति विद्या (स) आग्नेयी विद्या (द) गान्धर्वी विद्या

68. व्यास के परामर्श पर अर्जुन किस दिशा की ओर दिव्यास्त्रों की प्राप्ति हेतु प्रस्थान करते हैं?

(अ) दक्षिण दिशा (ब) उत्तर दिशा (स) पूर्व दिशा (द) पश्चिम दिशा

69. किरातार्जुनीयम् के चतुर्थ सर्ग में किस ऋतु का अलौकिक एवं विस्तृत प्राकृतिक वर्णन है?

(अ) वसन्त ऋतु (ब) शरद् ऋतु (स) वर्षा ऋतु (द) ग्रीष्म ऋतु

70. भारवि ने पञ्चम सर्ग में किस पर्वत की प्राकृतिक सुषमा एवं शिखरों का सांगोपांग वर्णन किया है?

(अ) रैवतक पर्वत (ब) इन्द्रकील पर्वत (स) चित्रकूट पर्वत (द) विन्ध्य पर्वत

71. षष्ठ सर्ग में इन्द्र द्वारा अर्जुन की तपस्या में विघ्न डालने हेतु किसे भेजा जाता है?

(अ) दैत्य सेना (ब) अप्सराओं एवं गन्धर्वों की सेना (स) यक्षों को (द) राक्षसों को

72. किरातार्जुनीयम् के सप्तम और अष्टम सर्ग में मुख्यतः किन विषयों का शृङ्गारिक वर्णन है?

(अ) युद्ध एवं व्यूहरचना (ब) गन्धर्व-अप्सरा विलास, सुरतक्रीड़ा एवं जलक्रीड़ा (स) मन्त्रणा एवं राजनीति (द) यज्ञ एवं तपस्या

73. नवम सर्ग में महाकवि भारवि ने अपनी अद्भुत काव्य-प्रतिभा से किसका वर्णन किया है?

(अ) सूर्यास्त, चन्द्रोदय, अन्धकार एवं प्रभात (ब) धनुर्विद्या (स) अस्त्र-निर्माण (द) राज्याभिषेक

74. दशम सर्ग में अप्सराओं के समस्त हाव-भाव और प्रलोभनों के सम्मुख अर्जुन का आचरण कैसा रहा?

(अ) विचलित हो गए (ब) पूर्णतः निर्विकार और अविचल रहे (स) क्रुद्ध हो गए (द) पलायन कर गए

75. एकादश (11वें) सर्ग में देवराज इन्द्र किस रूप में आकर अर्जुन की निष्ठा की परीक्षा लेते हैं?

(अ) वृद्ध मुनि (तपस्वी) के वेश में (ब) राजा के वेश में (स) सैनिक के वेश में (द) बालक के वेश में

76. द्वादश (12वें) सर्ग में अर्जुन किसके निमित्त घोर एवं निराहार तपस्या आरम्भ करते हैं?

(अ) भगवान विष्णु (ब) भगवान शिव (महादेव) (स) ब्रह्मा जी (द) सूर्यदेव

77. त्रयोदश (13वें) सर्ग में किस मायावी दैत्य ने अर्जुन पर आक्रमण करने हेतु वराह (शूकर) का रूप धरा था?

(अ) मारीच (ब) मूकासुर (स) बकासुर (द) ताड़का

78. अर्जुन और किरातवेशी शिव का एक साथ बाण किस लक्ष्य पर लगा?

(अ) मृग पर (ब) मूकासुर (वराह) पर (स) सिंह पर (द) पक्षी पर

79. चतुर्दश (14वें) सर्ग में अर्जुन और किरात सेनापति के मध्य किस विषय पर वाक्युद्ध होता है?

(अ) तपोभूमि के अधिकार पर (ब) वराह के प्रथम आखेट (शिकार) के स्वामित्व पर (स) गाण्डीव धनुष पर (द) मुकुट पर

80. पञ्चदश (15वें) सर्ग में प्रयुक्त चित्रालंकारों में कौन-सा प्रमुख बन्ध प्राप्त होता है?

(अ) गोमूत्रिका, सर्वतोभद्र एवं एकाक्षर (ब) केवल यमक (स) केवल श्लेष (द) केवल रूपक

81. किरातार्जुनीयम् के षोडश (16वें) सर्ग में दोनों पक्षों के मध्य किस प्रकार का युद्ध होता है?

(अ) केवल वाक्युद्ध (ब) विविध दिव्यास्त्रों एवं बाणों का घमासान युद्ध (स) जलयुद्ध (द) रथयुद्ध

82. सप्तदश (17वें) सर्ग में समस्त दिव्यास्त्र निष्फल होने पर अर्जुन और किरात के बीच कौन-सा युद्ध हुआ?

(अ) गदायुद्ध (ब) बाहुयुद्ध (भुजायुद्ध / मल्लयुद्ध) (स) खड्गयुद्ध (द) पाशयुद्ध

83. अष्टादश (18वें) सर्ग में अर्जुन के अतुलित शौर्य और धैर्य से प्रसन्न होकर शिव ने कौन-सा रूप दिखाया?

(अ) चन्द्रशेखर (उमा-महेश्वर) रूप (ब) नटराज रूप (स) भैरव रूप (द) अर्धनारीश्वर रूप

84. भगवान शिव ने प्रसन्न होकर अर्जुन को कौन-सा अमोघ अस्त्र प्रदान किया?

(अ) वायव्यास्त्र (ब) पाशुपतास्त्र (स) सम्मोहन अस्त्र (द) रौद्रास्त्र

85. शिव के अतिरिक्त किरातार्जुनीयम् के अन्तिम सर्ग में किन लोकपालों ने अर्जुन को अपने अस्त्र दिए?

(अ) इन्द्र, वरुण, कुबेर और यम (ब) सूर्य, चन्द्र, अग्नि और वायु (स) केवल इन्द्र (द) केवल कुबेर

86. 'भारवि' शब्द की व्युत्पत्ति क्या है?

(अ) भाः + रविः (सूर्य की कान्ति/दीप्ति) (ब) भार + वि (स) भानु + रवि (द) भव + रवि

87. भारवि की काव्य-शैली में किस रीति की प्रधानता मानी जाती है?

(अ) वैदर्भी रीति (ब) गौड़ी रीति (स) पाञ्चाली रीति (अर्थगाम्भीर्ययुक्त) (द) लाटी रीति

88. 'उपमा कालिदासस्य भारवेरर्थगौरवम्' यह प्रसिद्ध श्लोक किस आचार्य/परम्परा से सम्बद्ध है?

(अ) राजशेखर (ब) उद्भट (परम्परागत सुभाषित) (स) दण्डी (द) मम्मट

89. 'किरात' पद का व्याकरणिक अर्थ क्या है?

(अ) वनवासी भील/शबर रूपधारी भगवान शिव (ब) केवल एक सामान्य शिकारी (स) असुर (द) गन्धर्व

90. 'महीभृतां' पद में कौन-सा समास है?

(अ) षष्ठी तत्पुरुष (महीं बिभ्रतीति महीभृतः, तेषाम्) (ब) कर्मधारय (स) बहुव्रीहि (द) द्वन्द्व

91. 'वसुनि वाञ्छन् न च मन्युना नृपः' यहाँ 'वसुनि' शब्द का क्या तात्पर्य है?

(अ) अस्त्र-शस्त्र (ब) धन/सम्पत्ति (स) भूमि (द) अश्व

92. किरातार्जुनीयम् के प्रथम सर्ग में 'उदारकीर्तेरुदयम्' में कौन-सा अलंकार प्रयुक्त है?

(अ) अनुप्रास (ब) रूपक (स) उत्प्रेक्षा (द) सन्देह

93. 'न बाधतेऽस्य त्रिगणः परस्परम्' यहाँ 'त्रिगण' से क्या अभिप्राय है?

(अ) सत्त्व, रज, तम (ब) धर्म, अर्थ, काम (स) वात, पित्त, कफ (द) साम, दान, दण्ड

94. 'अखण्डमाखण्डलतुल्यधामभिः' यहाँ 'आखण्डल' पद का क्या अर्थ है?

(अ) सूर्य (ब) इन्द्र (स) यमराज (द) कुबेर

95. द्रौपदी के अनुसार किस व्यक्ति का आदर न मित्र करते हैं और न ही शत्रु उससे डरते हैं?

(अ) निर्धन का (ब) क्रोधरहित/तेजहीन (अमर्षशून्य) व्यक्ति का (स) मूर्ख का (द) रोगी का

96. 'द्विषन्निमित्ता यदियं दशा ततः' यह श्लोकांश किस पात्र के अन्तर्द्वन्द्व एवं पीड़ा को दर्शाता है?

(अ) कुन्ती (ब) द्रौपदी (स) सुभद्रा (द) गान्धारी

97. 'अवन्ध्यकोपस्य विहन्तुरापदां' यहाँ 'अवन्ध्यकोपस्य' का क्या अर्थ है?

(अ) जिसका क्रोध व्यर्थ न जाता हो (सफल क्रोध वाला) (ब) जो कभी क्रोध न करता हो (स) जो सदा शान्त रहे (द) जो क्षमाशील हो

98. भारवि के काव्य में किस गुण (काव्यगुण) की सर्वाधिक दीप्ति देखने को मिलती है?

(अ) केवल माधुर्य (ब) ओज एवं प्रसाद गुण (स) केवल प्रसाद (द) केवल सुकुमारता

99. 'विधाय तन्वंीमिव भूपतेस्तनुम्' यहाँ कौन-सा छन्द है?

(अ) वंशस्थ (ब) पुष्पिताग्रा (स) मालिनी (द) अनुष्टुप्

100. किरातार्जुनीयम् के अनुसार एक राजा के गुप्तचर उसकी क्या होते हैं?

(अ) बाहु (भुजाएँ) (ब) चारचक्षु (आँखें) (स) कर्ण (कान) (द) हृदय
✦ उत्तरमाला (Answer Key : प्रश्न 51 से 100) ✦
51-(ब) 52-(ब) 53-(ब) 54-(अ) 55-(ब) 56-(अ) 57-(ब) 58-(ब) 59-(ब) 60-(अ) 61-(ब) 62-(ब) 63-(ब) 64-(ब) 65-(ब) 66-(ब) 67-(ब) 68-(ब) 69-(ब) 70-(ब) 71-(ब) 72-(ब) 73-(अ) 74-(ब) 75-(अ) 76-(ब) 77-(ब) 78-(ब) 79-(ब) 80-(अ) 81-(ब) 82-(ब) 83-(अ) 84-(ब) 85-(अ) 86-(अ) 87-(स) 88-(ब) 89-(अ) 90-(अ) 91-(ब) 92-(अ) 93-(ब) 94-(ब) 95-(ब) 96-(ब) 97-(अ) 98-(ब) 99-(स) 100-(ब)

किरातार्जुनीयम् : 500 वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तरी महामैराथन (भाग-3 : प्रश्न 101-150)

UGC NET, UP TGT, PGT, GIC, RPSC एवं असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा विशेष

101. 'महोक्षः' पद का सही समास-विग्रह क्या होगा?

(अ) महान् च असौ उक्षा (कर्मधारय) (ब) महतः उक्षा (तत्पुरुष) (स) महान् उक्षा यस्य सः (बहुव्रीहि) (द) महती उक्षा (द्विगु)

102. 'ससौष्ठवौदार्यविशेषशालिनीम्' में 'शालिनीम्' पद का क्या अर्थ है?

(अ) गृहयुक्त (ब) शोभा/वैशिष्ट्य से युक्त (स) मन्द गति वाली (द) क्लिष्ट

103. 'विनिश्चितार्थामिति वाचमाददे' यहाँ 'वाचम्' पद का विशेषण पद कौन-सा है?

(अ) आददे (ब) विनिश्चितार्थाम् (स) इति (द) सः

104. 'न विव्यथे तस्य मनो न हि प्रियं प्रवेक्तुमिच्छन्ति मृषा हितैषिणः' में कौन-सा अलंकार है?

(अ) उपमा (ब) रूपक (स) अर्थान्तरन्यास (द) सन्देह

105. 'द्विषां विघाताय विधातुमिच्छतः' इस श्लोकांश में कौन-सा शब्दालंकार है?

(अ) यमक (ब) छेकानुप्रास एवं वृत्यनुप्रास (स) श्लेष (द) वक्रोक्ति

106. वनेचर ने हस्तिनापुर जाकर दुर्योधन के किस आचरण को प्रत्यक्ष जाना?

(अ) केवल युद्धनीति (ब) नयवृत्तम् (नीतिपूर्ण शासन-व्यवस्था) (स) व्यक्तिगत भोग-विलास (द) दण्डनीति मात्र

107. दुर्योधन अपने सेवकों (भृत्यों) के साथ किस प्रकार का स्नेहपूर्ण व्यवहार करता था?

(अ) दासों जैसा (ब) मित्रों (सखियों) जैसा (स) शत्रुओं जैसा (द) उदासीन

108. दुर्योधन अपने मित्रों (सुहृदों) के साथ कैसा बर्ताव करता था?

(अ) बन्धु-बान्धवों (भाइयों) जैसा आदरयुक्त (ब) सेवकों जैसा (स) राजा जैसा (द) मन्त्रियों जैसा

109. 'असक्तमाराधयतो यथायथं त्रिगणस्य' यहाँ 'असक्तम्' पद का क्या तात्पर्य है?

(अ) अत्यन्त आसक्त होकर (ब) अनासक्त/पक्षपातरहित होकर समभाव से (स) असमर्थ होकर (द) आलस्य से

110. 'निरत्ययं साम न दानवर्जितं न भूरि दानं विरहय्य सत्क्रियाम्' के अनुसार दुर्योधन का 'साम' किसके बिना प्रयुक्त नहीं होता?

(अ) दण्ड के बिना (ब) दान के बिना (स) भेद के बिना (द) मन्त्रणा के बिना

111. दुर्योधन का प्रचुर दान (भूरि दानम्) किसके बिना नहीं होता था?

(अ) सत्कार (सत्क्रिया) के बिना (ब) ढिंढोरा पीटे बिना (स) धन के बिना (द) राजाज्ञा के बिना

112. दुर्योधन द्वारा अपराधियों को दण्ड देते समय किन दो दुर्गुणों का पूर्ण अभाव रहता था?

(अ) भय और लज्जा (ब) लोभ और क्रोध (मन्यु) (स) दया और क्षमा (द) अहंकार और मद

113. 'महीभृतां' पद में मूल धातु एवं कौन-सा कृत् प्रत्यय लगा है?

(अ) भृ + क्विप् (ब) भृ + तृच् (स) भृ + घञ् (द) भृ + शतृ

114. 'दुरोदरच्छद्मजितां समीहते नयेन जेतुं जगतीं सुयोधनः' में 'दुरोदर' पद का क्या अर्थ है?

(अ) पेट का रोग (ब) जुआ (द्यूतक्रीड़ा) / पासा (स) कपटी मित्र (द) दुष्ट शत्रु

115. 'जगतीम्' पद में किस विभक्ति एवं वचन का प्रयोग हुआ है?

(अ) प्रथमा, एकवचन (ब) द्वितीया, एकवचन (स) तृतीया, एकवचन (द) षष्ठी, बहुवचन

116. 'तथापि जिह्मः स भवज्जिगीषया' यहाँ 'जिह्मः' पद का क्या अर्थ है?

(अ) सीधा (ब) कुटिल / कपटी (स) पराक्रमी (द) कायर

117. 'कुरुन्' पद में कौन-सी विभक्ति और वचन है?

(अ) प्रथमा, एकवचन (ब) द्वितीया, बहुवचन (स) सप्तमी, एकवचन (द) पञ्चमी, एकवचन

118. 'अचिरेण' अव्यय पद का सही अर्थ क्या है?

(अ) बहुत समय बाद (ब) शीघ्र ही (बिना विलम्ब के) (स) कभी नहीं (द) सदैव

119. द्रौपदी के अनुसार जुए में राज्य गँवाने वाले राजा की तुलना किससे की गई है?

(अ) उन्मत्त हाथी द्वारा अपने मस्तक की पुष्पमाला फेंकने से (ब) विषपान करने वाले से (स) कायर से (द) अन्धे से

120. 'पराभवोऽप्युत्सव एव मानिनाम्' यह अमर सूक्ति किरातार्जुनीयम् में किसके द्वारा कही गई है?

(अ) वनेचर (ब) द्रौपदी (स) युधिष्ठिर (द) भीमसेन

121. 'व्रजन्ति शत्रुनावधूय निःस्पृहाः शमेन सिद्धिं मुनयो न भूभृतः' यहाँ 'भूभृतः' पद किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?

(अ) पर्वतों के लिए (ब) राजाओं के लिए (स) मुनियों के लिए (द) मन्त्रियों के लिए

122. द्रौपदी के अनुसार शम (शान्ति/तपस्या) द्वारा सिद्धि प्राप्त करना किसका कार्य है?

(अ) राजाओं का (ब) वीतरागी मुनियों/तपस्वियों का (स) क्षत्रियों का (द) सेनापतियों का

123. 'अनुजीविभिः' पद में कौन-सी विभक्ति और वचन है?

(अ) तृतीया, बहुवचन (ब) पञ्चमी, बहुवचन (स) षष्ठी, बहुवचन (द) सप्तमी, बहुवचन

124. 'चारचक्षुषः' पद का सही समास विग्रह क्या होगा?

(अ) चाराः एव चक्षूंषि येषां ते (बहुव्रीहि) (ब) चारस्य चक्षुः (तत्पुरुष) (स) चत्वारि चक्षूंषि (द्विगु) (द) चारं च चक्षुः च (द्वन्द्व)

125. 'भवज्जिगीषया' पद में कौन-सा समास है?

(अ) षष्ठी तत्पुरुष (ब) कर्मधारय (स) अव्ययीभाव (द) बहुव्रीहि

126. 'अनारतम्' पद का क्या अर्थ है?

(अ) रुक-रुक कर (ब) निरन्तर / सतत (स) रात्रि में (द) कभी-कभी

127. 'नय' शब्द का किरातार्जुनीयम् महाकाव्य में मुख्य अर्थ क्या है?

(अ) आँख (ब) नीति / कूटनीतिक आचरण (स) नवीन (द) विनम्रता

128. किरातार्जुनीयम् के तृतीय सर्ग में महर्षि वेदव्यास ने पाण्डवों को किस बात पर विशेष बल दिया?

(अ) केवल सन्धि करने पर (ब) पुरुषार्थ, उद्यम एवं दिव्यास्त्र-संग्रह पर (स) वन में ही स्थायी रहने पर (द) संन्यास लेने पर

129. महर्षि वेदव्यास द्वारा प्रदत्त 'प्रतिस्मृति विद्या' का मुख्य सामर्थ्य क्या था?

(अ) मृत को जीवित करना (ब) स्मरण मात्र से अभीष्ट सिद्धियों एवं अस्त्रों का साक्षात्कार (स) अदृश्य हो जाना (द) स्वर्ण बनाना

130. किरातार्जुनीयम् के सर्ग 7 से सर्ग 10 तक किस रस का अङ्ग रूप में विशद विस्तार हुआ है?

(अ) शृङ्गार रस (ब) करुण रस (स) हास्य रस (द) भयानक रस

131. 'पाषाणत्रय' के अन्तर्गत किरातार्जुनीयम् के कौन-से सर्ग परिगणित होते हैं?

(अ) सर्ग 1, 2 एवं 3 (ब) सर्ग 16, 17 एवं 18 (स) सर्ग 5, 6 एवं 7 (द) सर्ग 13, 14 एवं 15

132. किरातार्जुनीयम् के 15वें सर्ग में प्रयुक्त 'सर्वतोभद्र' चित्र-श्लोक का क्या वैशिष्ट्य है?

(अ) केवल दो ही अक्षरों का प्रयोग (ब) चारों ओर (आगे, पीछे, ऊपर, नीचे) से एकसमान पढ़ा जाना (स) केवल स्वरों का प्रयोग (द) विलोम रूप में अर्थ बदलना

133. मल्लिनाथ ने भारवि के काव्य-पाक को किस फल के सदृश कहा है?

(अ) द्राक्षा (अंगूर) पाक (ब) नारिकेल (नारियल) पाक (स) कदली (केला) पाक (द) आम्र पाक

134. 'नारिकेलपाक' का वास्तविक लक्षण क्या है?

(अ) बाहर से कोमल, भीतर से कठोर (ब) ऊपर से कठोर/गम्भीर, किन्तु भीतर से सरस एवं मधुर (स) सर्वथा शुष्क (द) अत्यन्त सुलभ

135. किरातार्जुनीयम् में स्त्री होकर भी राजनीति की मर्मस्पर्शी और ओजस्वी मन्त्रणा देने वाली पात्र कौन हैं?

(अ) कुन्ती (ब) द्रौपदी (स) सुभद्रा (द) सत्यभामा

136. 'सुलभाः पुरुषा राजन् सततं प्रियवादिनः' इस रामायणी सूक्ति के समान किरातार्जुनीयम् की कौन-सी सूक्ति है?

(अ) 'वरं विरोधोऽपि समं महात्मभिः' (ब) 'हितं मनोहारि च दुर्लभं वचः' (स) 'विचित्ररूपाः खलु चित्तवृत्तयः' (द) 'सहसा विदधीत न क्रियाम्'

137. 'अपवर्जितामिव मालां मत्तवारणेन' यहाँ 'मत्तवारण' पद का क्या अर्थ है?

(अ) मदमस्त हाथी (ब) उन्मत्त अश्व (स) सिंह (द) मतवाला सैनिक

138. 'उदपादि' क्रियापद में कौन-सा लकार प्रयुक्त हुआ है?

(अ) लट् लकार (ब) लुङ् लकार (कर्मवाच्य/भाववाच्य) (स) लङ् लकार (द) लिट् लकार

139. 'द्विषन्निमित्ता' पद में कौन-सा समास है?

(अ) षष्ठी तत्पुरुष (द्विषताम् निमित्ता) (ब) कर्मधारय (स) बहुव्रीहि (द) अव्ययीभाव

140. 'शुक-पिक-कूजित' आदि शब्द भारवि के किस ऋतु-वर्णन में प्राप्त होते हैं?

(अ) ग्रीष्म ऋतु (ब) वसन्त ऋतु (स) शरद् ऋतु (चतुर्थ सर्ग) (द) हेमन्त ऋतु

141. 'सखीनिव प्रीतियुजोऽनुजीविनः' में कौन-सा अलंकार है?

(अ) उपमा अलंकार (ब) रूपक अलंकार (स) सन्देह अलंकार (द) भ्रान्तिमान् अलंकार

142. 'महीं महीभुजे' में 'मही' और 'महीभुजे' शब्दों की आवृत्ति में कौन-सा अलंकार है?

(अ) यमक अलंकार (ब) अनुप्रास अलंकार (स) श्लेष अलंकार (द) उत्प्रेक्षा अलंकार

143. किरातार्जुनीयम् के प्रथम सर्ग में कुल कितने श्लोकों में वनेचर का कथन वर्णित है?

(अ) श्लोक 1 से 10 तक (ब) श्लोक 3 से 25 तक (स) श्लोक 28 से 46 तक (द) सम्पूर्ण सर्ग में

144. प्रथम सर्ग में द्रौपदी का कथन किस श्लोक संख्या से आरम्भ होता है?

(अ) श्लोक 20 से (ब) श्लोक 27/28 से (स) श्लोक 35 से (द) श्लोक 40 से

145. 'अहो दुरन्ता बलवद्विरोधिता' में 'बलवद्विरोधिता' का क्या समास विग्रह होगा?

(अ) बलवता सह विरोधः (तृतीया तत्पुरुष/मध्यमपदलोपी) (ब) बलवान् विरोधः (स) बलेन विरोधः (द) बलवतः विरोधः

146. किरातार्जुनीयम् के किस सर्ग को 'व्यास-आगमन' सर्ग भी कहा जाता है?

(अ) प्रथम सर्ग (ब) तृतीय सर्ग (स) पञ्चम सर्ग (द) सप्तम सर्ग

147. 'धनुर्धरः' पद में कौन-सा समास है?

(अ) धनुः धरति इति (उपपद तत्पुरुष) (ब) कर्मधारय (स) बहुव्रीहि (द) द्वन्द्व

148. 'प्रशाम्य' पद में कौन-सा प्रत्यय है?

(अ) क्त्वा प्रत्यय (ब) ल्यप् प्रत्यय (स) तुमुन् प्रत्यय (द) ण्यत् प्रत्यय

149. किरातार्जुनीयम् महाकाव्य में भारवि ने किस गुण को 'सर्वसम्पदां मूलम्' सिद्ध किया है?

(अ) विवेकपूर्ण पुरुषार्थ एवं नीति (ब) अन्ध-साहस (स) भाग्यवादिता (द) मौन

150. भारवि के किरातार्जुनीयम् की समाप्ति पर अर्जुन को पाशुपतास्त्र के साथ-साथ क्या आशीर्वाद प्राप्त होता है?

(अ) युद्ध में विजय और निष्कण्टक राज्य-प्राप्ति (ब) दीर्घायु मात्र (स) देवलोक गमन (द) संन्यास
✦ उत्तरमाला (Answer Key : प्रश्न 101 से 150) ✦
101-(अ) 102-(ब) 103-(ब) 104-(स) 105-(ब) 106-(ब) 107-(ब) 108-(अ) 109-(ब) 110-(ब) 111-(अ) 112-(ब) 113-(अ) 114-(ब) 115-(ब) 116-(ब) 117-(ब) 118-(ब) 119-(अ) 120-(ब) 121-(ब) 122-(ब) 123-(अ) 124-(अ) 125-(अ) 126-(ब) 127-(ब) 128-(ब) 129-(ब) 130-(अ) 131-(अ) 132-(ब) 133-(ब) 134-(ब) 135-(ब) 136-(ब) 137-(अ) 138-(ब) 139-(अ) 140-(स) 141-(अ) 142-(ब) 143-(ब) 144-(ब) 145-(अ) 146-(ब) 147-(अ) 148-(ब) 149-(अ) 150-(अ)

किरातार्जुनीयम् : 500 वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तरी महामैराथन (भाग-4 : प्रश्न 151-200)

UGC NET, UP TGT, PGT, GIC, RPSC एवं असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा विशेष

151. 'प्रविभज्य' पद में प्रकृति-प्रत्यय का सही रूप क्या होगा?

(अ) प्र + विभज् + क्त्वा (ब) प्र + वि + भज् + ल्यप् (स) प्र + विभज् + ण्यत् (द) प्र + विभज् + तुमुन्

152. 'समूलमुन्मूलयतीव मे मनः' यह श्लोकांश प्रथम सर्ग में किसके द्वारा कहा गया है?

(अ) युधिष्ठिर (ब) द्रौपदी (स) वनेचर (द) भीमसेन

153. द्रौपदी के अनुसार शत्रुओं द्वारा दिया गया कौन-सा दुःख उसके मन को जड़ से उखाड़ रहा है?

(अ) धन का अभाव (ब) कुल-परम्परागत राज्यभ्रंश एवं पाण्डवों की दुर्दशा (स) वन का कष्ट (द) वस्त्राभाव

154. 'निसर्गदुर्बोधमबोधविक्लवाः क्व भूपतीनां चरितं क्व जन्तवः' में 'निसर्गदुर्बोधम्' किसका विशेषण है?

(अ) वनेचर का (ब) राजाओं के चरित्र (भूपतीनां चरितम्) का (स) सामान्य प्रजा का (द) पण्डितों का

155. 'क्व भूपतीनां चरितं क्व जन्तवः' इस पंक्ति में कौन-सा प्रमुख अलंकार है?

(अ) रूपक (ब) विषम अलंकार (निदर्शना) (स) उत्प्रेक्षा (द) सन्देह

156. 'वनेचरः' पद में कौन-सा समास माना जाता है?

(अ) उपपद तत्पुरुष / अलुक् तत्पुरुष (वने चरतीति) (ब) कर्मधारय (स) बहुव्रीहि (द) द्वन्द्व

157. 'महीभुजाम्' पद में कौन-सी विभक्ति और वचन प्रयुक्त है?

(अ) द्वितीया, बहुवचन (ब) षष्ठी, बहुवचन (स) तृतीया, एकवचन (द) पञ्चमी, एकवचन

158. 'अहो दुरन्ता बलवद्विरोधिता' यहाँ 'दुरन्ता' पद का व्याकरणिक लिंग क्या है?

(अ) पुँल्लिङ्ग (ब) स्त्रीलिङ्ग (प्रथमा एकवचन) (स) नपुंसकलिंग (द) अव्यय

159. द्रौपदी ने युधिष्ठिर के गुप्त तेज की तुलना किस काष्ठ/वृक्ष में छिपी अग्नि से की है?

(अ) चन्दन वृक्ष (ब) शमी वृक्ष (शमीतरु) (स) वटवृक्ष (द) आम्रवृक्ष

160. 'ज्वलन्तमग्निं दहनोचितं वने' यहाँ किस तेजस्वी गुण के प्रज्वलन का संकेत है?

(अ) कामभाव (ब) क्षात्रतेज एवं क्रोध (स) ज्ञान (द) तपस्या

161. 'धृतिसंयमौ' पद का शुद्ध समास-विग्रह क्या होगा?

(अ) धृतिश्च संयमश्च (इतरेतर द्वन्द्व) (ब) धृत्या संयमः (स) धृतये संयमः (द) धृतौ संयमः

162. 'अधिशय्य' पद में प्रयुक्त उपसर्ग, धातु एवं प्रत्यय का सही क्रम क्या है?

(अ) अधि + शीङ् + ल्यप् (ब) अधि + शे + क्त्वा (स) अधि + शय् + ण्यत् (द) अधि + शि + तुमुन्

163. युधिष्ठिर पहले राजप्रासाद में जिस बहुमूल्य शय्या पर सोते थे, वन में वे किस पर शयन करते हैं?

(अ) काष्ठ पर (ब) कुश/दर्भ युक्त कठोर भूमि (कुशास्तरण) पर (स) शिला पर (द) पर्णकुटी में

164. भीमसेन के शरीर पर पहले लाल चन्दन का लेप होता था, अब वन में क्या लगा रहता है?

(अ) भस्म (ब) वन-धूलि (रेणु) (स) कीचड़ (द) चन्दन

165. अर्जुन पहले उत्तर कुरु से अपरिमित सुवर्ण लाते थे, अब वन में युधिष्ठिर के लिए क्या लाते हैं?

(अ) फल-मूल (ब) वल्कल वस्त्र (वृक्षों की छाल) (स) मृगचर्म (द) समिधा

166. नकुल और सहदेव की किस अवस्था को देखकर द्रौपदी का हृदय अत्यधिक व्यथित होता है?

(अ) रुग्ण होने पर (ब) सुकुमार राजकुमारों का कठोर भूमि पर धूल-धूसरित होकर शयन करना (स) भूख से व्याकुल होना (द) शस्त्रहीन होना

167. द्रौपदी के अनुसार स्वाभिमानी क्षत्रियों के लिए 'धन' के समान क्या होता है?

(अ) सुवर्ण (ब) मान एवं स्वाभिमान (अभिमानधन) (स) भूमि (द) सेना

168. 'उदितम्' पद में मूल धातु एवं प्रत्यय कौन-सा है?

(अ) उद् + इत् (ब) वद् + क्त (सम्प्रसारण युक्त) (स) उद् + दा + क्त (द) वद् + ल्युट्

169. 'अवधीर्य' पद का सटीक संस्कृत पर्याय/अर्थ क्या है?

(अ) स्वीकार करके (ब) तिरस्कृत / अनादर करके (स) धारण करके (द) विचार करके

170. 'विजिगीषु' शब्द का राजनीतिशास्त्र में क्या अर्थ है?

(अ) हार मानने वाला (ब) विजय की उत्कट अभिलाषा रखने वाला राजा (स) सन्धि चाहने वाला (द) उदासीन राजा

171. किरातार्जुनीयम् के द्वितीय सर्ग में भीमसेन ने राजनीति के किस पक्ष को सर्वोपरि माना?

(अ) भाग्य को (ब) उत्साहशक्ति, पराक्रम एवं शत्रु पर तात्कालिक आक्रमण को (स) प्रतीक्षा को (द) सन्धि को

172. द्वितीय सर्ग में युधिष्ठिर ने भीमसेन के प्रस्ताव के उत्तर में किस गुण को आवश्यक बताया?

(अ) अन्ध-आक्रमण (ब) प्रतिज्ञा-पालन, उचित अवसर की प्रतीक्षा एवं गम्भीर विचार (स) पलायन (द) आत्मसमर्पण

173. भारवि के अनुसार बिना विचारे कार्य करने वाले (अविमृश्यकारी) व्यक्ति को क्या प्राप्त होता है?

(अ) यश (ब) समस्त महा-आपदाओं का आश्रय (परमापदां पदम्) (स) धन (द) राज्य

174. 'गुणलुब्धाः' पद में कौन-सा समास है?

(अ) गुणेषु लुब्धाः (सप्तमी तत्पुरुष) (ब) गुणानां लुब्धाः (स) गुणैः लुब्धाः (द) कर्मधारय

175. 'वृणते हि विमृश्यकारिणं गुणलुब्धाः स्वयमेव सम्पदः' में किसका वरण सम्पत्तियाँ स्वयं करती हैं?

(अ) आलसी का (ब) सोच-समझकर कार्य करने वाले (विमृश्यकारी) गुणी पुरुष का (स) क्रोधी का (द) दम्भी का

176. किरातार्जुनीयम् के तृतीय सर्ग में महर्षि वेदव्यास का आगमन किस तेज के समान वर्णित है?

(अ) चन्द्रमा के समान (ब) साक्षात् मूर्तिमान् तप एवं प्रदीप्त अग्नि के समान (स) विद्युत के समान (द) इन्द्रधनुष के समान

177. इन्द्रकील पर्वत पर प्रस्थान करते समय अर्जुन को किसने अमोघ आशीर्वाद और प्रेरणा दी?

(अ) केवल भीम ने (ब) युधिष्ठिर, द्रौपदी एवं महर्षि व्यास ने (स) श्रीकृष्ण ने (द) नकुल ने

178. चतुर्थ सर्ग में शरद् ऋतु की क्षीण-जल वाली नदियों की तुलना किससे की गई है?

(अ) वृद्धों से (ब) कृश-कटि (पतली कमर वाली) विरहिणी नायिकाओं से (स) बालिकाओं से (द) योगियों से

179. पञ्चम सर्ग में भारवि ने हिमालय एवं इन्द्रकील के शिखरों पर विचरने वाली किन जातियों का वर्णन किया?

(अ) असुरों का (ब) किन्नरों, गन्धर्वों एवं सिद्धों का (स) वानरों का (द) नागों का

180. किरातार्जुनीयम् के पञ्चम सर्ग में प्राकृतिक छटा के चित्रण में किस छन्द की प्रमुखता है?

(अ) केवल अनुष्टुप् (ब) वसन्ततिलका एवं विविध छन्द (स) केवल मालिनी (द) केवल वंशस्थ

181. षष्ठ सर्ग में देवराज इन्द्र को अर्जुन के घोर तप से क्या आशंका उत्पन्न हुई?

(अ) इन्द्रासन और स्वर्ग के अधिकार छिनने का भय (ब) युद्ध का भय (स) मृत्यु का भय (द) असुरों के आक्रमण का भय

182. सप्तम सर्ग में गन्धर्वों और अप्सराओं के आकाश-मार्ग से आगमन हेतु किसका उल्लेख है?

(अ) गरुड़ का (ब) दिव्य विमानों (आकाशीय यानों) का (स) मेघों का (द) रथों का

183. अष्टम सर्ग में वर्णित अप्सराओं की जलक्रीड़ा एवं पुष्प-चयन किस रस का परिपोषक है?

(अ) वीर रस (ब) सम्भोग शृङ्गार रस (स) करुण रस (द) वीभत्स रस

184. नवम सर्ग में भारवि ने उदित होते हुए चन्द्रमा की तुलना किससे की है?

(अ) विरक्त सन्त से (ब) नायिका के सम्मुख आते हुए कामी/अनुरागी नायक से (स) बालक से (द) राजा से

185. दशम सर्ग में अर्जुन को आकर्षित करने में असफल होने पर अप्सराओं की क्या स्थिति हुई?

(अ) वे क्रुद्ध हुईं (ब) वे लज्जित होकर अर्जुन के जितेन्द्रिय स्वरूप की प्रशंसक बनीं (स) उन्होंने युद्ध किया (द) वे मूर्छित हुईं

186. एकादश सर्ग में वृद्ध तपस्वी वेशधारी इन्द्र ने अर्जुन के समक्ष क्या प्रश्न उठाया?

(अ) भोजन का (ब) शान्त तपोवन में धनुष-बाण धारण करने का औचित्य (स) राज्य का (द) आयु का

187. वृद्ध तपस्वी को अर्जुन ने अपने शस्त्र-धारण का क्या कारण बताया?

(अ) केवल शिकार करना (ब) क्षत्रिय धर्म का पालन एवं कपटी शत्रुओं से कुल के अपमान का प्रतिशोध (स) आत्मरक्षा मात्र (द) दम्भ

188. द्वादश सर्ग में अर्जुन के एकपाद-तप (एक पैर पर खड़े होकर तप) का दिशाओं पर क्या प्रभाव पड़ा?

(अ) शीतल पवन बही (ब) सम्पूर्ण दिशाएँ और पर्वत तपने लगे तथा धुआँ उठने लगा (स) वर्षा होने लगी (द) अन्धकार छा गया

189. त्रयोदश सर्ग में किरात सेनापति के साथ शिकार हेतु कौन-से सहायक जीव आए थे?

(अ) शिकारी श्वान (कुत्ते) एवं भील सैनिक (ब) हाथी (स) सिंह (द) चीते

190. मूकासुर नामक दैत्य ने अर्जुन पर प्रहार करने के लिए किस पशु का विकराल रूप धरा था?

(अ) सिंह का (ब) विशाल शूकर (जंगली वराह) का (स) महिष (भैंसे) का (द) सर्प का

191. चतुर्दश सर्ग में किरात के दूत ने अर्जुन से क्या माँग की?

(अ) गाण्डीव धनुष की (ब) वराह के शरीर में लगे बाण और आखेट पर किरातराज के प्रथम अधिकार की (स) तपोभूमि छोड़ने की (द) स्वर्ण की

192. पञ्चदश सर्ग के 'गोमूत्रिका बन्ध' श्लोक की क्या विशेषता होती है?

(अ) अक्षरों का विन्यास गोमूत्र की टेढ़ी-मेढ़ी धारा के समान तिरछा पढ़ने पर समान रहता है (ब) केवल 'ग' वर्ण आना (स) केवल छन्द बदलना (द) विलोम अर्थ निकलना

193. षोडश सर्ग में अर्जुन के दिव्यास्त्रों को किरातवेशी शिव ने किस प्रकार व्यर्थ कर दिया?

(अ) भागकर (ब) अपने अद्भुत शर-जाल और लीला-शक्ति से निगलकर/नष्ट करके (स) छिपकर (द) जल में डूबकर

194. सप्तदश सर्ग में धनुष कट जाने पर अर्जुन ने किरात पर प्रहार करने के लिए क्या उठाया?

(अ) विशाल शिलाएँ एवं वृक्ष (ब) केवल कटार (स) खड्ग मात्र (द) मिट्टी

195. अष्टादश सर्ग में भगवान शिव ने अर्जुन के किस गुण से परम सन्तुष्ट होकर अपना दिव्य रूप दिखाया?

(अ) केवल रूप से (ब) अतुलनीय बाहुबल, क्षात्रतेज, निष्ठा और अविचल धैर्य से (स) पूजा-सामग्री से (द) स्तुति से

196. भगवान शिव ने अर्जुन को पाशुपतास्त्र के साथ किस प्राचीन अवतार की स्मृति कराई?

(अ) राम-लक्ष्मण (ब) नर-नारायण (अर्जुन नर और श्रीकृष्ण नारायण) (स) वामन (द) वराह

197. किरातार्जुनीयम् पर टीका लिखने वाले दक्षिण भारतीय प्रकाण्ड पण्डित मल्लिनाथ का पूरा नाम क्या है?

(अ) पेद्दिभट्ट मल्लिनाथ (ब) कोलाचल मल्लिनाथ सूरि (स) रामचन्द्र मल्लिनाथ (द) शिवदास मल्लिनाथ

198. भारवि के किरातार्जुनीयम् में प्रयुक्त 'घण्टापथ' टीका के नाम का क्या तात्पर्य है?

(अ) संकरा मार्ग (ब) खुला राजमार्ग (जिस पर कोई भी सुगमता से चल सके) (स) घण्टियों की ध्वनि (द) दुर्गम पथ

199. किरातार्जुनीयम् का प्रमुख काव्यशास्त्रीय सन्देश क्या निष्पन्न होता है?

(अ) कायरता की विजय (ब) नीति, पुरुषार्थ, क्षात्रधर्म और भगवद्-अनुग्रह से ही न्याय की विजय होती है (स) केवल भाग्य पर निर्भर रहना (द) संन्यास ही श्रेष्ठ है

200. 'किरातार्जुनीयम्' में कुल 18 सर्गों के साथ महाकाव्य के सभी शास्त्रीय लक्षणों की पूर्णता के कारण इसे क्या कहा जाता है?

(अ) खण्डकाव्य (ब) संस्कृत साहित्य का सर्वोत्कृष्ट शास्त्रीय महाकाव्य (महाकाव्य-रत्न) (स) चम्पूकाव्य (द) गीति काव्य
✦ उत्तरमाला (Answer Key : प्रश्न 151 से 200) ✦
151-(ब) 152-(ब) 153-(ब) 154-(ब) 155-(ब) 156-(अ) 157-(ब) 158-(ब) 159-(ब) 160-(ब) 161-(अ) 162-(अ) 163-(ब) 164-(ब) 165-(ब) 166-(ब) 167-(ब) 168-(ब) 169-(ब) 170-(ब) 171-(ब) 172-(ब) 173-(ब) 174-(अ) 175-(ब) 176-(ब) 177-(ब) 178-(ब) 179-(ब) 180-(ब) 181-(अ) 182-(ब) 183-(ब) 184-(ब) 185-(ब) 186-(ब) 187-(ब) 188-(ब) 189-(अ) 190-(ब) 191-(ब) 192-(अ) 193-(ब) 194-(अ) 195-(ब) 196-(ब) 197-(ब) 198-(ब) 199-(ब) 200-(ब)

किरातार्जुनीयम् : 500 वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तरी महामैराथन (भाग-5 : प्रश्न 201-250)

UGC NET, UP TGT, PGT, GIC, RPSC एवं असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा विशेष

201. 'श्रियः कुरुणामधिपस्य पालनीम्' यहाँ 'श्रियः' पद में कौन-सी विभक्ति और वचन है?

(अ) प्रथमा, बहुवचन (ब) षष्ठी, एकवचन (स) द्वितीया, एकवचन (द) पञ्चमी, बहुवचन

202. 'पालनीम्' पद में कौन-सा प्रत्यय प्रयुक्त हुआ है?

(अ) ल्युट् + ङीप् (ब) शानच् + टाप् (स) शतृ + ङीष् (द) क्तिन्

203. 'वेत्तुम्' पद का सही प्रकृति-प्रत्यय क्या होगा?

(अ) विद् + तुमुन् (ब) वेद् + क्त्वा (स) विद् + तव्यत् (द) विद् + ल्युट्

204. 'समाययौ' क्रियापद किस लकार, पुरुष एवं वचन का रूप है?

(अ) लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन (ब) लिट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन (सम् + आ + या) (स) लङ् लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन (द) लुट् लकार, उत्तम पुरुष, एकवचन

205. 'न हि प्रियं प्रवेक्तुमिच्छन्ति मृषा हितैषिणः' यहाँ 'मृषा' अव्यय पद का क्या अर्थ है?

(अ) सत्य (ब) असत्य / मिथ्या (झूठ) (स) मधुर (द) शीघ्र

206. 'हितैषिणः' पद का सही समास-विग्रह क्या होगा?

(अ) हितम् इच्छन्ति इति (उपपद तत्पुरुष) (ब) हितेन एषिणः (स) हितस्य एषिणः (द) हिताय एषिणः

207. 'द्विषाम्' पद का मूल प्रातिपदिक (शब्द) क्या है?

(अ) द्विष (ब) द्विष् (हलन्त पुँल्लिङ्ग) (स) द्वेष (द) द्वेषिन्

208. 'प्रभवः' पद का किरातार्जुनीयम् के प्रथम सर्ग में क्या पारिभाषिक अर्थ है?

(अ) नदियाँ (ब) स्वामी / राजा लोग (प्रभवन्ति इति) (स) प्रजाजन (द) सैनिक

209. 'चारचक्षुषो न वञ्चनीयाः प्रभवोऽनुजीविभिः' यहाँ 'अनुजीविभिः' पद का क्या अर्थ है?

(अ) शत्रुओं द्वारा (ब) भृत्यों / सेवकों (गुप्तचरों) द्वारा (स) गुरुजनों द्वारा (द) पुत्रों द्वारा

210. 'तदर्हसि क्षन्तुमसाधु साधु वा' - वनेचर युधिष्ठिर से किस बात के लिए क्षमा की प्रार्थना करता है?

(अ) विलम्ब से आने के लिए (ब) अप्रिय किन्तु यथार्थ (सत्य) समाचार कहने के लिए (स) धन माँगने के लिए (द) युद्ध न करने के लिए

211. दुर्योधन अपनी शासन-व्यवस्था को किसके द्वारा निर्दिष्ट मार्ग पर चलाता हुआ दिखाता है?

(अ) चाणक्य द्वारा (ब) मनु आदि प्राचीन धर्मशास्त्रकारों द्वारा (मनूदिष्टेन वर्त्मना) (स) शकुनि द्वारा (द) कर्ण द्वारा

212. 'नयपौरुषम्' पद में कौन-सा समास है?

(अ) द्वन्द्व समास (नयश्च पौरुषं च) (ब) कर्मधारय (स) अव्ययीभाव (द) बहुव्रीहि

213. 'वसुनि वाञ्छन्' में 'वसु' शब्द का द्वितीया बहुवचन में क्या रूप बनता है?

(अ) वसून (ब) वसूनि (नपुंसकलिंग) (स) वसवः (द) वसून्

214. 'वाचमाददे' में 'आददे' क्रियापद किस धातु एवं लकार का रूप है?

(अ) दा धातु, लट् लकार (ब) आङ् + दा धातु, लिट् लकार (आत्मनेपद) (स) दो धातु, लङ् लकार (द) दा धातु, लुट् लकार

215. 'विजिगीषया' पद में कौन-सी विभक्ति और वचन है?

(अ) प्रथमा, एकवचन (ब) तृतीया, एकवचन (स) पञ्चमी, एकवचन (द) षष्ठी, एकवचन

216. 'गुणानुरागेण शिरोभिरुह्यते नराधिपैर्माल्यमिवास्य शासनम्' - दुर्योधन की आज्ञा को सामन्त राजा कैसे धारण करते हैं?

(अ) भयवश पैरों में (ब) पुष्पमाला के समान आदरपूर्वक मस्तक पर (स) पत्रों पर लिखकर (द) ढाल पर रखकर

217. 'नराधिपैर्माल्यमिवास्य शासनम्' यहाँ कौन-सा अलंकार प्रयुक्त है?

(अ) रूपक (ब) उपमा अलंकार (स) उत्प्रेक्षा (द) श्लेष

218. 'सन्तनुते' क्रियापद में प्रयुक्त उपसर्ग, धातु और लकार क्या हैं?

(अ) सम् + तन् + लट् लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन) (ब) सम् + तु + लङ् लकार (स) सन् + तन् + लोट् लकार (द) सम् + तन् + लृट् लकार

219. 'सख्युः' पद में किस विभक्ति और वचन का प्रयोग हुआ है?

(अ) पञ्चमी/षष्ठी, एकवचन (ब) द्वितीया, बहुवचन (स) तृतीया, एकवचन (द) प्रथमा, बहुवचन

220. 'सुयोधनः' पद में 'सु' उपसर्ग का क्या औचित्य है?

(अ) सुन्दर युद्ध करने वाला (नीतिपूर्वक शासन दिखाने वाला) (ब) कुत्सित योद्धा (स) कायर (द) अस्त्रहीन

221. द्रौपदी के तीव्र आक्रोश का मुख्य कारण युधिष्ठिर का कौन-सा आचरण था?

(अ) वन में आखेट करना (ब) शत्रुओं के प्रति अत्यधिक क्षमाशीलता, सन्तोष एवं अकर्मण्यता (स) दान देना (द) यज्ञ करना

222. 'रुजः' पद का किरातार्जुनीयम् के सन्दर्भ में क्या अर्थ है?

(अ) आभूषण (ब) मानसिक पीड़ाएँ / व्यथाएँ (स) पुष्प (द) वृक्ष

223. 'अपास्त' पद में कौन-सा कृदन्त प्रत्यय लगा है?

(अ) अप + अस् + क्त (ब) अप + आस् + क्तवतु (स) अप + स्था + ल्यप् (द) अप + पा + तृच्

224. द्रौपदी ने भीमसेन के किस पूर्व वैभव और वर्तमान दशा की तुलना करके युधिष्ठिर को धिक्कारा?

(अ) पूर्व में सुवर्ण रथ पर चलना और अब पैदल वन-पर्वतों पर भटकना (ब) पूर्व में लाल चन्दन और अब धूलि-धूसरित होना (स) पूर्व में उत्तम भोजन और अब कन्द-मूल खाना (द) उपर्युक्त सभी दशाएँ

225. 'अधिरूढ' पद में प्रकृति-प्रत्यय का सही रूप क्या है?

(अ) अधि + रुह् + क्त (ब) अधि + रुध् + क्त्वा (स) अधि + राध् + ण्यत् (द) अधि + रुह् + ल्युट्

226. 'द्विषन्निमित्ता यदियं दशा ततः' में 'दशा' पद का क्या तात्पर्य है?

(अ) वस्त्र का छोर (ब) पाण्डवों की वर्तमान दयनीय वनवास-अवस्था (स) दिशा (द) आयु

227. 'उपेक्षसे' क्रियापद में कौन-सा लकार एवं पुरुष है?

(अ) लट् लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन (उप + ईक्ष्) (ब) लोट् लकार, प्रथम पुरुष (स) विधिलिङ्, उत्तम पुरुष (द) लङ् लकार, मध्यम पुरुष

228. द्रौपदी युधिष्ठिर को दुर्योधन के साथ कपट-सन्धि तोड़ने के पक्ष में क्या शास्त्र-सम्मत तर्क देती हैं?

(अ) छल करने वाले कपटियों के प्रति छल का आचरण ही क्षत्रिय धर्म है (ब) सन्धि सदा निन्द्य होती है (स) युद्ध ही एकमात्र उपाय है (द) वन में रहना पाप है

229. 'समयपरिरक्षणम्' पद में 'समय' शब्द का क्या विशिष्ट अर्थ है?

(अ) काल (घंटा-मिनट) (ब) प्रतिज्ञा / द्यूत-शर्त (नियम) (स) सन्ध्याकाल (द) अवसर

230. प्रथम सर्ग के अन्तिम (46वें) श्लोक में 'लक्ष्मीम्' पद किसके पुनरागमन हेतु प्रयुक्त हुआ है?

(अ) राजलक्ष्मी / साम्राज्य-समृद्धि के (ब) धन के (स) द्रौपदी के (द) स्वर्ग-लक्ष्मी के

231. राजनीतिशास्त्र के अनुसार किरातार्जुनीयम् के द्वितीय सर्ग में मन्त्रणा के कितने अङ्ग बताए गए हैं?

(अ) त्रिविध मन्त्र (ब) पञ्चाङ्ग मन्त्र (कर्मारम्भोपाय, पुरुषद्रव्यसम्पत् आदि) (स) चतुरङ्ग मन्त्र (द) सप्ताङ्ग मन्त्र

232. भीमसेन के अनुसार शत्रुओं को दण्ड देने के लिए किस काल की प्रतीक्षा करना व्यर्थ है?

(अ) वर्षा ऋतु की (ब) तेरह वर्ष की पूर्ण प्रतिज्ञा-अवधि की (स) सन्ध्याकाल की (द) प्रभात की

233. 'अयुक्तयुक्तं' पद में कौन-सा समास है?

(अ) नञ् तत्पुरुष (न युक्तम् अयुक्तम्, अयुक्तेन युक्तम्) (ब) बहुव्रीहि (स) द्वन्द्व (द) द्विगु

234. तृतीय सर्ग में महर्षि वेदव्यास के अन्तर्धान होने के उपरान्त युधिष्ठिर ने किसे एकान्त में मन्त्रणा हेतु बुलाया?

(अ) भीमसेन को (ब) अर्जुन (धनञ्जय) को (स) नकुल को (द) द्रौपदी को

235. 'गुह्यम्' पद का व्युत्पत्तिपरक अर्थ क्या है?

(अ) प्रकाशित (ब) गुह् + क्यप् (अत्यन्त गोपनीय / रहस्यमयी विद्या) (स) गुहा में रहने वाला (द) सामान्य

236. किरातार्जुनीयम् के चतुर्थ सर्ग में शरद् ऋतु के वर्णन के समय किस पवित्र नदी की छटा का उल्लेख है?

(अ) यमुना (ब) भागीरथी गङ्गा (सुरनदी) (स) नर्मदा (द) गोदावरी

237. पञ्चम सर्ग में इन्द्रकील पर्वत की गुफाओं और शिखरों के वर्णन में भारवि ने मुख्य रूप से किन अलंकारों की छटा बिखेरी है?

(अ) केवल यमक (ब) उत्प्रेक्षा, अतिशयोक्ति एवं उपमा (स) केवल श्लेष (द) केवल सन्देह

238. षष्ठ सर्ग में गन्धर्वों और अप्सराओं के अधिपति के रूप में किसका वर्णन आता है?

(अ) गन्धर्वराज चित्ररथ (ब) तुम्बुरु (स) हाहा-हूहू (द) नारद

239. सप्तम सर्ग में वनविहार के समय अप्सराओं के किन आभूषणों की ध्वनि और शिथिलता का वर्णन है?

(अ) किङ्किणी और नूपुर (पायल) (ब) काञ्ची (मेखला) और मुक्ताहार (स) कङ्कण और कुण्डल (द) उपर्युक्त सभी आभूषण

240. अष्टम सर्ग में भारवि द्वारा महाकाव्य के शास्त्रीय नियमों के अनुसार किस क्रीड़ा का वर्णन किया गया है?

(अ) आखेट क्रीड़ा (ब) जलक्रीड़ा (सलिल-विहार) एवं मधुपान (स) द्यूतक्रीड़ा (द) धनुर्विद्या क्रीड़ा

241. नवम सर्ग में प्रभात वेला में सूर्योदय होते ही कमलों के खिलने का वर्णन किस काव्यगुण को प्रदर्शित करता है?

(अ) केवल ओज (ब) माधुर्य एवं प्रसाद गुण (स) केवल श्लेष (द) गौड़ीय गुण

242. दशम सर्ग में अप्सराओं के समस्त कटाक्षों के बीच अर्जुन के अविचल ध्यान की तुलना किससे की गई है?

(अ) वायु-रहित स्थान में स्थित निष्कम्प दीपक एवं सुमेरु पर्वत से (ब) जल में तैरती नौका से (स) वृक्ष से (द) मेघ से

243. एकादश सर्ग में वृद्ध ब्राह्मण के रूप में इन्द्र ने अर्जुन को किस मार्ग का उपदेश देकर परीक्षा ली?

(अ) प्रवृत्ति मार्ग (ब) निवृत्ति मार्ग (मोक्ष, अहिंसा एवं संन्यास धर्म) (स) राजधर्म (द) कर्मकाण्ड

244. द्वादश सर्ग में अर्जुन की अनन्य तपस्या से द्रवीभूत होकर महादेव ने क्या रूप धारण करने का संकल्प किया?

(अ) वनचर किरात (भील सेनापति) का रूप (ब) यक्ष का रूप (स) गन्धर्व का रूप (द) ऋषि का रूप

245. त्रयोदश सर्ग में मूकासुर दैत्य पर अर्जुन और किरात के बाण छूटने की ध्वनि कैसी थी?

(अ) मन्द ध्वनि (ब) प्रलयकालीन वज्रपात और मेघगर्जन के समान (स) वीणा के समान (द) शंख के समान

246. चतुर्दश सर्ग में किरात के दूत और अर्जुन के वाक्-प्रतिवाद में किस शैली का अद्भुत परिपाक है?

(अ) हास्य शैली (ब) प्रौढ़, ओजस्वी एवं अर्थगौरवपूर्ण शैली (स) करुण शैली (द) शिथिल शैली

247. पञ्चदश सर्ग में प्रयुक्त 'मुरजबन्ध' चित्रकाव्य का क्या स्वरूप है?

(अ) मृदङ्ग (मुरज) के आकार में श्लोक के वर्णों का सन्निवेश (ब) केवल 'म' वर्ण की आवृत्ति (स) मुरली की धुन (द) एक ही चरण का चार बार आना

248. षोडश सर्ग में किरात सेनापति (शिव) द्वारा अर्जुन के बाणों के निवारण की उपमा किससे दी गई है?

(अ) प्रलय-अग्नि द्वारा तृण-समूह को भस्म करने से (ब) जल द्वारा अग्नि बुझाने से (स) पवन द्वारा धूल उड़ाने से (द) सूर्य द्वारा अन्धकार नष्ट करने से

249. सप्तदश सर्ग में बाहुयुद्ध के दौरान अर्जुन के घूंसों (मुष्टिप्रहार) को शिव ने किस प्रकार स्वीकार किया?

(अ) क्रुद्ध होकर (ब) भक्त के द्वारा अर्पित पुष्पवृष्टि के समान लीलापूर्वक (स) विचलित होकर (द) अस्त्र चलाकर

250. अष्टादश सर्ग में भगवान शिव द्वारा अर्जुन को पाशुपतास्त्र के साथ किस विधि का पूर्ण उपदेश दिया गया?

(अ) केवल अस्त्र चलाने (प्रयोग) की (ब) अस्त्र के संधान, प्रयोग, मन्त्र एवं उपसंहार (वापस बुलाने) की सम्पूर्ण विधि (स) अस्त्र छिपाने की (द) अस्त्र दान करने की
✦ उत्तरमाला (Answer Key : प्रश्न 201 से 250) ✦
201-(ब) 202-(अ) 203-(अ) 204-(ब) 205-(ब) 206-(अ) 207-(ब) 208-(ब) 209-(ब) 210-(ब) 211-(ब) 212-(अ) 213-(ब) 214-(ब) 215-(ब) 216-(ब) 217-(ब) 218-(अ) 219-(अ) 220-(अ) 221-(ब) 222-(ब) 223-(अ) 224-(द) 225-(अ) 226-(ब) 227-(अ) 228-(अ) 229-(ब) 230-(अ) 231-(ब) 232-(ब) 233-(अ) 234-(ब) 235-(ब) 236-(ब) 237-(ब) 238-(अ) 239-(द) 240-(ब) 241-(ब) 242-(अ) 243-(ब) 244-(अ) 245-(ब) 246-(ब) 247-(अ) 248-(अ) 249-(ब) 250-(ब)

किरातार्जुनीयम् : 500 वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तरी महामैराथन (भाग-6 : प्रश्न 251-300)

UGC NET, UP TGT, PGT, GIC, RPSC एवं असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा विशेष

251. 'अकृत्रिम' पद का सही समास-विग्रह क्या होगा?

(अ) न कृत्रिमम् इति (नञ् तत्पुरुष) (ब) कृत्रिमस्य अभावः (स) कृत्रिमेण युक्तम् (द) कुत्सितं कृत्रिमम्

252. 'मनसा' पद में किस प्रातिपदिक (मूल शब्द), विभक्ति और वचन का प्रयोग हुआ है?

(अ) मनस्, तृतीया, एकवचन (ब) मन, द्वितीया, एकवचन (स) मनस्, प्रथमा, एकवचन (द) मनिन्, सप्तमी, एकवचन

253. 'द्विषताम्' पद में मूल धातु एवं कौन-सा कृत् प्रत्यय लगा है?

(अ) द्विष् + शतृ (षष्ठी बहुवचन) (ब) द्विष् + शानच् (स) द्विष् + क्त (द) द्विष् + ल्युट्

254. 'न तेन सज्यं क्वचिदुद्यतं धनुः' - दुर्योधन को कभी प्रत्यञ्चा चढ़ा धनुष क्यों नहीं उठाना पड़ता था?

(अ) वह कायर था (ब) उसकी सुदृढ़ नीति एवं आज्ञा-मात्र से सर्वत्र शान्ति व अनुशासन था (स) उसके पास धनुष नहीं था (द) सैनिक विद्रोह कर चुके थे

255. 'उदारकीर्तेरुदयम्' में 'उदारकीर्तेः' पद का सही समास-विग्रह क्या है?

(अ) उदारा कीर्तिः यस्य सः (बहुव्रीहि) (ब) उदारा कीर्तिः (कर्मधारय) (स) उदारस्य कीर्तिः (तत्पुरुष) (द) उदारेण कीर्तिः

256. 'प्रियाणि वाञ्छन्त्यसुभिः समीहितुम्' - यहाँ कौन प्राण देकर भी स्वामी का अभीष्ट सिद्ध करना चाहते हैं?

(अ) स्वामीभक्त निष्ठावान् सेवक / चारगण (ब) शत्रु राजा (स) वनचर पशु (द) वैश्य वर्ग

257. 'महीभृतां सच्चरितैश्चरैः' में 'चरैः' पद का वास्तविक अर्थ क्या है?

(अ) पाँवों द्वारा (ब) गुप्तचरों (स्पशों) द्वारा (स) रथों द्वारा (द) बाणों द्वारा

258. साहित्यशास्त्र में 'अमर्ष' शब्द का क्या लक्षण/अर्थ माना गया है?

(अ) लज्जा (ब) स्वाभिमानजन्य असह्य रोष / पराक्रमयुक्त क्रोध (स) आलस्य (द) भय

259. द्रौपदी के अनुसार क्षत्रियों और राजाओं की वास्तविक शोभा किस गुण से है?

(अ) केवल तपस्या और क्षमा से (ब) तेज, पराक्रम एवं दण्डनीति से (स) मौन रहने से (द) वनवास से

260. 'जटाधराः सञ्जुहुधीह पावकम्' - द्रौपदी युधिष्ठिर पर व्यंग्य करते हुए क्या करने की सलाह देती हैं?

(अ) युद्ध करने की (ब) धनुष छोड़कर जटा धारण कर वन में अग्निहोत्र (हवन) करने की (स) हस्तिनापुर जाने की (द) द्यूत खेलने की

261. 'सञ्जुहुधि' क्रियापद किस धातु, लकार, पुरुष एवं वचन का रूप है?

(अ) सम् + हु धातु, लोट् लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन (ब) हु धातु, लट् लकार, प्रथम पुरुष (स) हा धातु, लङ् लकार (द) हु धातु, विधिलिङ् लकार

262. 'जटाधराः सञ्जुहुधीह पावकम्' में 'इह' अव्यय पद का क्या संकेत है?

(अ) राजभवन में (ब) इस द्वैतवन (तपोवन) में (स) स्वर्ग में (द) युद्धभूमि में

263. 'पावकम्' पद का वैदिक एवं लौकिक संस्कृत में क्या अर्थ है?

(अ) जल (ब) पवित्र करने वाली अग्नि (हविर्वाहन) (स) वायु (द) पृथ्वी

264. 'विमुञ्च' क्रियापद में कौन-सा लकार और पुरुष है?

(अ) लट् लकार, प्रथम पुरुष (ब) लोट् लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन (वि + मुच्) (स) लङ् लकार, उत्तम पुरुष (द) लृट् लकार, प्रथम पुरुष

265. 'अवन्ध्यकोपस्य' पद में कौन-सा समास है?

(अ) न वन्ध्यः अवन्ध्यः (नञ्), अवन्ध्यः कोपः यस्य सः (बहुव्रीहि) (ब) केवल कर्मधारय (स) केवल षष्ठी तत्पुरुष (द) केवल अव्ययीभाव

266. 'विहन्तुः' पद में मूल धातु, प्रत्यय और विभक्ति क्या है?

(अ) वि + हन् + तृच्, षष्ठी/पञ्चमी एकवचन (ब) वि + हन् + तुमुन् (स) वि + हन् + क्त (द) वि + हन् + ल्युट्

267. 'जातहार्देन न विद्विषादरः' में 'हार्द' शब्द का क्या अर्थ है?

(अ) हृदय का रोग (ब) स्नेह / आन्तरिक प्रेम / सौहार्द (स) कठोरता (द) वैरभाव

268. 'विद्विषा' पद में कौन-सी विभक्ति और वचन है?

(अ) तृतीया, एकवचन (विद्विष् शब्द) (ब) प्रथमा, एकवचन (स) सप्तमी, एकवचन (द) द्वितीया, बहुवचन

269. किरातार्जुनीयम् के प्रथम सर्ग में द्रौपदी की वक्तृता किस गुण से ओत-प्रोत है?

(अ) दीनता और रुदन से (ब) प्रौढ़ ओज, मर्मभेदी तर्क, क्षात्रतेज एवं स्वाभिमान से (स) केवल शृङ्गार से (द) शान्ति पाठ से

270. द्वितीय सर्ग में भीमसेन ने 'उत्साह शक्ति' की तुलना किससे की है?

(अ) शीतल जल से (ब) प्रदीप्त अग्नि एवं सूर्य के अमोघ तेज से (स) चन्द्रमा की चाँदनी से (द) मेघ से

271. किरातार्जुनीयम् में 'प्रज्ञा' (बुद्धि/धैर्य) और 'पौरुष' (बल/पराक्रम) का द्वन्द्व किनके माध्यम से अभिव्यक्त हुआ है?

(अ) युधिष्ठिर और भीमसेन के संवाद से (ब) नकुल और सहदेव से (स) द्रौपदी और कुन्ती से (द) अर्जुन और इन्द्र से

272. तृतीय सर्ग में महर्षि वेदव्यास ने अर्जुन को किस देवता की विशेष उपासना का निर्देश दिया?

(अ) केवल वरुण देव (ब) देवाधिदेव महादेव (शिव) एवं देवराज इन्द्र (स) केवल अग्नि देव (द) केवल यमराज

273. 'तपस्विनाम्' पद में कौन-सा तद्धित प्रत्यय प्रयुक्त हुआ है?

(अ) तपस् + विनि (इनि) प्रत्यय, षष्ठी बहुवचन (ब) तपस् + मयुट् (स) तपस् + तल् (द) तपस् + त्व

274. चतुर्थ सर्ग में शरद् ऋतु में आकाश में उड़ते श्वेत हंसों की पंक्ति की तुलना किससे की गई है?

(अ) काले मेघों से (ब) गगन-रूपी नायिका के गले में पड़े मुक्ताहार (मोतियों के हार) से (स) पुष्पों से (द) बाणों से

275. कासपुष्पों (कांस के फूलों) की सफेदी से सम्पूर्ण पृथ्वी का धवल होना किस ऋतु का प्राकृतिक वैशिष्ट्य है?

(अ) ग्रीष्म ऋतु (ब) शरद् ऋतु (चतुर्थ सर्ग) (स) शिशिर ऋतु (द) वसन्त ऋतु

276. पञ्चम सर्ग में इन्द्रकील पर्वत से गिरते श्वेत जल-प्रपातों (झरनों) की उपमा किससे दी गई है?

(अ) पर्वत रूपी विशाल गजराज के मस्तक पर लटकते श्वेत चामरों से (ब) सर्पों से (स) वस्त्रों से (द) लताओं से

277. षष्ठ सर्ग में अर्जुन की उग्र तपस्या के प्रभाव से वन के हिंसक वन्यजीवों का पारस्परिक व्यवहार कैसा हो गया?

(अ) वे अधिक हिंसक हो गए (ब) वे जन्मजात शत्रुता भूलकर परस्पर मित्रवत् विचरण करने लगे (स) वे वन छोड़कर भाग गए (द) वे नष्ट हो गए

278. सप्तम सर्ग में गन्धर्वों और अप्सराओं के सङ्गीत एवं नृत्य का वर्णन किस शास्त्रीय ग्रन्थ की परम्परा के अनुरूप है?

(अ) कामसूत्र एवं भरत-नाट्यशास्त्र (ब) अर्थशास्त्र (स) मनुस्मृति (द) चरकसंहिता

279. अष्टम सर्ग में अप्सराओं द्वारा 'मधुपान' के उपरान्त उनकी आँखों में कैसी शोभा वर्णित है?

(अ) अन्धकारमय (ब) स्वाभाविक लज्जा की शिथिलता एवं रक्तिम कमनीयता (स) भयभीत (द) अश्रुपूर्ण

280. नवम सर्ग में महाकवि भारवि ने रात्रि के गहन अन्धकार की उपमा किससे दी है?

(अ) बिखरे हुए कज्जल (काजल) एवं नील-वस्त्र से (ब) मेघ से (स) भस्म से (द) कीचड़ से

281. दशम सर्ग में अर्जुन के अविचल मन और निष्कामता को देखकर देवांगनाओं ने उन्हें क्या माना?

(अ) कामी पुरुष (ब) परम जितेन्द्रिय, निष्कलंक एवं महान् तपस्वी (स) दुर्बल (द) पाषाण-हृदय

282. एकादश सर्ग में वृद्ध मुनि रूपी इन्द्र ने 'मोक्षमार्ग' को उत्तम बताते हुए अर्जुन के किस आयुध को व्यर्थ कहा?

(अ) गदा को (ब) गाण्डीव धनुष एवं बाणों को (स) खड्ग को (द) चक्र को

283. अर्जुन ने वृद्ध मुनि को उत्तर दिया कि "जो अपने कुल के अपमान का मार्जन नहीं कर सकता, उसका मोक्ष कैसा?" यह क्या दर्शाता है?

(अ) अन्ध-हठ (ब) क्षत्रिय-धर्म के प्रति अनन्य निष्ठा एवं कर्तव्यबोध (स) अज्ञान (द) अधर्म

284. द्वादश सर्ग में महादेव शिव ने अर्जुन की वीरता की परीक्षा लेने हेतु अपने किस रूप का वरण किया?

(अ) राजा का (ब) वनचर किरात (भील सेनापति) का (स) भिक्षुक का (द) सिंह का

285. त्रयोदश सर्ग में मूकासुर दैत्य पर अर्जुन और किरातवेशी शिव के बाण एक साथ किस स्थान पर लगे?

(अ) पुच्छ पर (ब) वराह के एक ही मर्मस्थल (मुख/हृदय) पर (स) पैरों पर (द) उदर पर

286. चतुर्दश सर्ग में किरात के दूत ने अर्जुन से क्या कहकर बाण वापस लेने को कहा?

(अ) यह वन हमारा है (ब) यह शिकार हमारे स्वामी किरातराज का है, तुम्हारा बाण व्यर्थ है (स) तुम बालक हो (द) राजाज्ञा का पालन करो

287. पञ्चदश सर्ग के प्रसिद्ध एकाक्षर श्लोक 'न नोननुन्नो...' में भारवि ने किस एकमात्र व्यञ्जन वर्ण का चमत्कार दिखाया है?

(अ) 'क' वर्ण का (ब) 'न' (नकार) वर्ण का (स) 'त' वर्ण का (द) 'म' वर्ण का

288. पञ्चदश सर्ग में प्रयुक्त 'द्व्यक्षर श्लोक' में किन दो अक्षरों की पुनरावृत्ति से सम्पूर्ण श्लोक रचा गया है?

(अ) 'भ' और 'र' (अथवा 'त' और 'र') (ब) 'क' और 'ख' (स) 'च' और 'छ' (द) 'प' और 'फ'

289. षोडश सर्ग में किरात सेनापति और अर्जुन के बीच किस कोटि का अस्त्र-युद्ध घटित हुआ?

(अ) केवल वाक्-युद्ध (ब) आग्नेयास्त्र, वारुणास्त्र आदि विविध दिव्यास्त्रों का महायुद्ध (स) केवल मुष्टि-युद्ध (द) रथ-युद्ध

290. सप्तदश सर्ग में बाहुयुद्ध के समय जब अर्जुन ने शिव के चरण पकड़ने का यत्न किया, तब शिव ने क्या किया?

(अ) उन्हें दण्ड दिया (ब) उन्हें आकाश में उछाल दिया, जिससे अर्जुन की भक्ति व शरणागति और दृढ़ हुई (स) भाग गए (द) अस्त्र चलाया

291. अष्टादश सर्ग में भगवान शिव द्वारा अर्जुन को प्रदान किए गए 'पाशुपतास्त्र' की क्या विशेषता है?

(अ) यह केवल जल में चलता है (ब) यह त्रैलोक्य का सबसे अमोघ, संहारक एवं पाशुपत मन्त्र-युक्त दिव्यास्त्र है (स) यह केवल भ्रम उत्पन्न करता है (द) यह साधारण बाण है

292. 'पाशुपतास्त्र' के मूल अधिष्ठाता देव कौन माने जाते हैं?

(अ) भगवान विष्णु (ब) भगवान पशुपति (महादेव शिव) (स) इन्द्र (द) ब्रह्मा

293. महाकवि भारवि ने किरातार्जुनीयम् में कुल कितने विविध छन्दों का सफल सन्निवेश किया है?

(अ) केवल 2 छन्द (ब) लगभग 14 से 16 विविध छन्द (स) 50 छन्द (द) 100 छन्द

294. महाकवि भारवि का सर्वाधिक प्रिय एवं सर्वाधिक प्रयुक्त छन्द कौन-सा है?

(अ) अनुष्टुप् (ब) वंशस्थ छन्द (स) शार्दूलविक्रीडित (द) मन्दाक्रान्ता

295. किरातार्जुनीयम् के प्रथम सर्ग के आधार पर दुर्योधन किस बात से सर्वाधिक भयभीत रहता था?

(अ) पाण्डवों के निष्कलंक सदाचार, तेज और भावी प्रतिशोध से (ब) अपनी प्रजा से (स) भीष्म पितामह से (द) कर्ण से

296. किरातार्जुनीयम् पर रचित टीकाओं में सबसे प्रामाणिक एवं परीक्षा-दृष्टि से मान्य टीका कौन-सी है?

(अ) बालमनोरमा (ब) घण्टापथ (टीकाकार : कोलाचल मल्लिनाथ सूरि) (स) तत्त्वबोधिनी (द) मिताक्षरा

297. प्रत्येक सर्ग के अन्त में 'लक्ष्मी' शब्द का प्रयोग होने के कारण किरातार्जुनीयम् को क्या कहा जाता है?

(अ) शिवपदाङ्क काव्य (ब) लक्ष्मीपदाङ्क महाकाव्य (स) श्रीपदाङ्क काव्य (द) जयपदाङ्क काव्य

298. 'शिशुपालवधम्' (माघ) के प्रत्येक सर्ग के अन्त में कौन-सा शब्द प्रयुक्त होता है?

(अ) लक्ष्मी (ब) श्री (स) शिव (द) कृष्ण

299. 'नैषधीयचरितम्' (श्रीहर्ष) के प्रत्येक सर्ग के अन्त में किसका नामोल्लेख प्राप्त होता है?

(अ) केवल शिव का (ब) कवि-माता 'मामल्लदेवी' एवं पिता 'हीर' का (स) केवल राजा का (द) सरस्वती का

300. किरातार्जुनीयम् का प्रमुख दार्शनिक एवं नैतिक सन्देश क्या है?

(अ) भाग्य ही सर्वोपरि है (ब) धर्म, नीति, पुरुषार्थ और गुरु-ईश्वर कृपा से असम्भव भी सम्भव हो जाता है (स) अधर्म की विजय (द) निष्क्रियता ही शान्ति है
✦ उत्तरमाला (Answer Key : प्रश्न 251 से 300) ✦
251-(अ) 252-(अ) 253-(अ) 254-(ब) 255-(अ) 256-(अ) 257-(ब) 258-(ब) 259-(ब) 260-(ब) 261-(अ) 262-(ब) 263-(ब) 264-(ब) 265-(अ) 266-(अ) 267-(ब) 268-(अ) 269-(ब) 270-(ब) 271-(अ) 272-(ब) 273-(अ) 274-(ब) 275-(ब) 276-(अ) 277-(ब) 278-(अ) 279-(ब) 280-(अ) 281-(ब) 282-(ब) 283-(ब) 284-(ब) 285-(ब) 286-(ब) 287-(ब) 288-(अ) 289-(ब) 290-(ब) 291-(ब) 292-(ब) 293-(ब) 294-(ब) 295-(अ) 296-(ब) 297-(ब) 298-(ब) 299-(ब) 300-(ब)

किरातार्जुनीयम् : 500 वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तरी महामैराथन (भाग-7 : प्रश्न 301-350)

UGC NET, UP TGT, PGT, GIC, RPSC एवं असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा विशेष

301. 'श्रियः कुरुणामधिपस्य पालनीम्' में 'पालनीम्' पद किसका विशेषण है?

(अ) कुरुणाम् का (ब) श्रियम् (राजलक्ष्मी) का (स) अधिपस्य का (द) वृत्तिम् का

302. 'कुरुणाम्' पद में किस विभक्ति और वचन का प्रयोग हुआ है?

(अ) पञ्चमी, बहुवचन (ब) षष्ठी, बहुवचन (स) द्वितीया, एकवचन (द) सप्तमी, बहुवचन

303. 'द्वैतवने' पद में किस विभक्ति और वचन का रूप है?

(अ) प्रथमा, द्विवचन (ब) सप्तमी, एकवचन (स) तृतीया, एकवचन (द) पञ्चमी, एकवचन

304. 'समाययौ' क्रियापद में कितने उपसर्ग प्रयुक्त हैं?

(अ) एक (सम्) (ब) दो (सम् + आङ्) (स) तीन (द) एक भी नहीं

305. 'कृतप्रणामस्य' पद का सही समास-विग्रह क्या होगा?

(अ) कृतः प्रणामः येन सः (बहुव्रीहि) (ब) कृतः प्रणामः (कर्मधारय) (स) प्रणामस्य कृतम् (तत्पुरुष) (द) कृतेन प्रणामः

306. 'महीभुजे' पद का सटीक संस्कृत पर्याय क्या है?

(अ) सेवकाय (ब) राज्ञे (युधिष्ठिराय) (स) शत्रवे (द) मुनये

307. 'सौष्ठव' शब्द में 'सुष्ठु' शब्द से कौन-सा तद्धित प्रत्यय लगा है?

(अ) अण् प्रत्यय (सुष्ठु + अण्) (ब) तल् प्रत्यय (स) त्व प्रत्यय (द) मतुप् प्रत्यय

308. 'औदार्य' शब्द की सही प्रकृति-प्रत्यय क्या है?

(अ) उदार + ष्यञ् (ब) उदार + तल् (स) उदार + त्व (द) उदार + ल्युट्

309. 'वाचमाददे' में 'वाच्' शब्द किस लिङ्ग एवं विभक्ति का रूप है?

(अ) पुँल्लिङ्ग, प्रथमा (ब) स्त्रीलिङ्ग, द्वितीया एकवचन (स) नपुंसकलिंग, द्वितीया (द) अव्यय

310. 'मृषा' अव्यय पद का विलोम शब्द क्या होगा?

(अ) मिथ्या (ब) सत्यम् / यथार्थम् (स) अनृतम् (द) कपटम्

311. 'हितैषिणः' पद में मूल धातु कौन-सी है?

(अ) ईष् (ब) इष् (इच्छायाम्) (स) एष् (द) हस्

312. 'द्विषां विघाताय' में 'विघाताय' पद में चतुर्थी विभक्ति किस अर्थ में हुई है?

(अ) रुच्यर्थानां प्रीयमाणः (ब) तादर्थ्ये चतुर्थी वाच्या (प्रयोजन/फल प्राप्ति हेतु) (स) नमः स्वस्ति स्वाहा (द) धारेरुत्तमर्णः

313. 'अनुजीविभिः' पद का शुद्ध संस्कृत समानार्थी क्या है?

(अ) प्रभुभिः (ब) भृत्यैः / सेवकैः (स) रिपुभिः (द) पण्डितैः

314. 'प्रभवः' पद में 'प्र + भू' धातु से किस प्रत्यय का योग हुआ है?

(अ) अप् प्रत्यय (प्रभवन्ति इति प्रभवः) (ब) क्त प्रत्यय (स) शानच् प्रत्यय (द) ल्युट् प्रत्यय

315. 'चारचक्षुषो न वञ्चनीयाः' में 'वञ्चनीयाः' पद में कौन-सा कृत् प्रत्यय है?

(अ) तव्यत् (ब) अनीयर् (वञ्च् + अनीयर्) (स) यत् (द) ण्यत्

316. 'तदर्हसि क्षन्तुमसाधु साधु वा' में 'असाधु' पद का क्या अर्थ है?

(अ) पापी (ब) कटु / अप्रिय वचन (स) भिक्षुक (द) अयोग्य

317. 'क्षन्तुम्' पद में कौन-सी धातु एवं प्रत्यय है?

(अ) क्षि + तुमुन् (ब) क्षम् + तुमुन् (स) क्षण् + तुमुन् (द) क्षद् + तुमुन्

318. 'सदानुकूलेषु हि कुर्वते रतिम्' में 'सदानुकूलेषु' में कौन-सा समास है?

(अ) सदा अनूकूलाः तेषु (कर्मधारय / सुप्सुपा) (ब) बहुव्रीहि (स) द्वन्द्व (द) द्विगु

319. 'नृपेष्वमात्येषु च' यहाँ कौन-सा समास निष्पन्न होता है?

(अ) नृपाश्च अमात्याश्च तेषु (इतरेतर द्वन्द्व) (ब) षष्ठी तत्पुरुष (स) कर्मधारय (द) बहुव्रीहि

320. 'रतिम्' पद में 'रम्' धातु के साथ कौन-सा कृदन्त प्रत्यय लगा है?

(अ) क्त प्रत्यय (ब) क्तिन् प्रत्यय (स्त्रीलिङ्ग) (स) ल्युट् प्रत्यय (द) अच् प्रत्यय

321. 'सर्वसम्पदः' पद का सही समास-विग्रह क्या होगा?

(अ) सर्वाः सम्पदः (कर्मधारय) (ब) सर्वेषां सम्पदः (स) सर्वैः सम्पदः (द) सर्वासु सम्पदः

322. 'निसर्गदुर्बोधम्' पद का सही समास-विग्रह क्या है?

(अ) निसर्गेण दुर्बोधम् (तृतीया तत्पुरुष) (ब) निसर्गाय दुर्बोधम् (स) निसर्गात् दुर्बोधम् (द) निसर्गस्य दुर्बोधम्

323. 'अबोधविक्लवाः' पद का क्या अर्थ है?

(अ) विद्वान् (ब) अज्ञान से व्याकुल / मन्दबुद्धि वाले जीव (स) क्रोधी (द) राजा

324. 'तवानुभावोऽयमवेदि यन्मया' - वनेचर ने दुर्योधन के समस्त रहस्यों को जानने का कारण किसे माना?

(अ) अपनी चतुराई को (ब) महाराज युधिष्ठिर के प्रभाव एवं तेज को (स) धन के प्रभाव को (द) भाग्य को

325. 'अवेदि' क्रियापद में कौन-सा लकार और वाच्य है?

(अ) लट् लकार, कर्तृवाच्य (ब) लुङ् लकार, कर्मवाच्य (प्रथम पुरुष, एकवचन) (स) लङ् लकार, भाववाच्य (द) लुट् लकार

326. 'गूढविप्लवम्' पद का क्या अर्थ है?

(अ) जलप्लावन (ब) गुप्त षड्यन्त्र / आन्तरिक गुप्त उपद्रव (स) युद्ध (द) उत्सव

327. 'नयवर्त्म' पद का क्या तात्पर्य है?

(अ) नया मार्ग (ब) नीति का मार्ग (धर्मसम्मत शासन-पद्धति) (स) आँखों का मार्ग (द) वन का मार्ग

328. 'मनूदिष्टेन' पद में कौन-सी सन्धि हुई है?

(अ) यण् सन्धि (मनु + उद्दिष्टेन) (ब) गुण सन्धि (स) वृद्धि सन्धि (द) दीर्घ सन्धि

329. 'सख्युः' पद का मूल प्रातिपदिक (शब्द) क्या है?

(अ) सखी (ब) सखि (इकारान्त पुँल्लिङ्ग) (स) सखा (द) सख्य

330. 'इशिताम्' पद का किरातार्जुनीयम् में क्या अर्थ है?

(अ) इच्छा को (ब) प्रभुत्व / स्वामित्व / ऐश्वर्य को (स) बाण को (द) रात्रि को

331. 'असंशयम्' पद का व्याकरणिक स्वरूप क्या है?

(अ) नञ् तत्पुरुष / क्रियाविशेषण (अव्ययवत्) (ब) बहुव्रीहि (स) द्वन्द्व (द) कर्मधारय

332. 'कृतारिषड्वर्गजयेन' में 'अरिषड्वर्ग' से किसका बोध होता है?

(अ) छः बाह्य शत्रु राजा (ब) काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मात्सर्य (छः आन्तरिक शत्रु) (स) छः ऋतुएँ (द) छः वेदाङ्ग

333. 'त्रिगणः' पद में कौन-से तीन पुरुषार्थों का समावेश है?

(अ) सत्त्व, रज, तम (ब) धर्म, अर्थ और काम (स) वात, पित्त, कफ (द) साम, दान, दण्ड

334. 'यथायथम्' पद में कौन-सा समास है?

(अ) अव्ययीभाव समास (यथा यथा इति) (ब) तत्पुरुष (स) बहुव्रीहि (द) द्वन्द्व

335. 'निरत्ययम्' पद का सही समास-विग्रह क्या होगा?

(अ) निर्गतः अत्ययः यस्मात् तत् (प्रादि तत्पुरुष / अव्ययीभाव) (ब) अत्ययस्य अभावः (स) अत्ययेन सहितम् (द) अत्यये रतः

336. 'दानवर्जितम्' पद में कौन-सा समास है?

(अ) दानेन वर्जितम् (तृतीया तत्पुरुष) (ब) दानात् वर्जितम् (स) दानस्य वर्जितम् (द) दाने वर्जितम्

337. 'सत्क्रियाम्' पद का अर्थ क्या है?

(अ) हवन (ब) सत्कार / आदरपूर्ण सम्मान (स) क्रिया (द) दण्ड

338. 'वसु' शब्द का द्वितीया बहुवचन में क्या रूप बनता है?

(अ) वसून (ब) वसूनि (स) वसून् (द) वसवः

339. 'मन्युना' पद में कौन-सा प्रातिपदिक (मूल शब्द) है?

(अ) मन्यु (उकारान्त पुँल्लिङ्ग) (ब) मन्युन् (स) मन्य (द) मनस्

340. 'गुरूपदिष्टेन' पद में कौन-सा समास है?

(अ) गुरुणा उपदिष्टेन (तृतीया तत्पुरुष) (ब) गुरोः उपदिष्टेन (स) गुरवे उपदिष्टेन (द) गुरुषु उपदिष्टेन

341. 'रिपौ सुते वा दिशति समं दण्डेन' - दुर्योधन न्याय करते समय शत्रु और पुत्र में कैसा व्यवहार रखता था?

(अ) शत्रु से द्वेष और पुत्र से प्रेम (ब) दोनों के प्रति सर्वथा समान एवं निष्पक्ष दण्ड-विधान (स) पुत्र को क्षमा (द) शत्रु पर अत्याचार

342. 'धर्मविप्लवम्' पद का क्या अर्थ है?

(अ) धर्म की उन्नति (ब) धर्म का उल्लंघन / विनाश / मर्यादा-भङ्ग (स) धार्मिक उत्सव (द) तीर्थयात्रा

343. 'विधातुम्' पद में कौन-सा प्रत्यय है?

(अ) वि + धा + तुमुन् (ब) वि + धा + क्त्वा (स) वि + धा + ल्युट् (द) वि + धा + ण्यत्

344. 'कुरुणामधिपः' पद में कौन-सा समास है?

(अ) कुरुणाम् अधिपः (षष्ठी तत्पुरुष) (ब) कर्मधारय (स) बहुव्रीहि (द) द्वन्द्व

345. 'वनेचरः' पद में 'चरेष्टः' सूत्र से 'चर' धातु में कौन-सा कृत् प्रत्यय लगा है?

(अ) अण् प्रत्यय (ब) ट प्रत्यय (स) क प्रत्यय (द) घञ् प्रत्यय

346. 'वर्णिलीङ्गी' पद में 'वर्ण' शब्द से कौन-सा मत्वर्थीय प्रत्यय लगा है?

(अ) इनि प्रत्यय (वर्णिन् + ङीप्) (ब) मतुप् (स) तल् (द) अण्

347. 'हितं मनोहारि च दुर्लभं वचः' में कौन-सा छन्द प्रयुक्त है?

(अ) इन्द्रवज्रा (ब) वंशस्थ छन्द (स) उपजाति (द) मालिनी

348. किरातार्जुनीयम् के प्रथम सर्ग का मुख्य सन्दर्भ और वातावरण क्या है?

(अ) युद्धभूमि का प्रत्यक्ष वर्णन (ब) द्वैतवन में राजनीति-विमर्श एवं कूटनीतिक गुप्तचर-वार्ता (स) यज्ञशाला (द) विवाह उत्सव

349. भारवि ने अपने काव्य में 'अर्थगौरव' का निर्वाह किस प्रकार किया है?

(अ) व्यर्थ विस्तार छोड़कर सारगर्भित, नीतिसम्मत एवं सूक्तिमय पदों द्वारा (ब) केवल लम्बे समासों द्वारा (स) कठिन शब्दों के ढेर से (द) केवल शृङ्गार से

350. किरातार्जुनीयम् का अध्ययन संस्कृत प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए क्यों सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण माना जाता है?

(अ) इसमें केवल व्याकरण है (ब) यह उच्चस्तरीय राजनीति, उत्कृष्ट काव्यकला, प्रौढ़ व्याकरण एवं अमर सूक्तियों का अनुपम संगम है (स) यह बहुत छोटा ग्रन्थ है (द) इसमें केवल कथा है
✦ उत्तरमाला (Answer Key : प्रश्न 301 से 350) ✦
301-(ब) 302-(ब) 303-(ब) 304-(ब) 305-(अ) 306-(ब) 307-(अ) 308-(अ) 309-(ब) 310-(ब) 311-(ब) 312-(ब) 313-(ब) 314-(अ) 315-(ब) 316-(ब) 317-(ब) 318-(अ) 319-(अ) 320-(ब) 321-(अ) 322-(अ) 323-(ब) 324-(ब) 325-(ब) 326-(ब) 327-(ब) 328-(अ) 329-(ब) 330-(ब) 331-(अ) 332-(ब) 333-(ब) 334-(अ) 335-(अ) 336-(अ) 337-(ब) 338-(ब) 339-(अ) 340-(अ) 341-(ब) 342-(ब) 343-(अ) 344-(अ) 345-(ब) 346-(अ) 347-(ब) 348-(ब) 349-(अ) 350-(ब)

किरातार्जुनीयम् : 500 वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तरी महामैराथन (भाग-8 : प्रश्न 351-400)

UGC NET, UP TGT, PGT, GIC, RPSC एवं असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा विशेष

351. 'अकृतात्मभिः' पद का सही समास-विग्रह क्या होगा?

(अ) न कृतः आत्मा यैः ते (नञ् बहुव्रीहि) (ब) अकृता आत्मा (कर्मधारय) (स) आत्मनः अकृतम् (द) अकृतेन आत्मा

352. 'तथापि जिह्मः स भवज्जिगीषया' में 'भवत्' पद से किसका निर्देश है?

(अ) दुर्योधन का (ब) युधिष्ठिर (आप) का (स) भीम का (द) व्यास का

353. 'दुरोदरच्छद्मजिताम्' पद में कौन-सा समास निष्पन्न होता है?

(अ) दुरोदरेण छद्मना जिताम् (तृतीया तत्पुरुष / मध्यमपदलोपी) (ब) बहुव्रीहि (स) द्वन्द्व (द) अव्ययीभाव

354. 'तनोति शुभ्रं गुणसम्पदा यशः' - यहाँ 'तनोति' क्रियापद का कर्ता कौन है?

(अ) युधिष्ठिर (ब) सुयोधनः (दुर्योधनः) (स) वनेचरः (द) अर्जुनः

355. 'समुन्नयन् भूतिमनार्यसङ्गमात्' यहाँ 'अनार्यसङ्गमात्' में कौन-सी विभक्ति है?

(अ) तृतीया, एकवचन (ब) पञ्चमी, एकवचन (अपादान कारक) (स) षष्ठी, एकवचन (द) सप्तमी, एकवचन

356. 'वरं विरोधोऽपि समं महात्मभिः' में 'महात्मभिः' पद में तृतीया विभक्ति किस सूत्र से हुई है?

(अ) कर्तृकरणयोस्तृतीया (ब) सहयुक्तेऽप्रधाने (समम् योगे) (स) येनाङ्गविकारः (द) हेतौ

357. दुर्योधन ने कृषि की उन्नति हेतु अपनी भूमि को कैसा बना दिया था?

(अ) बंजर भूमि (ब) अदेवमातृका (वर्षा पर निर्भर न रहने वाली, कूप-नहर सिंचित) (स) केवल वर्षा-निर्भर (द) अकृष्य

358. 'वितन्वति क्षेममदेवमातृकाः' में 'क्षेमम्' पद का क्या अर्थ है?

(अ) युद्ध (ब) कुशल / कल्याण / समृद्धि (स) भय (द) दान

359. 'सुखेन लभ्या दधतः कृषीवलैः' में 'कृषीवलैः' पद का क्या अर्थ है?

(अ) व्यापारियों द्वारा (ब) कृषकों (किसानों) द्वारा (स) मन्त्रियों द्वारा (द) सैनिकों द्वारा

360. 'कृषीवल' पद में 'कृषि' शब्द से कौन-सा मत्वर्थीय तद्धित प्रत्यय लगा है?

(अ) वलच् प्रत्यय (कृषि + वलच्) (ब) मतुप् (स) इनि (द) अण्

361. 'सस्यसम्पदः' पद का सही समास-विग्रह क्या होगा?

(अ) सस्यानां सम्पदः (षष्ठी तत्पुरुष) (ब) सस्यैः सम्पदः (स) सस्याय सम्पदः (द) सस्येषु सम्पदः

362. 'उदारकीर्तेरुदयम्' में 'उदयम्' पद का क्या अर्थ है?

(अ) सूर्योदय (ब) अभ्युदय / उत्कर्ष / समृद्धि (स) पर्वत (द) पतन

363. 'सञ्चिन्त्य' पद में कौन-सा कृदन्त प्रत्यय प्रयुक्त हुआ है?

(अ) क्त्वा (ब) ल्यप् (सम् + चित् + ल्यप्) (स) ण्यत् (द) तुमुन्

364. 'तवानुजाताः' पद का किरातार्जुनीयम् के सन्दर्भ में क्या अर्थ है?

(अ) आपकी प्रजा (ब) आपके छोटे भाई (भीम, अर्जुन आदि) (स) आपके शत्रु (द) आपके सेवक

365. 'उरगः' पद की सही व्युत्पत्ति क्या है?

(अ) उरसा गच्छति इति (उरस् + गम् + ड = सर्प) (ब) उरसि तिष्ठति (स) उरो दधाति (द) उरः पाति

366. 'न विव्यथे तस्य मनः' में 'विव्यथे' क्रियापद किस धातु का रूप है?

(अ) विद् धातु (ब) व्यथ् धातु (लिट् लकार, आत्मनेपद) (स) विष् धातु (द) व्यध् धातु

367. 'कुरुन्' पद का प्रयोग भारवि ने किस अर्थ में किया है?

(अ) केवल कौरवों के लिए (ब) कुरु देश के समग्र जनपदों एवं प्रजा के लिए (स) युधिष्ठिर के लिए (द) वनेचर के लिए

368. 'महीभृतां' पद का किरातार्जुनीयम् के प्रथम सर्ग में क्या अभिप्राय है?

(अ) पर्वतों का (ब) राजाओं / नृपतियों का (महीं बिभ्रति इति) (स) शेषनाग का (द) वृषभों का

369. 'अचिरेण' पद का व्याकरणिक स्वरूप क्या है?

(अ) सर्वनाम (ब) तृतीयान्त क्रियाविशेषण (अव्ययवत् प्रयुक्त) (स) संज्ञा (द) धातु

370. 'प्रशाम्य' पद में मूल धातु कौन-सी है?

(अ) शास् (ब) शम् (उपशमे) (स) शो (द) श्वि

371. 'अवधीर्य' पद में प्रयुक्त उपसर्ग एवं प्रत्यय का सही युग्म क्या है?

(अ) अव + क्त्वा (ब) अव + ल्यप् (अव + धीर् + ल्यप्) (स) अप + ण्यत् (द) आ + तुमुन्

372. 'विचित्ररूपाः खलु चित्तवृत्तयः' - द्रौपदी के अनुसार मनुष्यों के मन की वृत्तियाँ कैसी होती हैं?

(अ) सरल (ब) अनेक प्रकार की एवं अत्यन्त गूढ़ (विचित्र) (स) एकसमान (द) सुगम

373. 'निशम्य' पद में कौन-सा प्रत्यय है?

(अ) क्त्वा (ब) ल्यप् (नि + शम् + ल्यप्) (स) ण्यत् (द) यत्

374. 'रुजः' पद में कौन-सा वचन और विभक्ति है?

(अ) तृतीया एकवचन (ब) द्वितीया बहुवचन / प्रथमा बहुवचन (रुज् शब्द) (स) पञ्चमी एकवचन (द) सप्तमी एकवचन

375. 'अपास्त' पद में कौन-सा उपसर्ग है?

(अ) अपि (ब) अप (अप + अस् + क्त) (स) अव (द) अनु

376. 'अधिरूढ' पद में मूल धातु कौन-सी है?

(अ) रुध् (ब) रुह् (जन्मनि प्रादुर्भावे च) (स) राध् (द) रिह्

377. 'द्विषन्निमित्ता' में 'द्विषत्' पद का क्या अर्थ है?

(अ) मित्र (ब) शत्रु / वैरी (स) भृत्य (द) गुरु

378. 'उन्मूलयति' क्रियापद में प्रयुक्त उपसर्ग एवं लकार क्या है?

(अ) उत् + लट् लकार (ब) उद् + मूल् (णिच्) + लट् लकार (स) उप + लङ् लकार (द) अप + लोट् लकार

379. 'शमीतरुम्' पद में कौन-सा समास है?

(अ) शमी एव तरुः तम् (कर्मधारय) (ब) शम्याः तरुः (स) शम्यै तरुः (द) बहुव्रीहि

380. 'शुष्कम्' पद में कौन-सा कृदन्त प्रत्यय लगा है?

(अ) शुष् + क्त (शुषः कः सूत्र से तकार को ककार) (ब) शुष् + तव्यत् (स) शुष् + ल्युट् (द) शुष् + अनीयर्

381. 'कथं त्वमेतौ धृतिसंयमौ यमौ' में 'धृतिसंयमौ' किसका विशेषण है?

(अ) भीम और अर्जुन का (ब) यमौ (नकुल और सहदेव) का (स) युधिष्ठिर का (द) दुर्योधन का

382. वनेचर का हस्तिनापुर से द्वैतवन में लौटना किरातार्जुनीयम् के किस सर्ग की मुख्य घटना है?

(अ) द्वितीय सर्ग (ब) प्रथम सर्ग (स) तृतीय सर्ग (द) चतुर्थ सर्ग

383. वनेचर द्वारा सत्य समाचार सुनाने पर युधिष्ठिर ने क्या प्रतिक्रिया दी?

(अ) उसे दण्ड दिया (ब) उसे यथोचित सत्कार, सम्मान एवं पारितोषिक देकर विदा किया (स) क्रोध किया (द) मौन रहे

384. किरातार्जुनीयम् में प्रतिपादित राजनीति के सिद्धान्तों की सर्वाधिक समानता किस प्राचीन नीतिग्रन्थ से है?

(अ) पञ्चतन्त्र (ब) कौटिल्य का अर्थशास्त्र एवं कामन्दकीय नीतिसार (स) हितोपदेश (द) शुक्रनीति

385. दुर्योधन द्वारा राज्य-रक्षा एवं विदेश नीति हेतु प्रयुक्त 'षड्गुणों' में क्या सम्मिलित नहीं है?

(अ) सन्धि एवं विग्रह (ब) यान, आसन, द्वैधीभाव एवं संश्रय (स) काम, क्रोध, मद एवं लोभ (द) उपर्युक्त अ और ब दोनों

386. किरातार्जुनीयम् के 15वें सर्ग में प्रयुक्त 'पद्मबन्ध' चित्रकाव्य में अक्षरों का विन्यास किस रूप में होता है?

(अ) कमल के दलों (पंखुड़ियों) एवं कर्णिका के आकार में (ब) बाण के आकार में (स) खड्ग के आकार में (द) चक्र के आकार में

387. 'रथबन्ध' चित्रकाव्य का विन्यास किस स्वरूप में किया जाता है?

(अ) वृक्ष के समान (ब) रथ के पहिये एवं रथ की आकृति में (स) पर्वत के समान (द) नदी के समान

388. किरातार्जुनीयम् के पञ्चम सर्ग में हिमालय के किस विशिष्ट शिखर का वर्णन है?

(अ) नीलगिरि (ब) गौरीशिखर एवं इन्द्रकील शिखर (स) मलयगिरि (द) पारियात्र

389. षष्ठ सर्ग में देवराज इन्द्र द्वारा प्रेषित अप्सराओं के समूह में कौन-सी प्रमुख अप्सरा सम्मिलित थी?

(अ) मेनका, रम्भा, उर्वशी एवं तिलोत्तमा (ब) शकुन्तला (स) दमयन्ती (द) वासवदत्ता

390. अष्टम सर्ग में अप्सराओं के जलविहार का वर्णन किस देव-सरोवर/नदी में हुआ है?

(अ) मन्दाकिनी (सुरनदी/स्वर्गङ्गा) के पावन सरोवरों में (ब) कावेरी में (स) सिन्धु में (द) ताप्ती में

391. दशम सर्ग में अर्जुन के अविचल तप के सम्मुख अप्सराओं के किस प्रयास की विफलता दिखाई गई है?

(अ) गायन की (ब) कामोद्दीपक हाव-भाव, कटाक्ष एवं विलास-चेष्टाओं की (स) अस्त्र-प्रहार की (द) मन्त्र-प्रयोग की

392. एकादश सर्ग में मुनिवेषधारी इन्द्र और अर्जुन के मध्य मुख्य विवाद का विषय क्या था?

(अ) धन का बटवारा (ब) संन्यास/मोक्ष-धर्म बनाम क्षत्रिय-धर्म (शस्त्रधारण) का औचित्य (स) राज्य-सीमा (द) यज्ञ-विधि

393. द्वादश सर्ग में अर्जुन की अनन्य तपस्या के तेज से भयभीत होकर देवगण किसकी शरण में गए?

(अ) भगवान विष्णु के (ब) देवाधिदेव महादेव (शिव) के पास कैलास (स) ब्रह्मा जी के (द) यमराज के

394. त्रयोदश सर्ग में किरातवेशी शिव के साथ आने वाली सेना का मुख्य आयुध क्या था?

(अ) केवल गदा (ब) धनुष-बाण, शूल, पाषाण एवं आखेटक आयुध (स) तोप (द) चक्र

395. चतुर्दश सर्ग में अर्जुन के गाण्डीव धनुष की प्रत्यञ्चा की टंकार से क्या प्रतिध्वनित हुआ?

(अ) केवल आश्रम (ब) सम्पूर्ण इन्द्रकील पर्वत, गुफाएँ और दशों दिशाएँ (स) समुद्र (द) पाताल

396. षोडश सर्ग में अर्जुन और किरात के बाणों के परस्पर टकराने से आकाश में क्या दृश्य उत्पन्न हुआ?

(अ) अन्धकार (ब) प्रलयकालीन अग्नि की ज्वालाएँ एवं चिनगारियों की वर्षा (स) जलवृष्टि (द) पुष्पवृष्टि

397. सप्तदश सर्ग में अर्जुन ने समस्त अस्त्र समाप्त होने पर शिव के विरुद्ध किस युद्ध-कौशल का आश्रय लिया?

(अ) माया-युद्ध (ब) मल्लयुद्ध / बाहुयुद्ध एवं मुष्टियुद्ध (स) पलायन (द) सन्धि

398. अष्टादश सर्ग में भगवान शिव ने अर्जुन के किस समर्पण-भाव से द्रवीभूत होकर वरदान दिया?

(अ) भय से (ब) शरणागति, अगाध भक्ति, निष्कलंक शौर्य और तप की पराकाष्ठा से (स) स्तुति-पाठ मात्र से (द) उपहार से

399. शिव से पाशुपतास्त्र प्राप्त करने के उपरान्त अर्जुन का अगला लक्ष्य क्या था?

(अ) वन में विश्राम करना (ब) इन्द्रलोक (अमरावती) जाकर अन्य लोकपालों के अस्त्रों का संचय करना (स) हस्तिनापुर लौटना (द) संन्यास लेना

400. किरातार्जुनीयम् महाकाव्य के समग्र अध्ययन से पाठक को किस प्रधान जीवन-मूल्य की प्रेरणा मिलती है?

(अ) कायरता की (ब) धर्मानुकूल पुरुषार्थ, धैर्य, स्वाभिमान, गुरु-ईश्वर निष्ठा एवं राष्ट्र-कर्तव्य की (स) केवल धन-संग्रह की (द) भाग्यवादिता की
✦ उत्तरमाला (Answer Key : प्रश्न 351 से 400) ✦
351-(अ) 352-(ब) 353-(अ) 354-(ब) 355-(ब) 356-(ब) 357-(ब) 358-(ब) 359-(ब) 360-(अ) 361-(अ) 362-(ब) 363-(ब) 364-(ब) 365-(अ) 366-(ब) 367-(ब) 368-(ब) 369-(ब) 370-(ब) 371-(ब) 372-(ब) 373-(ब) 374-(ब) 375-(ब) 376-(ब) 377-(ब) 378-(ब) 379-(अ) 380-(अ) 381-(ब) 382-(ब) 383-(ब) 384-(ब) 385-(स) 386-(अ) 387-(ब) 388-(ब) 389-(अ) 390-(अ) 391-(ब) 392-(ब) 393-(ब) 394-(ब) 395-(ब) 396-(ब) 397-(ब) 398-(ब) 399-(ब) 400-(ब)

किरातार्जुनीयम् : 500 वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तरी महामैराथन (भाग-9 : प्रश्न 401-450)

UGC NET, UP TGT, PGT, GIC, RPSC एवं असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा विशेष

401. 'नृपेष्वमात्येषु' पद में किस विभक्ति और वचन का प्रयोग हुआ है?

(अ) पञ्चमी, बहुवचन (ब) सप्तमी, बहुवचन (स) तृतीया, बहुवचन (द) षष्ठी, द्विवचन

402. 'अपास्तपेशा' में 'पेशा' (पिश धातु निष्पन्न) शब्द का वास्तविक अर्थ क्या है?

(अ) व्यवसाय (ब) शोभा / रूप / कान्ति (स) वस्त्र (द) आयुध

403. 'प्रजासु वृत्तिं यमयुङ्क्त वेदितुम्' - यहाँ 'वृत्तिम्' पद का क्या अर्थ है?

(अ) आजीविका (ब) आचरण / नीतिपूर्ण व्यवहार एवं वृत्तान्त (स) व्यापार (द) दान

404. 'यमयुङ्क्त' क्रियापद में कौन-सा लकार, पुरुष और वचन प्रयुक्त हुआ है?

(अ) लङ् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन (युज् धातु, आत्मनेपद) (ब) लट् लकार, मध्यम पुरुष (स) लिट् लकार, प्रथम पुरुष (द) लोट् लकार, उत्तम पुरुष

405. 'वर्णी' शब्द की व्युत्पत्ति एवं शास्त्रीय अर्थ क्या है?

(अ) वर्णवान् (ब) वर्ण + इनि (ब्रह्मचारी / ब्रह्मचर्याश्रम-स्थित) (स) चित्रकार (द) वनवासी

406. महाभारत एवं किरातार्जुनीयम् के अनुसार 'द्वैतवन' किस पवित्र नदी के कछार/समीप स्थित था?

(अ) सरस्वती नदी (ब) कावेरी नदी (स) गोमती नदी (द) नर्मदा नदी

407. 'कृतप्रणामस्य महीं महीभुजे' में 'महीम्' पद किस कारक और विभक्ति का रूप है?

(अ) करण कारक, तृतीया (ब) कर्म कारक, द्वितीया एकवचन (स) कर्ता कारक, प्रथमा (द) अधिकरण कारक

408. 'हितैषिणः' पद का व्याकरणिक स्वरूप क्या है?

(अ) प्रथमा विभक्ति, बहुवचन (हितैषिन् शब्द) (ब) द्वितीया विभक्ति, एकवचन (स) षष्ठी विभक्ति, एकवचन (द) सप्तमी विभक्ति, एकवचन

409. 'द्विषां विघाताय विधातुमिच्छतः' में 'इच्छतः' पद में कौन-सा कृदन्त प्रत्यय लगा है?

(अ) इष् + शानच् (ब) इष् + शतृ (षष्ठी एकवचन) (स) इष् + क्त (द) इष् + तुमुन्

410. 'रहस्यनुज्ञामधिगम्य भूभृतः' यहाँ 'रहसि' पद का क्या अर्थ है?

(अ) राजसभा में (ब) एकान्त में (गुप्त स्थान में) (स) वन के मध्य (द) रात्रि में

411. 'रहस्यनुज्ञामधिगम्य भूभृतः' में 'भूभृतः' पद में कौन-सी विभक्ति है और यह किसके लिए आया है?

(अ) प्रथमा, दुर्योधन के लिए (ब) षष्ठी एकवचन, महाराज युधिष्ठिर के लिए (स) पञ्चमी, वनेचर के लिए (द) द्वितीया, भीम के लिए

412. 'सौष्ठवौदार्यविशेषशालिनीम्' में 'सौष्ठव' का काव्यशास्त्रीय तात्पर्य क्या है?

(अ) शब्दों का लालित्य एवं व्याकरण-सम्मत निर्दोष पद-विन्यास (ब) क्लिष्टता (स) केवल छन्द (द) अलंकारहीनता

413. 'सौष्ठवौदार्यविशेषशालिनीम्' में 'औदार्य' शब्द का क्या अर्थ अभिप्रेत है?

(अ) धन का दान (ब) अर्थ की गम्भीरता, उदात्तता एवं अर्थगौरव (स) मधुर वाणी मात्र (द) लम्बे वाक्य

414. 'विनिश्चितार्थाम्' पद का सही समास-विग्रह क्या होगा?

(अ) विनिश्चितः अर्थः यस्याः ताम् (बहुव्रीहि) (ब) विनिश्चितः अर्थः (कर्मधारय) (स) अर्थस्य निश्चयः (द) विनिश्चितेन अर्थः

415. 'विनिश्चितार्थामिति वाचमाददे' - यहाँ 'आददे' क्रियापद का कर्ता पद कौन है?

(अ) युधिष्ठिरः (ब) वनेचरः (स) द्रौपदी (द) भारविः

416. 'निसर्गदुर्बोधम्' पद में कौन-सा उपसर्ग प्रयुक्त है?

(अ) निर् एवं दुर् (ब) केवल दुर् (स) केवल निः (द) निस्

417. 'क्व भूपतीनां चरितं क्व जन्तवः' - यहाँ 'जन्तवः' पद से वनेचर ने किसका संकेत किया है?

(अ) हिंसक पशुओं का (ब) अपने जैसे मन्दबुद्धि, वनचर एवं सामान्य जीवों का (स) मन्त्रियों का (द) पण्डितों का

418. 'तवानुभावोऽयमवेदि यन्मया' में 'अनुभावः' शब्द का सही अर्थ क्या है?

(अ) पश्चात्ताप (ब) प्रभाव / तेज / अनुग्रह (स) भय (द) नाटक का अङ्ग

419. 'निगूढतत्त्वं नयवर्त्म विद्विषाम्' - यहाँ 'निगूढतत्त्वम्' किसका विशेषण पद है?

(अ) वनेचरस्य (ब) नयवर्त्म (नीति-मार्ग) का (स) विद्विषाम् का (द) युधिष्ठिरस्य

420. 'विशङ्कमानो भवतः पराभवम्' - दुर्योधन को किससे पराजय की निरन्तर आशङ्का बनी रहती है?

(अ) देवराज इन्द्र से (ब) धर्मराज युधिष्ठिर एवं पाण्डवों से (स) अपने मन्त्रियों से (द) अन्य राजाओं से

421. 'नृपासनस्थोऽपि वनाधिवासिनाम्' - राजसिंहासन पर विराजमान होने पर भी दुर्योधन किससे भयभीत रहता है?

(अ) वनचर व्याघ्रों से (ब) वन में निवास करने वाले पाण्डवों (वनाधिवासिनाम्) से (स) भीलों से (द) मुनियों से

422. 'दुरोदरच्छद्मजिताम्' में 'जिताम्' पद में कौन-से प्रत्यय लगे हैं?

(अ) जि + शानच् + ङीप् (ब) जि + क्त + टाप् (स) जि + ल्युट् (द) जि + तुमुन्

423. 'समीहते नयेन जेतुं जगतीं सुयोधनः' में 'समीहते' क्रियापद में कौन-सी मूल धातु है?

(अ) सम् धातु (ब) ईह् धातु (चेष्टायाम् / इच्छायाम्) (स) इष् धातु (द) ईक्ष् धातु

424. 'तथापि जिह्मः स भवज्जिगीषया' - कपटी दुर्योधन किस साधन से सम्पूर्ण पृथ्वी को जीतना चाहता है?

(अ) सेना के बल से (ब) नय (उत्कृष्ट नीति एवं प्रजापालन) द्वारा (स) विषप्रयोग से (द) छल से

425. 'तनोति शुभ्रं गुणसम्पदा यशः' में 'शुभ्रम्' पद किसका विशेषण है?

(अ) गुणसम्पदा का (ब) यशः (निर्मल/उज्ज्वल कीर्ति) का (स) दुर्योधनस्य (द) जगतीम् का

426. 'समुन्नयन् भूतिमनार्यसङ्गमाद् वरं विरोधोऽपि समं महात्मभिः' - इस श्लोकार्ध में प्रयुक्त छन्द कौन-सा है?

(अ) उपजाति (ब) वंशस्थ छन्द (जतौ तु वंशस्थमुदीरितं जरौ) (स) पुष्पिताग्रा (द) प्रहर्षिणी

427. 'कृतारिषड्वर्गजयेन मानवीम्' में 'मानवीम्' पद किसका विशेषण है?

(अ) पदवीम् (मनु-प्रणीत शासन-पद्धति) का (ब) द्रौपदी का (स) श्रियम् का (द) जगतीम् का

428. 'अगम्प्यरूपाम्' पद का किरातार्जुनीयम् में क्या अर्थ है?

(अ) जो चलने योग्य न हो (ब) अत्यन्त गूढ़, दुर्लङ्घ्य एवं दूसरों के लिए अगम्य (स) कुरूप (द) सरल

429. 'पदवीम्' पद में किस विभक्ति और वचन का प्रयोग हुआ है?

(अ) प्रथमा, एकवचन (ब) द्वितीया, एकवचन (पदवी शब्द) (स) तृतीया, एकवचन (द) सप्तमी, एकवचन

430. 'प्रविभज्य नक्तन्दिवमस्ततन्द्रिणा' - दुर्योधन आलस्य त्यागकर रात-दिन का विभाजन किसलिए करता था?

(अ) केवल आखेट हेतु (ब) राजकार्यों, मन्त्रणा एवं नीति-पालन के सुचारु सम्पादन हेतु (स) द्यूतक्रीड़ा हेतु (द) विश्राम हेतु

431. 'अस्ततन्द्रिणा' पद में 'तन्द्रा' शब्द का सही अर्थ क्या है?

(अ) क्रोध (ब) आलस्य / प्रमाद / शिथिलता (स) लोभ (द) काम

432. 'अस्ततन्द्रिणा' पद का सही समास-विग्रह क्या होगा?

(अ) अस्ता तन्द्रा यस्य सः, तेन (बहुव्रीहि) (ब) तन्द्रायाः अस्तम् (स) अस्ता च तन्द्रा (द) तन्द्रया युक्तः

433. 'नक्तन्दिवम्' पद में कौन-सा समास माना जाता है?

(अ) नक्तं च दिवा च इति (द्वन्द्व समास / अव्ययीभाववत्) (ब) तत्पुरुष (स) बहुव्रीहि (द) कर्मधारय

434. 'असक्तमाराधयतो यथायथं त्रिगणस्य' में 'आराधयतः' पद में कौन-सा कृदन्त प्रत्यय है?

(अ) आङ् + राध् + शानच् (ब) आङ् + राध् (णिच्) + शतृ (षष्ठी एकवचन) (स) आङ् + राध् + क्त (द) आङ् + राध् + ल्युट्

435. दुर्योधन के न्यायप्रिय शासन में धर्म, अर्थ और काम (त्रिगण) किस प्रकार आचरित होते थे?

(अ) परस्पर टकराते हुए (ब) अभिन्न मित्रों के समान बिना किसी विरोध के सन्तुलित रूप में (स) केवल अर्थ की प्रधानता से (द) धर्म को छोड़कर

436. 'निरत्ययं साम न दानवर्जितम्' - यहाँ 'निरत्ययम्' पद किसका विशेषण है?

(अ) दानम् का (ब) साम (शान्ति/सान्त्वना नीति) का (स) दण्डस्य (द) भेदस्य

437. 'न भूरि दानं विरहय्य सत्क्रियाम्' में 'विरहय्य' पद में कौन-सा कृदन्त प्रत्यय लगा है?

(अ) क्त्वा (ब) ल्यप् (वि + रह् + णिच् + ल्यप्) (स) ण्यत् (द) तुमुन्

438. 'प्रवर्तते नास्य न सत्क्रियोपहता' में 'सत्क्रियोपहता' पद में कौन-सा समास है?

(अ) सत्क्रियया उपहता (तृतीया तत्पुरुष) (ब) सत्क्रियायाः उपहता (स) सत्क्रियायां उपहता (द) बहुव्रीहि

439. 'वसुनि वाञ्छन् न च मन्युना नृपः' - दुर्योधन धन-लोभ अथवा क्रोध के वशीभूत होकर क्या नहीं करता?

(अ) दान नहीं देता (ब) किसी को अनुचित दण्ड नहीं देता (स) यज्ञ नहीं करता (द) मन्त्रणा नहीं करता

440. 'स्वधर्म इत्येव निवृत्तकारणैः' - दुर्योधन दण्ड-विधान को किस रूप में स्वीकार करता था?

(अ) व्यक्तिगत प्रतिशोध (ब) केवल अपना निष्काम क्षत्रिय 'स्वधर्म' मानकर (स) भय दिखाने हेतु (द) धन-वसूली हेतु

441. 'गुरूपदिष्टेन रिपौ सुतेऽपि वा' - दुर्योधन किसके द्वारा उपदिष्ट दण्ड-मार्ग का निष्पक्ष पालन करता था?

(अ) शकुनि द्वारा (ब) शास्त्रकारों एवं गुरुजनों द्वारा प्रतिपादित धर्मशास्त्र (स) कर्ण द्वारा (द) दुःशासन द्वारा

442. 'विधाय रक्षान् परितः परेतरान्' में 'परेतरान्' पद का सटीक संस्कृत अर्थ क्या है?

(अ) शत्रुओं को (ब) शत्रु से भिन्न (अपने विश्वस्त / आत्मीय पुरुषों) को (स) विदेशियों को (द) वनवासियों को

443. 'अशङ्कितः' पद में कौन-सा समास है?

(अ) न शङ्कितः (नञ् तत्पुरुष) (ब) कर्मधारय (स) बहुव्रीहि (द) अव्ययीभाव

444. 'स शङ्किताकारमुपैति शङ्कितः' इस श्लोकांश में कौन-सा प्रमुख अलंकार है?

(अ) रूपक (ब) विरोधाभास एवं छेकानुप्रास (स) सन्देह (द) भ्रान्तिमान्

445. 'क्रियापवर्गेष्वनुजीविसात्कृताः' में 'क्रियापवर्गेषु' पद का क्या अर्थ है?

(अ) कार्यों के आरम्भ में (ब) कार्यों की सफलतापूर्वक समाप्ति (सिद्धि) होने पर (स) कार्यों के मध्य (द) युद्ध में

446. 'अनुजीविसात्कृताः' पद में 'सात्' प्रत्यय किस अर्थ में प्रयुक्त हुआ है?

(अ) तदधीन करने (समर्पण/स्वामित्व देने) के अर्थ में (ब) दूरी के अर्थ में (स) निषेध के अर्थ में (द) सादृश्य के अर्थ में

447. 'कृतज्ञतामस्य वदन्ति सम्पदः' - सेवकों को प्रदान की गई प्रचुर धन-सम्पदाएँ दुर्योधन के किस गुण को दर्शाती हैं?

(अ) उसकी कृपणता को (ब) उसकी कृतज्ञता एवं उदारता को (स) उसके भय को (द) उसके अहंकार को

448. 'अनारतं तेन पदेषु लम्भिता' में 'पदेषु' पद का क्या अर्थ है?

(अ) पाँवों में (ब) योग्यतानुसार उचित पदों / स्थानों पर (स) श्लोकों में (द) वनों में

449. 'विभाति भूयः समुदीरिता परम्' - दुर्योधन के राज्य में गुणों का यथोचित सम्मान होने से किसकी निरन्तर वृद्धि हो रही थी?

(अ) प्रजा के असन्तोष की (ब) राज्य-समृद्धि, प्रजा-अनुराग एवं यश की (स) रोगों की (द) करों (टैक्स) की

450. प्रथम सर्ग में भारवि द्वारा दुर्योधन के नीतिपूर्ण आचरण का विशद वर्णन महाकाव्य के किस उच्च आदर्श को प्रकट करता है?

(अ) अन्ध-शत्रुता (ब) शत्रु के भी वास्तविक गुणों और नीति-कौशल का निष्पक्ष, यथार्थ एवं प्रौढ़ निरूपण (स) केवल चाटुकारिता (द) असत्य वर्णन
✦ उत्तरमाला (Answer Key : प्रश्न 401 से 450) ✦
401-(ब) 402-(ब) 403-(ब) 404-(अ) 405-(ब) 406-(अ) 407-(ब) 408-(अ) 409-(ब) 410-(ब) 411-(ब) 412-(अ) 413-(ब) 414-(अ) 415-(ब) 416-(अ) 417-(ब) 418-(ब) 419-(ब) 420-(ब) 421-(ब) 422-(ब) 423-(ब) 424-(ब) 425-(ब) 426-(ब) 427-(अ) 428-(ब) 429-(ब) 430-(ब) 431-(ब) 432-(अ) 433-(अ) 434-(ब) 435-(ब) 436-(ब) 437-(ब) 438-(अ) 439-(ब) 440-(ब) 441-(ब) 442-(ब) 443-(अ) 444-(ब) 445-(ब) 446-(अ) 447-(ब) 448-(ब) 449-(ब) 450-(ब)

किरातार्जुनीयम् : 500 वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तरी महामैराथन (भाग-10 : प्रश्न 451-500)

UGC NET, UP TGT, PGT, GIC, RPSC एवं असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा विशेष (सम्पूर्ण ग्रन्थ समापन)

451. 'अनादरः' पद का सही समास-विग्रह क्या होगा?

(अ) न आदरः (नञ् तत्पुरुष) (ब) आदरस्य अभावः (स) कुत्सितः आदरः (द) आदरेण हीनः

452. 'अहो दुरन्ता बलवद्विरोधिता' में 'बलवद्विरोधिता' पद में कौन-सा भाववाचक तद्धित प्रत्यय लगा है?

(अ) त्व प्रत्यय (ब) तल् प्रत्यय (तल् + टाप् = ता) (स) ष्यञ् प्रत्यय (द) अण् प्रत्यय

453. 'कुरुन्' शब्द किस प्रातिपदिक (मूल शब्द) का द्वितीया बहुवचन रूप है?

(अ) कुरु (उकारान्त पुँल्लिङ्ग) (ब) कुरुन् (स) कौरव (द) कुरू

454. 'तथापि जिह्मः स भवज्जिगीषया' में 'जिह्मः' पद किस लिङ्ग और विभक्ति का रूप है?

(अ) नपुंसकलिंग, द्वितीया (ब) पुँल्लिङ्ग, प्रथमा एकवचन (स) स्त्रीलिङ्ग, प्रथमा (द) अव्यय

455. 'तनोति शुभ्रं गुणसम्पदा यशः' में 'यशः' शब्द किस प्रातिपदिक का रूप है?

(अ) यश (अकारान्त) (ब) यशस् (सकारान्त नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचन) (स) यशिन् (द) यशा

456. 'गुणसम्पदा' पद में कौन-सी विभक्ति और वचन प्रयुक्त है?

(अ) प्रथमा, एकवचन (ब) तृतीया, एकवचन (गुणसम्पद् शब्द) (स) पञ्चमी, एकवचन (द) सप्तमी, एकवचन

457. 'अनार्यसङ्गमात्' पद में कौन-से दो समास समाहित हैं?

(अ) नञ् तत्पुरुष एवं षष्ठी तत्पुरुष (ब) केवल कर्मधारय (स) केवल बहुव्रीहि (द) केवल द्वन्द्व

458. 'वितन्वति क्षेममदेवमातृकाः' में 'वितन्वति' पद किस व्याकरणिक रूप में प्रयुक्त है?

(अ) वि + तन् + शतृ (सप्तमी एकवचन / सति सप्तमी) (ब) लट् लकार प्रथम पुरुष बहुवचन (स) लोट् लकार (द) लङ् लकार

459. 'अदेवमातृकाः' पद का सही समास-विग्रह क्या होगा?

(अ) न देवाः मातृकाः यासां ताः (नञ् बहुव्रीहि) (ब) अदेवाश्च मातृकाश्च (स) देवानां मातृका (द) अदेवेभ्यः मातृका

460. 'सस्यसम्पदः' पद में 'सस्य' शब्द का क्या अर्थ है?

(अ) फल (ब) अन्न / धान्य / कृषि-उत्पाद (स) जल (द) पुष्प

461. 'कृषीवलैः' पद में मूल प्रातिपदिक क्या है?

(अ) कृषि (ब) कृषीवल (अकारान्त पुँल्लिङ्ग, तृतीया बहुवचन) (स) कृषक (द) कृषीवत्

462. 'सुखेन लभ्या दधतः कृषीवलैः' - दुर्योधन के सुशासित राज्य में किसानों को क्या सुगमता से प्राप्त हो रहा था?

(अ) ऋण (ब) प्रचुर एवं पकी हुई उत्तम फसलें (अकृष्टपच्या इव सस्यसम्पदः) (स) वस्त्र (द) अस्त्र

463. 'उदारकीर्तेः' पद का मूल प्रातिपदिक शब्द क्या है?

(अ) उदारकीर्त् (ब) उदारकीर्ति (इकारान्त पुँल्लिङ्ग, षष्ठी एकवचन) (स) उदारकीर्त (द) कीर्ति

464. 'अनुजाताः' पद में कौन-सा उपसर्ग और कृदन्त प्रत्यय है?

(अ) अनु + जन् + क्त (प्रथमा बहुवचन) (ब) अन + जा + क्त (स) अनु + ज्ञा + ल्युट् (द) अनु + जा + शानच्

465. 'उरगः' का अमरकोषीय संस्कृत पर्याय क्या है?

(अ) गरुड़ः (ब) सर्पः / भुजङ्गः / अहिः (स) मृगः (द) गजः

466. 'द्विषन्निमित्ता यदियं दशा ततः' में 'द्विषन्निमित्ता' पद का सही समास क्या है?

(अ) द्विषन्तः निमित्तं यस्याः सा (बहुव्रीहि समास) (ब) कर्मधारय (स) केवल द्वन्द्व (द) अव्ययीभाव

467. 'उन्मूलयति' पद में कौन-सी धातु और प्रत्यय प्रयुक्त हैं?

(अ) उद् + मूल् (णिच्) + लट् लकार (ब) उत् + मिल् + लोट् (स) उन् + मलू + लङ् (द) उद् + मूल + ण्यत्

468. 'शमीतरुम्' में 'तरु' शब्द व्याकरण के अनुसार किस लिङ्ग का है?

(अ) स्त्रीलिङ्ग (ब) पुँल्लिङ्ग (उकारान्त) (स) नपुंसकलिंग (द) उभयलिङ्ग

469. 'शुष्कम्' पद में 'शुष्' धातु का क्या अर्थ है?

(अ) गीला होना (ब) सूखना / शोषण होना (स) जलना (द) गिरना

470. 'धृतिसंयमौ' पद में 'धृति' शब्द का शास्त्रीय अर्थ क्या है?

(अ) क्रोध (ब) धैर्य / चित्त की धारण-शक्ति (स) अज्ञान (द) भय

471. 'संयम' शब्द का वास्तविक अर्थ क्या है?

(अ) युद्ध (ब) इन्द्रिय-निग्रह / मन और इन्द्रियों का नियन्त्रण (स) भोजन (द) दान

472. 'यमौ' पद में कौन-सी विभक्ति और वचन का प्रयोग हुआ है?

(अ) प्रथमा / द्वितीया द्विवचन (यम शब्द) (ब) तृतीया एकवचन (स) पञ्चमी एकवचन (द) षष्ठी बहुवचन

473. 'अधिशय्य' पद में किस पाणिनीय सूत्र से 'ल्यप्' आदेश हुआ है?

(अ) ल्यपि लघुपूर्वात् (ब) समासेऽनञ्पूर्वे क्त्वो ल्यप् (स) क्त्वा तोसुन्कसुनः (द) अदेङ् गुणः

474. 'कुशास्तरणम्' पद का सही अर्थ क्या है?

(अ) रेशमी वस्त्र (ब) कुशों (दर्भों) का बिछौना / शय्या (स) काष्ठ का आसन (द) सुवर्ण का पलंग

475. 'रक्ताङ्गरागम्' पद में कौन-सा समास है?

(अ) रक्तः अङ्गरागः यस्य सः (बहुव्रीहि / कर्मधारयगर्भ) (ब) द्वन्द्व (स) अव्ययीभाव (द) द्विगु

476. 'रेणु' शब्द का अमरकोषीय अर्थ क्या है?

(अ) जल (ब) धूलि / पराग / रजकण (स) पाषाण (द) सुवर्ण

477. 'वल्कल' शब्द का क्या तात्पर्य है?

(अ) रेशम (ब) वृक्षों की छाल से निर्मित मुनिवस्त्र (स) चमड़ा (द) कम्बल

478. 'अभिमानधन' पद किरातार्जुनीयम् में किसके लिए विशेष रूप से प्रयुक्त हुआ है?

(अ) धनलोलुपों के लिए (ब) स्वाभिमानी, तेजस्वी क्षत्रिय राजाओं के लिए (स) वैश्यों के लिए (द) भिक्षुकों के लिए

479. 'उदितम्' पद में कौन-सी धातु और प्रत्यय है?

(अ) वद् + क्त (सम्प्रसारण 'उकार' युक्त) (ब) उद् + इत् (स) वद् + ल्युट् (द) उद् + दा

480. 'अवधीर्य' पद में 'धीर्' धातु किस अर्थ में प्रयुक्त हुई है?

(अ) धारण करने में (ब) अनादर / तिरस्कार करने के अर्थ में (स) ध्यान करने में (द) चलने में

481. 'विजिगीषु' पद में 'सनाशंसभिक्ष उः' सूत्र से कौन-सा प्रत्यय लगा है?

(अ) उ प्रत्यय (वि + जि + सन् + उ) (ब) अण् प्रत्यय (स) तृच् प्रत्यय (द) इनि प्रत्यय

482. 'परमापदाम्' पद का सही समास-विग्रह क्या है?

(अ) परमाश्च ताः आपदः, तासाम् (कर्मधारय) (ब) परमस्य आपदः (स) परमेभ्यः आपदः (द) बहुव्रीहि

483. 'विमृश्यकारिणम्' पद में कौन-सा कृदन्त प्रत्यय लगा है?

(अ) णिनि प्रत्यय (वि + मृश् + कृ + णिनि) (ब) शतृ प्रत्यय (स) शानच् प्रत्यय (द) क्त प्रत्यय

484. 'गुणलुब्धाः' में 'लुब्ध' शब्द में कौन-सा प्रत्यय है?

(अ) लुभ् + क्त (लुभ् धातु) (ब) लुभ् + क्तवतु (स) लुभ् + शानच् (द) लुभ् + ल्युट्

485. महाभारत के वनपर्व में महर्षि वेदव्यास द्वारा युधिष्ठिर को किस विद्या का उपदेश दिया गया था, जो किरातार्जुनीयम् का आधार है?

(अ) संजीविनी विद्या (ब) प्रतिस्मृति विद्या (स) कामन्दकी विद्या (द) आन्वीक्षिकी

486. 'इन्द्रकील' पर्वत वर्तमान भौगोलिक दृष्टि से किस हिमालयी क्षेत्र में अवस्थित माना जाता है?

(अ) नीलगिरि क्षेत्र (ब) कुल्लू / हिमाचल एवं उत्तराखण्ड की पावन पर्वतमाला (स) अरावली क्षेत्र (द) पश्चिमी घाट

487. किरातार्जुनीयम् के 15वें सर्ग में प्रयुक्त विविध चित्रालंकारों में कौन-सा बन्ध संस्कृत काव्य की पराकाष्ठा है?

(अ) केवल यमक (ब) एकाक्षर, सर्वतोभद्र, पद्मबन्ध, मुरजबन्ध एवं गोमूत्रिका (स) केवल अनुप्रास (द) केवल रूपक

488. "न नोननुन्नो नुन्नोनो..." यह एकाक्षर श्लोक भारवि की किस असाधारण प्रतिभा को सिद्ध करता है?

(अ) केवल व्याकरण-दम्भ (ब) चित्रकाव्य, वर्ण-नियन्त्रण एवं प्रौढ़ शब्द-चातुर्य (स) संगीत-कला (द) नाटक-रचना

489. किरातार्जुनीयम् के 18वें (अन्तिम) सर्ग की समाप्ति किस मङ्गलमय फलश्रुति के साथ होती है?

(अ) पाण्डवों के संन्यास से (ब) भगवान शिव से पाशुपतास्त्र प्राप्ति एवं अर्जुन के विजय-वरदान से (स) युद्ध में मृत्यु से (द) वन में निवास से

490. महाकवि दण्डी-रचित 'अवन्तिसुन्दरीकथा' के अनुसार भारवि का मूल नाम क्या था?

(अ) श्रीकण्ठ (ब) दामोदर (स) भट्टनारायण (द) मुरारी

491. भारवि को किस चालुक्य/पल्लव राजसभा में विशिष्ट राज्याश्रय और सम्मान प्राप्त था?

(अ) राजा भोज (ब) सिंहविष्णु (पल्लव नरेश) एवं विष्णुवर्धन (चालुक्य) (स) हर्षवर्द्धन (द) चन्द्रगुप्त

492. 634 ईस्वी के प्रसिद्ध ऐहोल अभिलेख (कर्नाटक) में महाकवि कालिदास के साथ किस महाकवि का गौरवपूर्ण नामोल्लेख है?

(अ) माघ का (ब) भारवि का (येन कीर्तिरगाधायि कालिदासभारविकीर्तिः) (स) श्रीहर्ष का (द) भवभूति का

493. महाकवि भारवि का जन्मस्थान अधिकांश प्रामाणिक इतिहासकारों द्वारा कहाँ माना जाता है?

(अ) मिथिला (ब) दक्षिण भारत का अचलपुर (एलिचपुर) / नासिक / काञ्ची (स) कश्मीर (द) उज्जैन

494. संस्कृत साहित्य के 'बृहत्त्रयी' का प्रथम और सर्वप्रमुख ग्रन्थ कौन-सा है?

(अ) शिशुपालवधम् (ब) किरातार्जुनीयम् (18 सर्ग) (स) नैषधीयचरितम् (द) रघुवंशम्

495. किरातार्जुनीयम् पर 'घण्टापथ' टीका का प्रणयन करने वाले प्रकाण्ड पण्डित मल्लिनाथ का काल क्या है?

(अ) 7वीं शताब्दी (ब) 14वीं-15वीं शताब्दी (स) 10वीं शताब्दी (द) 18वीं शताब्दी

496. किरातार्जुनीयम् का प्रधान (अङ्गी) रस क्या है?

(अ) शृङ्गार रस (ब) वीर रस (युद्धादि-उत्साहयुक्त) (स) करुण रस (द) शान्त रस

497. किरातार्जुनीयम् का नायक अर्जुन किस कोटि का नायक है?

(अ) धीरललित (ब) धीरोदात्त नायक (स) धीरप्रशान्त (द) धीरोद्धत

498. किरातार्जुनीयम् का प्रतिनायक (सहयोगी प्रतिपक्षी) कौन है?

(अ) दुर्योधन (ब) किरातवेशधारी भगवान शिव (महादेव) (स) कर्ण (द) शकुनि

499. किरातार्जुनीयम् का प्रथम श्लोक 'श्रियः कुरुणामधिपस्य पालनीम्' किस प्रकार का मङ्गलाचरण है?

(अ) आशीर्वादात्मक (ब) वस्तुनिर्देशात्मक मङ्गलाचरण (स) नमस्करणात्मक (द) मिश्रित

500. 500 प्रश्नों की इस सम्पूर्ण किरातार्जुनीयम् महामैराथन का सर्वोत्कृष्ट नीति-सार किस अमर सूक्ति में अभिव्यक्त है?

(अ) 'काव्यं यशसेऽर्थकृते' (ब) 'हितं मनोहारि च दुर्लभं वचः' एवं 'सहसा विदधीत न क्रियाम्' (स) 'सर्वं परवशं दुःखम्' (द) 'शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्'
✦ उत्तरमाला (Answer Key : प्रश्न 451 से 500 - महामैराथन सम्पूर्ण) ✦
451-(अ) 452-(ब) 453-(अ) 454-(ब) 455-(ब) 456-(ब) 457-(अ) 458-(अ) 459-(अ) 460-(ब) 461-(ब) 462-(ब) 463-(ब) 464-(अ) 465-(ब) 466-(अ) 467-(अ) 468-(ब) 469-(ब) 470-(ब) 471-(ब) 472-(अ) 473-(ब) 474-(ब) 475-(अ) 476-(ब) 477-(ब) 478-(ब) 479-(अ) 480-(ब) 481-(अ) 482-(अ) 483-(अ) 484-(अ) 485-(ब) 486-(ब) 487-(ब) 488-(ब) 489-(ब) 490-(ब) 491-(ब) 492-(ब) 493-(ब) 494-(ब) 495-(ब) 496-(ब) 497-(ब) 498-(ब) 499-(ब) 500-(ब)

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